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Posterior cruciate ligament (PCL) injury: पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी क्या है?

परिभाषा |कारण|लक्षण|निदान|उपचार
Posterior cruciate ligament (PCL) injury: पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी क्या है?

परिभाषा

घुटने की हड्डियां आपस में लिगामेंट के जरिए ही जुड़ी होती है। यदि कभी किसी कारण ने इन लिगामेंट्स में से किसी एक को भी नुकसान पहुंचता है, तो आपको पैर में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में दिक्कत होती है। इन्हीं लिगामेंट में से एक है पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट। पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी यानी इसमें चोट लगने पर क्या होता है और इसका उपचार कैसे किया जा सकता है जानिए इस आर्टिकल में।

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी क्या है?

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट घुटने के पीछे होते हैं और यह आपके शिनबोन और थाईबोन्स को कनेक्ट करता है। यह शिनबोन को बहुत पीछे की ओर मुड़ने में मदद करता है यानी उसे फ्लेक्सिबल बनाता है। लिगामेंट्स एक रस्सी तरह काम करता है। आपके घुटने में कुल 4 लिगामेंट्स होते हैं तो घुटने की हड्डियों को आपस में जोड़कर रखता है। पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी तब होती है जब घुटने पर बहुत जोर से चोट लगती है या एक्सीडेंट में इस पर अधिक दबाव पड़ता है। पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट से मजबूत होता है और इसमें कम ही चोट लगती है। लेकिन आप कभी यदि घुटनों के बल गिरते हैं या दुर्घटना में पैरों पर ही अधिक दबाव पड़ता है तो पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी का खतरा बढ़ जाता है।

और पढ़ें- कंधे की अकड़न क्या है?

कारण

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी के क्या कारण है?

घुटने के जोड़ में चोट लगने से पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट को नुकसान पहुंच सकता है या किसी खेल के दौरान यदि घुटनों पर अधिक जोड़ या खिंचाव पड़ता है तो पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट को चोट पहुंच सकती है, साथ ही दूसरे लिगामेंट्स को भी क्षति पहुंच सकती है। चोट के कारणों में शामिल हैः

गाड़ी से एक्सीडेंट- एक्सीडेंट के दौरान यदि आपके घुटने मुड़ जाते हैं और आप आगे डैशबोर्ड की तरफ फोर्सफुली जाते हैं तो आपके शिनबोन अंदर की तरफ धकेल दिए जाते हैं जिससे पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी हो सकती है।

कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स- एथलेटिक स्पोर्ट्स जैसे फुटबॉल या सॉकर आदि खेलने के बाद घुटनों के बल गिरने पर इस पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी हो सकती है। इस स्थिति में शिनबोन नीचे जमीन पर टकराता है और पीछे खिसक जाता है। घुटने को मोड़ते समय झटका लगने पर भी पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी हो सकती है।

और पढ़ें- Bacillus Coagulans : बैसिलस कॉग्यूलंस क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

लक्षण

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी के लक्षण हैं?

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी के लक्षण सामान्य से गंभीर हो सकता हैं या चोट की गहराई पर निर्भर करता है। यदि लिगामेंट में हल्की मोच है तो कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। लेकिन इसके आंशिक या पूरी तरह से टूटने पर दिखने वाले सामान्य लक्षणों में शामिल है-

  • घुटने में कोमलता महसूस होना (खासतौर पर पीछे की तरफ)
  • घुटने के जोड़ में अस्थिरता
  • चोट लगने के कुछ ही घंटों के अंदर घुटने में सूजन
  • जोड़ों का सख्त होना
  • दर्द और सूजन की वजह से चलने में परेशानी

यदि चोट सिर्फ पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट में लगी है और घुटने के अन्य हिस्सों में किसी तरह की चोट नहीं लगी है, तो आपको पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी के कोई लक्षण नहीं दिखाई देंगे, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ स्थिति गंभीर होती जाएगी। आपको दर्द महसूस होने के साथ ही घुटने में अस्थिरता महसूस होगी या आप उसे स्टेबल नहीं रख पाएंगे।

निदान

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी का निदान क्या है?

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी को डायग्नोस करने के लिए डॉक्टर पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री पूछेगा, जैसे कि जब चोट लगी उस समय आप क्या कर रहे थे, जैसे कार से कहीं जा रहे थे या कोई स्पोर्ट्स खेल रहे थे। डॉक्टर कुछ अन्य सवाल भी पूछेगाः

  • चोट लगने के समय आपका घुटना सीधा, मुड़ा हुआ या ट्विस्टेड था?
  • चोट के बाद आपको घुटने में कैसा महसूस हुआ?
  • चोट के बाद से क्या किसी तरह के लक्षण दिखें?

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी के निदान के लिए शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है। डॉक्टर आपको पीठ के बल घुटनों को मोड़कर लेटने के लिए कहता है। वह आपके घुटनों की जांच करता है ऊपरी शिन को दबाता है। इस टेस्ट के दौरान यदि घुटनों की गतिविधि असामान्य होती है तो इसका मतलब है कि पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी हुई है। इसके अलावा आर्थोमीटर नाकर एक उपकरण से भी जांच की जा सकती है। यह लिगामेंट कितना टाइट है इसको जांचता है।

डॉक्टर को चलने के लिए कहता है, यदि आप ठीक से नहीं चल पा रहे हैं तो यह पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी का संकेत हो सकता है।

इसके अलावा घुटने में मौजूद तरल पदार्थ की जांच, एक्स-रे और MRI के जरिए भी पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी को डायग्नोस किया जाता है।

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी से बचाव क्या है?

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी से पूरी तरह से तो नहीं बचा जा सकता, क्योंकि यह एक्सीडेंट का परिणाम होता है। हालांकि कुछ एहतियाती कदम उठाकर इसकी संभावना को कम जरूर किया जा सकता है:

  • ऊपरी और निचले पैरों की मसल्स को मजबूत बनाने से जोड़ स्थिर रहते हैं
  • खेलते समय सही उपकरण का इस्तेमाल
  • कोई भी फिजिकल एक्टिविटी सही तरीके से करना चाहे एक्सरसाइज हो, रनिंग या वॉकिंग
  • जोड़ों को फ्लेक्सिबल बनाए रखने के लिए रोजाना स्ट्रेचिंग करें

और पढ़ें- बिना सर्जरी के फिशर ट्रीटमेंट कैसे होता है?

उपचार

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी का उपचार क्या है?

घर पर उपचार- यदि पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी सामान्य है तो घर पर PRICE मेथड से उपचार किया जा सकता है इसमें शामिल है:

प्रोटेक्टशन- घुटने को और चोट लगने से बचाना

रेस्ट– घुटने को आराम देना

आइसिंग- आइसपैक से घुटने की सिंकाई

कंप्रेसिंग– घुटने को हल्का कंप्रेशन देना जैते इलास्टिक बैंडेज

इलेवेटिंग– घुटने को ऊपर उठाना

यदि दर्द है तो आप ओवर द काउंटर पेन किलर ले सकते हैं।

अन्य उपचार

यदि घरेलू उपचार से मदद नहीं मिले तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर इलाज किस तरीके से करेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि चोट कितनी गंभीर है। उपचार के तरीकों में शामिल हैः

थेरिपी- फिजिकल थेरिपिस्ट आपको एक्सरसाइज की खास तकनीक बताएगा जिससे आपके घटुने मजबूतो होंगे। उसका काम और स्थिरता में भी सुधार होगा। आपको घुटने के ब्रेस या बैशाखी की भी जरूरत पड़ सकती है।

सर्जरी- यदि आपकी चोट गंभीर है, खासतौर पर यदि पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट के साथ अन्य लिगामेंट, कार्टिलेज या हड्डी टूट गई है तो आपको लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा यदि फिजियोथेरेपी के बाद भी आपका घुटना स्थिर नहीं हो पा रहा है तो सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Kanchan Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/05/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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