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शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव क्या होता है, क्या इस समस्या से पाया जा सकता है छुटकारा?

    शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव क्या होता है, क्या इस समस्या से पाया जा सकता है छुटकारा?

    हमारे शरीर में पोषक तत्वों का अहम रोल होता है। अगर शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाए, तो शरीर की गतिविधि या क्रियाविधि में किसी न किसी प्रकार की समस्या पैदा हो जाती है। शरीर में पोटैशियम का अहम रोल होता है। पोटेशियम नर्व इम्पल्स, मेटाबॉलिज्म और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में अहम रोल अदा करता है। शरीर में अधिक मात्रा में पोटैशियम हो जाने पर समस्या होने समस्या होने लगती है। शरीर में अगर अधिक मात्रा में पोटेशियम बनने लगे तो ऐसे में किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और इसका शरीर के विभिन्न भागों पर क्या प्रभाव पड़ता है, आइए जानते हैं इस आर्टिकल के माध्यम से।

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    शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव (The Effects of High Potassium on Your Body)

    हाइपरकेलिमिया (Hyperkalemia) तब होता है, जब आपका शरीर अधिक मात्रा में पोटेशियम को फिल्टर नहीं कर सकता है। अतिरिक्त पोटेशियम आपकी तंत्रिका यानी नर्व और मांसपेशियों की कोशिकाओं में समस्या पैदा करता है। इससे आपके दिल और आपके शरीर के अन्य क्षेत्रों में जटिलताएं हो सकती हैं। इस कारण से हार्ट और शरीर के अन्य एरिया में समस्या पैदा होना शुरू हो जाती है।

    जैसे कि हमने आपको पहले ही बताया कि हमारे शरीर में पोषक तत्वों और खनिजों की बहुत जरूरत होती है लेकिन जब ये अधिक मात्रा में हो जाते हैं, तो उनसे शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचने लगता है। शरीर में पोटेशियम की मात्रा अधिक होने पर किसी प्रकार के लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। डॉक्टर जब आपका ब्लड टेस्ट करते हैं, तो इसके बाद ही शरीर में पोटेशियम की मात्रा का पता चलता है। वहीं कुछ लोगों में इस बीमारी के लक्षण भी दिख सकते हैं। जैसे की हार्टबीट का नियमित ना होना, छाती में दर्द होना, पल्स का कमजोर हो जाना आदि लक्षण दिख सकते हैं। अगर आपको भी यह लक्षण दिखें, तो ऐसे में आपको डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए और टेस्ट कराना चाहिए। आइए जानते हैं कि शरीर में किन अंगों पर हाय पोटैशियम का बुरा प्रभाव पड़ता है।

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    शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव: जानिए क्या दिख सकते हैं लक्षण?

    • शरीर में अधिक पोटेशियम की मात्रा हो जाने पर हार्टबीट नियमित नहीं रहती है। हार्टबीट अधिक तेज से धीमी हो जाती है।
    • छाती में दर्द की समस्या पैदा हो सकती है। अगर आपको छाती में दर्द हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि यह शरीर में अधिक मात्रा में पोटैशियम के लक्षणों में शामिल हो सकता है।
    • अगर आपको सांस लेने में किसी प्रकार की समस्या महसूस हो रही है, तो ऐसे में डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है।
    • शरीर में अधिक मात्रा में पोटेशियम होने के कारण सांस लेने में दिक्कत पैदा हो जाती है, वहीं कुछ लोगों में मूड बदलता रहता है।
    • आपको मसल्स में भी कम कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर आप कोई भी काम करते हैं, तो आपको महसूस होगा कि आपकी मसल्स में ताकत नहीं बची है। ऐसे में डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
    • कभी-कभी हाथ पैर आदि का सुन्न पड़ जाना भी शरीर में अधिक मात्रा में पोटेशियम के लक्षण में शामिल हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को महसूस होता है कि उसके हाथ और पैरों में हमेशा झनझनाहट होती रहती है।
    • वहीं कुछ लोगों में हाय पोटेशियम के कारण वह वॉमिटिंग की समस्या, डायरिया या फिर मितली की समस्या हो जाती है। ऐसा सभी लोगों को महसूस हो, यह जरूरी नहीं है।
    • अगर आपको पहले से कोई किडनी कंडीशन है, तो आप हो हाय पोटेशियम की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।
    • पोटैशियम की अधिकता के कारण पल्स धीमी पड़ जाती है। जिन लोगों मे पोटैशियम की अधिकता होती है, उनमें कार्डियोवस्कुलर सिस्टम में परेशानी पैदा हो सकती है।

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    शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव: कार्डिवस्कुलर सिस्टम (Cardiovascular system) में क्या पड़ता है असर?

    अधिक पोटैशियम के कारण हार्ट कंडीशन की स्थित पैदा होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसे एरिथमिया (Arrhythmia) के नाम से जाना जाता है। इसे अनियमित हार्टबीट (Irregular heartbeat) के नाम से जाना जाता है। इस कारण से धड़कन बहुत तेज या फिर धीमी या एक लय में नहीं रहती है।
    एरिथमिया इसलिए होती है क्योंकि पोटेशियम मायोकार्डियम में कार्य करने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल का अभिन्न अंग है। मायोकार्डियम (Myocardium) हार्ट में मांसपेशियों की मोटी परत होती है। इसके अलावा हाय पोटैशियम के कुछ लक्षण आपके हार्ट सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। जानिए ऐसे में क्या लक्षण दिख सकते है।

    ध्यान रखें कि हार्ट डिजीज के लिए आप जो दवाएं ले रहे हैं, वे हाय पोटैशियम में योगदान कर सकती हैं। अगर आप बीटा-ब्लॉकर्स, एसीई इनहिबिटर्स, या डाययूरेटिक्स ले ले रहे हैं, तो ये दवाएं हाइपरक्लेमिया का कारण बन सकती हैं।

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    शरीर में हाय पोटैशियम की मात्रा के कारण किडनी की बीमारी से भी संबंधित हो सकता है। जिन लोगों को किडनी संबंधित बीमारी होती है या फिर किडनी फेलियर की समस्या हो गई होती है, उनमें पोटेशियम का लेवल बिगड़ जाता है। हमारे शरीर में पोटैशियम का अवशोषण कुछ सप्लीमेंट, फूड, डिंक्स आदि के माध्यम से होता है। शरीर में अगर पोटैशियम अधिक हो जाता है, तो किडनी के माध्यम से यूरिन के रूप में बाहर निकाल दिया जाता है लेकिन जब किडनी काम नहीं करती है, तो शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढ़ने लगती है। अगर यह कहा जाए कि जिन लोगों को किडनी की समस्या हो जाती है, उनके शरीर में धीरे-धीरे पोटैशिम बढ़ने लगता है, तो यह गलत नहीं होगा।

    शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव न पड़े, इसके लिए आपको कुछ प्रयास करने की जरूर है। अगर आपके शरीर में पोटेशियम की मात्रा अधिक हो गई है, तो ऐसे में आपको अपने फूड्स में ऐसे पदार्थों को शामिल नहीं करना चाहिए, जिनमें पोटेशियम अधिक मात्रा में होता है। हरी पत्तेदार सब्जियां या फिर खट्टे फल बेहतर होगा कि आप कम मात्रा में खाएं या फिर बिल्कुल बंद कर दें। आप इस बारे में डॉक्टर से भी जानकारी ले सकते हैं। और साथ ही खाने में कम पोटेशियम आहार में शामिल कर सकते हैं। पोटैशियम को कम करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ मेडिसिंस भी दे सकते हैं। अगर आपको किसी प्रकार की कंडीशन का सामना करना पड़ रहा है, तो बेहतर होगा कि उसका भी ट्रीटमेंट कराएं ताकि आपको हाय पोटैशियम की समस्या का सामना ना करना पड़े।

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    इस आर्टिकल में हमने आपको शरीर में हाय पोटैशियम का प्रभाव से संबंधित अहम जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की ओर से दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/04/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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