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प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें, इनको न करें अनदेखा

प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें, इनको न करें अनदेखा

प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें हर महिला के लिए बेहद ही खास होती हैं। चाहे वह पहली बार मां बन रही हो या दूसरी बार। पहले हफ्ते से लेकर 36वें हफ्ते तक गर्भवती महिला अपना और गर्भ में पल रहे बच्चे का बखूबी ख्याल रखती है। प्रेग्नेंसी को सुरक्षित, खुशनुमा और यादगार बनाने के लिए कपल प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें में हरेक ख्याल रखने की कोशिश करते हैं। आजकल तो बेबी बम्प के साथ माता-पिता अपनी यादें तस्वीरों में कैद करवाते हैं। लेकिन इन 9 महीनों में प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें महीला का कैसे ख्याल रखें और उसकी जरूरतों को नजरअंदाज न करें, जिससे उसे और गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान न पहुंचे। यह हम आपको बता रहे हैं। प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें कैसे रखें ख्याल।

और पढ़ें – क्या प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें एमनियोसेंटेसिस टेस्ट करवाना सेफ है?

प्रेग्नेंसी में इन बातों का रखें ख्याल

  • प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें ब्लीडिंग (मासिकधर्म) होना मां और बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें और अपने डॉक्टर से तुरंत मिले। कई महिलाओं में ऐसा देखा गया है कि उन्हें प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें भी पीरियड्स आता है। ऐसे में डॉक्टर के बताए गई सलाह और दवा गर्भवती महिला के लिए अनिवार्य है
  • चिड़चिड़ापन होना, कमजोरी महसूस होना या ऐसी कोई भी समस्या होने पर अपने डॉक्टर को अपनी समस्या बताएं। कई बार गर्भावस्था के समय संतुलित आहार नहीं लेने की वजह से भी चक्कर, कमजोरी आ सकती है।
  • ब्लड प्रेशर का ध्यान रखें। ब्लड प्रेशर ज्यादा या कम हो तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। बीपी चेक करवाते रहें।
  • पेट में कहीं भी दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लें और जानकारी हासिल करें कि ऐसा क्यों हो रहा है ?
  • बार-बार टॉयलेट की इच्छा होना। ऐसी स्थिति में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना उचित होगा।
  • अगर आप पानी सही मात्रा में पी रही हैं और फिर भी यूरिन का रंग पीला हो तो ऐसे में इसे टाले नहीं क्योंकि ये डिहाइड्रेशन की निशानी हो सकती है। ज्यादा यूरिन गर्भवती महिला में डायबिटीज (जैस्टेशनल डायबिटीज) के भी संकेत हो सकते हैं।
  • प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें अगर डायबिटीज (जैस्टेशनल डायबिटीज) की शिकायत होती है तो ऐसे में गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए कई तरह की समस्या शुरू हो सकती हैं। इस बारें में डॉक्टर आपको सही सलाह और आहार बताएंगे।
  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में खुजली होना सामान्य बात है लेकिन, अगर ज्यादा हो और रात के वक्त हो तो इसे इग्नोर न करें।
  • इन दिनों शरीर में सूजन होना सामान्य है लेकिन, अगर पैर-हाथ ज्यादा सूज गया हो और सिर में भी दर्द हो तो अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।
  • अगर आपको देखने में कोई भी समस्या जैसे धुंधला दिखना आ रही है तो आपको डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।
  • ऐसे वक्त में अगर आपको बुखार होता है तो शरीर का टेम्प्रेचर चेक करें ज्यादा तापमान बच्चे की सेहत पर बुरा असर करता है।

और पढ़ें – गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड की मदद से देख सकते हैं बच्चे की हंसी

गर्भधारण से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • गर्भधारण से पहले देखभाल करते समय इस बात का ध्यान रखें कि हर दिन कम से कम 400 से 800 माइक्रोग्राम फॉलिक एसिड जरूर लें। यह जन्म के समय बच्चे के ब्रेन, स्पाइन आदि में किसी तरह की कमी की संभावना को कम कर देता है। हर महिला को रोजना फॉलिक एसिड लेना चाहिए। इस बारे में डॉक्टर से बात करें, वह आपको इसका सही डोज बताएगा। कुछ डॉक्टर महिलाओं को जो पेरेंटल विटामिन्स देते हैं, उसमें फॉलिक एसिड की मात्रा अधिक होती है।
  • गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो उससे महीनों पहले ही सिगरेट और शराब से दूरी बना लें।
  • यदि आपको किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या है तो पहले उसका इलाज करवाएं। अस्थमा, डायबिटीज, मोटापा और ओरल हेल्थ का प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें पर बहुत असर पड़ता है, इसलिए पहले इनका ट्रीटमेंट करवाएं।
  • गर्भधारण से पहले आप जो भी दवाइयां या हर्बल सप्लिमेंट्स ले रही हैं उसके बारे में डॉक्टर को बताएं, क्योंकि कई बार कुछ दवाएं प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।
  • ऑफिस या घर पर किसी भी तरह की हानिकारक चीजों से दूर रहें जिनसे इंफेक्शन का खतरा हो सकता है। खतरनाक केमिकल के संपर्क में आने से भी बचें।
  • हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। सामान्य एक्सरसाइज, योग और हेल्दी डायट से खुद को फिट और स्वस्थ रखें।

प्रेग्नेंसी के बाद देखभाल

जबकि गर्भावस्था की देखभाल का सबसे अधिक ध्यान गर्भावस्था के नौ महीनों पर केंद्रित है। लेकिन, प्रेग्नेंसी के बाद भी देखभाल काफी महत्वपूर्ण है। पोस्टपार्टम की अवधि छह से आठ सप्ताह तक रहती है, जो बच्चे के जन्म के तुरंत बाद शुरू होती है। इस अवधि के दौरान, मां अपने नवजात शिशु की देखभाल के लिए सीखने के दौरान कई शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों से गुजरती है। प्रसवोत्तर के दौरान उचित आराम, पोषण और योनि की देखभाल शामिल है।

पर्याप्त आराम करें

प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं के लिए आराम बहुत जरूरी है। क्योंकि यह उनकी स्ट्रेंथ को वापस पाने के लिए काफी जरूरी है। नई मां के तौर पर ज्यादा थकने से बचने के लिए कुछ टिप्स फॉलों किए जा सकते हैं।

जब आपका बच्चा सोता है तो सोएं

  • बच्चे की रात की फिडींग को आसान बनाने के लिए अपने बिस्तर को अपने बच्चे के पालने के पास रखें
  • जब आप सोने जाएं तो किसी और को बोतल से बच्चे की फिडींग जिम्मेदारी दें

और पढ़ें : गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से कम हो सकती है मिसकैरिज की संभावना!

प्रेग्नेंसी के बाद खाने का रखें खास ख्याल

गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आपके शरीर में होने वाले परिवर्तनों के कारण प्रसवोत्तर अवधि में उचित पोषण लेना महत्वपूर्ण हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ वजन सुनिश्चित करता है कि आपके पास स्तनपान के लिए पर्याप्त पोषण है। हालांकि, आपको प्रसव के बाद स्वस्थ आहार का सेवन जारी रखना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्तनपान कराने वाली माएं भूख लगने पर खाती हैं। खाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक विशेष प्रयास करें जब आप वास्तव में भूखे हों तब ही भोजन करें। इसके अलावा व्यस्त होने या थके होने की स्थिति में खाने से समझोता न करें।

उच्च वसा वाले स्नैक्स से बचें

प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें – लो फैट फूड पर फोकस करें जो प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स का बैलेंस करने में मदद करता है। साथ ही काफी मात्रा में तरल पद्धार्थ लेने की जरूरत होती है। इसके अलावा डायट में फल और सब्जियों को भी शामिल करें।

वैसे तो गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं लेकिन, उन्हें साधारण बदलाव की तरह नहीं लेना चाहिए। कोई भी तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह आपके और आपके होने वाले बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ये जरूर ध्यान रखें कि हर गर्भवती महिला के शरीर की बनावट अलग होती है इसलिए किसी दूसरी गर्भवती महिला से तुलना न करें। विशेषज्ञों से सलाह लेते रहें और इन 9 महीनों में अपने आपको स्वस्थ बनाए रखें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Maternal-fetal emotional relationship during pregnancy, its related factors and outcomes in Iranian pregnant women: a panel study protocol/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6192301/Accessed on 28/07/2020

First time pregnant women’s experiences in early pregnancy/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3077216/Accessed on 28/07/2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 08/07/2019
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