बे ट्री (bay tree) की पत्तियों को तेज पत्ता के नाम से भी जाना जाता है। इन पत्तियों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों और तेल का प्रयोग कई दवाइयों में किया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Laurus nobilis है। बहुत सारी दूसरी पत्तियां दिखने और खुशबू में बिल्कुल तेजपत्ते जैसी होती हैं, लेकिन इनमें न्यूट्रिएंट्स बराबर नहीं होते हैं। एरोमाथेरेपी और कई हर्बल ट्रीटमेंट्स में भी स्किन और श्वसन संबंधित परेशानियों के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

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फाइटोथेरैपी रिसर्च जर्नल (Phytotherapy research journal) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, बे-लीफ में एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज होती हैं जो, पूरे शरीर में सूजन को कम करने की क्षमता रखती है। इसमें अलग फाइटोन्यूट्रिएंटस होते हैं जिसे पार्थेनोलाइड (parthenolide) कहा जाता है, ये सूजन और जलन को कम करने में मदद करता है। इसके लिए बस इसे प्रभावित क्षेत्रों में लगाना होता है, जैसे गले में दर्द या गठिया से प्रभावित क्षेत्र पर इसे लगा सकते हैं।
तेज पत्ता हमारे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें पाए जाने वाले कार्बनिक यौगिक इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), पेट की खराबी और प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण होने वाले रोगों के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ये हमारे शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालते हैं और पाचन को बढ़ावा देने का काम करते हैं। अगर आपको पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं तो आप तेज पत्ते का इस्तेमाल चाय में कर सकते हैं। तेज पत्ते की चाय पीने से कब्ज, एसिडिटी और पेट में मरोड़ जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
रात को सोने से पहले तेज पत्ते के तेल की कुछ बूंदों को पानी में मिलाकर पीएं। इससे आपको अच्छी नींद आएगी और अनिद्रा जैसी समस्याओं से राहत भी मिलेगी।
तेज पत्ता किडनी से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करने में मददगार होता है। किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं के लिए आप तेज पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। तेज पत्ते को पानी में उबालें। फिर उस पानी को छानकर ठंडा करें और पी जाएं।
बदन दर्द या शरीर के किसी भी अंग में दर्द की समस्या रहती है, तो तेज पत्ता इसे दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। दर्द में राहत पाने के लिए प्रभावित जगह पर तेज पत्ता के तेल से मसाज करें। इसके अलावा अगर तेज सिर दर्द हो रहा हो तो भी इसके तेल से सिर में मसाज करना फायदेमंद होता है।
तेज पत्ते में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इससे निकाले गए ऑयल को छाती पर लगाने से श्वसन संबंधित परेशानियों में आराम पहुंचता है। एरोमाथेरेपी में भी भाप के जरिए इसे दिया जाता है जो रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट से बैक्टीरिया संक्रमण को बाहर निकालने में मदद करता है।
कई अध्ययन बताते हैं कि तेज पत्ता डायबिटीज टाइप 2 के पेशेंट्स के लिए अच्छा होता है। शोध में पाया गया कि तेज पत्ता कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। इसके अलावा ये एचडीएल यानी गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। शुगर लेवल को कम करने के अलावा ये दिल को स्वस्थ रखने के लिए भी अच्छा है।
तेजपत्ते में लिनालूल (linalool) नामक तत्व होते हैं जो स्ट्रेस हॉर्मोन लेवल को कम करता है। एरोमाथेरेपी में स्ट्रेस के ट्रीटमेंट के लिए खासतौर पर इसका प्रयोग किया जाता है।
एंटी-फंगल गुणों से भरपूर तेज पत्ता जो खासतौर पर कैंडिडा संक्रमण के खिलाफ प्रभावी है। इसके अलावा त्वचा संबंधित फंगल इंफेक्शन को दूर करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
तेज पत्ते में विटामिन-सी और विटामिन-ए होते हैं जो घाव को भरने का काम करते हैं। एक शोध के मुताबिक, अगर आपके शरीर में विटामिन-सी और विटामिन-ए की कमी है तो ऐसे में घाव संवेदनशील हो सकते हैं।
तेज पत्ता विटामिन-सी से समृद्ध होता है जो शरीर से अत्यधिक चर्बी को हटाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर वजन को कंट्रोल में रखने में मदद करता है।
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औषधीय गुणों से भरपूर तेज पत्ता अच्छी सेहत के लिए वरदान समान है। इसमें प्रमुख लवण जैसे पोटैशियम, कॉपर, सेलेनियम, कैल्शियम और आयरन पाए जाते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट गुण शरीर के इंसुलिन को स्वस्थ बनाए रखते हैं। कई अध्ययन में इस बात की पुष्टी हो चुकी है कि तेजपत्ते में कुछ ऐसे रसायन होते हैं जो निम्नलिखित बीमारियों से लड़ने में सक्षम होते हैं जैसे गैस्ट्रिक अल्सर, ग्लूकोज की क्रियाओं को उत्तेजित और कम करना, बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन|
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अगर आपको कोई बीमारी है या वतर्मान में दवाइयां खा रहे हैं तो उनके असर पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सेवन से पहले डॉक्टर से इस विषय पर बात करें।
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तेजपत्ते से आपको निम्नलिखित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:
हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं की हर व्यक्ति को इसके दुष्प्रभावों का सामना करना पड़े। यह एक सुरक्षित जड़ी बूटी मानी जाती है जिसे बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा अगर आप किसी दवा या अन्य जड़ी बूटी का उपयोग कर रहे हैं तो दुष्प्रभावों की आशंका बढ़ सकती है।
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इस हर्बल सप्लिमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और अन्य कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लीमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।
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डिस्क्लेमर
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Current Version
07/07/2020
Mona narang द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Shruthi Shridhar
Updated by: Manjari Khare
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr. Shruthi Shridhar