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बच्चों को निमोनिया की वैक्सीन लगाना है जरूरी

बच्चों को निमोनिया की वैक्सीन लगाना है जरूरी

निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक संक्रमण है जो बैक्टीरिया के कारण होता है। छोटे बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है, इसलिए नवजात को निमोनिया से बचाव के लिए न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV13) और न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड वैक्सीन (PPSV23) दी जाती है। यह वैक्सीन इंजेक्शन के तीन डोज के रूप में दी जाती है। बच्चे को निमोनिया से बचाव के लिए हर किसी को वैक्सीन की पूरी डोज दिलवानी चाहिए। निमोनिया के लक्षण भले ही फ्लू जैसे होते हैं, लेकिन बच्चों के लिए बहुत घातक बीमारी है कई बार तो यह जानलेवा भी साबित हो जाती है। इसलिए निमोनिया के हल्के लक्षण दिखने पर भी तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। गंभीर निमोनिया होने पर निमोनिया वैक्सीन के इस्तेमाल से बच्चे की हालात को सुधार लाया जा सकता है।

न्यूमोकोकल संक्रमण ( Pneumococcal conjugate)क्या है?

निमोनिया के संक्रमण को ही न्यूमोकोकल संक्रमण कहा जाता है। यह स्ट्रेपटोकॉकल न्युमोनी नामक बैक्टीरिया के कारण फेफड़ों में होने वाला इंफेक्शन है। इसके अलावा निमोनिया किसी तरह की दवा दूसरी बीमारी के इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है। निमोनिया के लक्षण आमतौर पर फ्लू जैसे ही होते हैं। स्ट्रेपटोकॉकल न्युमोनी बैक्टीरिया एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं और यह निमोनिया के साथ ही ब्लड इंफेक्शन और बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस जैसे गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।

न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV13) और न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड वैक्सीन (PPSV23) न्यूमोकोकल संक्रमण से बचाव के लिए दिया जाता है। बच्चों को निमोनिया के संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें यह टीके लगाना आवश्यक है।

और पढ़ें : बच्चों के लिए किस तरह से फायदेमंद है जैतून के तेल की मसाज, जानिए सभी जरूरी बातें

खतरनाक है ये बीमारी

निमोनिया एक खतरनाक बीमारी है, जो ज्यादातर छोटे उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। यह फेफड़ों को प्रभावित करने वाला एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन है। आम तौर पर एल्वियोली (फेफड़ों में छोटी थैलियां) सांस लेने के दौरान हवा से भर जाती हैं, लेकिन निमोनिया होने पर एल्वियोली मवाद और तरल पदार्थ से भर जाती है। इसकी वजह से सांस लेने में समस्या होने लगती है। निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया और फंगी सहित कई संक्रामक के कारण होता है। भारत में निमोनिया, 2018 में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का दूसरा बड़ा कारण था।

जबकि भारत में सरकार की पहल और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण में सुधार हुआ है। फिर भी कई बच्चे मुख्य रूप से फीमेल चाइल्ड आज भी इसकी पहुंच से दूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बनी निमोनिया के लिए वैक्सीन की पहुंच अधिक सुलभ और सस्ती साबित हो सकती है।

निमोनिया का जोखिम किन बच्चों में ज्यादा रहता है?

  • एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चे में इसका खतरा ज्यादा रहता है। यदि कोई शिशु अल्पपोषित है, तो रिस्क फैक्टर बढ़ जाता है।
  • अगर शिशु में पहले से ही एचआईवी या खसर की समस्या है, तो ऐसा बच्चा निमोनिया के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।
  • इसके अलावा बच्चों में निमोनिया के पर्यावरणीय कारक भी जिम्मेदार होते हैं। जैसे-

निमोनिया कैसे फैलता है?

निमोनिया को कई तरीकों से प्रेषित किया जा सकता है-

  • आमतौर पर बच्चे के नाक या गले में पाए जाने वाले वायरस और बैक्टीरिया फेफड़े को संक्रमित कर सकते हैं।
  • जीव (organism) खांसी या छींक से वायु-जनित ड्रॉप्लेट्स के माध्यम से भी फैल सकता है।
  • निमोनिया ब्लड के माध्यम से भी फैल सकता है, विशेष रूप से जन्म के समय और उसके तुरंत बाद।

ऊपर दी गई जानकारी किसी भी तरह की डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। इस विषय से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपने डाॅक्टर से संपर्क करें।

और पढ़ें : Bacterial pneumonia: बैक्टीरियल निमोनिया क्या है?

PCV और PPSV ( निमोनिया वैक्सीन Pneumonia Vaccine ) टीका कब लगाया जाता है?

नवजात को PCV13 टीका 4 इंजेक्शन की सीरीज के रूप में लगाया जाता है-

  • पहला 2 महीने की उम्र में
  • दूसरा 4 महीने, तीसरा 6 महीने
  • चौथा 12 से 15वें महीने में लगाया जाता है

कुछ 2 साल से बड़े बच्चों को भी PCV13 का टीका लगाया जाता है, यदि उन्होंने पहले इसकी कोई डोज मिस कर दी है और उन्हें-

  • क्रॉनिक हेल्थ कंडिशन (दिल और फेफड़ों की कोई बीमारी)
  • कोई ऐसी स्वासथ्य समस्या जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया हो (अस्थमा, एचआईवी इंफेक्शन आदि)
  • डॉक्टर बच्चे की स्थिति का जायजा लेने के बाद निर्णय लेगा कि उसे PCV13 की कितनी डोज देनी है।

डॉक्टर 2 से 18 साल के कुछ बच्चों को PPSV23 टीकाकरण की सलाह दे सकते हैं यदि उन्हें लंबे समय से कोई स्वास्थ्य समस्या है जैसे-

  • हृदय, फेफड़े और लिवर से जुड़ी बीमारी
  • डायबिटीज
  • किडनी फेलियर
  • कमजोर इम्यून सिस्टम (कैंसर या एचआईवी इंफेक्शन के कारण)

PCV और PPSV वैक्सीन की सलाह क्यों दी जाती है?

2 साल से कम उम्र के बच्चे और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग जिन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, उन्हें न्यूमोकोकल संक्रमण का खतरा अधिक होता है। यह वैक्सीन निमोनिया की स्थिति को गंभीर होने से, अस्पताल जाने से और मृत्यु से भी बचाती है।

और पढ़ें : World Immunisation Day: बच्चों का वैक्सीनेशन कब कराएं, इम्यून सिस्टम को करता है मजबूत

क्या PCV और PPSV वैक्सीन सुरक्षित है?

बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए दी जाने वाली दोनों वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। आमतौर पर किसी भी दवा के साथ गंभीर समस्या जैसे एलर्जिक रिएक्शन की संभावना बनी रहती है, लेकिन PCV (छोटे बच्चों के दिया जाने वाला टीका) और PPSV (बड़े बच्चों और व्यस्कों को दिया जाने वाला टीका) से गंभीर नुकसान पहुंचने की संभावना न के बराबर है। PCV वैक्सीन की करीब 60,000 डोज पर किए गए अध्ययन के मुताबिक, इसके कोई गंभीर रिएक्शन नहीं है, हां मामूली साइड इफेक्ट जरूर देखने को मिले हैं जिसमें शामिल हैं-

  • 4 नवजात में से 1 को टीका लगाने वाले स्थान पर लालिमा, कोमलता या सूजन का अनुभव होता है
  • 3 नवजात में से 1 में 100.4 F तक हाई फीवर देखा गया है
  • कभी-कभी चिड़चिड़ापन, नींद जैसा आना या भूख न लगने की भी समस्या हो सकती है।

गंभीर एलर्जिक रिएक्शन आमतौर पर वैक्सीन लगाने के कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों के भीतर ही हो जाता है। गंभीर एलर्जिक रिएक्शन के संकेतों में शामिल हैं-

यदि बच्चे में गंभीर एलर्जिक रिएक्शन के कोई संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

हर दो में से एक व्यस्क को PPSV वैक्सीन के बाद टीका लगाने वाली जगह पर लालिमा और दर्द का अनुभव होता है 1 प्रतिशत से भी कम को गंभीर रिएक्शन जैसे बुखार या मांसपेशियों में दर्द की समस्या होती है।

और पढ़ें : बच्चों में टाइफाइड के लक्षण को पहचानें, खतरनाक हो सकता है यह बुखार

बच्चों को निमोनिया वैक्सीन लगाते समय ध्यान रखने योग्य बातें

बच्चों को निमोनिया की वैक्सीन लगवानी जरूरी है, मगर कुछ स्थितियों में डॉक्टर उन्हें टीका न लगाने की सलाह देते हैं। औमतौर पर निम्न स्थितियों में न्यूमोकोकल वैक्सीन नहीं लगाने की सलाह दी जाती है यदि-

  • यदि बच्चे को पिछली डोज से गंभीर (जानलेवा) एलर्जिक रिएक्शन हुआ हो
  • बच्चा यदि मध्यम या गंभीर रूप से बीमार है तो उसके ठीक होने के बाद ही टीका लगवाएं, हां सर्दी होने पर कोई समस्या नहीं है।

बच्चों को निमोनिया की वैक्सीन लगावाने के बाद कैसे करें उनकी देखभाल

PCV और PPSV वैक्सीन लगाने के बाद बच्चों को बुखार के साथ ही इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन, लालिमा आदि हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से पूछ लें कि क्या बच्चों को दर्द कम करने या बुखार के लिए कोई दवा दी जा सकती है और उसकी सही डोज क्या है।

कब जाएं डॉक्टर के पास

आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ सकती है यदि-

  • यदि आपके बच्चे ने सीरीज की कोई डोज मिस कर दी है
  • वैक्सीन लगवे के बाद उसे बहुत तेज बुखार या गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो गया हो।

खतरनाक है ये बीमारी- बच्‍चों में निमोनिया के लक्षण

बच्चों में निमोनिया के लक्षण उसकी गंभीरता के आधार पर दिखते हैं।

हल्के निमोनिया होने पर यह लक्षण दिखते हैं

एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट से ऐसे निमोनिया का इलाज किया जा सकता है।

मॉडरेट निमोनिया के लक्षण

इसमें बच्चे में लक्षण थोड़ा गंभीर हो जाते हैं। ऐसे होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं इसे हल्के में लेने की गलती न करें।

गंभीर निमोनिया के लक्षण

बैक्‍टीरियल निमोनिया बच्चों में आम बात है। और इससे स्थिति अक्सर गंभीर हो जाती है।

  • तेज बुखार
  • पसीना आना या ठंडी लगना
  • नाखून या होठों का नीला पड़ना
  • सीने में घरघराहट होना
  • सांस लेने में दिक्‍कत महसूस होना क्योंकि संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है।
  • ऐसी स्थिति में तुरंत उपचार की जरूरत होती है।

न्यूमोकॉकल बैक्टीरिया की वजह से होता है निमोनिया

न्यूमोकॉकल वैक्सीन बच्चे को लगवा दी जाए तो निमोनिया से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। हालांकि निमोनिया के खिलाफ इस वैक्सीन का असर क्या और कितना है इस बारे में रिसर्च टीम सही आंकड़े नहीं दे पायी। साउथ ईस्ट एशिया का पहला देश है लाओस जहां साल 2013 में पहली बार न्यूमोकॉकल वैक्सीन की शुरुआत की गई थी जो एक नहीं बल्कि 13 तरह के सबसे कॉमन न्यूमोकॉकस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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