प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी से क्या खतरा हो सकता है?

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Update Date मई 26, 2020 . 4 mins read
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गर्भावस्था में जिस तरह से हमें अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही कैल्शियम भी बहुत जरूरी है। प्रेग्नेंसी के दौरान कैल्शियम की कमी नहीं होनी चाहिए। कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी है। प्रेग्नेंसी के दौरान कैल्शियम की ली गई सही मात्रा होने वाले बच्चे की हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। तीसरी तिमाही के दौरान हड्डी अवशोषण दर में वृद्दि हो जाती है। कैल्शियम की ली गई सही मात्रा हड्डी खनिज घनत्व की कमी को कम करती है। प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी के कारण होने वाली मां को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी से होने वाली समस्या की जानकारी और कैल्शियम रिच फूड की जानकारी के लिए ये आर्टिकल पढ़ें।

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प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी से हो सकती है ये समस्या

जब मां बच्चे को जन्म देती है तो मां के स्तनों से दूध प्रवाह होता है। ब्रेस्ट का दूध बनने में कैल्शियम का बड़ा योगदान होता है। ऐसा कहना गलत होगा कि महिलाओं के शरीर का विकास हो चुका होता है इसलिए उन्हें कैल्शियम की जरूरत नहीं है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाओं में कैल्शियम की कमी हो सकती है। आपको सुन कर हैरानी होगी कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान कैल्शियम की सही मात्रा नहीं लेती हैं, ब्रेस्टफीडिंग के दौरान उनकी हड्डियों से कैल्शियम अवशोषित होता है।

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बच्चे के विकास के लिए प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी नहीं होनी चाहिए

पेट में शिशु के विकास के लिए भी कैल्शियम बहुत जरूरी होता है। डॉक्टर भी प्रेग्नेंट महिलाओं की जांच कर कैल्शियम की उचित मात्रा लेने की सलाह देते हैं। आप चाहे तो कैल्शियम की कमी होने पर अपनी डायट में सुधार कर इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी न हो इसके लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • नॉन प्रेग्नेंट लेडी को 500 मिलीग्राम पर डे कैल्शियम की जरूरत होती है जबकि प्रेग्नेंट लेडी को दोगुनी कैल्शियम यानी 1000 मिलीग्राम पर डे की आवश्यकता होती है।
  • प्रेग्नेंसी के सेकेंड हाफ में कैल्शियम की जरूरत अधिक बढ़ जाती है क्योंकि अब बच्चे को भी कैल्शियम की आवश्यकता होती है।
  • प्रेग्नेंट मां कैल्शियम नहीं लेगी तो बच्चे तक तो कैल्शियम पहुंच जाएगा लेकिन मां के अंदर कैल्शियम की कमी हो जाएगी।
  • बोन्स की बेसिक यूनिट कैल्शियम होती हैं, प्रेग्नेंसी के दौरान महिला कैल्शियम नहीं लेती है तो मां के शरीर का सारा कैल्शियम बच्चे में चला जाता है।
  • लड़कियों को कैल्शियम की सही मात्रा लेनी चाहिए। कैल्शियम की ली गई सही मात्रा जब लड़की मां बनती है, तब काम आती है।
  •  जब प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी हो जाती है तो महिलाओं में कमजोरी आ जाती है। महिलाएं थका हुआ महसूस करती हैं।
  • हार्ट की मसल्स को कॉन्ट्रेक्ट करने में भी कैल्शियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • ब्लीडिंग को रोकने में कैल्शियम का अहम रोल होता है। कैल्शियम की कमी के कारण ब्लड कैल्शियम को मेंटेंन करने के लिए बोन से कैल्शियम निकालता रहता है जो कमजोरी का कारण बन सकता है। कमी से महिलाओं की कमर और शरीर में दर्द हो सकता है।

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बॉडी के लिए कितना कैल्शियम है जरूरी

महिलाओं में

  • यंगर और 50 साल तक की महिलाओं के लिए – 1,000 एमजी (रोजाना)
  • 51 साल और अधिक उम्र के लिए – 1,200 एमजी (रोजाना)

मुझे कितना कैल्शियम मिल रहा है?

खाने के दौरान आप कितना कैल्शियम ले रहे हैं या फिर कितना कैल्शियम आपके शरीर में जा रहा है , ये जानना बहुत जरूरी है। किसी भी फूड को लेते वक्त उसकी डेली वेल्यू (DV) जरूर जांच लें। फूड लेवल में कैल्शियम परसेंटेज DV के रूप में दिया रहता है। यह प्रति दिन 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम पर आधारित होता है।

  • कैल्शियम का 30% DV 300 मिलीग्राम कैल्शियम के बराबर होता है।
  • कैल्शियम का 20% DV 200 मिलीग्राम कैल्शियम के बराबर होता है।
  • कैल्शियम का 15% DV 150 मिलीग्राम कैल्शियम के बराबर होता है।

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प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी को दूर करें ऐसे

प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए डायट में कुछ फूड्स को शामिल करना जरूरी है। प्रेग्नेंसी के दौरान डायट में दूध को जरूर शामिल करें। दूध में कैल्शिमम की उचित मात्रा पाई जाती है। प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए कुछ फूड जैसे फोर्टिफाइड सोया, बादाम, हेजलनटनारियल से बने हुए फूड और दूध से बनी डिश को शामिल किया जा सकता है। अगर आपको दूध पीना पसंद नहीं है तो दूध से बने आइटम्स को डायट में जरूर शामिल करें। खाने के बाद बटरमिल्क भी ले सकती हैं। अगर दूध से एलर्जी है तो इस बारे में एक बार डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

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प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी को दूर कर सकते हैं दूध से बने आइटम्स

दूध से बनी हुई पनीर को भी खाने में शामिल किया जा सकता है। जिन लोगों को दूध नहीं पसंद है, हो सकता है कि उन्हें पनीर का स्वाद पसंद आता हो। पनीर में भी कैल्शियम की उचित मात्रा होती है। पनीर को सूखा या फिर अन्य डिश के साछ भी खाया जा सकता है। पनीर को अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर बहुत से व्यंजन बनाए जा सकते हैं, जैसे कि पालक पनीर या कढ़ाई पनीर। ब्रेकफास्ट में मिंट की चटनी के साथ पनीर का पराठा भी खाया जा सकता है। स्टफ पराठा अक्सर लोगों को पसंद आता है।

प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी को दूर कर सकता है दही

प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए कैल्शियम रिच फूड के रूप में दही को शामिल किया जा सकता है। एक कप सादा, कम वसा वाला दही डेली जरूरत के लगभग एक तिहाई कैल्शियम की आपूर्ति करता है। साथ ही कैल्शियम रिच फूड में हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे कि मेथी और बथुआ, पालक, चौलाई, आदि कैल्शियम, आयरन और फोलेट का अच्छा सोर्स है। इनको भी अपने आहार में शामिल करें। बादाम भी कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन से भरपूर होता हैं। एक गिलास बादाम दूध आप ले सकती हैं या फिर कुछ बादाम को इवनिंग स्नैक के तौर पर खाया जा सकता हैं। आप चाहे तो बादाम शेक भी बना सकती हैं। कुछ तैलीय मछलियां जैसे कि सैल्मन और सार्डिन कैल्शियम के बेहतरीन सोर्स होती हैं। ये प्रोटीन और एसेंशियल ओमेगा 3 फैट्टी एसिड से भी भरपूर होती हैं। इन्हें पसंद के मुताबिक खाने में शामिल किया जा सकता है।

प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी न हो, इसके लिए डॉक्टर से परामर्श करना बहुत जरूरी है। डॉक्टर आपको कैल्शियम रिच फूड के बारे में जानकारी देंगे। प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की कमी न होने दें। बिना डॉक्टर की इजाजत के कैल्शियम सप्लिमेंट्स न लें। प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर की सलाह बहुत मायने रखती है। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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