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प्रेग्नेंसी में अजवाइन खानी चाहिए या नहीं?

प्रेग्नेंसी में अजवाइन खानी चाहिए या नहीं?

अजवाइन को कैरम सीड्स व थाइमोल सीड्स भी कहा जाता है। स्वाद व स्वास्थ्य गुणों के लिए अजवाइन अधिकतर भारतीय व्यंजनों में मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। हालांकि, कच्चा खाने पर इसका स्वाद नमकीन व मसालेदार हो सकता है। प्रेग्नेंसी में अजवाइन का सेवन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रेग्नेंसी में अजवाइन को बीज के रूप में खाना अधिक पसंद किया जाता है। इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में गर्भावस्था के दौरान आजवाइन को फायदेमंद बताया गया है।

अजवाइन अपने चिकित्सीय गुणों के लिए जानी जाती है। यह एंटीऑक्सीडेंट, मिनरल और फाइबर का एक बेहतरीन स्रोत होती है। प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाने से अधिकतर महिलाओं में अपच और कब्ज की समस्या ठीक हो जाती है। पाचन तंत्र को मजबूत व बेहतर बनाकर अजवाइन प्रेग्नेंसी में भूख बढ़ाने में भी मदद करती है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी में अजवाइन के सेवन से गुर्दों और श्वसन प्रणाली की सही तरीके से काम करने की क्षमता भी बढ़ती है। यही कारण है कि आयुर्वेद में प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाने की सलाह दी जाती है। इस आर्टिकल में पढ़ें कि प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाने के क्या फायदे होते हैं। इसके अलावा अधिक मात्रा में अजवाइन के सेवन से कोई नुकसान हो सकते हैं या नहीं?

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प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाना क्या सुरक्षित होता है?

प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाना सुरक्षित होता है लेकिन एक नियमित मात्रा तक, अगर आप गर्भवती हैं और अजवाइन का सेवन करना चाहती हैं तो बेहतर रहेगा कि पहले उसे पानी में भिगों लें और कुछ घंटों बाद खाएं। आप चाहें तो पानी को पी भी सकती हैं। हालांकि, इस बात का खास ध्यान रखें कि अजवाइन के अत्यधिक सेवन से आपको व आपके शिशु पर बुरा प्रभाव भी पड़ सकता है।

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प्रेग्नेंसी में अजवाइन के फायदे

गर्भावस्था में अजवाइन खाने के कई फायदे होते हैं, जिनमें निम्न मुख्य रूप से शामिल हैं –

एंटीफंगल गुणों से भरपूर

प्रेग्नेंसी में अजवाइन के एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण बैक्टीरिया और फंगल से लड़ने में मदद करती है। ऐसा अजवाइन में मौजूद थाइमोल और कार्वाक्रोल रसायनों के कारण होता है जो कि बैक्टीरिया और फंगल प्रतिरोधक केमिकल होते हैं।

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कोलेस्ट्रॉल स्तर

जानवरों पर किए गए अध्ययनों के मुताबिक अजवाइन के बीज कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। अधिक कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के मुख्य कारकों में से एक होता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाने से हृदय संबंधी विकार होने की आशंका कम हो जाती है।

उल्टी की समस्या से राहत

प्रेग्नेंसी में अजवाइन का सेवन करने से उल्टी की समस्या से भी राहत मिलती है। महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान उल्टी की समस्या के कारण खानपान में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

प्रेग्नेंसी में लो बीपी

प्रेग्नेंसी में हायपरटेंशन या हाई बीपी हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका को बढ़ा देते हैं। इस स्थिति की रोकथाम में कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स नामक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। यह ब्लॉकर्स कैल्शियम को आपके हृदय की कोशिकाओं में जाने व रक्त वाहिकाओं को फैलने से रोकते हैं जिससे ब्लड प्रेशर लो होने लगता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार अजवाइन में मौजूद थाइमोल रसायन कैल्शियम ब्लॉकर्स दवाओं की तरह काम करता है जिससे प्रेग्नेंसी में होने वाली हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है।

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अपच और कब्ज से राहत

अजवाइन आयुर्वेद में अपच और कब्ज के घरेलू उपचार में मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। कई अध्ययनों के मुताबिक प्रेग्नेंसी में अजवाइन खाने से पेट के अल्सर से भी छुटकारा पाया जा सकता है। इसके साथ ही अजवाइन गैस और पुरानी अपच की समस्या को भी ठीक करने में मदद करती है। प्रेग्नेंसी में कब्ज और अपच एक सामान्य समस्या है जिसके कारण कई महिलाओं को बेचैन और पेट दर्द से गुजरना पड़ता है। प्रेग्नेंसी में अजवाइन के सेवन से इसका इलाज किया जा सकता है। प्रेग्नेंसी में अजवाइन का सेवन करने से पेट की जलन से भी छुटकारा मिल सकता है। अक्सर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान पेट में जलन की समस्या महसूस होती है। ऐसे में आप अजवाइन का सेवन कर सकती हैं। चूहों पर किए गए एक अध्ययन से यह भी सामने आया है कि अजवाइन खाने को पचाने की प्रक्रिया में तेजी लाता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।

खांसी से छुटकारा

कुछ शोध में यह पाया गया है कि अजवाइन खांसी से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकती है। हालांकि, यह अध्ययन एक सूअर पर किया गया था इसलिए इंसानों पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है इस बात की फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, कुछ अध्ययनों के मुताबिक अस्थमा के मरीजों को अजवाइन खाने से इलाज की प्रक्रिया में मदद मिली है। आयुर्वेद में श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे खांसी के उपचार में अजवाइन का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसलिए प्रेग्नेंसी में अजवाइन का सेवन करने खांसी की शिकायत से छुटकारा मिल सकता है।

प्रेग्नेंसी में अजवाइन की सही खुराक

प्रेग्नेंसी में अजवाइन का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अजवाइन के सुरक्षित सेवन के लिए 12 मिलीलीटर अजवाइन के पानी का सेवन करें और साथ ही पेट में दर्द पर इसमें 12 मिलीलीटर सौंफ का पानी भी मिला सकते हैं। अजवाइन के पानी का सेवन दिन में 2 बार करना चाहिए किसी प्रकार की पेट संबंधी समस्या होने पर इसका 4 बार भी सेवन किया जा सकता है। अधिक लाभ पाने के लिए प्रेग्नेंसी में अजवाइन के पानी का खाना खाने से 30 मिनट पहले सेवन करें। इसकी मात्रा को लेकर किसी भी प्रकार के संदेह होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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गर्भावस्था के दौरान अजवाइन के साइड इफेक्ट

अजवाइन के अनमोल फायदों को मद्देनजर रखते हुए प्रेग्नेंसी में इसका सेवन महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, किसी भी लाभदायी चीज के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण उसके नुकसान भी होते हैं। अधिकतर मामलों में गर्भावस्था के दौरान अजवाइन के साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं। यदि प्रेग्नेंसी में अजवाइन का सेवन पर्याप्त मात्रा में किया जाए तो इसके सभी मुमकिन साइड इफेक्ट से बचा जा सकता है।

अधिक सेवन के कारण गर्भावस्था के दौरान अजवाइन के साइड इफेक्ट जैसे शरीर में गर्मी बढ़ना दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान अजवाइन के साइड इफेक्ट में चक्कर आना और मतली भी शामिल हैं।

आप चाहें तो अजवाइन के अद्भुत फायदे पाने के लिए इसके बीज या पानी को अपने आहार में शामिल कर सकती हैं। अधिकतर गर्भवती महिलाओं अजवाइन के पानी का सेवन करना अधिक पसंद करती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पानी के रूप में इसे पचा पाना आसान हो जाता है।

अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। उपरोक्त जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको प्रेग्नेंसी में किसी भी चीज से एलर्जी हो रही है तो बेहतर होगा कि आप उसे न खाएं। अगर आपने ऐसा किया तो आपको वॉमिटिंग के साथ ही अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

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सायकल लेंथ

28 दिन

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सूत्र

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Shivam Rohatgi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/11/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड