home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

इंफेक्शन से दूर रहना है, तो बचें इन वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर्स से!

इंफेक्शन से दूर रहना है, तो बचें इन वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर्स से!

हमारा खून कई सेल्स से मिलकर बनता है। इसमें वाइट ब्लड सेल्स (White Blood Cells) और प्लेटलेट्स (Platelets) और रेड ब्लड सेल्स (Red Blood Cells) होते हैं। इन सब का अपना महत्व और अलग-अलग कार्य हैं। आज हम बात करने वाले हैं वाइट ब्लड सेल्स के बारे में। वाइट ब्लड सेल्स को ल्यूकोसाइट्स (Leukocytes) कहा जाता है। यह इम्यून सिस्टम के वो सेल्स है, जो हमारे शरीर को संक्रामक रोगों (Infectious Disease), एलर्जेन (Allergens) आदि से बचाता है। आइए जानते हैं वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) के बारे में विस्तार से।

वाइट ब्लड सेल क्या होते हैं? (What are White Blood Cells)

वाइट ब्लड सेल की सामान्य संख्या आमतौर पर खून में प्रति माइक्रोलीटर 4,000-11,000 सेल्स के बीच होती है। वाइट ब्लड सेल की इससे अधिक संख्या को ल्यूकोसाइटोसिस (Leukocytosis) कहा जाता है। यही नहीं अगर यह संख्या सामान्य से कम होती है तो उसे ल्यूकोपेनिया (Leukopenia) कहा जाता है।

यह भी पढ़ें: खून के विकार साबित हो सकते हैं जानलेवा, इग्नोर करने की न करें भूल

वाइट ब्लड सेल्स के कई प्रकार होते हैं जैसे:

  • न्यूट्रोफिल्स (Neutrophils) : यह वाइट ब्लड सेल्स मुख्य रूप से जीवाणु संक्रमण (bacterial infections) से लड़ते हैं।
  • इओसिनोफिल्स (Eosinophils) : यह वाइट ब्लड सेल परजीवी संक्रमण (Parasitic Infections) से लड़ते हैं और एलर्जी प्रतिक्रियाओं (Allergic Reactions) में शामिल होते हैं।
  • बसोफिल्स (Basophils) : यह इन्फ्लेमेटरी रिएक्शंस (Inflammatory Reactions) में शामिल होते हैं।
  • लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes): इन इम्यून सिस्टम सेल्स के कार्यों में एंटीबॉडी का उत्पादन और बैक्टीरिया, वायरस और कैंसर कोशिकाओं सहित हानिकारक तत्वों से लड़ना शामिल है
  • मोनोसाइट्स (Monocytes): इसका काम डेड सेल्स व मलबे को साफ करना और हानिकारक तत्वों को पहचानने के लिए लिम्फोसाइटों के साथ काम करना है

इन सब वाइट ब्लड सेल्स का अपना काम होता है। यह वाइट ब्लड सेल जब अपना काम सही से नहीं करते या उनमे समस्या आती है। तो यह वाइट ब्लड सेल्स डिसऑर्डर का कारण बन सकता है।

white blood cell

वाइट ब्लड सेल्स डिसऑर्डर और इसके प्रकार कौन से हैं?

जब वाइट ब्लड सेल्स सामान्य से अधिक या कम संख्या में होते हैं या सही से काम नहीं कर पाते तो यह वाइट ब्लड सेल्स डिसऑर्डर का कारण बनते हैं। यह डिसऑर्डर भी कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ इस तरह हैं:

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर के प्रकार (Types of White Blood Cell Disorder)

दो मुख्य प्रकार के वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर हैं, प्रोलिफरेटिव डिसऑर्डर और ल्यूकोपेनिया (Proliferative Disorders and Leukopenia)। इसके अलावा भी कुछ अन्य डिसऑर्डर्स हो सकते हैं जैसे:

प्रोलाइफरेटिव डिसऑर्डर (Proliferative Disorders)

प्रोलाइफरेटिव डिसऑर्डर में वाइट ब्लड सेल्स की सख्या सामान्य से अधिक होती है। यह बढ़ोतरी आमतौर पर इंफेक्शन के कारण होने वाला रिएक्शन है। कई मामलों में ऐसा किसी तरह से कैंसर के कारण भी हो सकता है।

ल्यूकोपेनिया (Leukopenia)

खून में वाइट ब्लड सेल्स की संख्या सामान्य से कम होने को ल्यूकोपेनिया कहा जाता है। ऐसा आमतौर पर किसी बीमारी या अन्य स्थिति में सेल्स के नष्ट होने के कारण होता है। ल्यूकोपेनिया का ट्रीटमेंट इस बात पर निर्भर करता है, कि हमारे खून में किस प्रकार के वाइट ब्लड सेल्स कम है और इसका कारण क्या है।

न्यूट्रोपेनिया (Neutropenia)

एक खास तरह के ल्यूकोपेनिया (Leukopenia) को न्यूट्रोपेनिया (Neutropenia) कहा जाता है। जिसका अर्थ है रक्त में कम न्यूट्रोफिल का होना। न्यूट्रोपेनिया (Neutropenia) के अन्य कारणों में कीमोथेरेपी ,दवाईआं, वायरल बीमारियां आदि शामिल है। विकार जो शरीर के भीतर न्यूट्रोपेनिया का कारण बन सकते हैं, उनमें बोन मेरो में दोष भी शामिल हैं। ल्यूकोपेनिया और न्यूट्रोपेनिया ( Leukopenia and Neutropenia) दोनों इम्यून सिस्टम में कमी का कारण बन सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

ल्यूकोसाइटोसिस (Leukocytosis)

सर्कुलेशन में वाइट ब्लड सेल्स की संख्या के बढ़ने को ल्यूकोसाइटोसिस (Leukocytosis) कहा जाता है

ल्यूकोसाइटोसिस (Leukocytosis) सूजन और अन्य उन विकारों के कारण हो सकता है, जो बोन मेरो उत्पादन में वृद्धि करते हैं।

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of White Blood Cell Disorder)

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (Symptoms of White Blood Cell Disorder) के लक्षण बीमारी के प्रकार के ऊपर निर्भर करते हैं। कई मामलों में इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन, इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें: प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने के लिए 4 प्राकृतिक तरीके

  • लगातार या बार बार इंफेक्शन होना (Frequent or Recurrent Infections)
  • बुखार (Fever)
  • माउथ अलसर (Mouth Ulcers)
  • त्वचा में फोड़े-फुंसी (Skin Abscesses)
  • निमोनिया (Pneumonia)
  • थकावट (Fatigue)
  • बैचेनी (Malaise)
  • अचानक वजन कम होना (Unexplained Weight Loss)

Quiz: ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथक दूर करेगा यह क्विज

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर के क्या कारण है? (Causes of White Blood Cell Disorder)

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) के कारण भिन्न होते हैं। इसका कारण कुछ आनुवंशिक विकार जो माता-पिता से बच्चों में जाते हैं, कुछ अन्य चिकित्सा स्थितियां (Other Medical Condition) या पर्यावरणीय कारक (Environmental Factor), प्रतिरक्षा समस्याएं (Immune Problems), विकृतियां (Malignancies) आदि हो सकते हैं।

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर का निदान (Diagnosis of White Blood Cell Disorder)

आमतौर पर वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) के ऐसे कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं जिन पर ध्यान दिया जा सके। लेकिन, ब्लड टेस्ट की मदद से इसका निदान किया जा सकता है। इस समस्या के निदान के लिए यह टेस्ट कराए जा सकते हैं:

  • कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट (Complete Blood Count Test)
  • ब्लड कल्चर टेस्ट(Blood Cultures)
  • बोन मेरो बायोप्सी (Bone Marrow Biopsy)
  • साइटोमेट्री रक्त परीक्षण (Cytometry Blood Test)
  • इम्युनोग्लोबुलिन परीक्षण (Immunoglobulin Test)

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर का उपचार किस तरह से किया जा सकता है? (Treatment of White Blood Cell Disorder)

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर का उपचार (Treatment of White Blood Cell Disorder) इसके प्रकार और कारणों पर निर्भर करता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को नियमित रूप से मॉनिटर किया जाता है। ताकि पता चल सके कि उपचार किस तरह से काम कर रहा है। इसका उपचार इस तरह से किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: ये हैं हीमोग्लोबिन बढ़ाने के फूड्स, खून की कमी होने पर करें इनका सेवन

  • एंटीबायोटिक्स (Antibiotics): एंटीबायोटिक का प्रयोग संबंधी इंफेक्शन के उपचार के लिए किया जाता है।
  • कॉलोनी-स्टिमुलेटिंग फैक्टर्स (Colony-Stimulating Factors) या ग्रोथ फैक्टर्स (Growth Factors) : दवाएं बोन मेरो में वाइट ब्लड सेल के उत्पादन को तेज कर सकती हैं।
  • स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन (Stem Cell Transplantation): स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन का प्रयोग कुछ मामलों में उपचारात्मक चिकित्सा के लिए किया जा सकता है।
  • वाइट ब्लड सेल ट्रांसफ्यूजन (White Blood Cell Transfusion) : वाइट ब्लड सेल ट्रांसफ्यूजन का उपयोग शायद ही कभी किया जाता है। क्योंकि किसी भी रिसर्च से यह साबित नहीं हुआ है कि इससे पीड़ित व्यक्ति में इंफेक्शन या अन्य जोखिम कम हुए हों।

आहार और पोषण से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें.

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर से बचने के लिए लाइफस्टाइल में क्या परिवर्तन करने चाहिए? (Lifestyle Change for White Blood Cell Disorder)

स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या से बचने के लिए आपका हेल्दी रहना जरूरी है और हेल्दी रहने के लिए आवश्यक है हेल्दी हैबिट्स को अपनाना। अगर आप वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) से बचना चाहते हैं तो अपने जीवन में कुछ परिवर्तन लाएं। यह लाइफस्टाइल में बदलाव इस प्रकार हैं:

  • सही आहार (Right Food) :अगर आप वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) से बचना चाहते हैं तो रिफाइंड, डिब्बाबंद और जंक फ़ूड को भूल जाएं और इनकी जगह फल, सब्जियों, साबुत अनाज ,दालों आदि को दें। हमेशा पौष्टिक आहार ही खाएं और अधिक पानी पीएं। आप इसके लिए अपने डॉक्टर और एक डायटिशियन की सलाह भी ले सकते हैं।
  • तनाव से बचें (Avoid Stress): ऐसा माना जाता है कि तनाव वाइट ब्लड सेल्स को बढ़ाने का एक कारण हो सकता है। ऐसे में इससे बचने के लिए आप सही उपाय करें। जैसे योगा और मैडिटेशन आदि का सहारा लें।
  • धूम्रपान न करें (Don’t Smoke) : धूम्रपान करने से भी वाइट ब्लड सेल्स डिसऑर्डर बढ़ते हैं। इसलिए, अगर आप इन विकारों से बचना चाहते हैं तो धूम्रपान न करें।
  • व्यायाम (Exercise): व्यायाम आपको न केवल आपके शारीरिक स्वास्थ्य को सही बनाए रखता है बल्कि तनाव से भी आपको बचाता है। इसलिए रोजाना व्यायाम करना न भूलें। इसके साथ ही समय-समय पर अपने डॉक्टर से चेकअप कराना जरूरी है। ताकि, यह डिसऑर्डर होने पर तुरंत इसका निदान और उपचार हो सके।

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर

यह भी पढ़ें: खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए अपनाएं आसान टिप्स

वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) की एक विस्तृत श्रृंखला है। यह सेल्स शरीर को कई इंफेक्शंस और समस्याओं से बचाने में मददगार हैं। वाइट ब्लड सेल डिसऑर्डर (White Blood Cell Disorder) का प्रभाव आपके जीवन पर पड़ सकता है। इसलिए, अगर आप इस समस्या से पीड़ित हैं तो अपना ध्यान रखें। थकावट इस विकार से पीड़ित लोगों में होने वाली सामान्य समस्या है। इसलिए, अपने शरीर की सुनें और पर्याप्त आराम करें। इससे संबंधित किसी भी गंभीर बीमारी से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह लें और समय पर उपचार कराएं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
22/03/2021 पर AnuSharma के द्वारा लिखा
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
x