Urinary Tract Infection: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) क्या है?

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अपडेट डेट November 2, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिचय

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) क्या है?

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) ऐसा इंफेक्शन यानी संक्रमण है जो मनुष्य की मूत्रप्रणाली के किसी भी हिस्से में हो सकता है जैसे किडनी, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग। इस संक्रमण का मूत्राशय या मूत्रमार्ग में होना सबसे सामान्य है। यही नहीं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, दो में से एक महिला और दस में से एक पुरुष में यह समस्या होने की संभावना होती है। इस रोग के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक्स देते हैं, लेकिन खुद कुछ आसान तरीकों और घरेलू उपायों को अपना कर इस संक्रमण से राहत मिल सकती है। जानिए इस रोग के बारे में विस्तार से।

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लक्षण

 यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के क्या लक्षण हैं?

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के लक्षण इस चीज पर निर्भर करते हैं कि आपको यह समस्या शरीर के किस भाग में है।

इस समस्या के कुछ आम लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

  • मूत्र त्याग करते हुए दर्द या जलन होना
  • बार-बार पेशाब आना
  • मूत्राशय के खाली होने के बाबजूद मूत्र त्याग का अहसास होना
  • पेशाब में खून आना
  • कमर या पेट के निचले हिस्से में दबाव या ऐंठन
  • मूत्र में तेज दुर्गंध

किडनी इंफेक्शन होने पर आपको यह लक्षण दिखाई दे सकते हैं

  • पीठ के ऊपरी हिस्से और पेट में दर्द
  • अधिक बुखार होना
  • ठंड लगना और कंपकपाना
  • जी मिचलाना
  • उल्टी

मूत्राशय (सिस्टिटिस) संक्रमण के लक्षण

  • पैल्विक में दबाव
  • पेट के निचले हिस्से में असुविधा
  • बार-बार, दर्दनाक पेशाब
  • पेशाब में खून आना

मूत्रमार्ग संक्रमण के लक्षण

  • पेशाब के साथ जलन होना

यूटीआई (UTI) की समस्या सेल्फ मेडिकेशन की वजह से भी हो सकती है

और पढ़ें – Frequent Urination: बार बार पेशाब आना क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

कारण

 यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के क्या कारण हैं?

  • आमतौर पर, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) की समस्या बैक्टीरिया के कारण होती है। यह इंफेक्शन आमतौर पर मूत्राशय में विकसित होता है, लेकिन यह किडनी तक फैल सकता है। ज्यादातर मामलों में इन बैक्टीरिया से मुक्ति पाई जा सकती है। लेकिन, कुछ स्थितियों में इस इंफेक्शन के बढ़ने की संभावना भी रहती है।
  • महिलाओं में यूटीआई का खतरा अधिक होता है क्योंकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है और गुदा के पास होता है। इसकी वजह से, महिलाओं के शारीरिक गतिविधियों या बर्थ कंट्रोल के लिए डायाफ्राम का प्रयोग करने के बाद उन में इस संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। रजोनिवृत्ति भी महिलाओं में यूटीआई के जोखिम को बढ़ाती है।

इसके अलावा यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) की समस्या इन कारणों से भी हो सकती है:

  • डायबिटीज
  • अधिक उम्र
  • कुछ रोग जैसे अल्जाइमर रोग और डेलीरियम
  • मूत्राशय को पूरी तरह से खाली करने में परेशानी होना
  • यूरिनरी कैथेटर होना
  • आंत्र असंयम
  • बोवेल इंकॉन्टीनेंस
  • किडनी में पथरी होना
  • प्रोस्टेट का बढ़ना, मूत्रमार्ग का संकुचित होना, या कोई भी अन्य कारण जिससे मूत्र प्रवाह अवरुद्ध हो
  • गर्भावस्था
  • मूत्र पथ से जुड़ी सर्जरी या अन्य प्रक्रिया
  • किसी फ्रैक्चर, चोट लगने या अन्य स्थितियों में लंबे समय तक हिलने में समस्या होना

और पढ़ें – Urine Test : यूरिन टेस्ट क्या है?

जोखिम

 यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के जोखिम क्या हैं?

निम्नलिखित स्थितियों और लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने का जोखिम बढ़ जाता है:

  • महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) होना बहुत ही सामान्य है। इसका कारण महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होना, शारीरिक संबंध, बर्थ कंट्रोल के तरीके, रजोनिवृत्ति आदि हो सकते हैं।
  • अगर किसी के मूत्र पथ में समस्या हों।
  • मूत्र पथ में रुकावट होने जैसे गुर्दे की पथरी या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण भी इस संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
  • जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है या डायबिटीज या अन्य रोग हैं तो उन्हें भी इस संक्रमण का जोखिम रहता है।
  • जो लोग पेशाब करने के लिए एक ट्यूब (कैथेटर) का उपयोग करते हैं, उनसे भी उनमे भी इस संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।
  • अगर किसी की यूरिनरी सर्जरी हुई है या अन्य कोई समस्या है जिनके उपचार के लिए मेडिकल उपकरणों का प्रयोग किया गया है, तो इससे भी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने का जोखिम बढ़ सकता है।

और पढ़ें – पेशाब का रंग देखकर पहचान सकते हैं इन बीमारियों को

उपचार

 यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) का उपचार क्या है?

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने की स्थिति में डॉक्टर सबसे पहले आपसे इसके लक्षणों के बारे में जानेंगे। डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच करेंगे और उसके बाद आपको यूरिन टेस्ट के लिए कहा जाएगा। इसके लिए रोगी को अपने मूत्र का नमूना देना होगा। आपको निम्नलिखित टेस्ट कराने के लिए कहा जा सकता है।

मूत्र-विश्लेषण (Urinalysis): यह टेस्ट शरीर में वाइट ब्लड सेल्स, रेड ब्लड सेल्स, बैक्टीरिया आदि की जांच के लिए कराया जाता है।

क्लीन-कैच यूरिन कल्चर: यह टेस्ट बैक्टीरिया की जांच करने और उपचार के लिए सबसे अच्छी एंटीबायोटिक के बारे में जानने के लिए किया जाता है।

ब्लड टेस्ट: ब्लड काउंट और ब्लड कल्चर के लिए ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है।

इसके अलावा इन टेस्टस को भी कराया जा सकता है

  • पेट का CT स्कैन
  • इंट्रावेनस पयेलोग्राम (IVP)
  • किडनी स्कैन
  • किडनी अल्ट्रासाउंड
  • वोईडिंग कीस्टोरेट्रोग्राम (Voiding cystourethrogram)

एंटीबायोटिक्स

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का मुख्य कारण बैक्टीरिया है और इसका उपचार एंटीबायोटिक्स से किया जा सकता है। हालांकि, एंटीबायोटिक्स के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यह दुष्प्रभाव हैं रिएक्शन, रेशेस होना या कोई अन्य गंभीर समस्या । अगर आपको एंटीबायोटिक्स से अगर कोई दुष्प्रभाव हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं। डॉक्टर आपको आपके लक्षणों और समस्या के अनुसार एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं जैसे:

  • लंबे समय तक एंटीबायोटिक की कम मात्रा लेने से बार बारे होने वाले इंफेक्शन से बचा जा सकता है।
  • शारीरिक संबंध बनाने के बाद एंटीबायोटिक की एक डोज लेना भी इंफेक्शन से बचा सकता है।
  • हर बार लक्षण दिखाई देने पर 1 या 2 दिनों के लिए एंटीबायोटिक्स दी जा सकती है।
  • एक नॉन–एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस उपचार।

कई बार यौन संचारित रोगों के लक्षण भी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसे हो सकते हैं। इसलिए उपचार से पहले डॉक्टर से जानें कि आपको क्या समस्या है । कुछ लोगों में यूटीआई की समस्या ठीक नहीं होती और उन्हें यह रोग बार-बार होता है, इसे गंभीर यूटीआई कहा जाता है। अगर आपको गंभीर यूटीआई की समस्या है, तो आपको डॉक्टर लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं।

और पढ़ें – Urinalysis : पेशाब की जांच क्या है?

घरेलू उपाय

 यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के घरेलू उपाय क्या है?

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) से राहत पाने के लिए इन घरेलू उपायों को अपनाएं:

  • यौन गतिविधियों के बाद मूत्र त्याग अवश्य करें।
  • अधिक से अधिक पानी पीएं और मूत्र न रोकें।
  • नहाने की बजाएं शावर लें।
  • गुप्त अंगों पर न तो स्प्रे करें, न उन पर साबुन का प्रयोग करें और न ही पाउडर आदि लगाएं।
  • कॉटन के अंडरवियर पहनें और साथ ही ढीले कपड़ें पहने।
  • बर्थ कंट्रोल के तरीके को बदलें। डायाफ्राम, अनलुब्रिकेटेड या स्परमिसिड-ट्रीटेड कंडोम आदि सभी बैक्टीरिया को बढ़ा सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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