मैस्टाइटिस एक ऐसी समस्या है जिसमें महिलाओं के स्तन के ऊतक में असामान्य सूजन आ जाती है। यह आमतौर पर ब्रेस्ट डक्ट में इंफेक्शन के कारण होता है और ज्यादातर स्तनपान कराने वाली महिलाएं ही इस बीमारी से ग्रसित होती हैं। ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं शुरूआती 6 से 12 हफ्तों के बीच इस बीमारी से प्रभावित होती है, हालांकि कुछ महिलाओं में बाद में इस बीमारी के लक्षण दिखायी देते हैं।

मैस्टाइटिस होने में स्तन में दर्द और सूजन रहता है जिसके कारण बच्चे को स्तनपान कराने में परेशानी होती है। अगर समस्या ज्यादा बढ़ जाता है तो आपके लिए गंभीर स्थिति बन सकती है । इसलिए इसका समय रहते इलाज जरूरी है। इसके भी कुछ लक्षण होते हैं ,जिसे ध्यान देने पर आप इसकी शुरूआती स्थिति को समझ सकते हैं।
स्वस्थ महिलाओं में मैस्टाइटिस रेयर होता है। लेकिन डायबिटीज, पुरानी बीमारी, एड्स और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाली महिलाओं में यह बीमारी होने की संभावना अधिक होती है। ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली 1 से 3 प्रतिशत महिलाओं में यह बीमारी पायी जाती है। क्रोनिक मैस्टाइटिस उन महिलाओं में होता है जो स्तनपान नहीं कराती हैं। यह बीमारी महिलाओं के अलावा पुरुषों में भी हो सकती है। ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
मैस्टाइटिस होने पर स्तन में गर्माहट महसूस होती है और निप्पल से पस निकलता है। इस बीमारी के कई लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जो आमतौर पर पहली बार ब्रेस्टफीडिंग कराते समय दिखायी देते हैं। लेकिन समय के साथ मैस्टाइटिस के ये लक्षण सामने आने लगते हैं :
कभी-कभी कुछ महिलाओं में इनमें से कोई भी लक्षण सामने नहीं आते हैं।
इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी सामने आते हैं :
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ऊपर बताएं गए लक्षणों में किसी भी लक्षण के सामने आने के बाद आप डॉक्टर से मिलें। हर महिला के शरीर में मैस्टाइटिस के लक्षण अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति के लिए आप डॉक्टर से बात कर लें।
मैस्टाइटिस स्तन के ऊतकों में एक इंफेक्शन है जो स्तनपान के दौरान सबसे ज्यादा होता है। यह तब होता है जब बच्चे के मुंह से बैक्टीरिया क्रैक निप्पल के जरिए मिल्क डक्ट में प्रवेश कर जाते हैं। यह बीमारी बच्चे की डिलीवरी के एक से तीन महीने के बीच होती है।
लेकिन मैस्टाइटिस ब्रेस्टफीडिंग न कराने वाली और मेनोपॉज से गुजर चुकी महिलाओं को भी हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज के कारण इम्यूनिटी कमजोर होने और धूम्रपान करने वाली महिलाओं को भी यह बीमारी हो सकती है।
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मैस्टाइटिस का पर्याप्त उपचार मौजूद नहीं है। यह बीमारी होने पर मिल्क डक्ट अवरुद्ध हो जाता है जिसके कारण स्तन में पस जमा होने लगता है। अधिक मात्रा में पस जमा होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है और इसे सर्जरी के जरिए बाहर निकाला जाता है। भविष्य में मैस्टाइटिस के जोखिम से बचने के लिए इस बीमारी के लक्षण दिखायी देने के तुरंत बाद डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
मैस्टाइटिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर शरीर की जांच करते हैं और मरीज से उसके शरीर में दिखने वाले लक्षणों के बारे में विस्तार से बात करते हैं। इस बीमारी को जानने के लिए कुछ टेस्ट कराए जाते हैं :
कुछ मरीजों में अल्ट्रासाउंड के द्वारा मैस्टाइटिस का पता लगाया जाता है। मैस्टाइटिस की जांच के लिए डॉक्टर सीरिंज से ब्रेस्ट मिल्क निकालकर यह पता लगाते हैं कि स्तन में इंफेक्शन किस ऑर्गनिज्म के द्वारा हुआ है। इससे इस बीमारी का इलाज करना आसान हो जाता है।
कुछ थेरिपी और दवाओं से व्यक्ति में मैस्टाइटिस के असर को कम किया जाता है। मैस्टाइटिस के लिए तीन तरह की मेडिकेशन की जाती है :
मैस्टाइटिस होने के बाद भी बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करना सुरक्षित है। स्तनपान कराने से इंफेक्शन दूर होने में मदद मिलती है। स्तनपान बंद करने से मैस्टाइटिस के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। इसलिए लगातार अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें।
अगर आपको मैस्टाइटिस है तो आपके डॉक्टर आपको अपने आहार में 500 अतिरिक्त कैलोरी शामिल करने के लिए बताएंगे। इसके साथ ही आपको दिन भर में 10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाएगी। वहीं, स्तन में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों से युक्त संतुलित आहार लेने के लिए भी कहा जाता है। आप बच्चे को स्तनपान कराने के बाद बर्फ से अपने स्तन की सिंकाई कर सकती है। इससे दर्द कम होता है। बच्चे को सही पोजीशन में बैठकर या लेटकर दूध पिलाएं और अगर संभव हो तो ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करें।
इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
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Current Version
11/03/2020
Anoop Singh द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Niharika Jaiswal