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क्वाशियोरकर- प्रोटीन की कमी से होता है यह गंभीर कुपोषण

क्वाशियोरकर- प्रोटीन की कमी से होता है यह गंभीर कुपोषण

कुपोषण बच्चों में होने वाली बहुत गंभीर समस्या है और अधिकांश गरीब देशों/इलाकों में यह अधिक होती है। कुपोषण भी कई तरह के होते हैं। जिसमें से क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) भी कुपोषण का ही एक प्रकार है। यह कुपोषण शरीर में प्रोटीन की कमी से होता है। यदि इसका समय पर उपचार न कराया जाए तो ऑर्गेन फेलियर के साथ ही मरीज की जान भी जा सकती है। क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) की समस्या आमतौर पर अकाल ग्रस्त और गरीब/पिछड़े इलाकों मे अधिक देखी जाती है।

क्वाशियोरकर क्या है (What is Kwashiorkor)?

क्वाशियोरकर गंभीर कुपोषण है जो डायट में प्रोटीन की कमी से होता है। यह एडिमा (edema) यानी फ्लूड रिटेंशन से जुड़ी है इसलिए इसे “एडेमाटस कुपोषण” (edematous malnutrition) भी कहा जाता है। पोषण संबंधी यह विकार है अक्सर अकाल प्रभावित और गरीब इलाकों में देखा देखा जाता है। इस विकार से पीड़ित व्यक्ति के टखने, पैर और पेट को छोड़कर शरीर के अन्य हिस्से बहुत कमजोर होते हैं। टखने पैर और पेट फ्लूड रिटेंशन के कारण फूला हुआ दिखता है। क्वाशियोरकर से पीड़ित अधिकांश लोग जल्दी ठीक हो जाते है यदि उनका जल्दी और ठीक तरीके से उपचार किया जाए। उपचार में आमतौर पर डायट में अतिरिक्त कैलोरी और प्रोटीन शामिल किया जाता है। इस विकार से पीड़ित बच्चों का विकास सही तरह से नहीं हो पाता है और जिंदगी भर नाटे और कमजोर रह जाते हैं। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं जैसे कोमा में जाना, शॉक लगना या स्थायी मानसिक व शारीरिक विकलांगता (mental and physical disabilities)। इलाज न करवाने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

कुपोषण में पेट क्यों फूल जाता है (why malnutrition cause stomach bloating)?

क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) गंभीर कुपोषण की स्थिति है जो शरीर में प्रोटीन की बहुत अधिक कमी से होता है। प्रोटीन की कमी के कारण फ्लूड रिटेंशन होता है और इसी वजह से पेट फूल जाता है। स्तनपान बंद होने के बाद जब बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है, तो वह कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें तुरंत उपचार की जरूरत होती है। क्वाशियोरकर को प्रोटीन कुपोषण (protein malnutrition), मेलिगनैंट कुपोषण (malignant malnutrition), प्रोटीन-कैलोरी कुपोषण (protein-calorie malnutrition) भी कहा जाता है।

और पढ़ें- मसल्स ग्रोथ से लेकर वेट मेंटेनेंस तक, ये प्रोटीन पहुंचा सकता है आपको बहुत से फायदे

क्वाशियोरकर के कारण (What causes kwashiorkor)

गंभीर कुपोषण या प्रोटीन की कमी के परिणामस्वरूप क्वाशियोरकर (kwashiorkor) होता है। यह मेरास्मस से अलग है जो एक प्रकार का कुपोषण ही है, लेकिन यह कैलोरी की कमी से होता है। दरअसल, प्रोटीन शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन (fluid balance) बनाए रखते हैं। प्रोटीन की कमी से तरल शरीर के उन हिस्सों में चले जाते हैं जहां उन्हें नहीं जाना चाहिए और वहां टिशू में जमा हो जाते हैं। कोशिकाओं की दीवार के पास तरल पदार्थों के असंतुलन के कारण फ्लूड रिटेंशन या एडिमा (edema) होता है। हालांकि, इस स्थिति के सटीक कारणों का पता नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों इसे मुख्य रूप से मक्का, कसावा और चावल जैसे खाद्य पदार्थों से जोड़कर देखते हैं। डायट्री एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी भी इसका मुख्य कारण है। आमतौर पर यह विकार स्तनपान बंद करने वालों और 4 साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। इसकी वजह है कि स दौरान बच्चों को डायट से पर्याप्त पोषक तत्व और प्रोटीन नहीं मिल पाता है। यह इन इलाकों में आम हैं जहां भोजन की आपूर्ति नियमित नहीं है और कुपोषण की दर अधिक है।

व्यस्कों में इसका मुख्य कारण ईटिंग डिसऑर्डर जैसे एनोरेक्सिया (anorexia) भी है।

कहां यह विकार ज्यादा होता है?

क्वाशियोरकर- kwashiorkor

यूनाइटेड स्टेट में यह विकार दुर्लभ है। इसका प्रकार इन इलाकों में अधिक है-

  • दक्षिणपूर्व एशिया (Southeast Asia)
  • मध्य अमेरिका (Central America)
  • कांगो (Congo)
  • प्यूरटो रिको (Puerto Rico)
  • जमैका (Jamaica)
  • दक्षिण अफ्रीका (South Africa)
  • यूगांडा (Uganda)

यह उन इलाकों में भी आम है जहां भोजन की आपूर्ति की कमी है और पोषक तत्वों के संबंध में लोगों में जानकारी का अभाव है। अकाल, बाढ़, गरीबी से प्रभावित क्षेत्रों में भी यह विकार अधिक देखा गया है।

और पढ़ें- बच्चों में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए 10 बेस्ट फूड

क्वाशियोरकर के लक्षण (Symptoms of kwashiorkor)

प्रोटीन की कमी से होने वाले इस कुपोषण में बच्चे के शरीर में बहुत कम बॉडी फैट होता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। इस विकार में बच्चे का शरीर खासतौर पर पेट फूला हुआ दिखता है, लेकिन यह सूजन फ्लूड तरल पदार्थों के कारण होता है, ऐसा फैट और मांसपेशियों की वजह से नहीं होता है। इसके लक्षणों में शामिल है-

  • भूख न लगना
  • बालों के रंग में बदलाव, यह पीला और ऑरेंज दिख सकता है
  • डिहाइड्रेशन
  • एडिमा या सूजन, खासतौर पर यह पैरों में होता है और वहां की स्किन दबाने पर उंगली का निशान आ जाता है
  • मसल्स और फैट टिशू की हानि
  • सुस्ती और चिड़चिड़ापन (lethargy and irritability)
  • डर्मेटोसिस या त्वचा के घाव जो फटे, खुरदरे दिखते हैं
  • बार-बार स्किन इंफेक्शन होना या घाव का जल्दी ठीक न होना।
  • फटे नाखून
  • लंबाई न बढ़ना
  • पेट फूलना

इस विकार से पीड़ित बच्चों का बार-बार इंफेक्शन का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए लंबे समय तक उपचार न कराने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

क्वाशियोरकर का निदान (kwashiorkor diagnosis)

बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण के आधार पर इसका निदान किया जाता है। डॉक्टर बच्चे में त्वचा के घाव या रैश, पैर, टखनो, चेहरे और बांह में एडिमा की जांच करता है। इसके अलावा वह बच्चे की लंबाई भी मापता है जिससे पता चलता है कि क्या वह उम्र के हिसाब से है या नहीं।

कुछ मामलों में डॉक्टर इलेक्ट्रोलाइट लेवल, क्रिएटिनिन, कुल प्रोटीन, और प्रीएलबुमिन की जांच के लिए ब्लड टेस्ट भी करता है। हालांकि आमतौर पर बच्चे के शारीरिक परीक्षण और डायट के विवरण के आधार पर ही डॉक्टर क्वाशियोरकर का पता लगा लेते हैं। इस विकार से पीड़ित बच्चों का ब्लड शुगर लेवल भी आमतौर पर कम रहता है, इसके अलावा उनमें प्रोटीन का स्तर, सोडियम, जिंक और मैगनीशियम का लेवल भी कम होता है।

और पढ़ें- बच्चों के लिए विटामिन्स की जरूरत और सप्लीमेंटस के बारे में जानिए जरूरी बातें

क्वाशियोरकर vs मेरास्मस (Kwashiorkor vs. marasmus)

गंभीर या तीव्र कुपोषण (acute malnutrition) 3 प्रकार के होते हैं-

मेरास्मस (Marasmus)- इसमें पोषक तत्वों और कैलोरी की कमी के कारण बहुत अधिक वजन घट जाता है और मांसपेशियों को बहुत नुकसान पहुंचता है।

क्वाशियोरकर (Kwashiorkor)- प्रोटीन की कमी की वजह से वाटर रिटेंशन होता है जिससे सूजन या एडिमा हो जाता है।

मेरास्मिक-क्वाशियोरकर (Marasmic-kwashiorkor)- इसमें मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने के साथ ही अतिरिक्त एडिमा हो जाता है।

यह तीनों ही गंभीर कुपोषण की स्थिति है जिसमें तुरंत उपचार की जरूरत होती है।

क्वाशियोरकर का उपचार (Kwashiorkor treatments)

प्रोटीन मालन्यूट्रिशन हालांकि कुपोषण से ही संबंधित है, लेकिन सिर्फ बच्चे/व्यस्कों के खाना खिलाना से ही से पोषक तत्वों की कमी दूर नहीं हो जाएगा और न ही स्थिति में सुधार होगा।

यदि लंबे समय तक बच्चा पर्याप्त प्रोटीन और पोषक तत्वों के बिना रहता है, तो फिर उसे भोजन में लेना मुश्किल हो सकता है यानी बच्चे का शरीर उसे स्वीकारेगा नहीं। इसलिए जरूरी है कि रीफीडिंग सिंड्रोम (refeeding syndrome) से बचने के लिए बच्चे में सावधानीपूर्वक नई खाने की आदतें डाली जाए।

रीफीडिंग सिंड्रोम में इलेक्ट्रोलाइट और फ्लूड (तरल) तेजी से शिफ्ट होते हैं जो कुपोषित बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

क्वाशियोरकर से पीड़ित बहुत से बच्चों को लैक्टोज (lactose) से एलर्जी हो जाती है, ऐसे में उन्हें दूध और दूध से बने पदार्थों से दूर रखना पड़ता है जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं या फिर उन्हें एंजाइमस दिया जाता है ताकि उनका शरीर दूध को पचा सके।

इस विकार का इलाज करते समय डॉक्टर पीड़ित की डायट में सबसे पहले कार्बोहाइड्रेट्स शामिल करता है, फिर प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स। सुरक्षित तरीके से नए फूड शामिल करने की इस प्रक्रिया में हफ्तों का समय लग सकता है।

इसके अतिरिक्त यदि बच्चे की हालत बहुत गंभीर है और वह सदमें (shock) में है और उसका ब्लड प्रेशर कम व हार्ट रेट ज्यादा है तो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए पहले उसे दवा दी जाएगी।

और पढ़ें- जानिए कितनी मात्रा में लेना चाहिए प्रोटीन

क्वाशियोरकर से होने वाली जटिलताएं (Kwashiorkor complications)

क्वाशियोरकर- kwashiorkor

यह कुपोषण का अत्यंत गंभीर रूप है। बिना उपचार के इसकी वजह से कई तरह की जटिलताएं या स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं-

  • कार्डियोवस्कुलर समस्या (cardiovascular problems)
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (urinary tract infections)
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रॉब्लम्स (gastrointestinal problems)
  • लिवर का बड़ा होना जिसे हेपेटोमेगली (hepatomegaly)कहते हैं
  • इम्यून सिस्टम काम करना बंद कर देता है
  • इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन (electrolyte imbalances)

कम उम्र में ही कुपोषित होने के कारण क्वाशियोरकर से पीड़ित बच्चों की लंबाई उम्र के हिसाब से बढ़ नहीं पाती है। साथ ही यह विकार व्यक्ति को संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बना देता है जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करके गंभीर स्थिति उत्पन्न कर देता है। जितन जल्दी इसका निदान करके उपचार शुरू कर दिया जाए पीड़ित के ठीक होने की संभावना उतनी अधिक बढ़ जाती है।

क्वाशियोरकर से बचाव

प्रोटीन की कमी (protein deficiency) से होने वाले इस गंभीर कुपोषण से बचने का तरीका है कि बच्चों की डायट में पर्याप्त कैलोरी (calorie) और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाए। प्रोटीन के कुछ स्रोत हैं-

  • सीफूड
  • अंडे
  • लीन मीट
  • बीन्स
  • मटर
  • नट्स
  • बीज

क्वाशियोरकर (kwashiorkor) आमतौर पर बच्चों में होने वाला गंभीर कुपोषण का एक प्रकार है जो प्रोटीन की कमी से होता है। प्रोटीन शरीर में तरल पदार्थों का सही संतुलन और वितरण बनाए रखने के लिए जरूरी है और जब प्रोटीन की कमी से इसमें गड़बड़ी होती है तो इसका नतीजा कुपोषित बच्चे के पेट और पैरों में सूजन के रूप में दिखता है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह बहुत ही गंभीर स्थिति है, लेकिन जल्दी निदान और सही उपचार से पीड़ित व्यक्ति के ठीक होने की संभावना अधिक होती है।

 

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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