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IPV2 वैक्सीन: जानिए क्या फायदे हैं इस पोलियो वैक्सीन के?

IPV2 वैक्सीन: जानिए क्या फायदे हैं इस पोलियो वैक्सीन के?

वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण किसी भी बीमारी से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। बच्चों के लिए वैक्सीनेशन बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि, उनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, जिससे वो बहुत जल्दी बीमार पड़ते हैं। पोलियो एक गंभीर समस्या है, जिसके कारण जान जाने का जोखिम भी रहता है। इस बीमारी में भी सही समय पर वैक्सीनेशन को प्राथमिकता दी जाती है। पोलियो वैक्सीन की कई खुराकें बच्चों को पूरी लाइफ सुरक्षित रखती हैं। आज हम पोलियो की एक वैक्सीन के बारे में बात करने वाले हैं, जिसे IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) कहा जाता है। IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) का फुल फॉर्म है इनएक्टिव पोलियो वैक्सीन2 (Inactive polio Vaccine2)। आइए जानें क्या है यह वैक्सीन और किस तरह से हो सकती है फायदेमंद। किंतु, सबसे पहले पोलियो के बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

पोलियो क्या है? (Polio)

पोलियो एक संक्रामक वायरल बीमारी (Infectious viral disease) है, जिसके कारण नर्व डैमेज से लेकर पैरालिसिस तक हो सकता है। यही नहीं, कई मामलों में इसके कारण सांस लेने में समस्या होती है और कई बार यह रोग मृत्यु का कारण भी बन सकती है। कुछ साल पहले यह एक गंभीर बीमारी बन कर उभरी थी। हालांकि, आजकल वैक्सीनेशन से कुछ हद तक इस पर नियंत्रण पाया गया है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार खुद और अपने बच्चे को इससे प्रोटेक्ट करने के लिए कुछ सावधानियों को बरतना आवश्यक है।

इस वैक्सीनेशन की सलाह उन लोगों को भी दी जाती है, जो ऐसी जगह की ट्रैवेलिंग करने वाले हैं जहां इस समस्या का जोखिम बहुत अधिक हो। जिन वयस्कों में पहले टीका लगाया गया है और वो ऐसे क्षेत्र की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, जहां पोलियो का जोखिम हैं। उन्हें इनएक्टिवेटेड पोलियो वायरस वैक्सीन (Inactivated polio virus vaccine) की बूस्टर खुराक लेनी चाहिए। बूस्टर के बाद यह वैक्सीन उम्र भर प्रभावी हो सकती है। इनएक्टिवेटेड पोलियोवायरस वैक्सीन2 (inactivated poliovirus vaccine) या IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) से पहले पोलियो वैक्सीन के बारे में जानते हैं।

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पोलियो वैक्सीन क्या है? (Polio Vaccine)

पोलियो का इम्यूनाइजेशन के माध्यम से बचाव संभव है। इस वैक्सीन को कई बार दिया जाता है। पोलियो ट्रांसमिशन को रोकने के लिए 6 विभिन्न वैक्सीन्स हैं। जो इस प्रकार हैं:

  • इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (Inactivated polio vaccine)- यह वैक्सीन पोलियो वायरस टाइप्स 1, 2, और 3 से बचाती है।
  • ट्रॉयवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन (Trivalent oral polio vaccine)- यह वैक्सीन भी पोलियो वायरस टाइप्स 1, 2, और 3 से बचाती है।
  • बायवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन (Bivalent oral polio vaccine)– यह वैक्सीन पोलियो वायरस टाइप्स 1 और 3 से बचाती है।
  • मोनोवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन्स (mOPV1, mOPV2 and mOPV3) -यह वैक्सीन हर इंडिविजुअल टाइप के पोलियो वायरस से बचाव करती है। अगर पर्याप्त लोग इस समस्या से प्रतिरक्षित हो जाते हैं, तो यह वायरस फैल नहीं पाता है और नष्ट हो जाता है। अब जानते हैं IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) के बारे में।

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IPV2 वैक्सीन क्या है? (IPV2 Vaccine)

जैसा की पहले ही बताया गया है कि इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (Inactivated polio vaccine) पोलियो वायरस टाइप्स 1, 2, और 3 से बचाती है। ऐसे ही IPV वैक्सीन की सेकंड डोज भी जरुरी है, जिसे IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) कहा जाता है। ओरल पोलियो वैक्सीन के बाद IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) की सलाह दी जाती है। IPV2 वैक्सीन से पोलियो वायरस से प्रोटेक्शन बढ़ती है, जिसमें पैरालिसिस के प्रति प्रोटेक्शन भी शामिल है। अगर किसी व्यक्ति की कुछ साल पहले पोलियो वैक्सीनेशन (Polio Vaccination) हुई है, तो उसे ओरल पोलियो वैक्सीन दी गई होगी, जिसे लाइव पोलियो वायरस (Live Polio Virus) से बनाया जाता था। हालांकि, लाइव वायरस का टीका पोलियो से बचाव में अत्यधिक प्रभावी था, लेकिन ऐसा पाया गया कि इस बीमारी के कुछ मामलें ओरल टीके के कारण ही होते थे।

उसके बाद से इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन का ही प्रयोग किया जाता है। वायरस के इनएक्टिव फॉर्म के प्रयोग से पोलियो की संभावना कम रहती है। IPV और IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) की शॉट बाजू और टांग में शॉट दिया जाता है। IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) को कब लगवाना चाहिए, इसके बारे में डॉक्टर आपको सही सलाह दे सकते हैं। उम्मीद है कि IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) के बारे में आप समझ गए होंगे। अब जानते हैं कि IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) की जरूरत किन लोगों को होती है?

IPV2 वैक्सीन

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IPV2 वैक्सीन की जरूरत किन्हें होती है?

अगर बात की जाए पोलियो वैक्सीन की, तो अधिकतर लोगों को पोलियो वैक्सीन तब लेनी चाहिए, जब वो बच्चे होते हैं। बच्चों को इनएक्टिव पोलियो वैक्सीन (Inactive polio Vaccine) की चार खुराकें इन उम्र में दी जाती हैं:

  • दो महीने की उम्र में
  • चार महीने की उम्र में
  • 6-18 महीने की उम्र में
  • 4-6 साल में बूस्टर डोज

क्योंकि, अधिकतर वयस्क बचपन में इस टीकाकरण को करा चुके होते हैं। इसलिए, अठारह साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को रूटीन पोलियो वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। लेकिन, अगर किसी व्यक्ति का पोलियो वायरस के कांटेक्ट में आने की संभावना हो तो उसे पोलियो वैक्सीनेशन दी जाती है। इन लोगों को यह वैक्सीनेशन दी जा सकती है:

  • ट्रैवेलर्स को, जिन्हें ऐसी जगह पर ट्रेवल करना होता है जहां पोलियो अभी भी सामान्य है।
  • जो लोग लैब्स में काम करते हैं, उन्हें पोलियो वैक्सीनेशन की जरूरत होती है।
  • डॉक्टर, जो किसी पोलियो वायरस से इन्फेक्टेड लोगों के संपर्क में आ सकते हैं। उनके लिए भी यह वैक्सीन लेना आवश्यक है।

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अगर आप इन तीनों में से किसी भी ग्रुप में आते हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। अगर आपको कभी भी पोलियो का टीका नहीं लगा है, तो आपको IPV की यह तीन डोजेज़ दी जा सकती हैं। जो इस प्रकार हैं:

  • किसी भी समय पहली डोज
  • एक या दो महीने के बाद दूसरी डोज यानी IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine)
  • IPV2 वैक्सीन के 6 या 12 महीने के बाद तीसरी डोज

यह तो थी जानकारी कि किन लोगों को इस वैक्सीन की सलाह दी जाती है। अब जानिए कि किन लोगों को इस वैक्सीनेशन से बचना चाहिए?

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किन लोगों को पोलियो या IPV2 वैक्सीन नहीं लेनी चाहिए?

किन्हीं स्थिति में पोलियो या IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) लेने की सलाह नहीं दी जाती है। अगर आपको यह वैक्सीनेशन खुद के लिए करानी है या आपके बच्चों को यह वैक्सीन लगवानी हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। इन स्थितियों में इसकी सलाह नहीं दी जाती है:

  • अगर आपको IPV वैक्सीन (IPV Vaccine) की पहली डोज से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो।
  • अगर आपको एंटीबायोटिक्स स्ट्रेप्टोमाइसिन (Streptomycin), पॉलीमीक्सिन बी (Polymyxin B), और नियोमायसिन (Neomycin) से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हुआ हो।

हालांकि, गर्भवती महिलाओं को इस वैक्सीन से कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। लेकिन, इस स्थिति में इस ESE लेने से बचना चाहिए। इसके साथ ही डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसे लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि, इसके बाद कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। आइए जानें, IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) के साइड इफेक्ट्स के बारे में।

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IPV2 वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (Side effects of IPV2 Vaccine)

कुछ लोग पोलियो वैक्सीन या IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) के बाद एलर्जिक रिएक्शंस को नोटिस कर सकते हैं। शॉट वाली जगह में सूजन आ सकती है, लालिमा या दर्द भी हो सकती है। यह माइनर साइड इफेक्ट्स बहुत जल्दी स्वयं ठीक हो जाते हैं। लेकिन, अगर ऐसा न हो और यह समस्याएं बदतर हो जाएं, तो मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है। इसके अलावा, इस वैक्सीन को सुरक्षित माना जाता है। अधिकतर लोगों को इसके बाद कोई भी परेशानी नहीं होती है। हालांकि अन्य दवाईयों के जैसे इस वैक्सीन के बाद भी कुछ लोग गंभीर समस्याओं का अनुभव कर सकते हैं। लेकिन, इसकी संभावना कम है। अगर आपको इस वैक्सीनेशन के बाद कोई भी परेशानी होती है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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यह तो थी IPV2 वैक्सीन (IPV2 Vaccine) के बारे में जानकारी। यह इनएक्टिव पोलियो वैक्सीन (Inactive polio Vaccine) की दूसरी डोज है, जिसे लेना जरूरी माना जाता है ताकि पोलियो वायरस से अधिक सुरक्षा हो सके। इस वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। लेकिन, इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। इसके साथ ही इसे लेने के बाद आपको कोई भी परेशानी होती है तो भी मेडिकल हेल्प लेना भी अनिवार्य है। अगर आपके दिमाग में इस वैक्सीन से सम्बन्धित कोई भी सवाल है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में अवश्य जानें। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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Oral polio vaccine: How safe is safe?. https://www.jstor.org/stable/24104183  .Accessed on 27/10/21

Inactivated polio vaccine (IPV). https://www.gavi.org/types-support/vaccine-support/inactivated-polio-vaccine

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Sayali Chaudhari द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को