क्या है 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट, इस अवस्था में क्या खाएं और क्या न खाएं?

    क्या है 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट, इस अवस्था में क्या खाएं और क्या न खाएं?

    प्रेग्नेंसी में खानपान का काफी अहम योगदान होता है। गर्भवती के खानपान का असर पेट में पल रहे शिशु की सेहत पर पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान मां अपनी सेहत का जितना ख्याल रखेंगी, शरीर की देखभाल के साथ पौष्टिक आहार का सेवन करेंगी, जन्म के बाद शिशु उतना ही तंदुरुस्त पैदा होगा। इसके साथ ही शिशु का शारिरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। इसलिए जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं खानपान को लेकर सजग रहें, एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार भोजन का सेवन करना करना ही सुरक्षित होता है। गर्भवती महिलाएं चाहें तो खुद भी अपना 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट बना सकती हैं, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों ही हेल्दी रहें।

    प्रेग्नेंसी में क्या खाएं और क्या न खाएं

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट के लिए सबसे जरूरी है कि आप पहले से यह जान लें कि प्रेग्नेंसी में आपको क्या खाना है और क्या नहीं। आप चाहे तो इन चार जरूरी व न्यूट्रीएंट्स से भरपूर फूड आइटम्स को खाने में शामिल कर सकतीं हैं। चार न्यूट्रीएंट्स में लीन प्रोटीन, होल ग्रेन्स, डेयरी व फल-सब्जियों को शामिल कर सकती हैं।

    लीन प्रोटीन : इसमें आने वाले हर खाद्य पदार्थ में प्रोटीन होता है, जो शिशु के विकास में मदद करता है। इसमें दाल, बींस, चीज, दूध, अंडा, मछली, मीट, पनीर और नट्स आते हैं।

    होल ग्रेन्स : दिनभर में लगभग आधा कार्बोहाइड्रेड हमें होल ग्रेन्स से मिलते हैं, इसमें चपाती, आटे का पास्ता, ओटमील, आटे का ब्रेड, ब्राउन राइस शामिल है।

    डेयरी : कोशिश यही रहनी चाहिए कि गर्भवती को दिन में कम से कम दो से तीन डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करना चाहिए। इसमें दूध, दही, कॉलेज चीज शामिल होता है। इसका सेवन कर हमें कैल्शियम हासिल होता है जो शिशु की हड्डियों के लिए जरूरी होता है। वहीं प्रोटीन के साथ विटामिन डी भी हासिल होता है।

    फल व सब्जियां : रोजाना तीन से चार फलों का सेवन करने के साथ हरी व ताजी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। हरी सब्जियों में फाइबर, विटामिन व मिनरल्स के साथ कैलोरी की कम मात्रा होती हैं। 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट के लिए अतिरिक्त 300 कैलोरी के साथ रोजाना 15 से 20 ग्राम प्रोटीन से लेकर न्यूट्रीशन हासिल करना जरूरी होता है, इसे आप फलों, सब्जियों आदि से हिसाल कर सकतीं हैं। लेकिन यदि गर्भवती दवाओं का सेवन कर रही हो तो खाद्य पदार्थ की मात्रा में बदलाव हो सकता है।

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    प्रेग्नेंसी के आखिरी के महीनों में क्या ज्यादा खाना चाहिए

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट तैयार करने के लिए जरूरी है कि आपको इस अवस्था में सामान्य से थोड़ा ज्यादा खाने की आवश्यकता पड़ती है। क्योंकि इस अवस्था में ज्यादा थकान महसूस होती है इसलिए ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़ती है। प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में शिशु का विकास काफी तेजी से होता है, इसलिए जरूरी है कि शिशु के विकास के लिए मां जरूरी पोषक तत्व हासिल करें। ज्यादा खाने का अर्थ यह कतई नहीं कि आप दो लोगों के बराबर खाना खाने लगे। आप हमेशा ध्यान में रखें कि आपको शिशु के लिए खाने के जरिए पोषक तत्व हासिल करना है। इसलिए जरूरी है कि सामान्य से 300 अतिरिक्त कैलोरी का सेवन रोजाना करें। खाने से इसे जोड़कर देखें तो यह इतनी खाद्य सामग्री के बराबर होता है,

    क्या खाएं व क्या न खाएं, जानें

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट के लिए अतिरिक्त कैलोरी उन स्थिति में भी पड़ सकती है जब प्रेग्नेंसी के दौरान या फिर प्रेग्नेंसी के पहले अंडरवेट, ओवरवेट रहे हो। या फिर आप एक शिशु के जन्म के बाद दूसरे शिशु को जन्म देने वाली हो। इसके अलावा रोजमर्रा की एक्टिविटी पर भी आपका कैलोरी इनटेक निर्भर करता है। प्रेग्नेंसी में गर्भवती को यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें शुगरी ड्रिंक, डीप फ्राइड फूड या ज्यादा मीठा खाद्द पदार्थ आदि का सेवन कर कैलोरी की पूर्ति नहीं करनी है। इसकी बजाय गर्भवती को वैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे उन्हें न्यूट्रीएंट्स मिलें, वैसे खाद्य पदार्थ में दही, नट्स, उबाले हुए अंडे, फ्रेश फल व सब्जियां आदि का सेवन कर पेट में पल रहे भ्रूण के लिए कैलोरी की पूर्ति कर सकतीं हैं। 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट को लेकर अभी भी आप असमंजस में हैं तो उस स्थिति में बेहतर यही है कि आप डॉक्टरी सलाह लें। आपकी प्रेग्नेंसी के स्टेज व आपकी हेल्थ कंडीशन को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर बेहतर सुझाव दे सकते हैं।

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    प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी महसूस हो तो क्या खाएं

    गर्मी और मानसून के समय यह स्वभाविक है कि गर्भवती को गर्मी लग सकती है। वहीं हार्मोनल बदलाव के साथ गर्भवती का शरीर शिशु के लिए पेट के आकार में खुद ब खुद परिवर्तन करता है, इस कारण गर्भवती को गर्मी लग सकती है।

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    यदि गर्मी आपके खाने को प्रभावित करती है तो इस फूड चार्ट को अपनाएं

    • तीन बार में हेवी डाइट लेने की बजाय थोड़ा-थोड़ा व कम-कम भोजन का सेवन करें।
    • मसालेयुक्त खाद्य पदार्थ, फैटी व फ्राइड फूड का सेवन करने से परहेज करें, इसका सेवन करने से एसिटिडी व गर्मी में आप असहज महसूस कर सकतीं हैं।
    • ठंडे खाद्य पदार्थ जैसे सैंडविच, दही चावल, खीरा सलाद, रायता, फल को दही के साथ, फ्रूट चाट, सलाद, चिकेन सलाद व कोल्ड सूप का सेवन कर सकतीं हैं
    • वैसे खाद्य पदार्थ का सेवन करें जिसे आप आसानी से पचा सकें, मूंग दाल खिचड़ी, लेमन राइस, मिंट की चटनी के साथ इडली, साबूदाना, दलिया, स्टीम व ग्रिल की हुई सब्जियां, पोहा आदि।
    • ब्रेकफास्ट से लंच व लंच से डिनर के बीच फलों का सेवन करें, गर्मी से निजात पाने के लिए तरबूज, खरबूज व अनार का सेवन कर सकतीं हैं।
    • पसीने के जरिए आप जितना तरल शरीर से निकाल देती हैं कोशिश यही रहनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीकर शरीर में तरल की कमी को पूरा करें। गर्मी से बचाव के लिए आप नियमित रूप से पानी पीती रहें, इससे आपको गर्मी व थकावट नहीं होगी।
    • शरीर को ठंडा रखने वाले ड्रिंक जैसे नारियल पानी, लस्सी, छांछ, आम पन्ना, जल जीरा, फ्रेश नींबू पानी का सेवन कर तरो ताजा महसूस कर सकतीं हैं। इस अवस्था में यदि आप बर्फ का गोला व चुस्की खाने के लिए तरस रहीं हों तो ऐसे में आप घर पर ही बर्फ के गोले, फ्रूट जूस आदि तैयार कर सेवन कर सकतीं हैं।

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट के लिए जरूरी है कि आप जब भी घर छोड़ें अपने साथ हमेशा पानी का बॉटल साथ रखें। इस स्टेज में गर्भवती महिलाओं को चाय, कॉफी, वैसे ड्रिंक जिसमें कैफीन होता है उसका सेवन नहीं करना चाहिए। इन तमाम चीजों का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, वहीं आप डिहाइड्रेटेड हो सकतीं हैं।

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    बात 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट, कितनी कैलोरी की होती है जरूरत

    प्रेग्नेंसी में महिला को दो हजार कैलोरी की जरूरत पड़ती है। लेकिन 7 मंथ प्रेग्नेंसी के स्टेज तक आते आते उसे 300 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत पड़ती है, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों की स्वस्थ रहें और दोनों को पोषक तत्व मिलते रहे।

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    ब्रेकफास्ट और मिड मॉर्निंग में यह खाएं

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट में ब्रेकफास्ट से पहले दिन की शुरुआत चार आलमंड खाकर करें।

    इसके बाद ब्रेकफास्ट में यह खाएं;

    • दलिया एक कटोरी/ पोहा या उपमा, सब्जियों के साथ, दो आटा के ब्रेड, इसे सब्जियों या दही के साथ खाएं/सब्जियों के साथ दो रोटी/ गेहूं की दलिया/ ओट्स, इन खाद्य पदार्थों में से किन्हीं एक को डाइट में शामिल करें।
    • दूध- एक कप/दही आधी कटोरी, एक अंडा/पनीर 40 ग्राम

    मिड मॉर्निंग – दो फल

    दोपहर का भोजन व लंच

    • सलाद– एक मीडियम प्लेट
    • दाल – एक कटोरी
    • सब्जी- एक कटोरी
    • दही या रायता- दोनों में कोई एक, एक कटोरी
    • रोटी – दो

    शाम का स्नैक्स

    • दूध -एक कप (150 एमएल)
    • भूना चना- आधी कटोरी/ एक बेसन चीला/एक उबला हुआ अंडा/ अंकुरित चना- आधी कटोरी

    पूर्व संध्या- एक फ्रूट

    रात का खाना व डिनर

  • सलाद- एक मीडियम प्लेट
  • हरी पत्तेदार सब्जी- एक कटोरी
  • दाल (साबुत/पूरा)- एक कटोरी
  • रोटी- दो मीडियम साइज
  • दही- एक कटोरी
  • बेड टाइम– एक कप दूध (150 एमएल) इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए डाक्टरी सलाह लें।

    हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

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    गर्भवती के लिए ‘विटामिन के’ कितना है जरूरी

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट में ‘विटामिन के’ बेहद ही जरूरी होता है। ब्लड को क्लोट करने के लिए ‘विटामिन के’ की बेहद जरूरत होती है। ‘विटामिन के’ की कमी के कारण संभावना रहती है कि हेवी ब्लीडिंग और हेमरेज (haemorrhage) हो सकता है। शिशु की हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए ‘विटामिन के’ काफी जरूरी है। वयस्कों की तुलना में शिशु में ‘विटामिन के’ का लेवल कम होता है। शिशु को इंटर्नल ब्लीडिंग से बचाने के लिए जरूरी है कि शिशु के जन्म के तुरंत बाद ‘विटामिन के’ का शॉट दिया जाए। शिशु को पिलाए जाने वाले पहले ब्रेस्फीडिंग में कोलोस्ट्रम (colostrum) होता है, जिसमें ‘विटामिन के’ की पर्याप्त मात्रा होती है। शिशु को यह पिलाने के बाद उसे मां के दूध के काफी फायदे मिलते हैं। फॉर्मूला मिल्क में भी ‘विटामिन के’ की मात्रा होती है। 7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट के तहत शिशु को जितना संभव हो उसे ‘विटामिन के’ की खुराक देनी चाहिए। इसके लिए आप इन खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल कर सकतीं हैं। ‘विटामिन के’ से भरपूर खाद्य पदार्थों में आने वाले फूड आइटम्स;

    • पालक की तरह हरी पत्तेदार सब्जी, मेथी, बथुआ, शलगम, सलाद पत्ता, धनिया और सरसो को अपनी डाइट में शामिल करें।
    • ताजी सब्जियों में गोभी, हरी गोभी, मटर, पत्ता गोभी, बीन्स, गाजर, छोटी गोभी का सेवन कर सकतीं हैं।
    • फलों में खरबूजा, अनार, अंगूर और अंजीर का सेवन कर सकतीं हैं।
    • सोयाबीन
    • चिलगोजा (pine nuts)
    • ब्लूबेरीज

    ‘विटामिन के’ वेजीटेबल ऑयल के साथ मीट और डेयरी प्रोडक्ट में भी उपलब्ध होता है, लेकिन उसकी मात्रा कम होती है।

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    सेकेंड ट्राइमेस्टर में डायट : दिनभर के लिए विटामिन के से भरपूर खाद्य पदार्थ

    7 मंथ प्रेग्नेंसी डाइट चार्ट में आप चाहें तो इन खाद्य पदार्थ को शामिल कर पौष्टिक भोजन ले सकतीं हैं व शरीर में न्यूट्रीएंट्स की कमी को पूरा कर सकतीं हैं। जाने क्या व कब खाएं।

    ब्रेकफॉस्ट

    • मटर व बींस पोहा के साथ चावल, एक ग्लास दूध
    • वेन पोंगल डिश, नारियल की चटनी, अनार का जूस
    • आलू के साथ मसाला डोसा, आलू गोभी व मटर की सब्जी, नारियल की चटनी और नारियल पानी
    • गाजर-मटर युक्त उपमा, एक ग्लास दूध

    स्नैक्स

    • अंगूर
    • अंजीर
    • अनार
    • एक मुठी नट्स, बादाम व अखरोट

    लंच में यह खाएं

    • चावल के साथ भिंडी की सब्जी व शकरकंद
    • एग करी, पत्ता गोभी व टमाटर की सब्जी, रोटी, चावल
    • ब्लैक पामफ्रेट करी, पलाया व पोरीयाल, कर्ड राइस
    • मटर पोलाव, सोया नगेट्स, आलू करी, चुकंदर प्याज सलाद

    स्नैक्स

    • जलजीरा के साथ खीरा व गाजर
    • नींबू पानी, मटर व कच्चे आम का रस
    • अनार का जूस व सोया स्पिनिच कटलेट
    • अंजीर या केला

    डिनर में यह खाएं

    • लोभिया दाल करी, मूली की सब्जी, बथुवा, रोटी व दही
    • पालक व मक्का की करी, चुकंदर की सब्जी, बाजरे की रोटी
    • हरी गोभी स्टफ्ड डोसा, पुदीने की चटनी
    • मटन करी, धनिया चावल, प्याज व टमाटर का रायता

    खानपान को लेकर रहें सजग, लें डॉक्टरी सलाह

    गर्भवती महिलाओं को खानपान पर काफी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है, हल्की सी लापरवाही जच्चा-बच्चा की सेहत पर असर डाल सकती है। इसलिए जरूरी है कि खानपान को लेकर हमेशा सजग रहें। खाने में पौष्टिक आहार का सेवन करने के साथ ताजी फल व सब्जियों का सेवन करें। यहां तक कि खानपान को लेकर आप डॉक्टरी सलाह भी ले सकती हैं और उसके अनुसार ही सेवन करें। सेहत में होने वाले और खान-पान से संबंधित होने वाली किसी भी समस्या को लेकर डॉक्टरी सलाह लें। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा का सेवन करना आपकी सेहत के लिए घातक हो सकता है। हर गर्भवती की कोशिश यही होनी चाहिए कि उन्हें शरीर में न्यूट्रीएंट्स व मिनरल्स की कमी नहीं होनी चाहिए।

    अगर आपको डॉक्टर जांच के बाद कैल्शियम या आयरन की कमी बताते हैं तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी सप्लीमेंट जरूर लें। शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण बच्चे के विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। आप खानपान के साथ ही सप्लीमेंट का भी सेवन कर सकती हैं। एक ही तरह के पोषक तत्वों का सेवन करने के बजाय सभी प्रकार के पोषक तत्वों का सेवन करना लाभकारी होगा। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Satish singh द्वारा लिखित · अपडेटेड 29/10/2020

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