गामा-ग्लूटामाइल ट्रांसपेप्टिडेज़ टेस्ट रक्त में जीजीटी एंजाइम्स की मात्रा को मापता है। एंजाइम अणु होते हैं जो आपके शरीर में केमिकल रिएक्शन के लिए आवश्यक होता हैं। जीजीटी शरीर में परिवहन अणु के रूप में काम करता है जिससे दूसरे अणुओं को शरीर में स्थानांतरित करने में मदद मिलती है। यह लिवर को दवा और अन्य टॉक्सिन् को मेटाबोलाइज़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जीजीटी लिवर में केंद्रित होता है, लेकिन यह गालब्लैडर, स्पलीन, पैनिक्रियाज और किडनी में भी मौजूद होता है। लिवर के डैमेज होने पर जीजीटी ब्लड लेवल हमेशा हाई होता है।लिवर डैमेज की संभावना होने पर लिवर एंजाइम्स को मापने के लिए यह टेस्ट अक्सर दूसरे टेस्ट के साथ किया जाता है।
आपका डॉक्टर जीजीटी टेस्ट की सलाह देता है यदि उसे संदेह है कि आपका लिवर डैमेज हो गया है या आपको लिवर से संबंधित कोई बीमारी है या परेशानी है, खासतौर पर शराब पीने से संबंधित। जीजीटी टेस्ट वर्तमान में लिवर की क्षति और बीमारी का सबसे संवेदनशील एंजाइमेटिक संकेतक है। यह क्षति अक्सर बहुत ज़्यादा शराब के सेवन या अन्य विषाक्त पदार्थ जैसे- ड्रग्स या जहर के सेवन से होती है।
यदि आपने एल्कोहल रिहैब्लिटेशन प्रोग्राम पूरा कर लिया है और आप शराब से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपका डॉक्टर इस टेस्ट का आदेश यह देखने के लिए दे सकता है कि आप उपचार ठीक तरह से करा रहे हैं या नहीं। जिन लोगों का एल्कोहलिक हेपेटाइटिस के लिए इलाज किया गया हो, उनके जीजीटी स्तर की निगरानी के लिए भी यह टेस्ट किया जाता है। इसके साथ ही निम्नलिखित परेशानी होने पर भी GGT टेस्ट की जा सकती है। जैसे
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जीजीटी टेस्ट के 24 घंटों के भीतर अल्कोहल की थोड़ी मात्रा सें भी जीजीटी अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। स्मोकिंग से भी जीजीटी बढ़ सकता है।
जीजीटी का स्तर अधिक होना हृदय रोग या हाई ब्लडप्रेशर का संकेत हो सकता है। कुछ अध्ययन के मुताबिक, जीजीटी के स्तर में वृद्धि से लोगों के हृदय रोग से मरने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन ऐसा क्यों होता है अभी तक पता नहीं चला है।
जीजीटी स्तर बढ़ाने वाली दवाओं में शामिल है, कार्बामाजेपिन और बार्बिट्यूरेट्स जैसे फेनोबार्बिटल। इसके अलावा अन्य दवाएं नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लामेट्री ड्रग्स (NSAIDs), लिपिड-लोअरिंग ड्रग्स, एंटीबायोटिक्स, हिस्टामाइन रिसेप्टर ब्लॉकर्स (पेट में अतिरिक्त एसिड के उत्पादन का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है), एंटिफंगल, एंटीडिप्रेसेंट्स और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन जीजीटी का स्तर बढ़ा सकते हैं। क्लोफिब्रेट और ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स जीजीटी के स्तर को कम कर सकते हैं।
जीजटी का स्तर महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है, लेकिन पुरुषों में नहीं। मगर यह पुरुषों में कुछ हद तक अधिक ही होता है
इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर थोड़ा रक्तस्राव हो सकता है, दुर्लभ मामलों में ही इससे संक्रमण होता है।
डॉक्टर आपको टेस्ट के 8 घंटे पहले से कुछ नहीं खाने का निर्देश देगा और कुछ दवाइयां भी बंद कर सकता है। यदि आप टेस्ट के 24 घंटे के अंदर एल्कोहॉल का थोड़ा भी सेवन करते हैं, तो इससे टेस्ट रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। इसलिए GGT टेस्ट के 8 घंटे पहले से खाद्य पदार्थों का सेवन न करें और इस टेस्ट से पहले एल्कोहॉल का सेवन ही बर्जित है। अगर आपने एल्कोहॉल का सेवन किया है और टेस्ट के लिए जा रहें हैं, तो इसकी जानकारी अपने हेल्थ एक्सपर्ट को दें।
नियमित ब्लड टेस्ट से आपका जीजीटी लेवल मापा जा सकता है। आमतौर पर आपकी बांह की नस से ब्लड निकाला जाता है। तकनीशियन आपकी बांह पर एलास्टिक बैंड बांधता है। फिर सिरिंज की मदद से ब्लड निकाला जाता है। जब सुई चुभाई जाती है तो आपको बस चींटी के काटने जितना दर्द होता है और ब्लड निकालने वाली जगह पर थोड़ा निशान बन जाता है।
इस टेस्ट के बाद किसी तरह की खास देखभाल की जरूरत नहीं होती है। यदि डॉक्टर किसी तरह के निर्देश नहीं देता है तो आप अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकते हैं।
यदि आपके मन में जीजीटी टेस्ट से जुड़ा कोई सवाल हैै, तो कृपया अधिक जानकारी और निर्देशों को बेहतर तरीके से समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
जीजीटी का सामान्य स्तर 9–48 यूनिट प्रति लीटर (U/L) होता है। सामान्य वैल्यू भी उम्र और लिंग के आधार पर अलग हो सकती है।
जीजीटी का ऊंचा स्तर इस बात का संकेत है कि कोई स्वास्थ्य स्थिति या बीमारी लिवर को नुकसान पहुंचा रही है, लेकिन विशेष रूप से यह नहीं बताता कि क्या। आमतौर पर स्तर जितना अदिक होगा लिवर को उतनी अधिक क्षति होती है। हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी लिवर की बीमारी के कारण स्तर ऊंचा हो सकता है, मगर यह दूसरी वजहों से भी हो सकता है जैसे- हार्ट फेलियर, डायबिटीज या पैनक्रियाटिस। यह एल्कोहल के सेवन और लिवर को हानि पहुंचाने वाली दवाओं के कारण भी बढ़ सकता है।
कम या सामान्य जीजीटी स्तर संकेत देता है कि किसी व्यक्ति को लिवर की बीमारी नहीं है और उसने एल्कोहल का सेवन नहीं किया है।
जीजीटी का बढ़ा स्तर हड्डियों की बीमारी को बढ़ा देता है, ऐसा बढ़े हुए ALP लेवल के कारण होता है। लेकिन जीजीटी यदि कम या सामान्य है, तो ALP के बढ़ने का कारण हड्डी की बीमारी है।
जीजीटी उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है। यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि किसी दवा या आपके थोड़ा सा एल्कोहल के इस्तेमला से परिणाम प्रभावित हो रहा है, तो वह दोबारा टेस्ट के लिए कहेगा। बार्बिटुरटेस (Barbiturates), फेनोबार्बिटल (Phenobarbital) और कुछ बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं भी जीजीटी को बढ़ा देती हैं। महिलाओं में जीजीटी का स्तर उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है, लेकिन पुरुषों में नहीं।
आप बहुत शराब पीते थे और हाल ही में पीना बंद किया है तो आपके जीजीटी लेवल को सामान्य होने में कुछ महीने लगेंगे।
सभी लैब और अस्पताल के आधार पर जीजीटी टेस्ट की सामान्य सीमा अलग-अलग हो सकती है। परीक्षण परिणाम से जुड़े किसी भी सवाल के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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Current Version
25/05/2020
Kanchan Singh द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Nikhil deore