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कैसे दूर करें क्रोहन रोग के कारण होने वाले पोषक तत्वों की कमी को?

कैसे दूर करें क्रोहन रोग के कारण होने वाले पोषक तत्वों की कमी को?

हमारा शरीर तभी सही तरह से काम कर सकता है जब उसे सभी तरह के पोषक तत्व जरूरी मात्रा में मिलते रहे, लेकिन कुछ स्वास्थ्य स्थितियां ऐसी होती है जिसकी वजह से संतुलित आहार लेने के बावजूद आपका शरीर पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता और इसकी वजह से कई तरह की बीमारियां हो सकती है जिसमें से क्रोहन रोग (Crohn’s Disease) भी है। पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग (Nutritional Deficiencies and Crohn’s Disease) का गहरा संबंध है। पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग (Nutritional Deficiencies and Crohn’s Disease) की समस्या की पहचान कर कैसे इसका उपचार किया जा सकत है, जानिए इस आर्टिकल में।

क्या है क्रोहन रोग? (Crohn’s disease)

क्रोहन रोग आंत (intestine) से जुड़ी एक लंबी बीमारी है, जिसमें मरीज का शरीर पोषक तत्वों को अवोशिषत नहीं कर पाता है। पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग (Nutritional Deficiencies and Crohn’s Disease) की वजह से मरीज का पाचन तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है और वह कुपोषण (malnutrition) का शिकार हो जाता है। यह समस्या बड़ी आंत के शुरुआती हिस्से या छोटी आंत को प्रभावित करता है, लेकिन यह पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से में हो सकता है और धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती जाती है। दरअसल, हम जो भी खाते हैं उस भोजन के पोषक तत्वों छोट आंत द्वारा अवशोषित किए जाते हैं, लेकिन क्रोहन रोग से पीड़ित होने पर छोटी आंत अपना यह काम नहीं कर पाता है इस स्थिति को मालएब्जॉर्प्शन (malabsorption) या पोषक तत्वों का अवशोषित न होना कहा जाता है।

क्रोहन रोग (Crohn’s disease) की वजह से जब मरीज जरूर विटामिन्स और मिनरल्स को अवशोषित नहीं कर पाता, तो इस कमी के कारण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जैसे डिहायड्रेशन और कुपोषण हो सकता है। आमतौर पर ब्लड टेस्ट के जरिए डॉक्टर क्रोहन रोग का पता लगाते हैं और यह देखते हैं कि मरीज के शरीर में विटामिन और पोषक तत्वों की कमी है या नहीं। उसके बाद ही वह किसी तरह के इलाज की योजना बनाते हैं।

क्रोहन रोग के कारण होने वाले पोषक तत्वों की कमी (Types of nutritional deficiencies due to Crohn’s disease)

पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग- Nutritional Deficiencies and Crohn’s Disease

पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग (Nutritional Deficiencies and Crohn’s Disease) में मरीज का शरीर इन पोषक तत्वों को ठीक तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता है।

कैलोरी (Calories)- कैलोरी कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से मिलती है। जब किसी व्यक्ति का शरीर मालएब्जॉर्प्शन (malabsorption) के कारण पर्याप्त कैलीरो का अवशोषण नहीं कर पाता है तो बहुत जल्दी और अधिक वजन कम हो जाता है।

प्रोटीन (Protein)- क्रोहन रोग के कारण मरीज को प्रोटीन सप्लीमेंट (protein supplement) की जरूरत हो सकती है निम्न कारणों से-

  • प्रेडनिसोन (prednisone) जैसे हाई डोज स्टेरॉयड का इस्तेमाल
  • लंबे समय से खून की कमी या डायरिया (diarrhea)
  • छोटी आंत (small intestine) को प्रभावित करने वाला घाव या नासूर (fistulas)

फैट (Fat)- गंभीर क्रोहन रोग (Crohn’s disease) से पीड़ित व्यक्ति जिसकी छोटी आंत का निचला हिस्सा (ileum) बड़ी मात्रा में निकाल दिया गया हो, उनके शरीर में फैट की भी कमी हो जाती है। ऐसे में उन्हें अपनी डायट में अधिक हेल्दी फैट (healthy fats) शामिल करने की जरूरत है।

आयरन (Iron)- क्रोहन डिसीज (Crohn’s disease) के साइड इफेक्ट के रूप में एनीमिया या हेल्दी रेड ब्लड सेल्स की कमी हो सकती है, जिसकी वजह से आयरन की कमी (iron deficiency) की समस्या हो सकती है। इसलिए क्रोहन रोग से पीड़ित अधिकांश मरीजों को अतिरिक्त आयरन सप्लीमेंट की जरूरत होती है।

विटमान बी 12(Vitamin B-12)- जिन लोगों को आंत में गंभीर सूजन की समस्या होती है और जिनका छोटी आंत का निचला हिस्सा (ileum) निकाल दिया जाता है, उऩ्हें विटामिन बी 12 इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।

फॉलिक एसिड (Folic Acid)- क्रोहन रोग से पीड़ित कई मरीज इसके लक्षणों के इलाज के लिए सल्फासालजीन (sulfasalazine) लेते हैं और यह दवा शरीर की फोलेट को मेटाबोलाइज करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए ऐसे मरीजों के लिए फॉलिक एसिड सप्लीमेंट (folic acid supplements) लेना जरूरी हो जाता है। जिन लोगों को छोटी आंत के मध्य हिस्से गंभीर क्रोहन रोग होता है उन्हें भी फॉलिक एसिड सप्लीमेंट (Folic Acid supplement) की जरूरत होती है।

विटामिन ए, डी, ई और के (Vitamins A, D, E, and K)- जब मरीज का शरीर फैट को अवशोषित नहीं कर पाता है या छोटी आंत में सूजन की समस्या होती है तो शरीर में इन विटामिन्स की कमी हो सकती है, इसलिए इनके सप्लीमेंट की जरूरत पड़ती है। कोलेस्टिरमाइन (cholestyramine) नामक दवा लेने वाले मरीजों में विटामिन डी की गंभीर कमी हो सकती है, क्योंकि यह दवा विटामिन डी के अवशोषण में बाधा पहुंचाती है।

और पढ़ें : कहीं आपके बच्चे में तो नहीं है इन पोषक तत्वों की कमी?

जिंक (Zinc)- क्रोहन रोग (Crohn’s disease) से पीड़ित मरीज को जिंक सप्लीमेंट (zinc supplements) की जरूरत पड़ती है यदि उन्हें निम्न समस्याएं हैं-

  • बहुत अधिक सूजन
  • लंबे समय से डायरिया (chronic diarrhea)
  • छोटी आंत का मध्य हिस्सा (jejunum) निकाल दिया गया हो
  • प्रेडनिसोन (prednisone) ले रहा हो

इन सब कारणों से शरीर सही तरह से जिंक को अवशोषित (absorb) नहीं कर पाता है।

कैल्शियम (Calcium)- स्टेरॉयड (Steroids) लेने के कारण कैल्शियम का अवशोषण बाधित होता है। इसलिए क्रोहन डिसीज के उपचार के लिए स्टेरॉयड लेने वालों को अपनी डायट में कैल्शियम की अतिरिक्त मात्रा शामिल करने की जरूरत है।

मैगनीशियम (Magnesium)- जिन लोगों को लंबे समय से डायरिया है या जिनकी छोटी आंत का निचला या मध्य हिस्सा निकाल दिया गया है, उन्हें मैग्नीशियम के अवशोषण में दिक्कत होती है। यह मिनरल हड्डियों के विकास और शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी है। ऐसे में मरीज को इसके सप्लीमेंट की जरूरत पड़ती है।

पोषक तत्वों का अवशोषण न होने के लक्षण (Symptoms of malabsorption)

मालएब्जॉर्प्शन (malabsorption) ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज का शरीर पोषक तत्वों को पर्याप्त मात्रा में अवशोषित नहीं कर पाता है और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। आमतौर पर क्रोहन रोग में ऐसा होता है, लेकिन क्रोहन रोग से पीड़ित सभी मरीजों में मालएब्जॉर्प्शन के लक्षण दिखना जरूरी नहीं ऐसे में मरीज को पोषक तत्वों की कमी के लिए नियमित रूप से जांच कराने की जरूरत है। जिन लोगों में इसके लक्षण दिखते हैं, उसमें शामिल है-

  • ब्लोटिंग (bloating)
  • गैस (gas)
  • पेट में मरोड़ (stomach cramping)
  • भारी या फैटी मल (bulky or fatty stools)
  • लंबे समय से डायरिया (chronic diarrhea)

मालएब्जॉर्प्शन (malabsorption) के गंभीर मामलों में थकान और अचानक से वजन कम (weight loss) होना भी शामिल है।

और पढ़ें : शिशु के विकास में देरी के कारण क्या होते हैं? जान लीजिए इसका इलाज भी

मालएब्जॉर्प्शन का उपचार (Treatments for Malabsorption)

पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग- Nutritional Deficiencies and Crohn’s Disease

पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन डिसीज का गहरा संबंध है, क्योंकि इस रोग में शरीर पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता है और मालएब्जॉर्प्शन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसका उपचार करने की जरूरत है।

इस समस्या के उपचार के लिए मरीज के शरीर में जिन पोषक तत्वों की कमी (Nutritional Deficiencies) है उसे फूड या डायट्री सप्लीमेंट से पूरा किया जाता है। मालएब्जॉर्प्शन (Malabsorption) के उपचार के लिए कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करना भी बहुत जरूरी है। कई खाद्य पदार्थ गैस और डायरिया (diarrhea) की स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं, हालांकि हर व्यक्ति के शरीर में इसका अलग तरह से असर होता है, फिर भी निम्न खाद्य पदार्थ समस्या को बढ़ा सकते हैं-

  • बीन्स (beans)
  • सीड्स (seeds)
  • ब्रोकोली (broccoli)
  • पत्तागोभी (cabbage)
  • खट्टे फल (citrus foods)
  • तले हुए पदार्थ (fried foods)
  • मसालेदार भोजन (spicy foods)
  • फैट वाले फूड

जिन लोगों को इंटेस्टाइनल ब्लॉकेज (intestinal blockage) की समस्या हैं उन्हें हाई फाइबर फूड (high-fiber foods) जैसे कच्चे फल और सब्ज़ियों (जैसे बीन्,, पत्तागोभी, खट्टे फल, ब्रोकोली) से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। क्रोहन रोग (Crohn’s disease) से पीड़ित व्यक्ति को हेल्दी और बैलेंस डायट (balance diet) लेने की सलाह दी जाती है, जिससे विटामिन्स और मिनरल्स का अवशोषण ठीक तरह से हो सके।

और पढ़ें : अल्सरेटिव कोलाइटिस – बच्चों में क्यों होती है यह समस्या?

क्या क्रोहन रोग डायट से संबंधित है? (Is Crohn’s disease related to diet)

क्रोहन रोग किसी खाद्य पदार्थ की वजहसे नहीं होता और न ही इसके ट्रीटमेंट में किसी खास डायट से मदद मिलने के कोई सबूत है। हालांकि कुछ फूड ऐसे जरूर हैं जो कुछ मरीजों में रोग के लक्षणों को बढ़ा देते हैं। खासतौर पर हाई डायट्री फाइबर (high dietary fibre), फैटी फूड, कार्बोनेटेड पेय पदार्थ और डेयरी प्रोडक्ट्स (Dairy products)। इसलिए इनसे परहेज की सलाह दी जाती है। बेहतर होगा कि इस संबंध में डॉक्टर से सलाह लें और प्रोफेशनल डायटिशियन की मदद से अपना डायट प्लान तैयार करें।

क्रोहन रोग के लिए हेल्दी ईटिंग टिप्स (Healthy eating tips for Crohn’s disease)

यदि आपको क्रोहन रोग है तो बेहतर होगा कि रजिस्टर्ड डायटिशियन से कंसल्ट करके अपना स्पेशल डायट प्लान बनाएं और उसे फॉलो करें। वैसे क्रोहन रोग (Crohn’s disease ) के मरीजों को इन बातों का भी ध्यान रखने की जरूरत है-

  • एक बार में कम खाएं, 3-4 घंटे के अंतराल पर थोड़ा भोजन या स्नैक्स लें। खुद को हाइड्रेट रखें। थोड़ा-थोड़ा पानी पूरे दिन पीते रहें।
  • जब आपको रोग के लक्षण नहीं दिख रहे हैं तो अपनी डायट में साबूत अनाज और अलग-अलग तरह के फल और सब्ज़ियों को शामिल करें, लेकिन कम मात्रा में।
  • जब आपको डायरिया या पेटदर्द जैसे लक्षण दिखने लगे तो डायटिशियन के बताए फूड लिस्ट को ही फॉलो करें। ऐसे में हाई फाइबर (high fiber), फैटी फूड (fatty food), कच्चे फल व सब्जियां, कैफीन आदि से परहेज करें।

और पढ़ें : बच्चों के लिए विटामिन्स की जरूरत और सप्लीमेंटस के बारे में जानिए जरूरी बातें

क्रोहन रोग से बचने के उपाय (How to prevent Crohn’s Disease)

क्रोहन रोग एक प्रकार का इंफ्लेमेटरी बाउल डिसिज (inflammatory bowel disease) यानी आंत से जुड़ी बीमारी है। इससे बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • स्मोकिंग (smoking) से परहेज करें
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज या योग करें
  • बैलेंस डायट लें
  • आयरन की कमी न होने दें
  • नॉनस्टेरॉइडल एंटी इंफ्लामेटरी दवाइयों के सेवन से बचें, यह क्रोहन रोग के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।

क्रोहन रोग (Crohn’s Disease) आंत से जुड़ी गंभीर बीमारी है जिसमें शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। यह समस्या बढ़ने पर मरीज कुपोषण (malnutrition) का भी शिकार हो सकता है, इसलिए पोषक तत्वों की कमी और क्रोहन रोग की समस्या से बचने के लिए आंत को स्वस्थ रखना जरूरी है।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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