क्या शिशु भी हमारी तरह ही देख सकते हैं अपनी आसपास की चीजें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट February 12, 2021 . 5 मिनट में पढ़ें
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जब कमरे में अंधेरा छा जाता है, तो हम लोग कुछ पल के लिए घबरा जाते हैं। जब अचानक से लाइट आती है, तो कुछ पल के लिए हमारी आंखें बंद होती है और फिर सब कुछ नॉर्मल हो जाता है। मां के पेट में नौ माह तक रहने वाला शिशु गर्भ के अंदर कुछ देख नहीं सकता है लेकिन चीजों को महसूस जरूर कर सकता है। गर्भ के अंदर प्रकाश नहीं जाता है। जब बच्चे का जन्म होता है, तो अचानक से उसे चारों ओर प्रकाश का अभास होता है। बच्चे के जन्म के बाद लोग उससे आंखों में आंखें डालकर बात करते हैं लेकिन क्या कभी आपके मन में ये प्रश्न आया है कि शिशु साफ देख सकता है या फिर नहीं? इसका जवाब है नहीं। बच्चा जन्म के बाद पूरी तरह से देखने में सक्षम नहीं होता है। हमारी आंखें ब्रेन से जुड़ी हुई हैं। ब्रेन के डेवलपमेंट के साथ ही विजन डेवलपमेंट होता है। अगर आपको ये लग रहा है कि बच्चा सब कुछ साफ देख सकता है, तो ये बिल्कुल गलत है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको शिशु का विजन डेवलपमेंट कैसे होता है, इस बारे में बताएंगे। जानिए शिशु का विजन किस तरह से विकसित होता है।

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शिशु का विजन : क्या बच्चा आपको देख पाएगा?

जब आप न्यूबॉर्न बेबी को गोद में उठाकर कहते हैं ‘हैलो बेबी’, तो बच्चा आवाज सुनकर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है। यानी बच्चा ये देखने की कोशिश करता है कि आवाज कहां से आ रही है। शिशु आपकी शक्ल पर जब तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएगा, तब तक उसके मस्तिष्क में छवि नहीं बनेगी। शिशु का विजन डेवलपमेंट (Development) जन्म के तुरंत बाद नहीं होता है बल्कि कुछ महीनों तक ये क्रिया चलती है’। एक महीने के शिशु का ज्यादातर समय सोने में गुजरता है। जब बच्चा आंखें खोलता है, तो उससे हिलते हुए ऑब्जेक्ट आसानी से समझ में आते हैं और वो उनमें ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की कोशिश भी करता है। बच्चा एक ही समय में ज्यादा वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है।

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जन्म से तीन महीने तक शिशु का विजन (Baby’s Vision) कैसा रहता है?

जब शिशु का जन्म होता है, उस समय दृष्टि (vision) के बारे में अनुमान लगाना कठिन होता है। जन्म के कुछ महीनों बाद की बच्चे के विजन के बारे में जानकारी मिल पाती है। न्यू बॉर्न बेबी की आई साइट वीक होती है। शिशु 8 से 10 इंच की दूरी की वस्तु (Object) को देख पाता है। जन्म से तीन महीने तक बच्चा बड़े शेप, फेस आदि को आसानी से देख सकता है और साथ ही सफेद और काले रंग के बीच अंतर भी करने लगता है। उम्र बढ़ने के साथ ही ऑब्जेट फोकस और ऑब्जेक्ट को ट्रेक करने की एबिलिटी भी इम्प्रूव होती है। तीन महीने की उम्र तक बच्चा अपने हाथों को पहचानने लगता है और अपने खिलौने की पहचान भी करने लगता है।अगर आपको लग रहा है कि आपका बच्चा कुछ तिरछी ओर देखता है, तो आपको कुछ इंतजार करना चाहिए। अभी बच्चे का विकास हो रहा है। जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं या प्रीमेच्योर होते हैं, उन्हें चीजों में फोकस करने में ज्यादा समय लग सकता है।

चार से आठ महीने के दौरान शिशु का विजन कैसा होता है?

चार माह का शिशु चीजों में आसानी से फोकस कर सकता है और मूविंग ऑब्जेक्ट यानी हिलती हुई चीजों को पकड़ भी सकता है। चार माह की उम्र में बच्चा अपने माता-पिता के चेहरों को पहचाने लगता है। इस उम्र में बच्चा लाल और हरे रंग के शेड्स को आसानी से पहचानने लगता है और कुछ रंग को फेवर ( Baby’s color preferences) भी करने लगता है। इस स्टेज में शिशु की दोनों आंखें एक साथ काम करने लगती हैं। चार माह की उम्र में बच्चा मिरर देखकर खुश हो सकता है या हैंड को हिला सकता है। यानी चार से छह माह की उम्र में शिशु का विजन डेवलपमेंट अच्छी तरह से हो जाता है। आठ माह की उम्र में बच्चा चीजों को पहचान कर उनकी तरफ जाने का प्रयास भी करता है।

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एक साल के बेबी का विजन डेवलपमेंट (vision development) कैसा होता है?

एक साल की उम्र में शिशु को पूरी तरह से ऑब्जेक्ट दिखने लगते हैं और बच्चा आसानी से उनके बीच अंतर भी कर सकता है। इस उम्र में बच्चे अपने आसपास की चीजों को पहचानने लगते हैं और उनको याद भी रहता है कि उनका खिलौना कहा रखा होगा। इस उम्र में बच्चे की पास की दृष्टि और दूर की दृष्टि सही तरह से काम करती हैं। बच्चा अपनी ईमेज मिरर में देखकर पहचान सकता है कि वो उसकी ईमेज है न कि किसी और की। बच्चे की उम्र तीन साल होने पर उनका विजन 20/20 हो जाता है जबकि चार से छह साल की उम्र तक बच्चे का डेप्थ परसेप्शन डेवलप होता है। डेप्थ परसेप्शन की मदद से बच्चा किसी भी चीज के दूर होने या पास होने की जानकारी मिलती है।पांच सेंस की तरह बेबी के लिए विजन भी बहुत महत्वपूर्ण है। विजन की हेल्प से बच्चा अपने आसपास की चीजों को पहचानता है और उनसे सीखता भी है। पहले साल में बच्चे का विजन तेजी से डेवलप होता है। आपको बच्चे की आई हेल्थ का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। समय-समय पर आई एक्जामिनेशन बच्चे के विजन को सुरक्षित रखने का काम करेगा।

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बच्चों में विजन प्रॉब्लम को कैसे पहचानें?

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि न्यूबॉर्न बेबी की आंखों का विजन क्लीयर नहीं होता है। ऐसे में विजन प्रॉब्लम के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है। जब शिशु तीन से चार महीने का हो जाता है, तो विजन प्रॉब्लम के बारे में जानकारी मिल सकती है। अगर बच्चा आसपास के ऑब्जेक्ट को न देख रहा हो या फिर मूविंग ऑब्जेक्ट को देखकर प्रतिक्रिया न कर रहा हो, तो शिशु की आंखों की जांच जरूर कराएं। टॉडलर्स में एंब्लोपिया (amblyopia) की समस्या हो सकती है। इस कंडीशन का जितनी जल्दी इलाज कराया जाए, उतना बेहतर रहता है। इस कंडीशन का कोई वॉर्निंग साइन नहीं होता है लेकिन ये दृष्टि को प्रभावित करता है। अगर शिशु रोशनी को देखकर आंखें फेर लेता हो या फिर किसी चीज को आंखें बड़ी करके देखता है, तो आपको एक बार आई स्पेशलिस्ट से बात जरूर करनी चाहिए। आप बच्चे के साथ जितना ज्यादा समय बिताएंगे, आपको उसके बारे में अधिक जानकारी हो सकेगी। अगर आपको कोई भी लक्षण नजर आएं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

बेबी का पहला आई चेकअप कब करवाएं?

अगर आप बेबी का रेग्युलर चेकअप करा रही हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ (pediatricians) विजन स्क्रीनिंग भी करते हैं। अगर उन्हें किसी तरह की समस्या नजर आएगी, तो वो बच्चे को पिडिएट्रिक ऑप्थेलमोजिस्ट (pediatric ophthalmologist) को दिखाने की सलाह दे सकते हैं। डाउन सिंड्रोम ( Down syndrome) की समस्या से पीड़ित बच्चों या फिर किसी फैमिली हिस्ट्री के कारण उत्पन्न हुई परेशानी को नेत्र विशेषज्ञ जांचते हैं। अगर बच्चे को किसी भी तरह की समस्या नहीं है, तो बच्चे को तीन से चार साल की उम्र में आई चेकअप करा लेना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे की कमजोर दृष्टि के बारे में पता चल जाता है। इस उम्र में बच्चे पढ़ने या पिक्चर को समझ सकते हैं इसलिए आई चेकअप आसानी से किया जा सकता है।

अगर आपको शिशु के विजन डेवलपमेंट से जुड़ी किसी तरह की जानकारी चाहिए, तो आंखों के विशेषज्ञों से परामर्श करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइसइलाज और जांच की सलाह नहीं देता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको शिशु के विजन से जुड़ी ये खबर पसंद आई होगी। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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