43 सप्ताह के शिशु की देखभाल के लिए मुझे किन जानकारियों की आवश्यकता है?

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अपडेट डेट May 21, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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विकास और व्यवहार

43 सप्ताह के शिशु का विकास ​कैसा होना चाहिए ?

43 सप्ताह के शिशु में आपको कई तरह के विकास देखने को मिलेंगे। वे अब आपका हाथ पकड़कर चलने लगा होगा। जब आप उसे कपड़े पहनाती हैं, तब वे आपका हाथ भी पकड़ने की कोशिश करता होगा। इस चरण में, कुछ बच्चे पानी का कप या दूध की बॉटल पकड़कर खुद से पीने में सक्षम हो जाते हैं। लेकिन, कुछ बच्चों को इसमें समय लगता है। जिसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है।

दसवें महीने के तीसरे सप्ताह में (43 सप्ताह के शिशु), आपका बच्चा इन चीजों को करने में सक्षम हो जाता है,

  • कुछ देर के लिए बिना किसी सहारे के खड़ा हो सकता है,
  •  दा—दा और मां जैसे शब्दों को बोलने की कोशिश करता है
  •  अगर उसे कोई सामान चाहिए तो वे इशारों में आपको बता सकता है

43 सप्ताह के शिशु के विकास के लिए मुझे  क्या करना चाहिए?

जैसा कि बच्चे शरारती होते हैं, तो वे इस चरण में कुछ—कुछ शरारतें शुरू कर देते हैं। वे आपके साथ खेलने के लिए और आपका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कई बार जानबूझकर के भी आपके सामने सामान गिराते हैं, ताकि आप उसे उठाकर सामान दें। इस तरह से उसे खेलने में मजा आता है। अगर आप उसके साथ खेलकर थक गए हैं, तो कुछ मिनट के बाद आप उसके साथ हाइड एंड सीक जैसे दूसरे गेम्स खेल सकते हैं। इससे पहले वाले खेल से उसका ध्यान हटेगा।

स्वास्थ्य और सुरक्षा

मुझे  डॉक्टर से क्या बात करनी चाहिए?

43 सप्ताह के शिशु को डॉक्टर किसी चेकअप के लिए नहीं बुलाते हैं, अगर 43 सप्ताह के शिशु को स्वास्थ्य संबंधित कोई समस्या हो रही है, तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसलिए पेरेंट्स को 43 सप्ताह के शिशु के शरीर में होने वाले किसी भी नकारात्मक बदलाव को सझते हैं, तो घरेलू इलाज से बचना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से करना चाहिए।

मुझे किन बातों की जानकारी होनी चाहिए?

इस समय,आपका शिशु सर्दी या फ्लू के कारण बीमार हो सकता है, इसलिए आपको कुछ एंटी—बायोटिक्स के बारे में जानना जरूरी है,

एंटी—बायोटिक्स के बारे में आपको क्या पता होना चाहिए ?

जुकाम, फ्लू और कई श्वसन संबंधी बीमारियां बैक्टीरिया के कारण होती हैं और एंटी—बायोटिक्स उस वायरस से लड़ने का काम करते हैं। लेकिन, इसके कुछ साइड इफैक्ट्स भी होते हैं। इसलिए बीमार पड़ने पर बच्चे को एंटी—बायोटिक्स ऐसे ही नहीं दे देना चाहिए, इसकी अधिक जरूरत पड़ने पर ही इसे दें। इसे देते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जैसे कि

 बच्चे को एंटी—बायोटिक्स कब देनी चाहिए?

बच्चे को एंटी—बायोटिक्स हमेशा किसी डॉक्टर के द्वारा परामर्श करने पर ही देना चाहिए। इसके अलावा, डॉक्टर बच्चे के लिए जो एंटी—बायोटिक्स निर्धारित करता है, बच्चों को उसका पूरा कोर्स देना चाहिए, चाहें आपके बच्चे का स्वास्थ्य ठीक हो गया हो, लेकिन दवा की खुराक पूरी देनी चाहिए।कोर्स पूरा न होने पर और एंटी—बायोटिक्स को डोज न होने पर बच्चे को कोई दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

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बच्चों को एंटी—बायोटिक्स आसानी से कैसे देनी चाहिए?

बच्चे को एंटीबायोटिक्स देने के पहले कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, यदि बच्चे को एंटी—बायोटिक्स देने के बाद तुरंत ही उल्टी हो जाती है या कुछ देर बाद उल्टी कर देता है, तो उसे दूसरी डोज न दें, क्योंकि एंटीबायोटिक शरीर में अब्सॉर्ब हो जाती है। एंटी—बायोटिक की ओवरडोज से बच्चे को साइड इफेक्ट हो सकता है। कुछ दवाइयों को खाने के साथ मिलाया जा सकता है कि जैसे एप्पल सॉस के ​साथ ताकि दवा का स्वाद पता न चले।

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महत्वपूर्ण बातें

मुझे किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

43 सप्ताह के शिशु का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

दांत पीसना:

सिर पीटना या लुढ़कना, बाल खींचना, अंगूठा चूसना और दांत पीसने जैसा व्यवहार अक्सर बच्चे अपना तनाव और गुस्सा दिखाने के लिए करते हैं। दांत पीसना दूध के दांतों और स्थायी दांतों के विकास को प्रभावित कर सकता है। इसके दो कारण हैं: तनाव और जिज्ञासा।

  • सोने से पहले बच्चे प्यार करने से भी दांत पीसने की आदत बच्चों में कम हो जाती है। ज्यादातर मामलों में, जैसे—जैसे बच्चे में कोई नई कला और आदत आती है, तो बच्चा दांत पीसना बंद कर देता है।
  • दांतों को पीसने के कारण हर समय तनाव नहीं होता कभी कभी बच्चा अपने नए दांतों का अनुभव करने के लिए खुद ही ऐसा करना सीख जाता है,और फिर उन्हें इस क्रिया से होने वाले संसेशन से जो आवाज आती है, उससे उन्हें मजा आता है।
  • अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे की आदत कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है तो आप डेंटिस्ट से मिलें।

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दांत से काटना:

छोटे बच्चों में दांतों से काटने की आदत और हर तरह की चीजों को काटकर अनुभव करने की आदत अच्छी नहीं होती है। धीरे—धीरे वे आपको या​ किसी और को भी काटना शुरू कर देते हैं।
जब बच्चा किसी को काटता है तो उन्हें पता नहीं होता है कि उनके काटने से किसी को कोई दर्द या परेशानी हो सकती है। यदि उन्हें उसी समय इसके लिए रोका न जाए तो बच्चों में यह आदत पड़ जाती है और बाद में मना करने पर भी नहीं छूटती है। इसलिए जब भी बच्चा किसी को काटे, तो उसे तुरंत मना करें इसके लिए। उन्हें समझाएं ये गंदी आदत है।

43 सप्ताह के शिशु खाने-पीने का विशेष ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि 43 सप्ताह के शिशु को या बढ़ते बच्चों के लिए उनके आहार का ख्याल रखना चाहिए। बच्चों को गाय का दूध अवश्य पिलायें। अगर आपका 43 सप्ताह के शिशु है और वह दूध पीना नहीं चाहता है, तो उसे कैल्शियम की कमी हो सकती है। कैल्शियम की कमी का शरीर के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए कोशिश करें उसे दूध पिलाने की अगर फिर भी 43 सप्ताह के शिशु दूध पीना से मना कर दें तो ऐसे में अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को खिलाएं।

अगर आप 43 सप्ताह के शिशु से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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