home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

पाचन तंत्र को करना है मजबूत तो अपनाइए आयुर्वेद के ये सरल नियम

पाचन तंत्र को करना है मजबूत तो अपनाइए आयुर्वेद के ये सरल नियम

दैनिक तनाव और अनहेल्दी फूड हैबिट्स, अनियमित समय पर खाना, बहुत अधिक खाना या चलते-फिरते खाना, हमारे खराब पाचन तंत्र का कारण बनता है। नतीजतन, हम में से अधिकांश लोग गैस, पेट फूलना, अपच, पेट दर्द और दस्त जैसे लक्षणों का सामना करते हैं। शोध से पता चलता है कि लगभग 74 प्रतिशत अमेरिकी आबादी गैस्ट्रिक डिस्कंफर्ट के साथ रहती है। आयुर्वेद के अनुसार, खराब पाचन और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) प्रॉबल्म मुख्य रूप से पाचन प्रणाली में कम अग्नि या डायजेस्टिव सिस्टम की वजह से होती है। बेहतर पाचन के लिए आयुर्वेद (Ayurvedic treatment for Digestion) में कई उपाय बताए गए हैं। ‘हैलो स्वास्थ्य’ के इस आर्टिकल में पाचन के लिए आयुर्वेद उपाय बताए जा रहे हैं। आइए जानते हैं पाचन मजबूत करने के आयुर्वेदिक उपाय।

बेहतर पाचन के लिए आयुर्वेद (Ayurvedic treatment for Digestion)

पाचन के लिए आयुर्वेद (Ayurvedic treatment for Digestion)

आयुर्वेद के अनुसार, जो लोग आहार संबंधी नियमों का पालन नहीं करते और बिना आत्म नियंत्रण के भोजन का सेवन करते हैं, वे अजीर्ण (अपच) के शिकार हो जाते हैं। इससे शरीर में विभिन्न बीमारियां होने लगती हैं। आयुर्वेद में पाचन प्रक्रिया को तेजस (बुद्धि), ओजस (जीवन शक्ति) और प्राण (जीवन-शक्ति) की अच्छी गुणवत्ता के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पाचन प्रक्रिया एक व्यापक शब्द है, जिसमें हमारे भोजन का सकल पाचन, तत्वों का पाचन (शुगर, अमीनो एसिड, वसा), सेलुलर मेटाबॉलिज्म, साथ ही सेंसरी इनपुट्स, थॉट्स और आइडियाज का पाचन शामिल है। स्वस्थ पाचन क्रिया भोजन को अच्छे पोषण में परिवर्तित करने के लिए महत्वपूर्ण होती है, जो अपशिष्ट पदार्थों को अलग करके बाहर निकालती है।

और पढ़े : Digestive Disorder: जानिए क्या है पाचन संबंधी विकार और लक्षण?

आयुर्वेद के अनुसार अपच क्या है?

आयुर्वेद में अग्नि (डायजेस्टिव फायर) को लाइफ सोर्स के रूप में देखा जाता है। यह आपके अच्छे पाचन और चयापचय कार्यों के लिए बेहद जरूरी आयुर्वेदिक एलिमेंट है। आप जो खाते हैं वह इस अग्नि को पोषण देता है और इसे मजबूत करता है। इसलिए संतुलित आहार आपके पाचन तंत्र को मजबूत कर सकता है। वहीं, अस्वथ्य भोजन डायजेस्टिव सिस्टम को कमजोर कर सकता है या असंतुलित अग्नि का कारण बन सकता है। भोजन को पचाने या उचित पाचन की कमी में एक असामान्यता को अपच (Dyspepsia) कहा जाता है। अपच, गैस्ट्रो-इन्टेस्टाइनल विकारों की एक वजह बन सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, हानिकारक खाद्य पदार्थ, जैसे कि तले हुए खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड मीट और बहुत ठंडे खाद्य पदार्थ, ऐसे अपचित अवशेषों का निर्माण कर सकते हैं, जो टॉक्सिन्स बनाते हैं। इसे आयुर्वेदिक शब्दों में “अमा” कहा जाता है। यह अमा कई बीमारियों का मूल कारण है।

और पढ़े : आयुर्वेद और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के बीच क्या है अंतर? साथ ही जानिए इनके फायदे

पाचन के लिए आयुर्वेद : पाचन शक्ति कमजोर होने के लक्षण क्या हैं?

  • सीने में जलन होना,
  • कब्ज होना,
  • भूख कम लगना,
  • थकावट महसूस होना,
  • भोजन के बाद असहज महसूस करना,
  • स्टूल पास करने में परेशानी होना
  • काले रंग का स्टूल,
  • पेट के ऊपरी हिस्से में सूजन,
  • अपच होना आदि।

और पढ़े : कैसे शरीर को प्रभावित करता है बैक्टीरियल गैस्ट्रोएंटेराइटिस?

पाचन के लिए आयुर्वेद : खराब पाचन तंत्र के कारण क्या हैं?

कमजोर पाचन तंत्र के कई संभावित कारण हैं और यह अक्सर असंतुलित जीवनशैली से संबंधित होता है। कमजोर पाचन तंत्र के सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • ज्यादा खाना या जल्दी-जल्दी खाना
  • वसायुक्त, चिकना या मसालेदार भोजन
  • बहुत अधिक कैफीन, शराब, चॉकलेट या कार्बोनेटेड पेय
  • धूम्रपान
  • स्ट्रेस

कभी-कभी अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, जिसमें शामिल हैं:

और पढ़ें : कब्ज का आयुर्वेदिक उपचार : कॉन्स्टिपेशन होने पर क्या करें और क्या नहीं?

पाचन के लिए आयुर्वेद : पाचन तंत्र मजबूत करने के आयुर्वेदिक उपाय

पाचन तंत्र मजबूत करने के उपाय में शामिल करें धनिया

आयुर्वेदिक औषध विज्ञान और वैदिक चिकित्सा में बड़े पैमाने पर धनिया का इस्तेमाल किया जाता है। धनिया के बीज की तासीर ठंडी होती है और ये दानें अपने पाचक गुणों के लिए जाने जाते हैं। धनिया शरीर में अतिरिक्त गर्मी और एसिड को ठंडा करता है और एक नेचुरल कार्मिनेटिव (एक ऐसा पदार्थ है जो हमारे पाचन तंत्र से गैस को खत्म करता है) माना जाता है। इस कारण से, यह इर्रिटेबल बाउल डिजीज (IBD), रिफ्लक्स और एसिडिटी को कम करने में विशेष रूप से उपयोगी है।

और पढ़ें : पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं ये टिप्स फॉलो करना

पाचन तंत्र मजबूत करने का एक उपाय- जीरा

कमजोर पाचन शक्ति को मजबूत करने के लिए जीरा काफी फेमस है। जीरा पाचन को बढ़ाता है और गैस, जी मिचलाना, ब्लॉटिंग और पेट की जलन को कम करता है। यह ब्लड स्ट्रीम में पोषक तत्वों के अवशोषण को तेज करता है और बड़ी आंत में पानी के अवशोषण में मदद करके दस्त को कम करता है।

और पढ़ें : पेट की खराबी से राहत पाने के लिए अपनाएं यह आसान घरेलू उपाय

पाचन तंत्र मजबूत करने का एक उपाय- अदरक

बेहतर पाचन के लिए आयुर्वेद में अदरक का इस्तेमाल खूब किया जाता है। यह कम हुई डायजेस्टिव फायर को बढ़ाने और स्वस्थ पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी बूटी है। अदरक एक त्रिदोषज जड़ी बूटी (Tri-doshic herb) है। मतलब यह वात, पित्त और कफ को संतुलित करती है। अदरक को उसके उत्तेजक गुण की वजह से जाना जाता है। इसे मांसपेशियों में दर्द और स्वस्थ रक्त परिसंचरण में मदद करने के लिए जाना जाता है। यह विशेष रूप से मतली, पेट फूलना, हिचकी और एसिड रिफ्लक्स (Acid reflux) को कम करने के लिए उपयोगी है।

और पढ़ें : एसिडिटी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें क्या करें क्या नहीं

पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए करें सौंफ का सेवन

सौंफ के नाजुक और सुगंधित बीज अपने पाचक गुणों के लिए जाने जाते हैं। गैस और ब्लॉटिंग से राहत देने के अलावा सौंफ मतली और एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मददगार है। सौंफ एक प्राकृतिक एंटीस्पास्मोडिक (Antispasmodic) है, यही वजह है कि इसका उपयोग बाउल टेंशन (Bowel tension) और पेट के निचले हिस्से में दर्द (Abdominal pain) को कम करने के लिए किया जाता है। सौंफ बिना पित्त को बढ़ाए पाचन अग्नि को बढ़ाने में विशेष रूप से प्रभावी है।

और पढ़ें : गुस्से का प्रभाव बॉडी के लिए बुरा, हो सकती हैं पेट व दिल से जुड़ी कई बीमारियां

पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए आंवला

आंवला पेट के लिए बेहद ही गुणकारी है। आंवला पाउडर को एक कप पानी में मिलाएं और खाली पेट इसका सेवन करें। मजबूत पाचन शक्ति के लिए यह बहुत ही अच्छी आयुर्वेदिक रेमेडी है।

और पढ़ें : अपच ने कर दिया बुरा हाल, तो अपनाएं अपच के घरेलू उपाय

पाचन के लिए आयुर्वेद में इलायची का महत्व

इलायची, जिसे ‘सभी मसालों की रानी’ के रूप में भी जाना जाता है, साधारण खाद्य पदार्थों के स्वाद को बढ़ाने के साथ ही पाचन को भी दुरुस्त करती है। यह कई तरह के फूड्स से अम्लीय प्रभावों को कम करती है। इसी तरह, यह अक्सर दूध उत्पादों और मिठाइयों में सुगंधित स्वाद और पाचन गुणों के लिए इस्तेमाल की जाती है।

और पढ़ें : यूरिक एसिड डाइट लिस्ट से इन फूड्स को कहें हाय, तो हाई-प्यूरीन फूड्स को कहें बाय-बाय

एलोवेरा

पाचन शक्ति को दुरुस्त करने के लिए एलोवेरा का सेवन करे। इसके सेवन से सभी तरह के पाचन सम्बन्धी रोग दूर होते हैं, जिसमें पेट का अल्सर भी शामिल है। एलोवेरा जेल को पानी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।

और पढ़ें : लॉकडाउन और क्वारंटीन के समय कब्ज की समस्या से परेशान हैं? इन उपायों से पाएं छुटकारा

त्रिफला

मजबूत डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए त्रिफला (आंवला, हरड़ और बहेड़ा) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कमजोर पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन खाली पेट करने की सलाह दी जाती है। तीन जड़ी-बूटियों का यह मिश्रण आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को स्ट्रॉन्ग करने के साथ ही कब्ज से निजात दिलाता है।

और पढ़ें : पेट की परेशानियों को दूर करता है पवनमुक्तासन, जानिए इसे करने का तरीका और फायदे

हल्दी

हल्दी, पाचन तंत्र के लिए पाचन अग्नि में मदद करती है और शरीर में ऊतकों में जमा विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करती है। यह जीआई ट्रैक्ट में बिना पचे भोजन के निर्माण को कम करने काम करती है। अपने एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण, हल्दी पेट और आंतों में रोगजनक बैक्टीरिया को रोकने में मदद करती है और अपच, पेट के अल्सर और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम को ठीक करने में मदद करती है। हालांकि, हल्दी का उपयोग कम मात्रा में किया जाना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह पित्त को बढ़ा सकती है।

और पढ़ें : Inflammatory Bowel Disease (IBD): इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार

मजबूत पाचन तंत्र का इलाज आयुर्वेदिक थेरिपी द्वारा

कमजोर पाचन शक्ति को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक थेरिपी इस प्रकार हैं –

पाचन तंत्र मजबूत करने के उपाय : सर्वांग स्वेदन

इस आयुर्वेदिक थेरेपी में स्वेद यानी पसीने के द्वारा शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को दूर किया जाता है, जिसकी वजह से पाचन शक्ति मजबूत बनती है।

और पढ़ें : डिटॉक्स टी आज ट्रेंड में है, इंटरनेशनल टी डे पर जानें इसके फायदे और साइड इफेक्ट्स

पाचन तंत्र मजबूत करने के उपाय : शोधन

मजबूत पाचन शक्ति के लिए शोधन आयुर्वेदिक चिकित्सा (बायो-क्लींजिंग थैरेपी) के बाद शमन थेरेपी की भी सलाह दी जाती है। शरीर में अम्ल को संतुलित करके पेट में जलन आदि से निजात दिलाने में यह थेरेपी कारगर होती है।

और पढ़ें : क्या आप महसूस कर रहे हैं पेट में जलन? इंफ्लमेटरी बाउल डिजीज हो सकता है कारण

पाचन तंत्र मजबूत करने के उपाय : विरेचन कर्म

विरेचन शरीर को डिटॉक्स करने की एक आयुर्वेदिक थेरेपी है। इसमें कई तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। पेट में मौजूद एक्स्ट्रा एसिड को इससे निकालने में मदद मिलती है।

और पढ़ें : डिटॉक्स डायट प्लान को फॉलो कर भी घटा सकते हैं वजन, रहेंगे तरो-ताजा भी

पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक दवा

  • शंख वटी की 250-500 मिलीग्राम को शहद / गर्म पानी / छांछ (Buttermilk) के साथ 7-10 दिन का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • हिंगवास्तका चूर्ण की 1.5-3 ग्राम मात्रा को घी या गुनगुने पानी के साथ 7-10 दिन तक लेने से अपच की समस्या दूर होती है।
  • कमजोर पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए संजीविनी वटी की 125 मि.ग्रा को गर्म पानी के साथ 7 से 10 दिन तक इस्तेमाल करें।

नोट: ऊपर बताई गई किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर या हर्बलिस्ट की सलाह से ही किया जाना चाहिए। उपचार की अवधि और दवा की खुराक हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है।

और पढ़ें : बॉडी के लिए क्यों जरूरी है डिटॉक्स वॉटर, जानिए इसके 5 फायदे

पाचन के लिए आयुर्वेद : पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए योग (Yoga for digestive system)

निम्नलिखित योगाभ्यास अपच में फायदेमंद होते हैं। हालांकि, इन्हें केवल योग चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।

1. सूर्य नमस्कार, कटिचक्रासन, भुजंगासन, धनुरासन, वज्रासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन आदि।

2. प्राणायाम (अनलोम-विलोम, भस्त्रिका)।

और पढ़ें : पेट के लिए लाभदायक सेतुबंधासन करने का आसान तरीका, फायदे और सावधानियों के बारे में जानें

मजबूत पाचन के लिए आयुर्वेदिक टिप्स

स्वस्थ खाएं : दिन में तीन बार भोजन करें

  • आयुर्वेद में मील्स को स्किप करने की मनाही है, क्योंकि ये डाइजेस्टिव रिदम को बाधित कर सकता है। हैवी ब्रेकफास्ट, पर्याप्त लंच और हल्का डिनर आपकी डाइजेस्टिव फायर को सही बनाए रखने के लिए अच्छा होता है।
  • जैसे ही आप उठते हैं, एक कप गर्म पानी में एक बड़ा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे टॉक्सिन्स को रिलीज करने में मदद मिलती है और डाइजेस्टिव ट्रैक्ट साफ होता है। मिड मॉर्निंग ब्रेकफास्ट के लिए, ताजे फल का सेवन करें।
  • आयुर्वेद के हिसाब से दोपहर के भोजन में दो या तीन प्रकार की सब्जियां शामिल करनी चाहिए, जिनमें से एक पत्तेदार हरी सब्जी होनी चाहिए; एक कटोरी दाल, एक छोटी सर्विंग गर्म सूप, ताजा दही आदि।
  • डिनर के लिए एक छोटी मील लें। सब्जी / दाल के सूप के साथ एक चपाती लें।

हाइड्रेट रखें खुद को

  • दिन में बहुत सारा शुद्ध पानी पिएं, लेकिन भोजन के साथ पानी या पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
  • आइस्ड, कार्बोनेटेड या कैफीन युक्त पेय पदार्थ न लें और भोजन के साथ एल्कोहॉल और दूध के सेवन से बचें।
  • रात में बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन आपके पाचन को दुरुस्त रखेगा।

और पढ़ें : Not Chewing Food Well: भोजन को अच्छी तरह न चबाना क्या है?

अपने भोजन का सेवन समय पर करें

रोजाना लगभग एक ही समय पर खाएं। सोने और जागने के चक्र की तरह ही आपका पाचन भी नियमित दिनचर्या से लाभान्वित होगा।

और पढ़ें : कोरोना वायरस (Covid -19) से बचाएगी कीटो डायट (Keto diet) : जानें Ketogenic आहार के बारे में डायटीशियन ने क्या कहा?

गलत फूड कॉम्बिनेशन से बचें

बेहतर पाचन के लिए आयुर्वेद में कुछ खाद्य संयोजनों की रूपरेखा दी गई है। इनके विपरीत कुछ गलत फूड कॉम्बिनेशन शरीर में अमा को बढ़ाते हैं। जैसे-

  • दूध का सेवन नमकीन या खट्टे पदार्थों के साथ नहीं किया जाना चाहिए।
  • खरबूजे को भारी भोजन जैसे पनीर, तले हुए खाद्य पदार्थ या भारी अनाज के साथ नहीं खाना चाहिए।
  • सामान्य तौर पर फलों का सेवन अकेले ही किया जाना चाहिए क्योंकि ये बहुत जल्दी पच जाते हैं।
  • दूध के साथ मांस या मछली नहीं लेनी चाहिए।
  • शहद को कभी भी गर्म करना या पकाना नहीं चाहिए।

नोट: यदि आप ऊपर दिए गए भोजन दिशानिर्देशों और भोजन सुझावों का पालन करते हैं, तो आप सबसे असंगत खाद्य संयोजनों से बचेंगे।

और पढ़ें : दूध-ब्रेड से लेकर कोला और पिज्जा तक ये हैं गैस बनाने वाले फूड कॉम्बिनेशन

भोजन की तैयारी और सर्विंग पर दें ध्यान

  • अपना भोजन प्यार और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ तैयार करें। आयुर्वेद के हिसाब से हर चीज कनेक्टेड है। वैदिक परंपरा में, लोग खाना बनाने से पहले नहाते थे और अग्नि को धन्यवाद देते थे।
  • जब आप परेशान हों या तनावग्रस्त हों, तो भोजन तैयार ना करें या खाना न खाएं। क्योंकि आपका लिवर और पाचनतंत्र नकारात्मक भावनाओं से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है और उस भोजन को कुशलता से पचा नहीं पाएगा।
  • अपने घर या कार्यस्थल में खाने के लिए निर्धारित क्षेत्र या कमरे में खाएं।
  • सुनिश्चित करें कि भोजन करने के समय जरूरत का सामान आपके पास हो ताकि आप बीच में उठे नहीं।
  • माइंडफुल ईटिंग (mindful eating) की आदत डालें : मल्टी टास्किंग करते हुए खाना खाने की आदत अक्सर लोगों में देखी जाती है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है, जिनसे बचा जा सकता है। शांत वातावरण में माइंडफुल ईटिंग का अभ्यास करें।

और पढ़ें : क्या हैं ईटिंग डिसऑर्डर या भोजन विकार क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

माइंडफुल ईटिंग के लिए अन्य आदतें

  • जब आप भोजन करते हैं तो फोन पर बात न करें।
  • टेलीविजन न देखें।
  • भोजन को निगलने से पहले खूब चबाएं।
  • भोजन के दौरान गर्म पानी के कुछ घूंट पाचन में मदद करेंगे, लेकिन किसी भी पेय का बहुत अधिक सेवन न करें।
  • भोजन करने के बाद, कुछ मिनट के लिए चुपचाप बैठें।

और पढ़ें : गर्म पानी के साथ शहद और नींबू लेने से बढ़ती है इम्युनिटी, जानें इसके फायदे

पर्याप्त नींद लें

अच्छे पाचन के लिए आयुर्वेद के अनुसार पर्याप्त नींद लें। जब हम सो रहे होते हैं तब केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और पाचन कार्य रेस्ट और डाइजेस्ट मोड पर पीक पर होता है, इसलिए हर रात आठ घंटे की नींद लेना महत्वपूर्ण है।

और पढ़ें : तामसिक छोड़ अपनाएं सात्विक आहार, जानें पितृ पक्ष डायट में क्या खाएं और क्या नहीं

भोजन के बाद टहलें

भोजन के बाद कम से कम 15 से 20 मिनट तक टहलना पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes) वाले लोगों के लिए, खाने के बाद रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है। खड़े होकर खाना न खाएं इससे पाचन शक्ति कमजोर होती है।

हेल्दी रहने के लिए डायजेशन का दुरुस्त रहना बेहद ही जरूरी है। आयुर्वेद के नियमों का पालन करके डायजेस्टिव सिस्टम (Digestive health) को सुधारा जा सकता है। इसके लिए खाने के नियमों का पालन करने के साथ ही नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।

health-tool-icon

बीएमआर कैलक्युलेटर

अपनी ऊंचाई, वजन, आयु और गतिविधि स्तर के आधार पर अपनी दैनिक कैलोरी आवश्यकताओं को निर्धारित करने के लिए हमारे कैलोरी-सेवन कैलक्युलेटर का उपयोग करें।

पुरुष

महिला

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

How to Improve Your Digestion: Discover 6 Miracle Ayurvedic Herbs to Boost Gut Health. https://www.artofliving.org/us-en/how-to-improve-digestion-with-ayurvedic-herbs. Accessed On 17 Sep 2020

Ajirna (Indigestion). https://www.nhp.gov.in/ajirna-indigestion_mtl. Accessed On 17 Sep 2020

digestion. https://www.betterhealth.vic.gov.au/searchresults?q=digestion%20. Accessed On 17 Sep 2020

AYURVEDIC TIPS FOR HEALTHY DIGESTION. https://www.ayush.com/ayurvedic-tips-for-healthy-digestion. Accessed On 17 Sep 2020

Ayurvedic Wisdom for Better Digestion. https://kripalu.org/resources/ayurvedic-wisdom-better-digestion. Accessed On 17 Sep 2020

Anti-Oxidative and Anti-Inflammatory Effects of Ginger in Health and Physical Activity: Review of Current Evidence. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3665023/. Accessed On 17 Sep 2020

Effects of ginger on gastric emptying and motility in healthy humans. https://journals.lww.com/eurojgh/Abstract/2008/05000/Effects_of_ginger_on_gastric_emptying_and_motility.11.aspx. Accessed On 17 Sep 2020

 

 

 

लेखक की तस्वीर badge
Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/01/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
x