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दस्त का आयुर्वेदिक इलाज क्या है और किन बातों का रखें ख्याल?

परिचय |लक्षण |कारण |डायरिया की जांच|इलाज |घरेलू उपाय
दस्त का आयुर्वेदिक इलाज क्या है और किन बातों का रखें ख्याल?

परिचय

दस्त (डायरिया) को आयुर्वेद में अतिसार कहा जाता है। दस्त की समस्या किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें दस्त की परेशानी डायजेशन ठीक तरह से न होने के साथ-साथ पेट में होने वाले इंफेक्शन की वजह से होता है। इसके साथ ही अन्य शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों की वजह से भी दस्त की समस्या शुरू हो सकती है। इस आर्टिकल में समझेंगे दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) कैसे किया जाता है? दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) क्या है?

लक्षण

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज समझने से पहले दस्त के लक्षण क्या हैं?

दस्त के लक्षण निम्नलिखित हैं। जैसे-
इन लक्षणों के अलावा और भी लक्षण हो सकते हैं। लेकिन, इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

कारण

दस्त या डायरिया के कारण क्या हैं?

इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे:-
  • दूषित पानी या खाने का सेवन करना
  • बासी खाद्य पदार्थों का सेवन करना
  • अत्यधिक तेल मसाले में बना खाना खाना
  • जंक फूड का सेवन करना
  • आवश्यकता से ज्यादा पानी पीना
  • मानसिक परेशानी होना
  • कभी-कभी किसी डर के कारण भी दस्त की समस्या शुरू हो सकती है
छोटे बच्चे या नवजात शिशुओं में दस्त के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। जैसे:
  • स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त की परेशानी तब हो सकती है अगर मां तेल मसाले का सेवन ज्यादा करें
  • शिशु जिस बोतल से दूध पीता है, उसका ठीक तरह से साफ न होना
  • बच्चों का दूषित पानी का सेवन करना
  • बच्चे को जंक फूड ज्यादा खिलाना
इन कारणों के साथ-साथ अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए अगर कोई शारीरिक परेशानी महसूस होती है, तो उसे नजरअंदाज न करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) क्या है यह समझने की कोशिश करते हैं।

डायरिया की जांच

डायरिया का पता लगाने के लिए आपके डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे और आपकी मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार कारण का पता लगाएंगे। वह आप से लैब टेस्ट करवाने के लिए भी कह सकते हैं, जिसमें पेशाब (यूरिन) का टेस्ट और खून (ब्लड) का टेस्ट शामिल होता है।

इसके अलावा अन्य टेस्ट, जो आपके डॉक्टर आप से करवाने के लिए कह सकते हैं उनमें शामिल हैं –

फास्टिंग टेस्ट – इसकी मदद से डॉक्टर खाने के कारण होने वाली एलर्जी का पता लगाते हैं।

इमेजिंग टेस्ट – आंतों में सूजन और संरचनात्मक असमानताओं का पता लगाने के लिए।

स्टूल कल्चर – बैक्टीरिया, पैरासाइट या किसी अन्य रोग के संकेत के लिए।

कोलोंस्कॉपी – आंतों के रोग के लक्षणों का पता लगाने के लिए पूरे कोलन की जांच करना।

और पढ़ें: कभी सोचा नहीं होगा आपने धनिया की पत्तियां कब्ज और गठिया में दिला सकती हैं राहत

इलाज

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) क्या है?

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) निम्नलिखित तरह से किया जाता है:

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: बस्ती कर्म

बस्ती कर्म के दौरान कुछ जड़ी-बूटियों सौंफ, मुलेठी एवं तिल के तेल को गाय के ताजे दूध में मिलाया जाता है। अच्छी तरह से मिक्स होने के बाद अब इसका काढ़ा बनाया जाता है। यह पेट के लिए अच्छा होता है और इससे दस्त की परेशानी भी दूर होती है।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: विरेचन

विरेचन पाचन शक्ति को बेहतर बनाने के साथ-साथ दस्त की परेशानी को भी दूर करने में मददगार है। दस्त की परेशानी को दूर करने के लिए हरीतकी या पिप्पली से विरेचन कर्म किया जाता है। विरेचन कर्म वैसे आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से ही करवाना चाहिए, जिन्हें ये पूरी प्रक्रिया ठीक तरह से आती हो। विरेचन कर्म के बाद मरीज को कमजोरी महसूस हो सकती है।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: निदान परिवाचन

निदान परिवाचन के तहत आयुर्वेदिक एक्सपर्ट उन कारणों का पता लगाना चाहते हैं, जिनकी वजह से दस्त की समस्या शुरू हुई है। जैसे जरूरत से ज्यादा खाना, दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन करना या कोई अन्य कारण।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: शमन चिकित्षा

शमन चिकित्षा के अनुसार मरीज को अतिसार होने पर वैसे खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है, जो अच्छी तरह से डायजेस्ट हो सके।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: हरीतकी

हरीतकी (Haritaki) एक पौधा है, जिसके छाल को पीसकर दस्त होने पर सेवन करवाया जाता है। आयुर्वेदिक रिसर्च में बताया गया है की दूध या शहद में हरीतकी को मिलाकर सेवन करने से जल्दी स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: सेब का सिरका

रिसर्च के अनुसार सेब के सिरके में मौजूद पेक्टिन तत्व दस्त की परेशानी को दूर करने में सक्षम होता है और आंतों को रिलैक्स करने में मददगार होता है। वहीं सेब के सिरके में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण डायजेशन को बेहतर करने के साथ-साथ पेट दर्द या पेट में होने वाले इंफेक्शन से भी बचता है।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: अदरक

रोज के खाद्य पदार्थ या चाय जैसे पेय पदार्थों में अदरक का सेवन करते हैं। लेकिन, इसका सेवन सिर्फ यहीं तक सिमित नहीं है। दरअसल अदरक में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेशन गुण पाचन शक्ति को मजबूत रखने के साथ ही संक्रमण से भी बचाता है। इसलिए अदरक के रस में शहद को मिलाकर सेवन करने से अतिसार से निजात दिलाता है।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: जीरा

जीरा के छोटे-छोटे दानों में विटामिन-ई, विटामिन-बी, मैग्नेशियम आयरन और कई सारे डाइट्री मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो शरीर को फिट रखने का काम करते हैं। आयुर्वेदिक जानकार दस्त की परेशानी होने पर भुने जीरा का पाउडर और ताजे दही के साथ मिलाकर खाने से लाभ मिलता है। ध्यान रखें दही का सेवन दिन के भोजन के दौरान ही करें।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: धनिया

अगर किसी व्यक्ति को दस्त ज्यादा हो रहा है या हुआ है, तो ऐसी स्थिति में मरीज को प्यास ज्यादा लगती है। आयुर्वेद में ऐसे वक्त में पानी और धनिये को एक साथ उबाल कर पानी की मात्रा को आधी की जाती है (एक लीटर पानी को आधा लीटर होने तक उबालना) और फिर इस पानी को छानकर ठंडा होने के बाद पेशेंट को पिलाया जाता है।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: बेल

पके ओर अधपके बेल के गूदे और बेल के पौधे की जड़ से दस्त का इलाज किया जा सकता है। लंबे समय से दस्त होने पर बेल के सेवन की सलाह सबसे ज्यादा दी जाती है। बेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, इसलिए यह संक्रामक दस्त पैदा करने वाले एन्टेरोटॉक्सिनस को हटाने में मदद करते हैं।

कुटज से करें डायरिया का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea)

कुटज को डायरिया के उपचार के लिए बहुत ही उपयोगी जड़ी-बूटी माना जाता है। यह कई रूपों में उपलब्ध है, जैसे कि अर्श, चूर्ण और कुटज अवलेह। यह पेट में हो रहे दर्द को ठीक करता है और शरीर में बन रहे बैक्टीरिया को खत्म करके, बन रहे विष से हमें सुरक्षा प्रदान करता है।

डायरिया का आयुर्वेदिक इलाज है जायफल

जायफल के सूखे बीज का उपयोग दस्त के लिए किया जाता है, आमतौर पर इस जड़ी-बूटी का उपयोग चूर्ण, वाटी या काढ़े के रूप में किया जाता है। यह कई आयुर्वेदिक योगों में से एक घटक है, जो कि गैस्ट्रिक गतिशीलता को कम करने का काम करता है। इसके अलावा पानी से हो रहे मल को भी यह नियंत्रित करने में मदद करता है।

और पढ़ें: आयुर्वेद और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के बीच क्या है अंतर? साथ ही जानिए इनके फायदे

सौंफ से करें दस्त का उपचार

सौंफ भी दस्त को ठीक करने में बहुत उपयोगी होती है। 1 छोटा चम्मच कच्ची सौंफ बिना भूनी हुई और 1 छोटा चम्मच पकी सौंफ दोनों को मिलाकर इसका चूर्ण बनाकर रोज खा सकते हैं। यह दस्त को सही करने का कारगार उपाय है।

दालचीनी है डायरिया का आयुर्वेदिक उपचार

दालचीनी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो पेट के वायरस को खत्म करने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। यह पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में मदद करता है और ऐसे एंजाइम को बाहर निकालता है, जो दस्त का कारण होते हैं। उबले हुए पानी में 1 चम्मच दालचीनी का पाउडर और थोड़ी-सी अदरक पीसकर उसका मिश्रण तैयार करें, फिर आधे घंटे रखने के बाद इसको आप दिन में दो या तीन बार पीएं।

और पढ़ें: पथरी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें कौन सी जड़ी-बूटी होगी असरदार

दस्त का आयुर्वेदिक नुस्खा है पुदीने की चाय

पुदीने की पत्तियां पेट से जुड़ी परेशानीयों के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। इससे गैस, पेट में दर्द और दस्त जैसी बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। पुदीने की पत्तियां गुनगुने पानी में भिगोकर कुछ समय के लिए रख दें और फिर डेली इस चाय को पीएं।

दस्त का आयुर्वेदिक इलाज: पुदीना, नींबू और शहद

पुदीने की चाय को स्वादिष्ट बनाने के लिए आप चाहें, तो उसमें नींबू और शहद भी मिला सकते हैं। कहते हैं कि दस्त की परेशानी अगर लंबे वक्त से चली आ रही है, तो ऐसी स्थिति में पुदीना, नींबू और शहद रामबाण माना जाता है। इन तीनों के रस को मिलाकर सेवन करने से दस्त की परेशानी दूर होती है। वहीं इनमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल एवं एंटीइंफ्लमेशन गुण पेट में होने वाले इंफेक्शन से भी बचाने में सहायक होते हैं।
दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) इन ऊपर बताये गए अलग-अलग तरीकों से किया जाता है।

घरेलू उपाय

अतिसार की परेशानी से बचने के लिए क्या हैं घरेलू उपाय?

निम्नलिखित घरेलू उपाय को अपनाकर दस्त की परेशानी से बचा जा सकता है। जैसे:
  • हाथ धोकर खाने की आदत डालें
  • दस्त की वजह से बॉडी डिहाइड्रेट होने लगती है। इसलिए डिहाइड्रेशन से बचना चाहिए। इसके लिया दो से तीन लीटर तक पानी का सेवन रोजाना करना लाभकारी माना जाता है।
  • पानी उबालकर और छानकर पीएं।
  • फाइबर युक्त आहार जैसे ओट्स, दाल या आलू का सेवन किया जा सकता है।
  • जंक फूड से दूरी बनायें।
  • तेल मसाले वाले खाने से परहेज करें।
  • बासी खाना न खाएं।
  • दस्त के दौरान एक्सरसाइज न करें।
  • खली पेट या भूखे न रहें।
  • खाना खाने के बाद वॉक करें।

इन ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखें लेकिन, परेशानी महसूस होने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क करें।

अगर आप दस्त का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of diarrhea) या दस्त की परेशानी से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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लेखक की तस्वीर badge
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/05/2021 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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