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आपकी ये आदतें बन सकती हैं प्रोस्टेट कैंसर का कारण

    आपकी ये आदतें बन सकती हैं प्रोस्टेट कैंसर का कारण

    वैसे तो यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer) का कारण क्या है लेकिन डॉक्टरों का यह मानना है कि प्रोस्टेट कैंसर तब शुरू होता है जब पुरुषों के प्रोस्टेट में कुछ कोशिकाएं असामान्य हो जाती हैं। असामान्य कोशिकाओं के डीएनए में उत्परिवर्तन कोशिकाओं को बढ़ने और सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से विभाजित करने का कारण बनता है। इस दौरान असामान्य कोशिकाएं जीवित रहती हैं, जब अन्य कोशिकाएं मर जाती है। तो असामान्य कोशिकाएं मिलकर एक ट्यूमर बनाती हैं जो आस-पास के ऊतकों को हानि पहुंचाने का कार्य करते है। कई मामलों में यह देखा गया है की कुछ असामान्य कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकती हैं। ऐसे कई केस सामने आए हैं जिनमें यह देखा गया है की यह शरीर के बाकी हिस्सों में फैलकर विकराल हो सकता है।डॉक्टरों का कहना है कि कुछ ऐसे कारक है जो प्रोस्ट्रेट कैंसर का कारण बन सकते हैं। जो इस प्रकार हैं।

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    प्रोस्टेट कैंसर के कारण (Causes of prostate cancer)

    इस पर डॉक्टर निश्चितता के साथ नहीं कह सकते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर का कारण क्या है लेकिन विशेषज्ञ आमतौर पर इस बात से सहमत हैं कि आहार जोखिम में योगदान देता है। जो पुरुष अधिक मात्रा में वसा का सेवन करते हैं विशेष रूप से लाल मांस और उच्च गर्मी में पकाया जाने वाले पशु वसा के अन्य स्रोतों से – उन्नत प्रोस्टेट कैंसर विकसित होने की अधिक संभावना हो सकती है। यह रोग उन देशों में अधिक पाया जाता है जहां मांस और डेयरी उत्पाद सबसे अधिक हैं उन देशों की तुलना में जहां मूल आहार में चावल, सोयाबीन उत्पाद और सब्जियां जैसे ब्रोकोली, फूलगोभी, का सेवन उच्च हैं। उन लोगों में इसका खतरा उन देशओं के मुकाबले कम होता है।

    आनुवांशिक गुण (Genetic properties)

    प्रोस्टेट कैंसर (प्रोस्टेट कैंसर) एक आनुवांशिक बीमारी की तरह भी हो सकता है। बीआरसीए 2 जीन नामक डीएनए के एक हिस्से में उत्परिवर्तन से पुरुष को प्रोस्टेट कैंसर, होने का खतरा हो सकता है। आनुवांशिक बीमारी न केवल पुरुषों में बल्कि महिलाओं में भी होता है। यदि महिला परिवार के सदस्यों में स्तन या डिम्बग्रंथि के कैंसर है तो इसमें उस परिवार महिलओं को कैंसर होने का खतरा होता है। इस बीमारी के बढ़ते जोखिम के साथ जुड़े अन्य विरासत वाले जीनों में RNASEL, BRCA 1, DNA बेमेल जीन, HPC1 और HoxB13 शामिल हैं।यह कई अध्ययनों में पाया गया है कि जिन परिवारों में ये बीमारी पहले हो चुकी है। वहां अन्य पुरूषों को प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा अन्य पुरुषों के मामले में अधिक पाया गया है।

    मोटापा (Obesity)

    हाल ही में हुए शोध से पता चलता है कि मोटापा भी कहीं न कहीं प्रोस्टेट कैंसर की वजह बन सकता हैं। यदि आप इस जोखिम से बचना चाहते हैं। तो आपको एक संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करने की जरुरत है। इससे आपके प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम कम हो सकते हैं।

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    नस्ल (Breed)

    प्रोस्टेट कैंसर का कारण कभी-कभी आपकी नस्ल हो सकती है। प्रोस्टेट कैंसर एशियाई पुरुषों की तुलना में अफ्रीकी-कैरिबियन और अफ्रीकी मूल के पुरुषों में अधिक आम है। कई मामलों में पाय़ा गया हैअमेरिकी पुरुषों और अफ्रीकी वंश के जमैका पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने का ज्यादा खतरा होता है। तो वहीं अन्य जातियों और नस्लों के पुरुषों में इसका खतरा कम होता है।

    हार्मोनल लिंक (Hormonal link)

    आपके हार्मोन्स में होने वाले बदलाव भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बन सकता है। इस कारण वसा हार्मोन का उत्पादन और हमारी लाइफस्टाइल के मिलने से शरीर में उच्च आहार टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। जो प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को बढ़ावा दे सकता है।

    पारिवारिक इतिहास (Family history)

    प्रोस्टेट कैंसर पारिवारिक इतिहास के कारण भी बन सकता है।परिवारिक इतिहास और आनुवंशिकता अलग अलग हो सकती है। पारिवारिक इतिहास वो है, जब एक आदमी जिसके पिता या भाई (पहले रिश्तेदार) को कैंसर है। तो ऐसे में पुरुष रिश्तेदारों में प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम बढ़ जाते है।

    उम्र (Ages)

    वृध्दाअवस्था वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा देखा गया है। जैसे-जैसे आप बूढ़े होते हैं, जोखिम बढ़ता है, और ज्यादातर मामलों का निदान 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में होता है।

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    धूम्रपान का अधिक सेवन (Excessive smoking)

    कुछ लोग बहुत अधिक मात्रा में धूम्रपान का सेवन करते हैं। आप ये बात जानते ही हैं अधिक धूम्रपान कैंसर और कई बीमारियों का कारण होता है। यदि बात करें प्रोस्टेट कैंसर की तो धूम्रपान के साथ-साथ गलत खान-पान की आदत भी इसका जोखिम बढ़ाते हैं।जो लोग अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं उनमें भी यह खतरा हो सकता है। इससे आपके शरीर में फैट भी बढ़ता है शरीर में ज्यादा वसा प्रोस्टेट का कारण बनता है। प्रोस्टेट कैंसर बहुत धीमी गति से बढ़ता है। इसी कारण से इसके लक्षण आपको एक बार में पता नहीं चलते हैं।

    राष्ट्रीयता

    प्रोस्टेट कैंसर उत्तरी अमेरिका, यूरोप (विशेष रूप से यूरोप के उत्तर-पश्चिमी देशों), केन्याई और ऑस्ट्रेलिया में अधिक आम है। यह एशिया, अफ्रीका और दक्षिण और मध्य अमेरिका में कम है।

    रसायन भी बन सकता है कारण

    जो व्यक्ति ज्यादा रसायन के संपर्क में आते हैं जैसे जो पुरुष रसायन या धातु ,बैटरी, वेल्डिंग, और रबड़ का काम करने वाले कारीगर लंबे समय तक इस कार्य में रहते हैं। उन्हें भी प्रोस्टेट कैंसर होने के जोखिम होते हैं।

    आहार

    आपके आहार और प्रोस्टेट कैंसर के बीच एक कड़ी होती है। कैल्शियम में उच्च आहार, वसायुक्त खाद्य पदार्थ, रेड मीट,प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ने के जोखिम से जुड़ा हुआ है।कैल्शियम का अधिक सेवन और स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। प्रोस्टेट कैंसर आहार और जीवन शैली जैसे कई कारक इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

    और पढ़ें : Enlarged Prostate: प्रोस्टेट का बढ़ना क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

    प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

    प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआत में कोई संकेत या लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते हैं जब तक कि कैंसर ट्यूब पर दबाव डालने के लिए काफी बड़ा नहीं हो जाता है जो मूत्राशय से मूत्र को लिंग से बाहर निकालता है। प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं।

    • रात में अधिक बार पेशाब
    • पेशाब करने में कठिनाई
    • पेशाब करते समय काफी देर तक खड़े रहना
    • कमजोर प्रवाह
    • हड्डी में दर्द
    • नपुंसकता
    • ऐसा लगना जैसे आपका मूत्राशय पूरी तरह से खाली नहीं हुआ है
    • मूत्र में रक्त या वीर्य में रक्त

    अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी प्रकार की चिकित्सा और उपचार प्रदान नहीं करता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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    सूत्र
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    shalu द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/02/2022 को
    डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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