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गाउट के ट्रीटमेंट के लिए होम्योपैथिक मेडिसिन दिखाती हैं अपना असर

गाउट के ट्रीटमेंट के लिए होम्योपैथिक मेडिसिन दिखाती हैं अपना असर

गाउट (Gout) की समस्या जोडों से जुड़ी हुई है। जोड़ों में सूजन के साथ ही तेज दर्द का सामना गाउट की समस्या के दौरान करना पड़ता है। गाउट की समस्या पैरों में होती है और ये घुटने, टखने को प्रभावित करती है। कुछ लोगों में गाउट के लक्षण रिस्ट यानी कलाई या कोहनी में भी देखने को मिलते हैं। गाउट यानी गठिया की समस्या उम्र बढ़ने के साथ ही कॉमन हो जाती है। यानी गठिया की समस्या का सामना किसी को भी करना पड़ सकता है। जोड़ों (ज्वाइंट्स) में स्वैलिंग के कारण व्यक्ति को चलने फिरने में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। वैसे तो ये बीमारी किसी भी उम्र में व्यक्ति को हो सकती है लेकिन पुरुषों में इस बीमारी के लक्षण अधिक दिखाई पड़ते हैं। जब ब्लड में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है, तो गठिया की समस्या जन्म लेती है। जोड़ों में सूजन, जोड़ों के आसपास जलन आदि इस बीमारी के लक्षण के रूप में दिखाई पड़ते हैं। गाउट का परमानेंट ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं है लेकिन ऑल्टरनेटिव ट्रीटमेंट इस बीमारी में राहत पहुंचा सकते हैं। जानिए गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन के बारे में, जो इस बीमारी को दूर करने में मदद कर सकती हैं।

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जानिए गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन के बारे में (Homeopathic medicine for gout)

गाउट

जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं कि गाउट यानी गठिया का कोई परमानेंट ट्रीटमेंट नहीं है लेकिन गाउट के लक्षणों को कुछ दवाओं की सहायता से कम किया जा सकता है। गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन ज्वाइंट्स के दर्द से राहत दिलाने का काम करती हैं। यहां हम आपको कुछ होम्योपैथिक मेडिसिंस के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो आपकी मदद कर सकती हैं। बेहतर होगा कि होम्योपैथिक एक्सपर्ट से जानकारी लेने के बाद ही दवा का सेवन करें।

बेंजोइक एसिड (Benzoic acid)

बेंजोइक एसिड का इस्तेमला गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन (Homeopathic medicine for gout) के रूप में किया जाता है। ये दवा विशेष रूप से घुटने या पैर के अंगूठे के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस दवा का इस्तेमाल करने से जोड़ में फटने का एहसास, गठिया के कारण पैरों में कठोरता, सूजन आदि को दूर करने के लिए किया जाता है। आप डॉक्टर से परामर्श के बाद इस दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन: अर्निका (Arnica)

यह दवा गाउट के साथ होने वाली कुछ परेशानियों को कम करने में मदद करती है। गाउट के कारण ज्वाइंट्स में होने वाले दर्द को कम करने में ये दवा इस्तेमाल की जाती है। दर्द के कारण व्यक्ति संपर्क करने या छूने से डर सकता है। गाउट के कारण व्यक्ति को पैर को उस हिस्से को छूने में डर लगता है, जहां दर्द हो रहा हो। ऐसे में अर्निका का इस्तेमाल दर्द से राहत दिलाने का का करता है।

कैल्केरिया फ्लोरिका (Calcarea fluorica)

गाउट के कारण फिंगर ज्वाइंट्स बढ़ जाते हैं। इसमें घुटने और पैर की उंगलिया भी शामिल हो सकती है। ऐसे में जब भी व्यक्ति काम करता है, तो जोड़ों से आवाज आती है और साथ ही दर्द का एहसास भी होता है। मौसम बदलने पर समस्या भी बढ़ जाती है। ऐसे में कैल्केरिया फ्लोरिका (Calcarea fluorica) का इस्तेमाल करने से राहत मिल सकती है। बेहतर होगा कि आप एक्सपर्ट से इस बारे में जानकारी लें।

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गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन: रोडोडेंड्रोन (Rhododendron)

गाउट के कारण पैरों और हाथों में पैदा हुई सूजन को कम करने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है। सूजन की समस्या कम से अधिक भी हो सकती है, जो कई परेशानियों का कारण बन सकती है। अक्सर लोगों को सुबह के समय ज्वाइंट्स में दर्द और सूजन अधिक महसूस होती है। ऐसे में रोडोडेंड्रोन (Rhododendron) अपना असर दिखाती है। आप डॉक्टर से इस दवा के बारे में पूछ सकते हैं।

लाइकोपोडियम (Lycopodium)

जिन लोगों को गठिया या गाउट की समस्या लंबे समय से होती है, उनके लिए लाइकोपोडिम मेडिसिन का इस्तेमाल बेहतर रहता है। चलने में एड़ी में दर्द के साथ ही चुभन का एहसास भी होता है। इस कारण से कमर में भी दर्द शुरू हो जाता है। डॉक्टर आपसे बीमारी के लक्षणों को पूछकर इस दवा को लेने की सलाह दे सकते हैं।

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अर्टिका यूरेन्स (Urtica urens)

गठिया की समस्या यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होती है। इसकी ब्लड में मात्रा को कम या फिर खत्म करना जरूरी होता है। यूरिक एसिड के लेवल को कम करने के लिए अर्टिका यूरेन्स का इस्तेमाल किया जाता है। जिन लोगों को गठिया के कारण कंधे के साथ ही कलाई और घुटनों में ठंड आने पर अधिक समस्या होती है, उनके लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है।

गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन लेने के साथ ही इन बातों का रखें ध्यान

आपको दवाओं का इस्तेमाल करने के साथ ही अपनी डायट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत है। आपको खाने में कैफीन के साथ ही गोभी, सूखी बींस, पालक, यीस्ट प्रोडक्ट आदि के सेवन को सीमित करना होगा। साथ ही खाने में प्यूरीन को भी कम मात्रा में लें। आपको समुद्री फूड्स जैसे कि केकड़ा, झींगा और श्रिम्प के साथ ही टूना, ट्राउट और हेरिंग जैसे मछलियों के सेवन से भी दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि इनका सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है। शरीर में किन चीजों के सेवन से यूरिक एसिड बढ़ता है, आपको इसकी जानकारी जरूर होनी चाहिए।

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आपको खाने में ब्लूबेरीज, चेरीज और स्ट्राबेरीज को शामिल करना चाहिए क्योंकि ये आपके शरीर में यूरिक एसिड को कम करने का काम करते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं। आपको खाने में चावल, बाजरा, स्टार्च वाली सब्जियां, हरी सब्जियां, मक्का, कॉर्नब्रेड, फल, अंडे, नट्स और हर्बल चाय आदि को शामिल करना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से व्यायम करें और पानी का पर्याप्त मात्रा में सेवन करे। पानी का सही मात्रा में सेवन करने से शरीर के कई विषैले तत्व शरीर के बाहर निकल जाते हैं। आपको एल्कोहॉल के साथ ही स्मोकिंग से दूरी बना लेनी चाहिए। आप डॉक्टर की सलाह से कुछ सप्लिमेंट्स भी ले सकते हैं।

गाउट एक गंभीर रोग है। गाउट के लक्षण दिखते ही आपको डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।ऐसा करने से आपको गाउट का ट्रीटमेंट लेने में मदद मिलेगी। अगर आप घरेलू उपचार कर रहे हैं और आपको फायदा नहीं पहुंच रहा है, तो डॉक्टर को इस बारे में जरूर बताएं। कई बार स्थितियां गंभीर होने लगती हैं। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको गाउट की होम्योपैथिक मेडिसिन (Homeopathic medicine for gout) के संबंध में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/05/2021 को
डॉ. स्नेहल सिंह के द्वारा मेडिकली रिव्यूड