गर्भ में बच्चा मां की आवाज से उसकी खुशबू तक इन चीजों को लगता है पहचानने

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Update Date दिसम्बर 30, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
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हो सकता है कि आपने पौराणिक कथाओं में ये बात सुनी होगी कि बच्चा गर्भ में सीखता है। हम आपको उन बातों पर यकीन करने को नहीं कहेंगे, लेकिन ये सच है कि बच्चा गर्भ में रहकर कई चीजों को महसूस करता है और उनसे सीखता है। प्रेग्नेंसी के 23 हफ्ते बाद बच्चा बहुत कुछ महसूस करने लगता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चा गर्भ में कुछ खास किस्म की आवाज और कुछ फूड टेस्ट को पहचान लेता है। दूसरी तिमाही के आखिरी तक बच्चा सुनना शुरू कर देता है।

 गर्भ में बच्चा कैसे सीखता है?

अनुभव से सीखना

जब बच्चा गर्भ में होता है तो कुछ खास संगीत या किसी चीज की आवाज जैसे कार के इंजन की आवाज आदि उसे याद रह सकती है। पैदा होने के बाद जब वो दोबारा साउंड को सुनता है तो उसे तुरंत पहचान लेता है।

रिपिटेशन से सीखना

इसका सबसे अच्छा उदाहरण है अलार्म। जब बच्चा गर्भ में था तो आप रोज अलार्म लगाकर ही सोती थी और उसकी आवाज सुनकर उठती थी। बच्चे ने रोजाना वो आवाज सुनी और उसे याद हो गया कि इस आवाज को सुनकर हलचल होती है।

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लर्निंग बाय एक्सपीरियंस

गर्भ के दौरान बच्चे के साथ कुछ एक्सपीरिएंस जुड़े होते हैं, जैसे कि आप ने प्रेग्नेंसी के समय में कोई मेलोडियस सॉन्ग सुना और आपको नींद आ गयी। पैदा होने के बाद जब बच्चे को वहीं सॉन्ग सुनाया जाता है तो वो शांति महसूस करता है। हो सकता है कि वो इस आवाज को सुनकर सो भी जाए।

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तो क्या गर्भ में बच्चा सीखता है?

अभी तक इस बात का कोई भी सबूत नहीं मिला है कि गर्भ में बच्चे को किसी खास तरह की चीज सिखाई जा सकती है। आप अपने आस-पास जो भी चीजें करती है, वो बच्चा महसूस करता है और उनसे सीखता है। अगर आप ये चाहे कि उसे कोई पोयम या स्टोरी सिखाएं तो पॉसिबल नहीं है। प्रेग्नेंसी के दौरान आप उससे कुछ बात करेंगी तो वो आपकी आवाज को पहचान लेगा। साथ ही कुछ बातों का रिस्पॉन्स भी मिल सकता है। बाहरी दुनिया की गतिविधियां उसे थोड़ा बहुत जरूर सिखा सकती है।

मां का खानपान बन जाएगा बच्चे की पसंद

इस बात को सुनकर चौंकने की जरूरत नहीं है। रिसर्च में ये बात सामने आई है कि बच्चों को वो चीजें जल्दी पसंद आती हैं, जो उनकी मां ने गर्भावस्था के दौरान ज्यादा खाई थी। अगर आपको अपने बच्चे को वेजीटेबल और फ्रूट लवर बनाना है तो प्रेग्नेंसी के दौरान सब्जियां और फल पर ज्यादा फोकस रखें। गर्भ में शिशु एम्निऑटिक फ्लूड से घिरा होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मां जो भी खाना खाती है, उसका सीधा असर एम्निऑटिक फ्लूड पर भी पड़ता है। बच्चा जो भी पोषण मां के शरीर से ले रहा होता है, वो मां के खाने का अंश ही होता है। ऐसे में मां जो खाती है, गर्भ में शिशु के लिए टेस्ट प्रिफरेंस बन जाता है। पैदा होने के बाद भी बच्चा उसी तरह का खाना पसंद करता है।

मां की आवाज से रिश्ता

गर्भ में बच्चा सिर्फ महसूस ही नहीं करता है बल्कि सीखता भी है। मनोचिकित्सा और बाल रोग सहयोगी प्रोफेसर विलियम फिफर कहते हैं कि, ‘ जब हमने गर्भ में बच्चे की गतिविधियों की जांच की तो पाया कि बच्चा पेट में किसी दूसरे की आवाज सुनकर खास रिस्पॉन्स नहीं दे रहा था, लेकिन जैसे ही उसे मां की आवाज सुनाई गई वो अंगूठा चूसकर रिस्पॉन्स करने लगा।’

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गर्भ में बच्चा देख सकता है सपना

आपने महसूस किया होगा कि कई बार बच्चे सोते समय रोने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे सपना देख रहे होते हैं। गर्भ में शिशु के साथ ही ऐसा होता है। रिसर्च के अनुसार बच्चे गर्भ में अचानक से नींद लेते हैं और जिसे रेम स्लीप (REM sleep) कहते हैं। महिला के गर्भ में बच्चे को रेम स्लीप लेते पाया गया है। इससे ये साबित होता है कि गर्भ में शिशु सपने देख सकता है।

कानों में जाने वाली भाषा

आप ये मत सोचिए कि बच्चा गर्भ में रहकर भाषा भी सीख जाता है। हां ये कह सकते हैं कि आप उससे जिस भाषा में अब तक बात कर रहे थे, वो उसके लिए पहचानी हुई आवाज होती है। एक अध्ययन से पता चलता है कि गर्भ में बच्चे को जो भाषा सुनाई जाती है वो उस भाषा के प्रति अच्छा रिस्पॉन्स देता है, लेकिन भाषा को बदल दिया जाए तो उनका रिस्पॉन्स कुछ खास नहीं होता है। ये इस बात का संकेत देता है कि बच्चा किसी खास लय या धुन को कुछ हद तक सीख लेता है।

गर्भ में बच्चा प्रकाश देखकर रिस्पॉन्स करता है

जब बच्चा तीसरी तिमाही में होता है तो उसकी आंखें बंद रहती हैं। सातवें महीने के बाद बच्चा आखें खोलता है, लेकिन चारों ओर अंधेरा होता है। डॉक्टर्स ने बताया कि जब गर्भ में प्रकाश डाला गया तो फीटस ने लाइट की ओर से नजरें हटा लीं। अल्ट्रासाउंड में भी पाया गया है कि प्रकाश पड़ने पर फीटस आंखें खोलता और बंद करता है।

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गर्भ में बच्चा  मां की गंध को पहचान लेता है

पेट के अंदर बच्चा मां की गंध को महसूस कर सकता है। जब वो पैदा होता है तो मां की गंध से ही उसे नजदीकी का अहसास होता है। डॉक्टर्स भी मां को सलाह देते हैं कि ब्रेस्ट फीडिंग देने के बाद ही बाथ लें। बच्चे मां के नैचुरल एरोमा को पहचान लेते हैं। गर्भ में शिशु मां की आवाज, खाने के टेस्ट के साथ ही उसकी आवाज भी आसानी से पहचान लेता है। रिसर्च में ये बात सामने आई है कि गर्भ में शिशु किसी खास प्रकार के खाने की महक को पहचानने लगता है।

क्या दूसरे देशों में फीटल लर्निंग का अप्रोच है ?

कोरिया

यहां महिलाएं प्रेग्नेंसी के समय टेग्यो (taegyo) का अभ्यास करती हैं। टेग्यो के दौरान महिलाएं या होने वाले माता-पिता विशेष प्रकार का संगीत सुनते हैं। कहानियां पढ़ते हैं और अपने होने वाले बच्चे से बातें भी करते हैं। इन लोगों का मानना है कि इससे होने वाले बच्चे की बुद्धि, प्रतिभा में विकास होता है। साथ ही महिलाएं कोशिश करती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान आस-पास का वातावरण अच्छा रहे। इस दौरान बेहतरीन खाने को शामिल किया जाता है।

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फ्रांस

फ्रांस में हेप्टेनॉमी का अभ्यास किया जाता है। इस दौरान माता-पिता बच्चे के साथ संवाद स्थापित करते हैं और मां बच्चे को मूवमेंट के बारे में बताने की कोशिश करती है। हालांकि इस बात के सुबूत स्पष्ट नहीं है कि इन सब क्रियाओं से बच्चा कितना सीखता है।

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