Leukemia : ल्यूकेमिया क्या है? जाने इसके कारण लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट अगस्त 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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मूल बातें जानें

ल्यूकेमिया (Leukemia) क्या है?

ल्यूकेमिया ब्लड सेल्स का कैंसर है। हमारे खून में रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स होते हैं, जो बोन मैरो द्वारा बनते हैं। बोन मैरो हड्डियों के बीच बनी कैवेटिस में पाए जाने वाला नरम और स्पंजी टिश्यू होता है। रेड ब्लड सेल ऑक्सीजन और अन्य सामग्रियों को शरीर के टिश्यू तक पहुंचाते हैं। व्हाइट ब्लड सेल संक्रमण से लड़ते हैं और प्लेटलेट खून को जमाने में और गाढ़ा करने में मदद करते हैं। बोन मैरो में रोज सैकड़ों अरबों नये ब्लड सेल बनते हैं, जिससे हमारे शरीर को लगातार नए और स्वस्थ सेल की आपूर्ति होती है। दूसरे कैंसर से अलग, ल्यूकेमिया किसी ट्यूमर का निर्माण नहीं करता है। बल्कि, व्हाइट ब्लड सेल का अत्यधिक निर्माण करता है।

ल्यूकेमिया रक्त में व्हाइट ब्लड सेल्स में होता है। व्हाइट ब्लड सेल्स, जो हमारे इम्युन सिस्टम का एक हिस्सा होते हैं, और हमारे शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। जब ये सेल ल्यूकेमिया से प्रभावित हो कर असामान्य हो जाते है, तो इन असामान्य सेल्स, जिन्हें ल्यूकेमिक सेल कहा जाता है, संक्रमण से लड़ने में उतने समर्थ नहीं रहते, जितने सामान्य अवस्था में सफेद ब्लड सेल होते हैं। समय के साथ ल्यूकेमिक सेल का बनना दूसरे ब्लड सेल के निर्माण में भी रुकावट पहुंचता है और धीरे-धीरे शरीर में टिश्यूज को ऑक्सीजन पहुंचाने वाले रेड ब्लड सेल की और रक्त को जमाने वाले प्लेटलेट्स की भी कमी होने लगती है। यही कारण है कि ल्यूकेमिया से पीड़ित लोगों को चोट लगने पर अत्यधिक खून के बहने और संक्रमण होने का खतरा होता है।

ल्यूकेमिया कई प्रकार के होते हैं, वहीं इसके कुछ प्रकार मुख्य रूप से बच्चों में पाए जाते हैं। वहीं कुछ वयस्कों में पाए जाते हैं। इनमें व्हाइट ब्लड सेल अलग-अलग प्रकार से प्रभावित होते हैं। ल्यूकेमिया को दो प्रकार से बांटा गया है।

एक यह किस तरह बढ़ता है

जब ब्लड सेल्स का विकास नहीं हो पाता और वे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते। इस तरह का ल्यूकेमिया बहुत ही तेजी से फैलता है।

इसके अलावा ल्यूकेमिया का एक कारण यह भी है कि जब कुछ ब्लड सेल्स अविकसित रह जाते हैं। इसके कारण अन्य सेल्स भी अपना काम ठीक से नहीं कर पाते। लेकिन, इस तरह का ल्यूकेमिया धीरे-धीरे फैलता है।

दूसरे तरह के ल्यूकेमिया को व्हाइट ब्लड सेल्स पर यह कैसे असर डालता है इस आधार पर बांटा गया है।

लिंफोकाइटिक ल्यूकेमिया (Lymphocytic leukemia): इस तरह का ल्यूकेमिया लिंफोइड सेल्स पर बुरा असर डालता है, जो कि लिंफेटिक टिश्यू का निर्माण करते हैं। ये टिश्यू आपके इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है।

माइलोजीनस ल्यूकेमिया Myelogenous  leukemia: इस तरह के ल्यूकेमिया में माइलोइड सेल्स पर असर पड़ता है। ये सेल्स रेड ब्लड, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करते हैं।

ल्यूकेमिया (Leukemia) कितना आम है?

ल्यूकेमिया ज्यादातर बच्चों और किशोरों में पाया जाता है। यह औरतों की तुलना में मर्दों में ज्यादा पाया जाता है। यह किसी भी उम्र के रोगियों को प्रभावित कर सकता है। इससे होने वाले खतरों के कारणों को कम करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से मिलें ।

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लक्षण

ल्यूकेमिया (Leukemia) के लक्षण

  • त्वचा का पीलापन, यह रेड ब्लड सेल की कमी के कारण होता है।
  • मसूड़ों, मलाशय या नाक से लगातार खून का बहना ।
  • त्वचा पर छोटे लाल धब्बे (पेटीचिया)।
  • संक्रमण जल्दी होना।
  • बार-बार बुखार या ठंड लगना।
  • आपकी गर्दन में, बांह के नीचे या आपकी कमर में किसी नई गांठ या सूजी हुयी ग्रंथि का होना।
  • वजन घटना
  • बिना कारण थकान, कमजोरी।
  • हड्डी में दर्द
  • बहुत पीड़ा होना।
  • रात को अत्यधिक पसीना आना
  • पेट के बाईं ओर सूजन और दर्द।

कुछ लक्षण ऊपर नहीं लिखे गए हो सकते है।अगर आपको सवाल या शंका है , तो कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें ।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आप में ऊपर लिखे कोई भी लक्षण है या कोई प्रश्न हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें। हर किसी का शरीर अलग तरह से काम करता है। इसलिए अपने डॉक्टर के साथ बात कर सलाह लेना सबसे अच्छा होता है और साथ ही आप जान सकते है कि आपकी स्थिति के लिए सबसे अच्छा क्या है।

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कारण

ल्यूकेमिया  के कारण

वैज्ञानिकों को अब-तक ल्यूकेमिया के सही कारणों का पता नहीं चला है। यह माना जाता है कि इसका कारण वंशानुगत और पर्यावरण से संबंधित हो सकता है। सामान्य तौर पर ल्यूकेमिया तब माना जाता है, जब कुछ ब्लड सेल(मुख्यत व्हाइट ब्लड सेल) अपने डीएनए में स्वयं परिवर्तन कर लेते हैं। प्रत्येक सेल के अंदर कुछ निर्देश होते है, जो इस डीएनए की कार्रवाई को निर्देशित करते हैं। इसके अलावा सेल में कुछ अन्य परिवर्तन भी होते है जिन्हें यदि पूरी तरह से समझा जाए, तो ये ल्यूकेमिया को समझने में मदद कर सकता है।

Know the risk factors

ल्यूकेमिया (Leukemia) के खतरे के कारण क्या है?

ल्यूकेमिया के खतरे के कारण बहुत से हैं, जैसे:

  • अत्यधिक रेडिएशन
  • हानिकारक रासायनिक एक्सपोजर
  • कीमोथेरिपी या रेडिएशन थेरेपी द्वारा चिकित्सा
  • असामान्य क्रोमोसोम
  • डाउन सिंड्रोम
  • फैमिली हिस्ट्री

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पहचान और उपचार

दी की गई जानकारी किसी भी डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। सटीक सलाह के लिए डॉक्टर से संपंर्क करें।

ल्यूकेमिया (Leukemia) की पहचान

आप निम्नलिखित टेस्ट करवा कर इसकी पहचान या निदान पा सकते है :

  • शारीरिक परीक्षा: एनीमिया के कारण पीली त्वचा, लिम्फ नोड्स की सूजन और आपके लिवर और स्प्लीन का बढ़ना ल्यूकेमिया का संकेत माना जाता है।
  • ब्लड टेस्ट : ब्लड टेस्ट निर्धारित कर सकता है कि सफेद ब्लड सेल्स या प्लेटलेट्स के स्तर सामान्य हैं या नहीं, जो ल्यूकेमिया होने या न होने का निर्धारण कर सकते हैं।
  • बोन मैरो टेस्ट : आपके ल्यूकेमिया कोशिकाओं के कुछ स्पेशल टेस्ट उन विशेषताओं की पहचान कर सकते हैं, जिनका उपयोग आपके उपचार को किस माध्यम से किया जाए निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

ल्यूकेमिया (Leukemia) का इलाज

ल्यूकेमिया उपचार के ऑप्शंस उम्र और वर्तमान स्वास्थ्य पर तथा ल्यूकेमिया के प्रकार और क्या वह आपके शरीर के अन्य भागों में फैल गया है आदि पर आधारित होता है।

ल्यूकेमिया के लिए उपयोग किए जाने वाले सामान्य उपचारों में शामिल हैं:

  • कीमोथेरिपी : कीमोथेरिपी ल्यूकेमिया का एक प्रमुख इलाज है। इस उपचार में केमिकल्स का प्रयोग करके ल्यूकेमिया सेल्स को खत्म किया जाता है। ल्यूकेमिया के लिहाज से इस थैरेपी में एक से लेकर कई दवाईयों के कॉम्बिशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये दवाएं गोलियों के रूप में या फिर सीधे धमनियों में इंजेक्ट किया जा सकती हैं।
  • जैविक चिकित्सा उन उपचारों का प्रयोग करती है, जो आपकी इम्यून सिस्टम को पहचान कर ल्यूकेमिया के सेल्स पर हमला करती हैं।
  • टार्गेटेड थेरेपी टार्गेटेड थेरेपी उन दवाओं का उपयोग करती है, जो आपके कैंसर सेल्स की अंदरूनी कमजोरियों पर हमला करती हैं।
  • रेडिएशनथेरेपी : ल्यूकेमिया कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने और उनकी वृद्धि को रोकने के लिए एक्स-रे या दूसरी हाई एनर्जी किरणों का उपयोग करती है। रेडिएशन थेरेपी का स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की तैयारी के लिए उपयोग किया जा सकता है।
  • स्टेम सेल ट्रांसप्लांट: एक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट आपके रोग-ग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ बोन मैरो से बदलने की एक प्रक्रिया है।
  • ब्लड ट्रांसफ्यूशन: ब्लड ट्रांसफ्यूशन या खून चढ़ाना भी इसके ईलाज में सहायक हो सकता है। इसमें किसी स्वस्थ्य वॉलेंटियर द्वारा दान किए ब्लड को पीड़ित में रेड सेल्स, व्हाइट सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी पूरी करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

निम्नलिखित जीवनशैली और घरेलू उपचार आपको ल्यूकेमिया (Leukemia) से बचाव में मदद कर सकते हैं:

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