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बच्चों में पोषण की कमी के इन संकेतों को न करें अनदेखा

बच्चों में पोषण की कमी के इन संकेतों को न करें अनदेखा

बच्चों में पोषण की कमी हो तो वे कुपोषण का शिकार होने लगते हैं। बच्चों के शरीरिक और अच्छे मानसिक विकास में उनके खानपान की महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर उसमें किसी प्रकार की कमी हो जाती है तो बच्चे के विकास में भी फर्क पड़ना शुरू हो जाता है। इस बारे में डॉ श्रीनिवास (चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार) ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि 12 वर्ष की उम्र वाले बच्चे का भोजन एक युवक के बराबर होता है और 14 से 18 साल की लड़की के लिए 2,800- 3,000 कैलोरी का आहार पोषण के लिए ठीक माना जाता है। इसी अवस्था के बालक के पोषण के लिये 3,000-3,400 कैलोरी का आहार मिलना चाहिए। यदि उनमें पोषण की कमी होती है तो कई लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे कि:

प्रतिदिन के आहार में भिन्न पोषण तत्वों का अनुपात, जो बचाएगा पोषण संबंधी कमियों से

बच्चों में पोषण की कमी से होने वाली समस्याएं (Nutritional deficiency problems in children)

बच्चों में पोषण की कमी से एक नहीं अनेक समस्याएं होने लगती हैं। जानिए इनके बारे में विस्तार से।

बच्चों में पोषण की कमी के कारण अवसाद और घबराहट (Depression and anxiety)

अवसाद और घबराहट मानसिक स्थितियां हैं। लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि इनसे जुड़ी अधिकांश मामलों में इन समस्याओं की वजह शिशु में पोषक तत्वों की कमी (nutritional deficiencies) होती है। जब बच्चों को पोषण तत्वों की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती है तो उसे घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है। जिसके कारण उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है। इसलिए बच्चे के पोषण का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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nutritional deficiency in children बच्चों में पोषण की कमी

हाइपरएक्टिविटी (Hyperactivity) भी बच्चे में पोषण की कमी का संकेत

बहुत से बच्चे कभी शांत और आराम से नहीं बैठते हैं। उनका मस्तिष्क बहुत ज्यादा एक्टिव होता है। आपने भी देखा होगा कि इस तरह के बच्चे हर समय दौड़ते और कूदते हुए रहते हैं। हालांकि यह स्थिति बहुत हद तक आनुवंशिकी होता है लेकिन, कई बच्चे कई एक्टिव नहीं होते हैं क्योंकि वो अंदर से कमजोर होते हैं। इसलिए उनके भोजन में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए, जैसे फल, दूध और हरी सब्जियां आदि। इस बारे में डॉक्टर की सलाह भी जरूर लें।

बोलने में देरी की समस्या (Delay in speech)

बच्चों में देर से बोलने की समस्या की मुख्य वजह है विटामिन बी-12 की कमी। इसलिए उन्हें विटामिन बी-12की कमी को पूरा करने के लिए सप्लिमेंट देना उचित नहीं है। बेहतर यह कि हम शिशु के आहार में ऐसे चीजों को शामिल करें जिन में प्रचुर विटामिन बी-12 में पाया जाता है। B12 वाले अहारों में अंडा, मीट, मछली, दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे कि पनीर, छास, दही, इत्यादि है। अगर बच्चे को किसी फूड से एलर्जी है तो इस बारें डॉक्टरी सलाह लें।

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बच्चों में पोषण की कमी के कारण होता है मोटापा (Obesity and excessive weight problem)

क्या आप यह सोचते हैं कि, पोषक तत्वों की कमी से केवल कुपोषण होता है, जिसमें बच्चे दुबले पतले होते हैं, तो गलत है। आपको यह बात दें कि पोषण की कमी से मोटापा और अत्यधिक वजन की समस्या भी हो सकती है। दरअसल मोटापा और अत्यधिक वजन की समस्या कुपोषण से ही संबंधित है। इसलिए अगर बच्चें में ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

बच्चों में पोषण की कमी से रूखी त्वचा (Dry skin due to nutritional deficiency in children)

रूखी त्वचा और बालों की एक वजह यह भी है कि शिशु के शरीर में वसा विलय विटामिन (fat soluble vitamins) की कमी हो रही है उदाहरण के लिए विटामिन ए, डी, ई और के-2 इत्यादि। इन लक्षणों पर पेरेंट्स अकसर ध्यान नहीं दे पाते।

बच्चों में पोषण की कमी के कारण टेढ़े दांत (Crowding of Teeth)

अटपटा जरूर लगे आपको पर लेकिन, सच बात है कि अगर शिशु अत्यधिक घने दांतों (Crowding of Teeth) की समस्या से पीड़ित है तो हो सकता है उसके अंदर कुछ पोषक तत्वों की कमी (nutritional deficiencies) है। ऐसे होने पर मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है।

दांतों का खराब होना (Tooth decay) भी है बच्चों में पोषण की कमी का संकेत

दांतो की सड़न और कैविटी की मुख्य वजह है अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन, बच्चों का दिन भर चॉकलेट खाना, और दांतो को साफ न रखना। लेकिन, क्या आप यह भी जानते हैं कि बच्चों के दांतो की सड़न और कैविटीज का कारण बच्चों में पोषक तत्वों की कमी होने पर भी हो सकती है। इसलिए अगर बच्चे में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।

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बच्चों में पोषण की कमी के कारण सर्दी-जुकाम का बार-बार होना (Recurrent cold)

आप यकिन नहीं करेंगे लेकिन, मेरे बचपन में यह मेरी सबसे बड़ी समस्या थी। क्या आप किसी बच्चे को जानते हैं जो हमेशा सर्दी या जुकाम की समस्या से पीड़ित रहता है? अगर हां, तो उसके आहार से वे पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं, जो शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए जरूरी हैं। इससे उसका इम्यून सिस्टम वीक हो रहा है और वह बार-बार इंफेक्शन से पीड़ित हो रहा है।

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बच्चों में पोषण की कमी के कारण जिद्दी स्वभाव (Stubborn temperament due to lack of nutrition in children)

शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ वसा और ओमेगा 3 शिशु को अच्छे स्वभाव में रखने में मदद करते हैं। अगर शिशु के शरीर को इसकी पर्याप्त मात्रा मिले तो शिशु का मूड बेहतर रहता है। इसलिए सुनिश्चित करें कि शिशु को पोषण मिल रहा हो।

बच्चों में पोषण की कमी के कारण हड्डियों की समस्याएं (Orthopedic diseases)

बच्चों में हड्डियों की बीमारी (Orthopedic diseases) को भी पोषक तत्वों की कमी से जोड़ कर कुछ अध्ययन में देखा गया है। गर्भवती महिलाएं अपने आहारों में फल, साग-सब्जियों को सम्मिलित करके भी अपने होने वाले बच्चों को इस बीमारी से बचा सकती हैं।

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बच्चों में पोषण की कमी के अन्य संकेत और लक्षण (Other signs of nutritional deficiency in children)

बच्चों में पोषण की कमी के कुछ अन्य संकेत और लक्षण हैं:

  • थकान और कमजोरी
  • चिड़चिड़ापन
  • खराब प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है
  • सूखी और पपड़ीदार त्वचा
  • अपर्याप्त, अवरुद्ध विकास
  • फूला हुआ पेट
  • घाव, संक्रमण और बीमारी से ठीक होने में लंबा समय लगना
  • मांसपेशियों का कम होना
  • व्यवहारिक और बौद्धिक विकास का धीमा होना
  • मानसिक कार्यक्षमता और पाचन समस्याओं में कमी

उम्मीद करते हैं कि आपको बच्चों में पोषण की कमी होने वाली समस्याओं से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

Accessed on 15th-July-2019

https://www.medicalnewstoday.com/articles/179316

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https://www.helpguide.org/articles/diets/childhood-obesity-and-weight-problems.htm

https://my.clevelandclinic.org/health/articles/9957-nutrition-problems-and-their-solutions

 

 

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Nikhil deore द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/12/2021 को
डॉ. अभिषेक कानडे के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड