Aloe Vera: एलोवेरा क्या है?

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अपडेट डेट जुलाई 7, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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एलोवेरा का परिचय (Uses Of Aloe Vera In Hindi)

एलोवेरा के फायदे

कांटों की तरह दिखने वाला और कई खूबियों से भरपूर एलोवेरा का पौधा गर्म और शुष्क इलाकों में पाया जाता है। ऐलोवेरा के पौधे का इस्तेमाल जैल बनाने और लैटेक्स (एक तरह का वनस्पति दूध) बनाने के लिए किया जाता है। इसकी पत्तियों को बीच से काटने पर जो तरल पदार्थ निकलता है, उससे जैल का निर्माण किया जाता है, जबकि लैटेक्स को पत्ती की त्वचा के ठीक नीचे की कोशिकाओं से प्राप्त किया जाता है।

कई औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा का इस्तेमाल कई तरह की दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है। इसे सीधे दवाई के तौर पर भी खाया जा सकता है। कई त्वचा संबंधित समस्याओं में भी इसे उपचार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग एलोवेरा का इस्तेमाल वजन घटाने, मधुमेह, हेपेटाइटिस, आंतों की सूजन, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस, पेट के अल्सर, अस्थमा, त्वचा के घावों, बुखार, खुजली और सूजन आदि समस्या में भी करते हैं।

एलोवेरा पर हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि इसमें पाया जाने वाला रसायन असमाननं (Acemannan) एचआईवी(एड्स) की समस्या में भी काफी सहायक हो सकता है। कुछ जगहों पर ऐलोवेरा का इस्तेमाल हाई कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

एलोवेरा लैटेक्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से कब्ज को खत्म करने के लिए किया जाता है। शोध में यह बात सामने आई है कि इसका इस्तेमाल मिर्गी के दौरे (seizures), अस्थमा की समस्या, जुकाम, खून बहने, असामान्य मासिक धर्म, कोलाइटिस,अवसाद, मधुमेह की बीमारी, मोतियाबिंद, बवासीर की समस्या, ऑस्टियोअर्थराइटिस, आंखों की समस्या और कैंसर जैसी बीमारियों में किया जाता है।

कुछ लोग चेहरे पर ऐलोवेरा जैल का इस्तेमाल करते हैं। शोध के मुताबिक, एलोवेरा जैल का इस्तेमाल चेहरे पर होने वाली जलन, कील-मुहांसे की समस्या, रैशेज, मुंह में सूजन, मुंह में जलन, डायपर रैशज, बवासीर और आंतरिक बवासीर को हटाने के बाद होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए प्रभावकारी है। पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस, सूजन में ऐलोवेरा जैल का इस्तेमाल एक एंटीसेप्टिक के रूप में किया जाता है। ऐलोवेरा एक्सट्रेक्ट और ऐलोवेरा जैल का इस्तेमाल, जननांग दाद, स्कैल्प और खुजली वाली त्वचा, जलन, सनबर्न और शुष्क त्वचा के लिए किया जाता है।

ऐलोवेरा कैसे काम करता है?

हर्बल सप्लीमेंट के उपयोग से जुड़े नियम,अंग्रजी दवाओं के नियमों जितने सख्त नहीं होते हैं। इनकी उपयोगिता और सुरक्षा से जुड़े नियमों के लिए अभी और शोध की जरूरत है। इस हर्बल सप्लीमेंट के इस्तेमाल से पहले इसके फायदे और नुकसान की तुलना करना जरूरी है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।

एलोवेरा जैल त्वचा के लिए फायदेमंद है और इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधित कई समस्याओं के उपचार के तौर पर किया जाता है। इसका इस्तेमाल स्किन पर होने वाली सोरायसिस जैसी बीमारियों से राहत पाने के लिए भी काफी प्रभावकारी है।

ऐलोवेरा पर हुए शोध में यह बात सामने आई है कि इसमें कुछ ऐसे घटक पाए जाते हैं, जो कुछ प्रकार के बैक्टीरिया और कवक के लिए हानिकारक हो सकते हैं। एलोवेरा लैटेक्स में कुछ ऐसे रसायन मौजूद होते हैं, जोकि एक विरेचक औषधि (laxative) के रूप में काम करते हैं।

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सावधानियां और चेतावनी (How Safe Is Using Aloe Vera In Hindi)

ऐलोवेरा का उपयोग करने से पहले मुझे किन बातों पता होना चाहिए?

अपने चिकित्सक या फार्मासिस्ट या हर्बलिस्ट से परामर्श करें, यदि:

  • अगर आप गर्भवती हैं या फिर शिशु को स्तनपान करवा रही हैं तो ऐलोवेरा का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भावस्था में महिला को अपने खानपान का ध्यान रखना जरूरी होता है, ऐसे में अगर ऐलोवेरा का सेवन किया जाए, तो कई बार यह नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। इसलिए एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
  • अगर आप कोई स्वास्थ्य संबंधी दवाई का सेवन कर रहे हैं, तो इसका सेवन करने से बचें।
  • अगर आपको किसी तरह की एलर्जी है, तो ऐलोवेरा का सेवन बिना डॉक्टर के सुझाव के न करें।
  • आपको कोई अन्य बीमारी, विकार या कोई चिकित्सीय उपचार चल रहा है तो भी इसका सेवन न करें।

हर्बल सप्लीमेंट के उपयोग से पहले इसके फायदे और नुकसान की तुलना करना जरूरी है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।

कितना सुरक्षित है ऐलोवेरा का सेवन?

अगर आप एलोवेरा जैल का इस्तेमाल एक कॉस्मेटिक या दवा के तौर पर रहे हैं, तो यह सुरक्षित है।

अगर आप कम समय के लिए ऐलोवेरा को खा रहे हैं तो इसका इस्तेमाल सुरक्षित है। आप चाहें तो रोजाना 15 मिलीग्राम ऐलोवेरा ले सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह प्रक्रिया 42 दिनों तक दोहराना सुरक्षित है। साथ ही 50% ऐलोवेरा जैल युक्त घोल को चार हफ्ते तक दिन में दो बार लिया जा सकता है। एक खास जैल कॉम्प्लेक्स (एलो क्यूडीएम कॉम्प्लेक्स यूनीवेरा इंक) को आठ सप्ताह तक रोजाना लगभग 600 मिलीग्राम लेना सुरक्षित माना गया है।

अगर आप ऐलोवेरा लैटेक्स की ज्यादा मात्रा लेते हैं तो भी यह आपके लिए असुरक्षित हो सकता है।

ऐलोवेरा का इस्तेमाल करने से पहले बरतें ये सावधानियां

प्रेगनेंसी या स्तनपान के दौरान : 

ऐलोवेरा  जैल या लैटेक्स का इस्तेमाल गर्भावस्था  के दौरान सुरक्षित नहीं माना गया है। शोध के मुताबिक, ऐलोवेरा का इस्तेमाल करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है इसलिए इस दौरान इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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बच्चों के लिएः

बच्चों की त्वचा पर ऐलोवेरा जैल का इस्तेमाल करना सही है। लेकिन, अगर आप ऐलोवेरा लैटेक्स और ऐलोवेरा के पत्तों का अर्क 12 साल से छोटे बच्चे पर करते हैं तो उन्हें पेट में दर्द, ऐंठन और दस्त की समस्या हो सकती है।

डायबिटीज:

शोध में यह बात सामने आई है कि ऐलोवेरा का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को कम किया जा सकता है। अगर आप भी डायबिटीज पेशेंट और ऐलोवेरा का इस्तेमाल ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए करना चाहते हैं, तो एक बार सभी पहलूओं पर बारिकी से जांच करें।

क्रोहन रोग:

अल्सरेटिव कोलाइटिस में से अगर आपको कोई भी समस्या हो तो ऐलोवेरा लैटेक्स का प्रयोग बिल्कुल भी न करें। कई बार ऐलोवेरा लैटेक्स लेने से आंत में जलन की समस्या हो सकती है। इसका इस्तेमाल करते वक्त इस बात का भी ध्यान रखें कि ऐलोवेरा के पत्तों से बने उत्पादों में कुछ ऐलोवेरा लैटेक्स शामिल होंगे।

बवासीर:

बवासीर होने पर ऐलोवेरा लैटेक्स न लें। इससे हालत और खराब हो सकती है।

किडनीः

किडनी की समस्या होने पर ऐलोवेरा का अधिक सेवन न करें, क्योंकि इससे किडनी फेल भी हो सकती है।

सर्जरीः

सर्जरी के वक्त या सर्जरी के बाद ऐलेवोरा लेने से यह ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। अगर आपने हाल ही में कोई सर्जरी करवाई है, तो कम से कम दो सप्ताह तक ऐलोवेरा का इस्तेमाल न करें।

एलोवेरा के साइड इफेक्ट (Aloe Vera Side Effects In Hindi)

ऐलोवेरा से मुझे किस तरह के साइड इफेक्ट हो सकते हैं?

ऐलोवेरा के जितने फायदे हैं, उतने ही नुकसान भी हैं। शोध में यह बात सामने आई है कि ऐलोवेरा का इस्तेमाल करने से पेट दर्द और ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐलोवेरा का अधिक मात्रा में लंबे समय तक उपयोग करने से दस्त, गुर्दे की समस्याएं, पेशाब में खून, पोटेशियम का कम होना, मांसपेशियों की कमजोरी, वजन घटाने और हृदय की गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई दिनों तक रोजाना एक ग्राम ऐलोवेरा लैटेक्स लेना शरीर के लिए घातक हो सकता है।

शोध में यह बात भी सामने आई है कि ऐलोवेरा की पत्ते का अर्क लेने से कुछ लोगों में किडनी की समस्या हुई है, हालांकि यह असामान्य स्थिति है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐलोवेरा के अर्क से सिर्फ उन्हीं लोगों को समस्या होती है, जो अतिसंदेवनशील होते हैं।

इसके अलावा ऐलोवेरा के कई और भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अगर ऐलोवेरा लेने के बाद आपको किसी भी तरह की परेशानी होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

एलोवेरा से पड़ने वाले प्रभाव (Aloe Vera Effects In Hindi)

एलोवेरा से जुड़े परस्पर प्रभाव

इस हर्बल सप्लीमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और अन्य कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लीमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

यहां पर दी गई जानकारी को डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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एलोवेरा की खुराक (Aloe Vera Dosage In Hindi)

एलोवेरा की सामान्य खुराक क्या है?

व्यस्कों के लिए (अगर खाने में इस्तेमाल कर रहे हैं) :

कब्ज के लिएः

शोध के मुताबिक 100-200 मिलीग्राम ऐलोवेरा या फिर 50 मिली ग्राम ऐलोवेरा एक्सट्रेक्ट शाम के वक्त लेने से कब्ज से छुटकारा मिल सकता है। इसके अलावा आप 500 मिलीग्राम का ऐलोवेरा कैप्सूल रोजाना एक ले सकते हैं। आप चाहे तो अपनी आवश्यकतानुसार ऐलोवेरा कैप्सूल एक दिन में तीन ले सकते हैं।

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वजन घटाने के लिएः

वजन घटाने के लिए ऐलोवेरा से बने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना काफी लाभदायक माना जाता है। आप ऐलोवेरा जैल से निर्मित (ऐलोवेरा क्यूडीएम कॉम्प्लेक्स, यूनीवेरा इंक, सियोल) जैल दिन में दो बार ले सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक आपको इस प्रक्रिया को आठ सप्ताह कर दोहराना होगा।

चेहरे पर इस्तेमाल करने के लिए

मुंहासों के लिए:

रोजाना सुबह और शाम चेहरा धोने के बाद ऐलोवेरा जैल लगाने से मुंहासों से निजात मिलती है।

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जलने पर:

ऐलोवेरा जैल और जैतून के तेल की क्रीम को दिन में जो  बार छह सप्ताह तक लगाना चाहिए। इसके अलावा, एलो क्रीम का इस्तेमाल घाव की ड्रेसिंग और जले हुए के घाव को खत्म करने के लिए दिन में तीन बार रोजाना लगाना चाहिए या इसको लगाना तब तक जारी रखें, जब तक कि वह निशान खत्म नहीं हो जाते।

दाद के लिए:

0.5% ऐलोवेरा एक्स्ट्रेक्ट वाली क्रीम रोजाना तीन बार लगाने से दाद से छुटकारा मिल सकता है। आप चाहे तो दाद वाले स्थान पर ऐलोवेरा लगाने की प्रक्रिया को सप्ताह में पांच दिनों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

त्वचा या मुंह पर खुजली वाले चकत्तों के लिए (Lichen planus):

स्किन पर खुजली के कारण होने वाले चकत्ते के लिए ऐलोवेरा जैल का इस्तेमाल रोजाना दो से तीन बार करने से राहत मिलती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, आपको इस प्रक्रिया को आठ सप्ताह तक दोहराना जरूरी है। रोजाना दिन में 4 बार दो चम्मच ऐलोवेरा माउथवॉश का इस्तेमाल सिर्फ दो मिनट करने से मुंह की खुजली से राहत मिलती है। इससे सांसों की बदबू से भी छुटकारा पया जा सकता है।

एलोवेरा किस रूप में उपलब्ध  है?

  • पत्तों के रूप में
  • कैप्सूल
  • जैल

उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से जरूर जानकारी लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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