बर्थ ऑर्डर का असरः बड़ा होगा परफेक्शनिस्ट तो छोटा होगा मस्त

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

बच्चों का बर्थ ऑर्डर उनके व्यवहार के बारे में बहुत कुछ बताता है। अलग बर्थ ऑर्डर के बच्चों में कुछ समानताएं तो होती है। लेकिन, कुल मिलाकर ये एक दूसरे से एकदम अलग होते हैं। जैसे कि सिंगल चाइल्ड को अपनी चीजें शेयर करने में परेशानी होती है। सबसे बड़ा बच्चा बॉसी यानि की अपनी चलाने वाला होता है। वहीं, सबसे छोटे बच्चे को हमेशा वो मिलता है, जो वह चाहता है और बीच का बच्चा बीच में ही अटका रह जाता है मतलब उनमें धैर्य और शालीनता होती है। क्या ये महज धारणाएं है या बर्थ ऑर्डर में सच में बच्चों के व्यवहार पर असर पड़ता है?

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इस बारे में फ्रैंक सलोवे, पीएचडी और बोर्न टू रेबेल (पेंथियन) के लेखक कहते हैं कि बर्थ ऑर्डर केवल एक छोटा सा हिस्सा है, जो बताता है हम कैसे हैं, लेकिन भाई-बहनों में पर्सनालिटी में अंतर होना बहुत सामान्य बात है। एक्सपर्ट कहते हैं बर्थ ऑर्डर के हिसाब से भाई-बहन अपनी भूमिकाओं को अपनाते हैं, जिससे व्यवहार में अंतर आता है। न केवल बच्चे बल्कि माता-पिता इन भूमिकाओं को बच्चों में डालते हैं और कई बार वे इसे महसूस नहीं करते। हम आपको बताएंगे कि कैसे सिंगल चाइल्ड, सबसे बड़े, सबसे छोटे या बीच के बच्चे के व्यक्तित्व के अंतर को कैसे समझा जाए।

सबसे बड़े बच्चे की विशेषताएं

बर्थ ऑर्डर के हिसाब से सबसे बड़ा बच्चा अपने माता-पिता की जिम्मेदारियों को समझता है और उनके नियमों को फॉलो करता है। इसलिए उनमें एक स्थिरता होती है और वे अपना कार्यभार संभालना पसंद करते हैं और उनमें आत्मविश्वास की भावना होती है।  The Birth Order Book: Why You Are the Way You Are (Revell)  के लेखक  केविन लिमेन, कहते हैं कि जब वे अपने जूते बांधना सीखते हैं या बाइक चलाना सीखते हैं, तो उन्हें चिढ़ाने के लिए उनके बड़े भाई-बहन नहीं होते हैं। घर के अडल्ट उन्हें गंभीरता से लेते हैं और इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। जब माता-पिता बड़े भाई-बहन को आगे बढ़ाने पर जोर देते हैं, तो यह उन्हें मोटिवेट करता है।

घर का पहला बच्चा ज्यादातर महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ परफेक्शनिस्ट भी होता है। इन परफेक्शनिस्ट बच्चों के सबसे सामान्य पहचान यह है कि वो गलत होने पर भी अपनी गलती नहीं मानते। उनके अंदर परफेक्ट होने का व्यवहार इतना ज्यादा होता है कि वो जल्दी से अपनी गलती नहीं मानते। इसकी वजह से बच्चों को ओल्डेस्ट चाइल्ड सिंड्रोम(Oldest Child syndrome)  हो सकता है, जिसमें वह अपने बॉसी नेचर को सही ठहराता है।

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बर्थ ऑर्डर में पहले बच्चे की पेरेंटिंग कैसे करेंः

  • माता-पिता को पहले बच्चे पर अधिक जिम्मेदारी देने से बचना चाहिए। उन्हें पहले बच्चे को ये बिल्कुल नहीं कहना चाहिए कि उनके छोटे भाई-बहन उनसे सीखेंगे।
  • जब आप अपने बड़े बच्चे को अधिक जिम्मेदारियां दे रहे हों, तो उन्हें कुछ और विशेष अधिकार भी दें जैसे कि बड़े बच्चे को अधिक सोने का समय।

मिडिल ऑर्डर के बच्चे की खूबियां

बर्थ ऑर्डर में बीच में पैदा हुए बच्चे अक्सर बड़े भाई-बहनों की तुलना में पूरी तरह से अलग होते हैं। एक बार जब घर में एक बड़े बच्चे की जगह ली जा चुकी हो, तो दूसरे नंबर पर पैदा होने वाले बच्चे में उसका व्यवहार बड़े से एकदम अलग होता है। डॉ लेमन कहते हैं दूसरे या मिडिल बच्चे को लेबल करना कठिन हो जाता है क्योंकि इस बच्चे में पेरेंट्स बड़े बच्चे की छाप देखना चाहते हैं। यदि बड़े भाई-बहन को माता-पिता पसंद करते हैं, तो मिडिल ऑर्डर का बच्चा उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर सकता है। मिडिल बर्थ ऑर्डर के बच्चों की श्रेणी बताना आसान नहीं है। लेकिन वह बड़े बच्चे के नक्शे कदम पर चलते हैं। उनकी नजर में बड़े भाई-बहन को सारी सुविधाएं मिलती हैं इसलिए मिडिल ऑर्डर के बच्चे जो चाहते हैं उसे पाने के लिए बात-चीत करना सीखते हैं, जो उन्हें धैर्य रखने में मदद करता है।

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मिडिल ऑर्डर के बच्चे की देखभाल कैसे करेंः

  • मिडिल ऑर्डर के बच्चे माता-पिता का जीवन आसान बनाते हैं। इसलिए माता-पिता को उनके ऊपर भी ध्यान देना चाहिए।
  • उसके लिए नए दोस्तों की जरुरत का सम्मान करें। पार्क में या प्ले डेट्स पर नए दोस्तों से मिलने के लिए उसके लिए अवसर बनाएं।
  • मिडिल ऑर्डर के बच्चों को हमेशा माता-पिता का ध्यान शेयर करना पड़ता है। अपने मिडिल बर्थ ऑर्डर बच्चे को स्पेशल फील कराने के लिए उसके साथ थोड़ा अलग से समय बिताएं।

सबसे छोटे बच्चे की क्वालिटी

सबसे छोटे बच्चे के आने पर माता-पिता परिस्थितियों से निपटने के लिए अनुभवी हो जाते हैं। वे अब पहली बार माता-पिता बनने वाली घबराहट से नहीं जूझ रहे होते हैं। इसकी वजह से इन बच्चों पर बड़े भाई-बहनों की तरह जिम्मेदारियां नहीं होती। वो ज्यादा खुलकर रहते हैं, फन लविंग होते हैं और सोशल होते हैं। इन्हें लोगों से मिलना बातचीत करना बेहद पसंद होता है। ये बच्चे अपने ऊपर किसी चीज की टेंशन नहीं लेते। अपने बड़े भाई-बहनों की खूबियों की तुलना में सबसे छोटे बच्चों का व्यवहार थोड़ा अलग होता है।

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कैसे करें बर्थ ऑर्डर में सबसे छोटे बच्चे की परवरिश

  • लास्ट बॉर्न बच्चों के अंदर एक धारण होती है कि माता-पिता उन्हे सीरियश नहीं लेते। उन्हें ऐसा महसूस न हो इसके लिए उन्हें घर के फैसलों में हिस्सा लेने दें।
  • जब भी वह कुछ अच्छा करें तो उनकी तारीफ करें। उनके लिए छोटी-छोटी खुशियां मायने रखती हैं इसलिए उनकी हर बात को सुनें और समझें।
  • छोटे बच्चों को कुछ जिम्मेदारियां दें। चाहें वह जिम्मेदारियां छोटी ही क्यों ना हों। ऐसा करके उन्हें यह महसूस कराएं कि वह परिवार का अहम हिस्सा हैं।

बर्थ ऑर्डर का बच्चों पर बहुत असर पड़ता हैं। इसके लिए अलग-अलग बातें जिम्मेदार हैं। जैसे कि माता-पिता का उनके बच्चों के प्रति व्यवहार, रिश्तेदारों का बच्चों को उनके बर्थ ऑर्डर से आंकना। बच्चों के बर्थ ऑर्डर में होने वाला गैप भी इस व्यवहार के लिए जिम्मेदार है। हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में बर्थ ऑर्डर का क्या असर पड़ता है इससे जुड़ी हर जानकारी देने की कोशिश की है। यदि आपको इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी चाहिए तो आप हमसे कमेंट कर पूछ सकते हैं।

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