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आपकी लापरवाही बन सकती है वायरल इंफेक्शन का कारण! जरूरी है ये खास जानकारी

आपकी लापरवाही बन सकती है वायरल इंफेक्शन का कारण! जरूरी है ये खास जानकारी

वायरस बहुत छोटे जर्म्स होते हैं। वायरस प्रोटीन कोटिंग से बने होते हैं, जिसमें अनुवांशिक जानकारी मौजूद होता है। वायरस आम सर्दी (Common cold), फ्लू (flu) और मस्से (Warts) जैसे संक्रामक रोगों का कारण बनते हैं। वायरल इंफेक्शन के प्रकार कई होते हैं, जो एचआईवी/ एड्स, इबोला और कोविड-19 जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। वायरस को हाईजैकर भी कह सकते हैं। वायरस सेल्स पर अटैक कर अपनी तरह के वायरस प्रोड्यूस करते हैं। इस कारण से कोशिकाएं मर जाती है या डैमेज हो जाती है। वायरस का अटैक लिवर, रेस्पायरेटरी सिस्टम या ब्लड आदि पर हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, तो वायरस उस व्यक्ति को आसानी से बीमार कर सकता है। वायरल इंफेक्शन से बचने के लिए सावधानी के साथ ही मजबूत इम्यूनिटी बहुत जरूरी है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको वायरल इंफेक्शन के प्रकार के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही बताएंगे कि कैसे इस संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखा जाए।

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वायरल इंफेक्शन के प्रकार (Types of viral infections)

other viral infections

वायरस के प्रकार एक नहीं बल्कि बहुत से होते हैं, जो अलग-अलग रोगों को जन्म देते हैं। जानिए मानव शरीर को कौन-से वायरल इंफेक्शन हो सकते हैं।

  • स्मॉलपॉक्स (Smallpox)
  • कॉमन कोल्ड ( Common cold) and
  • विभिन्न प्रकार के फ्लू (Different types of flu)
  • मीजल्स (Measles)
  • चिकनपॉक्स (Chicken pox)
  • हेपेटाइटिस (Hepatitis)
  • हार्पीस और कोल्ड सोर्स (Herpes and cold sores)
  • पोलियो (Polio)
  • रेबीज (rabies)
  • इबोला और हंता फीवर (Ebola and Hanta fever)
  • एचआईवी (HIV)
  • सार्स (SARS)
  • डेंगू फीवर (Dengue fever)
  • एचपीवी(HPV)

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कोल्ड सोर्स (Cold sores)

वायरल इंफेक्शन के प्रकार

कोल्ड सोर्स के कारण होंठ के आसपास फफोले पड़ जाते हैं। ऐसा हर्पीज लेबियालिस (Herpes labialis) वायरस के कारण होता है। कोल्ड सोर्स वायरल इंफेक्शन है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। कोल्डसोर्स हार्पीज सिम्प्लेक्स टाइप 1 (HSV-1) के कारण कारण फैलता है और संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों के माध्यम से अन्य व्यक्ति में फैल सकता है। ओरल सेक्स भी इस बीमारी को फैलाने का काम कर सकता है। हार्पीज सिम्प्लेक्स टाइप 2 (HSV-2) के कारण जेनिटल हार्पीस की समस्या हो जाती है। इस कारण से जननांग के आसपास मस्से आ जाते हैं, जो दर्द का कारण बनते हैं। इस कारण से बुखार, मांसपेशियों में दर्द, फफोले के स्थान में खुजली और दर्द आदि लक्षण दिखाई पड़ते हैं। जानिए कैसे पाया जा सकता है इस वायरस से छुटकारा।

कोल्ड सोर्स का ट्रीटमेंट

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि इस वायरल इंफेक्शन को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। कोल्ड सोर्स (Cold sores) का ट्रीटमेंट लक्षणों के आधार पर किया जाता है। यानी वायरस को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है लेकिन लक्षणों को कम किया जा सकता है। डॉक्टर फफोले की समस्या को ठीक करने के लिए एंटीवायरल क्रीम लगाने की सलाह देंगे। साथ ही दर्द से छुटकारे के लिए एंटीवायरल मरहम भी दिया जाता है। बुखार व अन्य लक्षणों से छुटकारे के लिए ओवर-द काउंटर दवाएं भी दी जाती हैं। अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

वायरल इंफेक्शन के प्रकार: एचआईवी (HIV)

वायरल इंफेक्शन के प्रकार

एचआईवी (human immunodeficiency virus) वायरस उन सेल्स में हमला करता है, जो शरीर की रक्षा करती हैं। एचआईवी वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम में हमला करता है, जिसके कारण व्यक्ति आसानी से किसी भी बीमारी से ग्रसित हो सकता है। असुरक्षित यौन संबंध के माध्यम से एचआईवी आसानी से फैल सकता है। साथ ही निडिल शेयर करने, ड्रग्स इंजेक्शन आदि भी एचआईवी के ट्रांसमिशन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान अगर मां को एचआईवी है, तो ये होने वाले बच्चे को भी संक्रमित कर सकता है। अगर ब्लड को बिना जांचे चढ़ाया जाए, तो ये भी वायरस के संक्रमण को फैला सकता है। एचआईवी होने पर बुखार, ठंड लगन, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, थकान, लंफ नोड्स में सूजन आदि लक्षण दिखते हैं।

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एचआईवी से बचाव

एचआईवी से बचा नहीं जा सकता है लेकिन इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। सुरक्षित यौन संबंध आपको न केवल बीमारियों से बचाने का काम करते हैं बल्कि अनचाही प्रेग्नेंसी को भी रोकते हैं। कॉन्डोम का इस्तेमाल यौन संबंध बनाते समय करना चाहिए। एक बार इस्तेमाल की गई निडिल का दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर किसी महिला को एचआईवी है, तो उसे कंसीव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। टैटू बनवाते समय भी नई निडिल का इस्तेमाल करना चाहिए। कुछ बातों का ध्यान रख एचआईवी वायरस से बचा जा सकता है।

सीजनल इंफ्लूएंजा (Seasonal influenza)

सीजनल इंफ्लएंजा वायरस के कारण फैलता है। ये आम वायरल इंफेक्शन है, जिससे कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। सीजनल फ्लू के लक्षण सीजनल कोल्ड जैसे ही होते हैं। बुखार, खांसी, जुकाम, कफ की समस्या, शरीर में दर्द होना, थकान का एहसास आदि सीजनल फ्लू के लक्षण हैं। सीजनल इंफ्लूएंजा आसानी से हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाता है। अगर हाइजीन के साथ ही कुछ बातों का ख्याल रखा जाए, तो इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, उन्हें सीजनल फ्लू के दौरान ज्यादा समस्या नहीं होती है और ये संक्रमण कुछ समय बाद अपने आप ही ठीक हो जाता है। ये संक्रमण पांच से सात दिन तक रहता है और फिर खत्म हो जाता है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उन्हें बीमारी के लक्षण अधिक परेशान कर सकते हैं। डॉक्टर बीमारी के लक्षणों को कम करने के लिए दवा देते हैं।

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वायरल इंफेक्शन के प्रकार: डेंगू फीवर (Dengue fever)

Dengue fever

डेंगू फीवर मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है। ये बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है। इंफेक्शन के करीब 14 दिन बाद बीमारी के लक्षण नजर आते हैं। डेंगू के लक्षणों में बुखार, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, लिम्फ नोड्स में सूजन, गले में खराश, ज्वाइंट्स पेन आदि दिख सकते हैं। पेशेंट को हल्का बुखार से अधिक बुखार हो सकता है। बीमारी के लक्षण सात दिनों तक दिख सकते हैं। साथ ही शरीर में लाल दाने भी दिख सकते हैं।

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डेंगू फीवर का इलाज

डेंगू वायरस मच्छर में रहता है और फिर मच्छर के माध्यम से मनुष्य के शरीर के ये प्रवेश करता है। अगर घर से मच्छरों को खत्म किया जाए, तो इस बीमारी को रोका जा सकता है। ट्रॉपिकल एरिया में ट्रैवलिंग के दौरान भी डेंगू से संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। ब्लड टेस्ट के माध्यम से डेंगू वायरस के बारे में जानकारी मिलती है। डेंगू का इलाज करने के लिए कोई दवा उपलब्ध नहीं है बल्कि संक्रमण के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर दवा देते हैं। एसिटामिनोफेन के साथ दर्द निवारक का इस्तेमाल किया जाता है।

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पोलियो (Polio)

Polio

पोलियो (Polio) को पोलियोमाइलाइटिस ( poliomyelitis) भी कहते हैं। पोलियो वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाली बीमारी है, जो पैरालिसिस, सांस लेने में समस्या का कारण बनती है। ये वायरल इंफेक्शन मौत का कारण भी बन सकता है। इस संक्रमण के होने पर आमतौर पर लक्षण नजर नहीं आते हैं। करीब 95 प्रतिशत रोगों में किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते हैं। पोलियो वायरस के कारण पोलियो की बीमारी होती है। पोलियो होने पर कुछ लोगों को बुखार, गले में खराश, थकान, हाथ और पैरों की जकड़न, मैनिंजाइटिस यानी मस्तिष्क के आसपास की झिल्लियों में संक्रमण की समस्या हो सकती है। पोलियो से बचाव के लिए दो साल के बच्चों को चार से छह साल तक पोलियो की वैक्सीन दी जाती है। ओरल पोलियो वैक्सीन की सहायता से पोलियो को हराया जा सकता है।

कोरोना वायरस और कोविड-19 (Covid-19)

कोविड -19 वायरस के संक्रमण के कारण लाखों लोगों को साल 2020 में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। कोविड-19 नया वायरस है, जो लोगों को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। वायरस के संक्रमण के कारण हल्के बुखार के साथ ही, जुकाम,खांसी, छींक, सिरदर्द आदि लक्षण दिख सकते हैं। कोविड-19 से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क बेहद जरूरी है। हाथों को मुंह में लगाने से पहले हाथों को क्लीन जरूर करें। हाइजीन का ख्याल रख इस संक्रमण से बचा जा सकता है। कोविड-19 से बचने के लिए इस बीमारी के बारे में जागरुकता बहुत जरूरी है। फिलहाल दुनिया में इस बीमारी की वैक्सिनेशन शुरू हो चुकी है लेकिन फिर भी सावधानी ही इस संक्रमण से बचाने में मदद कर सकती है।

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वायरल इंफेक्शन (Viral infections) का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है?

वायरल इंफेक्शन को डायग्नोज करने के लिए निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं।

  • एलिसा टेस्ट (ELISA)
  • स्किन बायोप्सी (Skin biopsy)
  • इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी (Electron microscopy)
  • हिस्टोपैथीलॉजी (histopathology)

वायरल इंफेक्शन (Viral infections) से बचने के लिए एंटीवायरल मेडिसिंस

कई वायरल संक्रमण बिना ट्रीटमेंट के अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। वायरल कोल्ड या इंफ्लूएन्जा चार से सात दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाता है। यानी वायरल इंफेक्शन के लक्षणों को कम करने के लिए कुछ दवाएं इस्तेमाल की जाती है, जो वायरस पर सीधा असर नहीं करती हैं। वहीं एंटीवायरल दवाएं सीधा वायरस पर अपना असर दिखाती हैं। एंटीवायरल दवाएं वायरस के डीएनए के उत्पादन को रोकने का काम करती हैं। वहीं कुछ दवाएं वायरस को होस्ट सेल्स में जाने से रोकने का काम करती हैं। अगर एंटीवायरल मेडिसिंस का सेवन बीमारी की शुरूआत में किया जाए, तो असर साफ दिखाई पड़ता है। चिकनपॉक्स, दाद, दाद सिंप्लेक्स वायरस -1 (एचएसवी -1), हार्पीज सिम्प्लेक्स वायरस -2, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और इन्फ्लूएंजा के इलाज में एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

वायरल इंफेक्शन से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

फ्लू, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, चिकनपॉक्स, हार्पीस जोस्टर, एचपीवी, पोलियो, रेबीज आदि के लिए वैक्सीन मौजूद हैं। आप डॉक्टर से जानकारी लेने के बाद वैक्सिनेशन करवा सकते हैं। अपने बच्चों को टीका जरूर लगवाएं। ऐसा करने से खतरनाक वायरस से छुटकारा मिल सकता है। अगर किसी को वायरल संक्रमण है, तो उससे दूरी बनाएं रखें। हाइजीन का ख्याल रखें और हाथ धोने के बाद ही मुंह छुएं। स्वच्छ खाना खाएं और सुरक्षित यौन संबंध बनाएं। इन बातों का ध्यान रख आप वायरल संक्रमण से बच सकते हैं।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वायरल इंफेक्शन के प्रकार (Other viral infections) के बारे में जानकारी मिल गई होगी। बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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सूत्र

Viruses

https://medlineplus.gov/viralinfections.html  (Accessed on 16/3/2021)

Structure and classification of viruses
http://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK8174/ (Accessed on 16/3/2021)

Measles vaccination
https://www.cdc.gov/measles/vaccination.html (Accessed on 16/3/2021)

Types of vaccines
https://www.vaccines.gov/basics/types/index.html#live (Accessed on 16/3/2021)

Viruses
http://www.microbeworld.org/types-of-microbes/viruses (Accessed on 16/3/2021)

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड