मिनरल सप्लिमेंट्स का बच्चों की ग्रोथ से क्या है संबंध? जवाब मिल जाएगा यहां!

    मिनरल सप्लिमेंट्स का बच्चों की ग्रोथ से क्या है संबंध? जवाब मिल जाएगा यहां!

    शरीर के लिए जिस तरह से विभिन्न प्रकार के विटामिन जरूरी होते हैं, ठीक वैसे ही मिनरल भी जरूरी होते हैं। ये बोंस, मसल्स, हार्ट और ब्रेन के प्रॉपर वर्क करने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। हॉर्मोन और एंजाइम के निर्माण के लिए भी मिनरल्स अहम भूमिका निभाते हैं। मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स फायदेमंद हो सकते हैं। मिनिरल्स दो प्रकार के होते हैं। मैक्रोमिनरल्स (Microminerals) और ट्रेस मिनिरल्स (Trace minerals)। वैसे तो ये मिनरल्स विभन्न प्रकार के फूड्स से प्राप्त हो जाते हैं लेकिन डायट में विभिन्न प्रकार के फूड्स न शामिल करने पर इनकी कमी भी हो सकती है। कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड और सल्फर मिनरल कहलाते हैं। ट्रेस मिनरल्स आयरन, मैग्नीज, कॉपर, आयोडीन, जिंक, कोबाल्ट, फ्लोराइड और सेलेनियम आदि की थोड़ी सी ही मात्रा की शरीर को जरूरत होती है।

    बच्चों के लिए मिनरल्स बहुत जरूरी होते हैं। अगर शरीर में इनकी कमी हो जाए, तो बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जानिए मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स (Mineral supplements for mineral deficiency) क्यों जरूरी होते हैं।

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    मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स (Mineral supplements for mineral deficiency)

    अगर बच्चों के खाने में विटामिन फिर मिनरल्स की कमी हो जाती है, तो उन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। मिनरल डेफिशिएंसी से निपटने के लिए डॉक्टर बच्चों को मिनरल सप्लिमेंट्स लेने की सलाह भी दे सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौन-से मिनरल बच्चों के लिए बहुत जरूरी होते हैं।

    मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स के रूप में कैल्शियम (Calcium)

    कैल्शियम मिनरल शरीर बच्चों के शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। बच्चे के शरीर का विकास तेजी से होता है, तो ऐसे में मजबूत बोंस के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता है। कैल्शियम (Calcium) नर्व और मसल्स की वर्किंग को आसान बनाता है। कैल्शियम हार्ट को हेल्दी रखने के लिए (To keep the heart healthy) भी जरूरी होता है। अगर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिल पाता है, तो उनकी बोंस और दांतों को मजबूती नहीं मिल पाती है। बच्चों को रीकेट्स (Rickets) की बीमारी से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी (Vitamin D) के साथ ही कैल्शियम की भी जरूरत होती है। अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो बच्चों की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

    खाने में दूध, योगर्ट और पनीर का सेवन करने से पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिलता है। जिन बच्चों में कैल्शियम की अधिक कमी होती है, तो मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स (Mineral supplements for mineral deficiency) के रूप में डॉक्टर कैल्शियम सप्लिमेंट्स लेने की राय दे सकते हैं। मार्केट में कैल्शियम युक्त गमी उपलब्ध होती है, जो बच्चों को खाने में पसंद आती हैं।

    गमी में कैल्शियम के साथ ही अन्य पोषक तत्व भी शामिल होते हैं। डॉक्टर फास्टएंडअप (FAST&UP), न्यूट्रिलाइट किड्स कैल्शियम मैग्नीशियम कोको टैबलेट (NUTRILITE KIDS CALCIUM MAGNESIUM COCOA TABLET) आदि लेने की सलाह दे सकते हैं। बेहतर होगा कि डॉक्टर के परामर्श के बाद ही बच्चे को मिनरल सप्लिमेंट दें।

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    मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स के रूप में आयोडीन (Iodine)

    आयोडिन रिच सॉयल में उगने वाली सब्जियों या फिर सीफूड्स में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। टिशू डेवलपमेंट के लिए बच्चों के लिए आयोडीन बहुत जरूरी होता है। सेल्स से ऑक्सीजन और एनर्जी लेने के दौरान आयोडीन (Iodine) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन आयोडाइज्ड नमक और सीफूड्स से मिल सकती है। एक से 8 साल के बच्चे को प्रति दिन 90 μg आयोडीन की जरूरत होती है।

    उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर में आयोडीन की जरूरत भी बढ़ जाती है। ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को एक दिन में 270μg आयोडीन की जरूरत होती है। शरीर में आयोडीन की कमी होने पर डॉक्टर आयोडीन सप्लिमेंट्स दे सकते हैं। आपको इस संबंध में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए।

    मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स: जरूरी मिनरल में जिंक भी है शामिल

    मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स (Mineral supplements for mineral deficiency) के रूप में जिंक का सेवन भी किया जाता है। मांस, चिकन, समुद्री भोजन, दूध, बीज, टोफू और साबुत अनाज आदि से जिंक की पर्याप्त मात्रा प्राप्त होती है। जिंक बच्चों के लिए जरूरी होता है क्योंकि ये सेल ग्रोथ की बायोलॉजिकल प्रोसेस (Biological process) में अहम रोल अदा करता है।

    बच्चों में जिंक की कमी होने पर डेली सप्लिमेंट्स के माध्यम से जिंक की कमी को पूरा किया जा सकता है। सुपर गमी (Super Gummy) का इस्तेमाल करने से जिंक (Zinc) और कैल्शियम, आयरन (Iron) विटामिन आदि की कमी को पूरा किया जा सकता है। इसका सेवन बच्चों के लिए इम्यूनिटी बूस्ट करने के साथ ही हड्डियों को भी मजबूती प्रदान होती है।

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    बच्चों के शरीर में आयरन की कमी (Iron deficiency in kid’s)

    बच्चों के शरीर में आयरन की कमी बहुत आम है। आयरन शरीर के लिए जरूरी मिनरल में शामिल है। एडल्ट के मुकाबले में बच्चों में अधिक आयरन की कमी पाई जाती है। ग्रोथ के दौरान शरीर को अधिक आयरन की जरूरत पड़ती है। वेजीटेरियन और नॉनेवेजीटेरियन डायट से आयरन की पर्याप्त मात्रा प्राप्त की जा सकती है। आयरन की कमी के कारण बच्चों की स्किन के रंग में भी बदलाव आ जाता है।

    अगर खाने से पर्याप्त मात्रा में आयरन नहीं मिल पा रहा है, तो डॉक्टर बच्चों के लिए मल्टीविटामिन गमीज (Multivitamin Gummies For Kids) या फिर फिटडे आयरन और फोलिक एसिड गमीज (Fitday Iron & Folic Acid Gummies) खाने की सलाह दे सकते हैं। आपको बिना परामर्श के बच्चे को कोई भी सप्लिमेंट नहीं देना चाहिए। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है।

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    मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स: मैग्नीशियम की कमी को पूरा करते हैं मैग्नीशियम सप्लिमेंट्स

    शरीर में एंजाइम बनने की प्रोसेस में मैग्नीशियम अहम रोल अदा करते हैं। ये शरीर के लिए जरूरी मिनरल में शामिल है। बच्चों के शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो सकती है, जिसे सप्लिमेंट्स की हेल्प से भी पूरा किया जा सकता है। मैग्नीनिशियम स्लीप, मूड, ध्यान लगाने, एनर्जी लेवल, बाउल रेग्युलेशन आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 1-3 साल के बच्चे को एक दिन में 80 mg/day मैग्नीशियम की जरूरत होती है। अगर बच्चे को ठीक से नींद न आ रही हो या फिर मेमोरी प्रॉब्लम हो, तो आपको डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर ऐसे में बच्चे को न्यूट्रिलाइट किड्स कैल्शियम मैग्नीशियम कोको टैबलेट या फिर अन्य सप्लिमेंट्स लेने की सलाह दे सकते हैं।

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    अगरल आप बच्चे को पौष्टिक आहार दे रहे हैं और खाने में विभिन्न प्रकार के फूड्स शामिल कर रहे हैं, तो बच्चों को जरूरी मिनरल्स आसानी से मिल जाएंगे। कई बार फूड्स से मिनरल्स न मिल पाने पर शरीर में समस्या होने लगती है। अगर आपको बच्चे में किसी प्रकार के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर को जानकारी दें। डॉक्टर बच्चे की जांच करने के बाद उसे जरूरी सप्लिमेंट्स लेने की राय दे सकते हैं। मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स (Mineral supplements for mineral deficiency) में क्या लेना है, इस बारे में डॉक्टर ही आपको जानकारी दे सकते हैं। अगर आप जानकारी लिए बिना ही बच्चों को मिनरल सप्लिमेंट्स देंगे, तो उनके शरीर में मिनरल की अधिकता भी हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

    हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से आपको मिनरल डेफिशिएंसी के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स (Mineral supplements for mineral deficiency) के बारे में जानकारी मिल गई होगी। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/12/2021 को
    डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड