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गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने पर क्या करें?

गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने पर क्या करें?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार भारत में साल 2015 में 69.2 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। वहीं भारत में टाइप-2 डायबिटीज पेशेंट की संख्या साल 2030 तक 98 मिलियन तक बढ़ सकती है। ऐसा लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल के एक रिपोर्ट में कहा गया है। इसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। आज समझने की कोशिश करेंगे कि गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने पर महिलाओं को क्या करना चाहिए? गर्भधारण से पहले डायबिटीज की बीमारी किस तरह से मां और शिशु दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।

अगर आप टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज के पेशेंट हैं, तो आपको जल्द से जल्द प्रेग्नेंसी प्लानिंग कर लेनी चाहिए। गर्भधारण से पहले डायबिटीज की समस्या है तो शुगर लेवल को गर्भावस्था के पहले से ही कंट्रोल करना जरूरी है। शुगर लेवल प्रेग्नेंसी के दौरान भी नियंत्रित रखना जरूरी है। अगर डायबिटीज की समस्या सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान हो तो इसे जेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं। जेस्टेशनल डायबिटीज बेबी डिलिवरी के बाद ठीक हो जाती है। देखा जाए तो मनुष्यों में डायबिटीज 3 तरह के होती हैं। टाइप-1, टाइप-2 और जेस्टेशनल डायबिटीज।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में हर्बल टी से शिशु को हो सकता है नुकसान

टाइप-1 डायबिटीज

जब शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है तब टाइप-1 डायबिटीज होती है। ऐसे में ब्लड शुगर लेवल को नॉर्मल रखना पड़ता है। जिसके लिए मरीज को पूरी तरह से इंसुलिन इंजेक्शन पर आश्रित रहना पड़ता है। टाइप-1 डायबिटीज बच्चों और किशोरों में होने वाली डायबिटीज की बीमारी है। बच्चों और युवा वयस्कों में यह अचानक से हो सकती है। शरीर में पैंक्रियाज से इंसुलिन नहीं बनने की स्थिति में ऐसा होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार दवा से इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है। इसलिए इंजेक्शन की मदद से हर दिन इंसुलिन लेना अनिवार्य होता है। गर्भधारण के पहले डायबिटीज होने पर इसका प्रॉपर इलाज करवाना जरूरी है। ताकि प्रेग्नेंसी हेल्दी हो सके।

टाइप-2 डायबिटीज

अगर शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम होने लगे और शरीर उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाए, तो ऐसे स्थिति में डायबिटीज टाइप-2 की शिकायत हो जाती है। टाइप-2 डायबिटीज बहुत ही सामान्य है और यह 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को होता है। ऐसा नहीं है की टाइप-2 डायबिटीज सिर्फ ज्यादा उम्र के लोगों को हो कभी-कभी यह बीमारी जल्दी भी हो सकती है। गर्भधारण के पहले डायबिटीज होने पर कॉम्पिलकेशन हो सकती है।

और पढ़ें: गर्भावस्था के दौरान होने वाले इंफेक्शंस से कैसे बचें?

गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने पर क्या करें?

गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने पर कई बार लोग प्रेग्नेंसी प्लान करते हैं तो कई बार बिना प्लानिंग के भी गर्भ ठहर जाता है। दोनों ही परिस्थिती में क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं।

गर्भधारण से पहले डायबिटीज है और अगर बेबी प्लानिंग कर रहें हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे-

  1. प्रेग्नेंसी प्लानिंग के 6 महीने पहले से डॉक्टर के संपर्क में रहें। हेल्थ एक्सपर्ट इस दौरान आपको शुगर लेवल कंट्रोल रखने के टिप्स देते हैं और जरूरत पड़ने पर सप्लिमेंट जैसे फोलिक एसिड दिया जा सकता है।
  2. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए जो दवा आप पहले से ले रहीं हैं हो सकता है डॉक्टर इस दौरान दूसरी दवाओं को लेने की सलाह दें।
  3. अगर गर्भवती होने वाली महिला स्वस्थ है और डायबिटीज कंट्रोल में है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान खतरा कम होता है। ऐसी स्थिति में नॉर्मल डिलिवरी की संभावना ज्यादा होती है
  4. गर्भधारण से पहले डायबिटीज होना और प्रेग्नेंसी के दौरान शुगर लेवल कंट्रोल नहीं होने पर यह शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है।

और पढ़ें: फैंटम प्रेग्नेंसी क्या है?

गर्भधारण से पहले डायबिटीज है या अनप्लांड प्रेग्नेंसी होने पर क्या करें?

हर कोई प्रेग्नेंसी प्लानिंग के साथ नहीं कर सकता। अगर आप डायबिटीज की पेशेंट हैं तो गर्भ ठहरने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

गर्भधारण से पहले डायबिटीज है और आप प्रेग्नेंट हैं तो क्या करें?

आप अपनी सेहत का ध्यान रख सकती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान और ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। शुगर लेवल कंट्रोल में रहना गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जरूरी है।

आइडियल ब्लड शुगर लेवल खाना खाने के पहले- 70-130 mg/dL होना चाहिए और खाना खाने के बाद 200 mg/dL तक होना चाहिए।

गर्भधारण से पहले डायबिटीज की समस्या दूर नहीं हुई तो प्रेग्नेंसी के वक्त आंख या किडनी से जुड़ी बीमारी हो सकती है। यही नहीं इस दौरान प्री-क्लेम्पसिया (Pre-eclampsia), स्टिलबर्थ या मिसकैरिज की संभावना हो सकती है।

गर्भधारण से पहले डायबिटीज की समस्या होने पर जन्म लेने वाला शिशु सामान्य की तुलना में ज्यादा बड़ा हो सकता है और ऐसे बच्चों में बर्थ डिफेक्ट भी हो सकता है। हालांकि गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने के बाद भी अगर प्रेग्नेंसी में शुगर लेवल ठीक रखा जाए तो परेशानी नहीं होती है।

और पढ़ें: छठे महीने में एक्सरसाइज करें, लेकिन क्यों कुछ खास तरह के व्यायाम न करें?

डायबिटीज की समस्या क्यों होती है?

किन कारणों की वजह से होती है टाइप-1 डायबिटीज

  • परिवार (ब्लड रिलेशन) में किसी को डायबिटीज की बीमारी।
  • जेनेटिक परेशानियों के साथ नवजात का जन्म। जिस कारण शरीर में इंसुलिन का निर्माण न होना।
  • कुछ मेडिकल कंडिशन जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस या हेमोक्रोमैटोसिस।
  • कभी-कभी संक्रमण या वायरस के संपर्क में आने की वजह से जैसे मम्पस या रूबेला साइटोमेगालोवायरस।

इन कारणों के अलावा भी अन्य कारण हो सकते हैं।

किन कारणों से होती है टाइप-2 डायबिटीज

  • परिवार (ब्लड रिलेशन) में किसी को टाइप-2 डायबिटीज की बीमारी होना।
  • अत्यधिक वजन होना
  • स्मोकिंग करना।
  • असंतुलित आहार सेवन करना।
  • एक्सरसाइज नहीं करना।
  • HIV जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए एंटी-सिजर्स, दवाएं और एचआईवी जैसी दवाओं का सेवन करना।

मधुमेह होने पर आहार का ख्याल रखें

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कॉर्डियोलॉजी ( American College of Cardiology) और 10 वीं अमीरात कार्डिएक सोसायटी कांग्रेस द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि जो पेशेंट हाई फाइबर डाइट ले रहे थे, उनके ब्लड प्रेशर के साथ ही ग्लूकोज के लेवल में भी सुधार देखने को मिला। भारत के अमृतसर में केयर वेल हार्ट एंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं की टीम ने छह महीनों तक 200 डायबिटिक लोगों के खानपान पर नजर रखी। इस दौरान भोजन समूह और खाने के भाग को अलग किया गया था ताकि पता चल सके कि किस फूड को खाने से शरीर में क्या अंतर दिखेगा। करीब तीन से छह महीने बाद जब तक भोजन दिया गया। हाई फाइबर फूड लगभग 24 से 20 ग्राम प्रति दिन के हिसाब से दिया गया था। छह महीने बाद जब चेकअप किया गया तो सीरम कोलेस्ट्रॉल में 9% की कमी, ट्राइग्लिसराइड्स में 23% की कमी, और सिस्टोलिक रक्तचाप और फास्टिंग ग्लूकोज में 15 और 28% की कमी दर्ज की गई। हाई फाइबर वाला आहार हृदय रोग और ब्लड शुगर के लिए फायदेमंद साबित होता है।

इसलिए गर्भधारण से पहले डायबिटीज होने पर हाई फाइबर फूड का सेवन करना चाहिए। ये ब्लड लिपिड लेवल के साथ ही भविष्य में बड़े जोखिम से बचाने में सहायता कर सकता है। अगर हम अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव कर लें तो बड़ी बीमारियों से भी राहत मिल सकती है। आम, चिया सीड्स, ओट्स, छोले, केले जैसे खाद्य पदार्थ में हाई फाइबर होता है। इन्हें लेना भी आसान होता है। लाल बेरी, चिया पुडिंग, ककड़ी और एवेकैडो को सलाद में लिया जा सकता है। शरीर को बीमारी से बचाने के लिए हाइ फाइबर फूड लें।

अगर आप गर्भधारण से पहले डायबिटीज से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

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अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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सूत्र

Pre-existing diabetes and pregnancy: https://www.pregnancybirthbaby.org.au/diabetes-during-pregnancy Accessed on 15/07/2020

Managing Preexisting Diabetes for Pregnancy: https://care.diabetesjournals.org/content/31/5/1060 Accessed on 15/07/2020

Management of Preexisting Diabetes in Pregnancy: A Review: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/31087027 Accessed on 15/07/2020

Pre-Existing Diabetes and Pregnancy Potential Effects of Uncontrolled Diabetes Before and During Pregnancy: https://www.cdc.gov/pregnancy/documents/DiabetesDefects_Cleared.pdf Accessed on 15/07/2020

Pregnancy if you have diabetes: https://www.healthnavigator.org.nz/health-a-z/d/diabetes-pre-existing-and-pregnancy/ Accessed on 15/07/2020

लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 01/04/2021 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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