Complete Blood Count Test : कंप्लीट ब्लड काउंट क्या है?

By Medically reviewed by Dr. Radhika apte

बेसिक्स को जाने

कंप्लीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count) क्या है ?

कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) खून में टाइप ऑफ सेल्स और उनकी की संख्या के बारे में जानकारी देता है, जैसे रेड ब्लड सेल्स, वाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स । डॉक्टर को सीबीसी रिपोर्ट कमजोरी, थकान या चोट लगने जैसे लक्षण की जाँच करने में मदद करता है। खून की कमी, एनीमिया, संक्रमण और कई अन्य डिसऑर्डर और उनके निदान में भी सीबीसी टेस्ट बहुत उपयोगी सिद्ध होता है ।

सीबीसी टेस्ट में शामिल होते हैं:

  • व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC, ल्यूकोसाइट) काउंट
  • व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC डिफरेंस)
  • रेड ब्लड सेल्स (RBC काउंट)
  • हेमेटोक्रिट (HCT, पैक्ड सेल वॉल्यूम, PCV)
  • हिमोग्लोबिन (Hgb)
  • रेड ब्लड सेल्स इंडेक्स
  • प्लेटलेट (थ्रोम्बोसाइट) काउंट
  • मींन प्लेटलेट वॉल्यूम (MPV)

आपका डॉक्टर सीबीसी टेस्ट के साथ साथ ब्लड स्मीयर टेस्ट कराने के लिए बोल सकता है । हालांकि ये सीबीसी टेस्ट का हिस्सा नहीं है । टेस्ट के दौरान रंक्त की कुछ बूंदों को कांच की बनी स्लाइड पे फैला दिया जाता है और एक विशेष डाई की मदद से स्लाइड पे निशान छोड़ दिए जाते है ।

आगे की प्रक्रिया मे स्लाइड को माइक्रोस्कोप की मदद से देखा जाता है और आरबीसी और डब्लूबीसी और प्लेटलेट्स की संख्या और आकार को रिकॉर्ड किया जाता है ।

अलग अलग तरह के आकार वाली सेल्स से कई रोगों के निदान में काफी मदद मिलती है, जैसे ल्यूकेमिया, मलेरिया या सिकल सेल रोग।

कंप्लीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count) क्यों किया जाता है ?

सीबीसी टेस्ट नॉर्मल ब्लड टेस्ट के जैसा है लेकिन यह कई वजहों से किया जाता है :

आपका डॉक्टर आपके टोटल हेल्थ को रिव्यु, मॉनिटर करने के लिए ये टेस्ट बोल सकता है । एनीमिया या ल्यूकेमिया जैसे दूसरे रोग की स्क्रीनिंग के लिए भी रूटीन चेकअप के दौरान डॉक्टर आपसे सीबीसी टेस्ट कराने की सिफारिश कर सकता है।

मेडिकल कंडीसन को डायग्नोस करने के लिए भी ये टेस्ट किया जाता है । कमजोरी, थकान, बुखार, सूजन, चोट या ब्लीडिंग की कंडीसन में भी डॉक्टर आपको सीबीसी टेस्ट कराने को बोल सकता है ।

सीबीसी टेस्ट बीमारी के लक्षणों और कारणों को समझने और उसे जड़ से ठीक करने में मदद कर सकता है । यदि डॉक्टर को लगता है कि आप किसी इंफेक्शन से जूझ रहे है तो सीबीसी टेस्ट के माध्यम से वो इस बात को कन्फर्म कर सकता है ।

मेडिकल कंडीसन की मॉनिटरिंग के लिए । यदि कोई ब्लड डिसऑर्डर या रंक्त सम्बंधी बीमारी आपके सेल्स की गिनती को प्रभावित कर रही है, तो आपका डॉक्टर आपके मेडिकल कंडीसन लिए कंप्लीट ब्लड काउंट रिपोर्ट की मदद ले सकता है ।

मेडिकल ट्रीटमेंट की मॉनिटरिंग के लिए । यदि आप कोई ऐसी दवा ले रहे है जो आपके ब्लड सेल्स पे प्रभाव डाल रही है तो सीबीसी टेस्ट आपकी हेल्थ की निगरानी रख सकता है ।

यह भी पढ़ें : Blood cancer : ब्लड कैंसर क्या है?

जानने योग्य बातें

कंप्लीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count ) कराने से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए?

शरीर की कई अलग-अलग स्थितियों में सेल्स की संख्या घटती-बढ़ती रहती है। इनमें से कुछ कंडीसन में क्योर की जरूर हो सकती है जबकि अन्य मामलों में शरीर खुद ही सेल्स काउंट को बैलेंस कर लेता है ।

हाल में हुए ब्लड इंफैक्शन सीधे तौर पे सीबीसी पे असर डालते है

शिशुओं और बच्चों का नार्मल सीबीसी रिजल्ट वयस्कों से अलग होता है । पैथलॉजी अलग अलग ऐज ग्रुप की सीबीसी के कई रिफरेंस रेंज को दर्शाता है । डॉक्टर सीबीसी डेटा को देखते समय इस बात का ध्यान रखते है ।

जानिए क्या होता है

कंप्लीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count) के दौरान क्या होता है?

हेल्थ प्रोफेशनल की नजर से:

एक लचीला बैंड आपकी बांह के चारो तरफ लपेटा जाता है जिससे आप थोड़ा कसा हुआ या असहज फील कर सकते है। हो सकता है कि आपको सुई की चुभन महसूस भी ना हो और हो भी तो जरा सी हो। फाइनली आपके बांह से ब्लड के सैंपल कलेक्ट कर लिया जाता है ।

अगर आपके मन मे सीबीसी टेस्ट से सम्बंधित किसी भी प्रकार की शंका या सवाल है तो बेहतर निर्देश के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करिए।

यह भी पढ़ें : Blood Smear Test: ब्लड स्मीयर टेस्ट क्या है?

रिजल्ट को समझें

मेरे टेस्ट रिजल्ट का क्या मतलब है ?

यहां नॉर्मल वैल्यू को लिस्टेड कर रहे है जिसे हम रेफरेंस रेंज या एक मार्गदर्शिका के रूप में देख सकते है

अलग अलग पैथलॉजी लैब में इनकी रेंज में बदलाव मुमकिन है । लैब रिपोर्ट में उन सभी रेंज का उल्लेख होना जरूरी है जिनका प्रयोग किया गया है।

आपका डॉक्टर भी हेल्थ और अन्य कारकों के आधार पर आपके रिजल्ट को समझने की कोशिश करेगा । ये भी सम्भव है कि यहाँ दी गयी नॉर्मल वैल्यू आपके टेस्ट रिपोर्ट की वैल्यू से भिन्न हो लेकिन ये आपके और आपकी लैब के लिए सामान्य हो ।

सीबीसी टेस्ट की नार्मल वैल्यू सेक्स, उम्र, समुद्र से कितनी उचाई पे रहते है और आपके ब्लड सैंपल पे निर्भर करती है । किसी भी कंडिसन्स को समझने के लिए डॉक्टर इनमे से किसी भी सीबीसी वैल्यू की जांच पड़ताल कर सकता है ।

उदाहरण के लिए, रेड ब्लड सेल्स (आरबीसी) काउंट, हीमोग्लोबिन (एचबीजी), और हेमटोक्रिट (एचसीटी) इस बात की तरफ इशारा करते है कि किसी व्यक्ति को एनीमिया है या नहीं ।

दूसरी तरफ रेड ब्लड इंडेक्स और ब्लड स्मीयर एनीमिया को ठीक करने और एनमिया होने के कारणों का पता लगाने में भी कारगर सिद्ध होते है ।

यह देखने के लिए कि क्या व्हाइट ब्लड (WBC, ल्यूकोसाइट) की काउंट बेहतर है और सेल्स स्मीयर को कैसे देखती हैं, आपका डॉक्टर (WBC काउंट) और WBC डिफ्रेंसिअल के काउंट पे नजर डालेगा । यह देखने के लिए कि किसी निश्चित प्रकार के सेल्स की संख्या कम या ज्यादा तो नही ।

आपका डॉक्टर टोटल काउंट और उस विशेष सेल के प्रतिशत को देखेगा। प्रत्येक प्रकार की श्वेत कोशिका की कुल संख्या के लिए सामान्य मूल्य हैं। यहाँ प्रत्येक व्हाइट सेल्स की नार्मल वैल्यू को दिखाया गया है।

प्रेगनेंसी इन ब्लड वैल्यू को बदल सकती है इसलिये आपका डॉक्टर गर्भावस्था के प्रत्येक तिमाही के दौरान नार्मल वैल्यू के बारे में आपसे बात करेगा।

व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC, ल्यूकोसाइट) काउंट

पुरुष और गैर-गर्भवती महिलाएं: 5,000-10,000 WBC प्रति क्यूबिक मिलीमीटर (mm3) या 5.0-10.0 x 109 WBCs प्रति लीटर (L)

व्हाइट ब्लड सेल्स टाइप्स (WBC डिफ्रेंसिअल)

न्यूट्रोफिल: 50% -62%

बैंड न्यूट्रोफिल: 3% -6%

लिम्फोसाइट्स: 25% –40%

मोनोसाइट्स: 3% -7%

ईोसिनोफिल्स: 0% -3%

बेसोफिल्स: 0% -1%

रेड ब्लड सेल्स (RBC) काउंट

पुरुष: 4.5-5.5 मिलियन RBCs प्रति माइक्रोलिटर (mcL) या 4.5-5.5 x 1012 / लीटर (L)

महिलाएं: 4.0-5.0 मिलियन RBCs प्रति mcL या 4.0-5.0 x 1012 / L

बच्चे: 3.8-6.0 मिलियन RBCs प्रति mcL या 3.8 –6.0 x 1012 / L

शिशु: 4.16.1 मिलियन आरबीसी प्रति एमसीएल या 4.1–6.1 x 182 / L

हेमेटोक्रिट (एचसीटी)

पुरुष: 42% -52% या 0.42–0.52 मात्रा अंश

महिला: 36% -48% या 0.36–0.48 मात्रा अंश

बच्चे: 29% -59% या 0.29–0.59 मात्रा अंश

नवजात शिशु: 44% -64% या 0.44–0.64 मात्रा अंश

हीमोग्लोबिन (Hgb)

पुरुष: 14–17.4 ग्राम प्रति डेसीलीटर (g / dL) या 140-174 ग्राम प्रति लीटर (g / L)

महिलाएं: 12-16 g / dL या 120-160 g / LCM

बच्चों: 9.5-20.5 g / dL या 95-205 g /

नवजात शिशु: 14.5–24.5 g / dL या 145–245 g / L

सामान्य तौर पर, सामान्य हीमोग्लोबिन लेवल हेमेटोक्रिट के मूल्य का एक तिहाई होता है।

रेड ब्लड सेल्स इंडेक्स

मीन कोरपसकुलर वॉल्यूम (MCV) – वयस्क: 84-96 फीमोलिटर्स (fL)

मीन कोरपसकुलर हीमोग्लोबिन (एमसीएच) – वयस्क: 28-34 पिकोग्राम (पीजी) प्रति सेल्स

मीन कोरपसकुलर हीमोग्लोबिन सांद्रता (MCHC) – वयस्क: 32-36 ग्राम प्रति डेसीलीटर (g / d)

रेड सेल्स डिस्ट्रीब्यूशन विड्थ ( RDW)

सामान्य: 11.5% -14.5%

प्लेटलेट (थ्रोम्बोसाइट) काउंट

वयस्क: 140,000-400,000 प्लेटलेट्स प्रति मिमी 3 या 140-400 x 109 /

बच्चे: 150,000-450,000 प्लेटलेट्स प्रति मिमी 3 या 150–450 x 109 / एल

मीन प्लेटलेट की मात्रा (MPV)

वयस्क: 7.4-10.4 mcm3 या 7.4-10.4 fL

बच्चे: 7.4-10.4 mcm3 या 7.4-10.4 fL

ब्लड स्मीयर नॉर्मल: ब्लड सेल्स की आकार, रंग और संख्या सामान्य होती हैं।

हाई वैल्यू

रेड ब्लड सेल्स (RBC)

आरबीसी की हाई लेवल वैल्यू से पैदा हुई खतरनाक स्थिति: धूम्रपान, कार्बन मोनोऑक्साइड, लंबे समय तक फेफड़े की बीमारी, किडनी की बीमारी, कैंसर, हृदय रोग, शराब की लत लिवर की समस्या , बोनमेरो (पॉलीसिथिया वेरा या हीमोग्लोबिन से जुड़ी रेयर बीमारी जो ऑक्सीजन को जकड़ देता है ।

ऐसी स्थितियाँ जो शरीर की वाटर कॉन्टेंट को प्रभावित करती हैं, हाई आरबीसी वैल्यू के लिए जिम्मेवार हो सकती है । ऐसी कंडीसन में डिहाइड्रेशन, दस्त या उल्टी, अत्यधिक पसीना और पेशाब की अधिकता हो सकती है । शरीर में तरल पदार्थ की कमी से भी आरबीसी की मात्रा बढ़ जाती है इसे स्फुरित पॉलीसिथेमिया कहा जाता है।

व्हाइट ब्लड सेल्स (डब्ल्यूबीसी, ल्यूकोसाइट)

डब्ल्यूबीसी के हाई लेवल वैल्यू के कारण कई गभीर स्थितियां पैदा हो सकती है जैसे संक्रमण, सूजन, शरीर के ऊतकों को नुकसान (जैसे कि दिल का दौरा), गंभीर शारीरिक या भावनात्मक तनाव (जैसे बुखार, चोट या सर्जरी), किडनीफेल्योर, ल्यूपस, तपेदिक (टीबी), शामिल हैं। गठिया, कुपोषण, ल्यूकेमिया और कैंसर जैसे रोग।

और पढ़ें : Hepatitis A Virus Test: हेपेटाइटिस-ए वायरस टेस्ट क्या है?

अभी शेयर करें

रिव्यू की तारीख जुलाई 8, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 17, 2019