डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक कंडिशन है, जिसमें शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी काफी धीरे होता है। यह स्थिति जीवन भर के लिए रहती है, लेकिन प्रॉपर देखभाल के साथ डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) वाले लोग स्वस्थ रूप से बड़े हो सकते हैं और सामान्य तरीके से समाज में उठ बैठ सकते हैं।

यह सबसे आम जेनेटिक डिसऑर्डर (Genetic disorder) है। यह बीमारी बचपन में ही सामने आने लगती है।
डाउन सिंड्रोम निम्नलिखित कारणों से हो सकता है। जैसे:
हालांकि यह जानना जरूरी है कि कुछ जन्मदोष विकास में देरी या पिता के दवाइयों के संपर्क में आने से और एल्कोहॉल (Alcohol) के सेवन के चलते होते हैं।
इसके सामान्य लक्षण हैं जैसे हम आपको नीचे बता रहे हैं:
ऊपर दिए गए कुछ लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको किसी लक्षण से परेशानी है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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अगर आपको नीचे बताए गए लक्षण में से कोई भी लक्षण नजर आए, तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए :
आपके बच्चे को तुरंत एक डॉक्टर की जरूर होती है, अगर उसे यह समस्या हों :
भ्रूण की प्रत्येक कोशिका 46 गुणसूत्रों से बनती है, जो 23 गुणसूत्र के दो अलग-अलग जोड़े होते हैं। एक भ्रूण को बनाने के लिए 23 गुणसूत्रीय दो कोशिकाएं एक साथ आकर मिलती हैं और 46 जोड़ी जायगोट बनता है। इसके बाद ही यह भ्रूण का रूप लेता है। कुछ मामलों में कोशिकाओं के विभाजन के दौरान गुणसूत्रों का एक अतिरिक्त जोड़ा दोनों गुणसूत्र के जोड़ो में से किसी एक में मिल जाता है। यहां गुणसूत्र के दो जोड़े होने के बजाय तीन जोड़े हो जाते हैं। इस प्रकार की अनियमितता के चलते बच्चे में सामान्य शारीरिक और जन्मजात बदलाव पैदा होते हैं। इसे ही जेनेटिक डिसऑर्डर कहा जाता है।
एक नॉर्मल शरीर में 46 क्रोमोसोम होते हैं, जिनमें से आधे मां से और आधे पिता से होते हैं। 21वें क्रोमोसोम में असामान्य डिवीजन के कारण डाउन सिंड्रोम होता है। इस सिंड्रोम वाले लोगों में 47 क्रोमोसोम होंगे। 21 वें क्रोमोसोम से ही मानसिक और शारीरिक अक्षमता सामने आती है।
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इसके लिए कई जोखिम कारक हैं, हम आपको कुछ कारण नीचे बता रहे हैं जैसे:
दी गई जानकारी किसी भी मेडिकल एडवाइज का विकल्प नहीं है। ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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स्क्रीनिंग टेस्ट (Screening test), डायग्नोस्टिक टेस्ट (Diagnostic test) और ब्लड सैंपल (Blood sample) की मदद से डाउन सिंड्रोम की जानकारी मिल सकती है। कपल के फैमली हिस्ट्री को ध्यान में रखकर डाउन सिंड्रोम की जानकारी के लिए ये टेस्ट किये जा सकते हैं।
इसका पूरी तरह से इलाज नहीं किया जा सकता है। हालांकि माता-पिता के लिए इस स्थिति को जल्द से जल्द महसूस करना और अपने बच्चे को पहली उम्र से मदद करना जरूरी है।
अगर आपके बच्चे में डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) है, तो आपको उसे डॉक्टर और उन्हें जरूरी मेडिकल केयर प्रोवाइड करने के लिए अपने डॉक्टर या एक सपोर्टिंग ग्रुप की मदद की जरूरत हो सकती है। इसके साथ ही आपको बच्चे का पूरा ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि खानपान से डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे का जीवन आसान बनाया जा सकता है।
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रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार डाउन सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है, लेकिन एनडीएसएस (राष्ट्रीय डाउन सिंड्रोम समाज) एवं लोगों में बढ़ती डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरुकता डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) से पीड़ित व्यक्ति या बच्चे और उनके परिवार के लिए एक सकारात्मक कदम है।
जब आपके बच्चे को हुए डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) का पता चलता है, तो यह आपके लिए पहली बार कठिन हो सकता है। आपको एक सपोर्टिव सोर्स ढूंढना चाहिए, जहां आप आप इस स्थिति के बारे में जरूरी जानकारी ले सकें और अपने बच्चे को स्किल डेवलप करने में मदद करें:
इस बीमारी से पीड़ित बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में अलग होते हैं। इन बच्चों के मानसिक विकास भी देर से होता है और ये बच्चे ठीक तरह से निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। हालांकि अगर पेरेंट्स अगर चिंता और परेशानियों को एक ओर रखकर इस बीमारी से जुड़ी जानकारी एवं डॉक्टर से कंसल्टेशन कर बच्चे की मदद कर सकते हैं। आजकल डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के लिए स्कूल भी चलाये जाते हैं।
इस आर्टिकल में हमने आपको डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस बीमारी से जुड़े किसी अन्य सवाल का जवाब जानना है, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे। अपना ध्यान रखिए और स्वस्थ रहिए।
डिस्क्लेमर
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Current Version
02/03/2022
Pawan Upadhyaya द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Pooja Bhardwaj
Updated by: Manjari Khare
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr. Pooja Bhardwaj