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Glaucoma: ग्लूकोमा क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण और उपाय

ग्लूकोमा क्या होता है ?|ग्लूकोमा के लक्षण क्या हैं?|ग्लूकोमा के कारण क्या हैं?|वह क्या चीजे हैं जो ग्लूकोमा होने की संभावना को बढ़ा सकती हैं?|ग्लूकोमा का निदान कैसे किया जाता है ?|जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार
Glaucoma: ग्लूकोमा क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण और उपाय

ग्लूकोमा क्या होता है ?

ग्लूकोमा (Glaucoma ) के बारे में जानकारी

ग्लूकोमा में आंखों की ऑप्टिक नर्व क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे अंधापन होने का खतरा होता है। आमतौर पर यह आंखों पर उच्च दबाव पड़ने के कारण होता है। ऑप्टिक नर्व, नर्व फायबर्स का एक बंडल है जो रेटिना को मस्तिष्क से जोड़ता है। जब ऑप्टिक नर्व क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो जो संकेत आपके मस्तिष्क को बताते हैं कि आप क्या देख रहे हैं, बाधित हो जाते हैं।

इसके कई प्रकार हैं। इनमें ओपन-एंगल, एंगल क्लोजर, नॉर्मल टेंशन, पिगमेंटरी, कंजेनिटल और सेकेंडरी ग्लूकोमा शामिल हो सकते हैं। इसमें सबसे आम ओपन-एंगल या मोतियाबिंद है।

ग्लूकोमा (Glaucoma ) कितना आम है?

यह बेहद आम बीमारी है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन, 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में इसकी संभावना ज्यादा होती है। यह अंधेपन के कुछ मुख्य कारणों में से एक है।

और पढ़ें :Bulging Eyes : कुछ लोगों की आंखें उभरी हुई क्यों होती है?

ग्लूकोमा के लक्षण क्या हैं?

ग्लूकोमा (Glaucoma ) के लक्षण

ओपन-एंगल ग्लूकोमा: शुरुआत में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन, बढ़ने पर आंखों के किनारे या बीच में एक धब्बा दिखता है।

एंगल क्लोजर ग्लूकोमा: इसके लक्षणों में गंभीर सिर दर्द, आंखों में दर्द, मितली और उल्टी, कम दिखना, आंखें लाल होना आदि हैं।

कंजेनिटल ग्लूकोमा: यह जन्मजात शिशु में होता है और पहले वर्ष के अंदर ही इसके लक्षण समझ में आने लगते हैं।

सेकेंडरी ग्लूकोमा: यह मोतियाबिंद बीमारियों के शरीर पर पड़े प्रभाव के कारण होता है। इसके लक्षण भी ऊपर दिए गए लक्षणों जैसे ही होते हैं।

और पढ़ें : आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

मुझे कब अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

यदि इसका इलाज न कराया जाए तो इससे दृष्टि हानि और अंधापन हो सकता है। जो लोग 40 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, उन्हें इसका कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 

 

ग्लूकोमा के कारण क्या हैं?

ग्लूकोमा (Glaucoma ) के कारण

इसका मुख्य कारण आपकी ऑप्टिक नर्व का डैमेज होना है। आमतौर पर ज्यादा प्रेशर पड़ने से ऑप्टिक नर्व डैमेज होती है। यह दबाव आंखों में ज्यादा तरल जमने से होता है। साथ ही इसके कारण इसके प्रकार पर भी निर्भर करता है। इनमें से कुछ सामान्य कारण यह हैं :

ओपन-एंगल ग्लूकोमा: यह सबसे आम है। इसमें आंखों में ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ जमने के आंख के पिछले हिस्से पर दबाव पड़ता है। उस दबाव के कारण आइरिस और कॉर्निया के बीच एक बड़ा सा एंगल बन जाता है।

एंगल क्लोजर ग्लूकोमा: इस तरह के मोतियाबिंद में भी आंखों में बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ जम जाता है। इसके कारण आंखों पर दबाव पड़ने के कारण छोटा एंगल बनता है या बनता ही नहीं है।

और पढ़ें : Jaundice : क्या होता है पीलिया ? जाने इसके कारण लक्षण और उपाय

नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा: इस तरह के मोतियाबिंद में किसी भी तरह का दबाव इसका कारण नहीं होता है बल्कि ऑप्टिक नर्व में कम ब्लड सप्लाई इसका मुख्य कारण होता है।

सेकेंडरी ग्लूकोमा: यह किसी अन्य बीमारी या दवाइयों के शरीर पर पड़े बुरे असर के कारण होता है। खासकर कि उच्च रक्तचाप या डायबिटीज इसके मुख्य कारण होते हैं।

कंजेनिटल ग्लूकोमा: इस तरह का मोतियाबिंद जन्म या गर्भावस्था के दौरान हुई किसी कमी के कारण शिशु में हो सकता है।

पिगमेंटरी ग्लूकोमा: इस तरह के मोतियाबिंद में आंखों में तरल पदार्थ की आपूर्ति के कारण एक धब्बा सा बन जाता है जो कि धीरे धीरे बढ़ने लगता है।

 

वह क्या चीजे हैं जो ग्लूकोमा होने की संभावना को बढ़ा सकती हैं?

  • 60 वर्ष से अधिक होने पर आपको ग्लूकोमा होने का खतरा अधिक होता है।
  • आंखों में इंट्राओकुलर दबाव होना।
  • परिवार में कभी किसी को ग्लूकोमा रहा हो।
  • कई दवाइयां ऐसी हैं जो इसका कारण बन सकती हैं। ऐसी दवाओं में कॉर्टिकोस्टेरॉइड आई ड्रॉप शामिल हैं।
  • अन्य रोग जैसे मधुमेह, हृदय की समस्याएं इत्यादि।
  • आंख में दबाव को जांचने के लिए टोनोमेट्री टेस्ट कर सकते हैं ।
  • आप कितनी दूरी तक देख सकते हैं इसका टेस्ट किया जा सकता है ।
  • ऑप्टिक नर्व टेस्ट ।
  • कॉर्नियल की मोटाई को जानने के लिए पचमेट्री टेस्ट कर सकते हैं ।
  • गोनिस्कोप टेस्ट ।

और पढ़ें : आंख से कीचड़ आना हो सकता है इन बीमारियों का संकेत, जान लें इनके बारे में

ग्लूकोमा का निदान कैसे किया जाता है ?

ग्लूकोमा का इलाज कैसे करें?

इसका इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है। ग्लूकोमा का इलाज इन चीजों द्वारा किया जा सकता है।

आई ड्रॉप: इन दवाओं में प्रोस्टाग्लैंडिंस (लैटानोप्रोस्ट, बिमाटोप्रोस्ट), बीटा ब्लॉकर्स (टिमोल, बीटैक्सोलोल), अल्फा एड्रीनर्जिक एगोनिस्ट (एप्राक्लोनिडिन, ब्रिमोनिडाइन), कार्बोनिक एनहाइड्रेज इनहिबिटर (डोरजोलैमाइड, ब्रिनजोलैमाइड) और माइओटाइपरिन शामिल हैं। ये दवाएं मुख्य रूप से आंख में दबाव को कम करने का काम करती हैं।

ओरल चिकित्सा: कई डॉक्टर आई ड्रॉप के साथ ओरल चिकित्सा भी देते हैं। इसमें से एसिटाजोलैमाइड भी एक है।

लेजर ट्रैबेकोप्लास्टी: इस ट्रीटमेंट के इस्तेमाल से आंखों की नसों में द्रव्य के बहाव को सीमित किया जाता है। यह ट्रीटमेंट लेजर द्वारा आई क्लीनिक में दिया जा सकता है।

और पढ़ें : : Ulcerative colitis : अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है? जाने इसके कारण ,लक्षण और उपाय

इसके अलावा ग्लूकोमा का इलाज सर्जरी के द्वारा भी होता है :

ग्लूकोमा सर्जरी को मेडिकल भाषा में ट्रेबैक्यूलेक्टमी कहते हैं। ये ऑप्टिक नर्व के डैमेज होने के खतरे को कम करने के लिए किया जाता है। आप जानते हैं ग्लूकोमा के बारे में, इस बीमारी में आंखों में फ्लूइड्स अनियमित रूप से स्रावित होते रहते हैं, जिस वजह से आंखों में प्रेशर बढ़ जाता है। आगे चल कर फ्लूइड्स की अनियमितता के कारण ऑप्टिक नर्व इंजरी हो जाती है। जिससे सही तरह से चीजें दिखाई नहीं देती है। ग्लूकोमा 40 साल से ऊपर के लोगों में होता है और 50 में से किसी 1 इंसान को होता है।

और पढ़ें : घर पर आंखों की देखभाल कैसे करें? अपनाएं ये टिप्स

अगर ग्लूकोमा का समय से इलाज नहीं किया गया तो आगे चल कर ये अंधापन (Blindness) में बदल जाता है। आपके एनेस्थेटिस्ट ने आपको एनेस्थेटिक (सुन्न या बेहोश) करने के कई तरीके बताए होंगे। सर्जरी को करने में लगभग 45 से 75 मिनट का समय लगता है। क्योंकि, सर्जन ऑपरेशन के दौरान आंखों में इकट्ठा तरल (Fluid) को निकालते हैं। अगर आपके मन में सर्जरी के दौरान भी कोई भ्रम या सवाल हो तो सर्जन से जरूर पूछ लें।

और पढ़ें : :Eye allergies: आंख में एलर्जी क्या है?

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

ग्लूकोमा के इलाज के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

ग्लूकोमा का इलाज यानी ट्रीटमेंट लेने के दौरान अगर आप अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देते हैं तो समस्या अधिक बढ़ सकती है। ग्लूकोमा के इलाज के दौरान आपको कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • आप ऐसे किसी भी काम को ना करें, जिससे आंखों का दबाव बढ़ें। आंखों पर जोर लगाना या आंखों पर अधिक दबाव पड़ना समस्या को बढ़ा सकता है।
  • आंखों में नियमित रूप से ड्रॉप को जरूर डालें।
  • आपको अपनी डायट में ऐसे फूड को शामिल करना चाहिए जो आंखों को स्वस्थ्य रखें। आप खाने में नट्स, खट्टे फल, दूध, गाजर, पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करें।
  • अगर आंखों के ट्रीटमेंट के दौरान आपको किसी दवा से एलर्जी हो रही हो तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।
  • खाने में विटामिन ए से भरपूर फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। आप विटामिन ए के लिए खाने में अंडा गेंहू, अखरोट, पालक, वेजीटेबल ऑयल आदि शामिल कर सकते हैं। साथ ही विटामिन सी के लिए टमाटर, स्ट्रॉबेरी, ब्रोकली, मोसम्मी, नींबू आदि को जरूर शामिल करें।
  • अगर आप नॉनवेजीटेरियन हैं तो खाने में जिंक युक्त फूड को भी आसानी से शामिल कर सकते हैं। सी फूड जिंक का अच्छा सोर्स माना जाता है।
  • आप डॉक्टर से पूछें कि हेल्दी डायट के साथ ही किस तरह की एक्सरसाइज आपके लिए फायदेमंद रहेगी।
  • नियमित आधार पर टेस्ट करवाएं और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें ।
  • अगर कोई दवा ले रहें हों तो अपने डॉक्टर को बताएं ।
  • अगर आपको कोई अन्य बीमारियां हैं जैसे अस्थमा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग इत्यादि हैं तो डॉक्टरों को बताएं ।

यदि आपके कोई सवाल हों तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

 

 

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Aamir Khan द्वारा लिखित
अपडेटेड 05/07/2019
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