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ई सिगरेट की बिक्री, उत्पादन, विज्ञापन पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

ई सिगरेट की बिक्री, उत्पादन, विज्ञापन पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

स्वास्थ्य के लिए बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत की कैबिनेट ने 18 सितंबर को इलेक्ट्रानिक सिगरेट जिसे आम बोलचाल की भाषा में ई सिगरेट कहा जाता है उसके उत्पादन, आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ‘ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ‘एक कार्यकारी आदेश में युवा लोगों पर पड़ रहे बुरे प्रभाव के कारण ई सिगरेट के प्रतिबंध को मंजूरी दी गई’। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत में युवा इससे बुरी तरह से प्रभावित है। अभी ये स्पष्ट नहीं है कि क्या ये आदेश वेपिंग (Vaping) पर भी प्रतिबंध लगाएगा। भारत में 100 मिलयन से अधिक वयस्क धूम्रपान में लिप्त हैं। अधिक खपत के कारण ई सिगरेट कंपनियों के लिए ये बड़ा बाजार है। प्रस्तावित अध्यादेश में उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम एक साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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क्या होता है वेपिंग ?

आमतौर पर वेपिंग निकोटीन, पानी, सॉल्वैंट्स और फ्लेवर से बना मिश्रण होता है। इसे धूम्रपान के विकल्प के रूप में देखा जाता है।

अमेरिका का दिया हवाला

सीतारमण ने अमेरिका में हुए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि वहां 10वीं और 12वीं के स्कूली बच्चों में ई सिगरेट का चलन 77.8 प्रतिशत बढ़ा है जबकि मिडिल स्कूल के बच्चों में ई सिगरेट लेने का चलन 48.5 प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश में ई सिगरेट के कई ब्रांड मौजूद हैं, लेकिन वे सभी विदेश में बनते हैं और आयात किए जाते हैं। ई सिगरेट से निकलने वाले धुएं में बहुत अधिक निकोटिन पाया जाता है जो स्वास्थय के लिए हानिकारक होता है। आपको बताते चले कि बीते फरवरी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने सभी राज्यों को ईएनडीएस (इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स) पर प्रतिबंध लगाने के लिए लिखा था। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्थगनादेश लगा दिया था।

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ई सिगरेट क्या है

ई सिगरेट एक ऐसा उपकरण है जो सिगरेट, सिगार या पेन के आकार का होता है और जिसमें तंबाकू नहीं होता है। ई सिगरेट में बैटरी का उपयोग किया जाता है और इसमें निकोटीन, फ्लेवरिंग और दूसरे केमिकल्स होते हैं जिनमें से कुछ हानिकारक भी हो सकते हैं। जब इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग किया जाता है, तो निकोटीन और दूसरे केमिकल धुंए में बदल जाता है जो सांस लेने से फेफड़ों में जाता है। अलग-अलग ई सिगरेट में निकोटीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। अभी तक इस पर पूरी जानकारी नहीं है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट सुरक्षित हैं या नहीं और धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान छोड़ने में मदद करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। ई सिगरेट को इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी कहा जाता है।

ई सिगरेट के बारे में जरूरी फैक्ट्स

ई सिगरेट के बारे में कुछ मुख्य बातें यहां बताई जा रही है जो लोगों के बीच में मशहूर हैः

  • ई सिगरेट देखने में सिगरेट जैसा है, लेकिन इसमें तंबाकू की मात्रा नहीं होती
  • ई सिगरेट धूम्रपान कम करने या छोड़ने के लिए सहायक के रूप में बेचे जाते हैं और कुछ लोग उन्हें इसके लिए मददगार पाते हैं।
  • हालांकि शोध से पता चलता है कि वे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
  • स्वास्थ्य अधिकारी ई सिगरेट का उपयोग करने से युवाओं को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक ई सिगरेट का इस्तेमाल युवाओं की सेहत के लिए नुकसानदायक है।

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ई सिगरेट से क्या खतरा हो सकता है

जबकि ई सिगरेट कुछ लोगों को स्मोकिंग छोड़ने में मदद कर सकती है, लेकिन कई शोधों में इस बात के प्रमाण बढ़ रहे हैं कि कुछ मामलों में वेपिंग हानिकारक हो सकती है। इसके अलावा वेपिंग कई बार धूम्रपान करने से ज्यादा हानिकारक साबित हो सकती है।

ई सिगरेट को बैन करने का कारण हर देश में अलग-अलग है, लेकिन भारत में इसे बैन करने के पीछ ये कारण बताएं गए हैं:

  • अधिकांश ई सिगरेट में निकोटीन होता है जो नशे की लत है और किशोरों के दिमाग में बदलाव को ट्रिगर करता है। यह गर्भावस्था के दौरान खतरनाक है क्योंकि यह भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है।
  • एरोसोल में सॉल्वैंट्स, फ्लेवरिंग और टॉक्सिकेंट्स होते हैं जिसे “हानिकारक” या “पोटेंशियली हानिकारक” के रूप में बताया जाता है।
  • ई सिगरेट फेफड़ों को अलग-अलग पदार्थों के संपर्क में लाती है। इनमें से एक डाइसेटाइल है जो “पॉपकॉर्न लंग (popcorn lung)” एक गंभीर और अपरिवर्तनीय फेफड़ों की बीमारी का कारण बन सकता है।
  • संभावित रूप से इसमें कुछ टॉक्सिक मैटेरियल पाए गए हैं जिसको गलती से निगलने से पॉयजनिंग की परेशानी भी हुई है।
  • जो लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं वे ई सिगरेट के उपयोग से पारंपरिक और मेडिकल हेल्प के तरीकों का उपयोग करना बंद कर देते हैं।
  • ई सिगरेट उत्पादों का उपयोग करने वाले किशोर नियमित रूप से तम्बाकू का उपयोग शुरू करने की अधिक संभावना रखते हैं।
  • निकोटीन के निरंतर उपयोग से अन्य दवाएं जैसे कोकीन, ड्रग्स लोगों को ज्यादा अच्छी लगने लगती हैं।
  • ई सिगरेट में इस्तेमाल की जाने वाली फ्लेवरिंग, मार्केटिंग और यह अवधारणा कि यह किशोरों के लिए हानिकारक नहीं है वेपिंग को और बढ़ावा दे रही है। परेशान होने वाली बात यह है कि इसके इस्तेमाल से किशोरों में स्मोकिंग करने की संभावना बढ़ जाती है।
  • वैपिंग से सेकंड हैंड स्मोकिंग को खत्म नहीं किया जाता है क्योंकि वैपिंग में कार्सिनोजेनिक मैटेरियल ज्यादा होता है।

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ई सिगरेट पर हाल ही में किए गए शोध

जनवरी 2018 में, प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों के परिणाम प्रकाशित किए गए थे जिसमें बताया गया था कि कैसे ई सिगरेट में मौजूद नाइट्रोसैमिन (Nitrosamines) डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि ई सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने के बाद फेफड़ों की कोशिकाओं को रिपेयर करने की क्षमता में काफी कमी आई है। इसके अलावा इस शोध में ई सिगरेट के धुएं ने चूहों में फेफड़े, मूत्राशय और हृदय को नुकसान पहुंचाया।

इस शोध पर यह निष्कर्ष निकाला गया हैं: “चूहों पर ई सिगरेट का प्रभाव देखने के बाद ये बात कही गई है कि यह संभव है कि ई सिगरेट का धुआं मनुष्यों में फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर के साथ-साथ हृदय रोग में भी योगदान दे सकता है।” अमेरिका में FDA ने धूम्रपान को रोकने के लिए ई सिगरेट को मंजूरी नहीं दी है।

इस बात को ध्यान रखते हुए भारत में भी 18 सितंबर को ई सिगरेट के उत्पादन, आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/02/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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