भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव : पहली से तीसरी तिमाही तक बेबी के मवूमेंट होते हैं कुछ ऐसे

    भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव : पहली से तीसरी तिमाही तक बेबी के मवूमेंट होते हैं कुछ ऐसे

    फर्स्ट ट्राइमेस्टर की थकान, जी मिचलाना, उल्टी के बाद अब समय आ गया है बेबी के फर्स्ट मूवमेंट की जॉयफुल फीलिंग को महसूस करने का। इस फीलिंग का एहसास आम तौर पर महिलाओं को सेकेंड ट्राइमेस्टर में होता है। भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement) का अनुभव हर महिला के लिए अलग हो सकता है। वहीं ये शिशु पर भी निर्भर करता है। कुछ बच्चे बहुत अधिक मूवमेंट करते हैं वहीं कुछ बिना मूवमेंट के बाहर आने का इंतजार करते हैं। भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव होना प्रेग्नेंसी के दौरान सामान्य माना जाता है। चलिए इसे ट्राइमेस्टर के हिसाब से समझ लेते हैं।

    दूसरी तिमाही में भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes in fetal movement in the second trimester)

    दूसरी तिमाही में भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement) का अनुभव आमतौर पर 5 महीने या कहे कि प्रेग्नेंसी के 18- 22 हफ्ते में होता है। जिसमें पेट में गुदगुदी, मरोड़ या भूख का एहसास जैसा अनुभव हो सकता है। एक बार मूवमेंट फील करने के बाद महिला इन हलचलों में वृद्धि का अनुभव कर सकती है। जैसे-जैसे उसकी मसल्स मजबूत होंगी उसके पंचेस और भी पावरफुल होते जाएंगे। गर्भावस्था के 6 महीने पूरे होने पर भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव को महिला महसूस कर सकती है। उसके पैरों के मूवमेंट्स अधिक तेज हो जाएंगे। उसका व्यवहार अप्रत्याशित होगा। हो सकता है कि कभी वह अधिक मूवमेंट करें तो कभी बिलकुल ना करें।

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    तीसरी तिमाही में भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes in fetal movement in the third trimester)

    7 महीने की प्रेग्नेंट महिला के बेबी के पास अभी भी गर्भाशय में काफी जगह रहती है जिसमें वह एक जगह से दूसरी जगह खिसकना, किक मारना जारी रखता है। इन पंचेस की वजह से महिला अचानक से कुछ झटका महसूस कर सकती है। जैसे-जैसे शिशु 8वें महीने में वजन बढ़ा रहा होता है, वह विशाल अपार्टमेंट जिसे आपका गर्भ कहा जाता था, उसके लिए एक तंग कोठरी की तरह हो जाता है। ऐसे में उसके लिए पहले जैसी कलाबाजी करना मुश्किल होता है, लेकिन उसके टर्न करने से महिला को झुनझुनी जैसा अनुभव होना जारी रहेगा। तीसरी तिमाही में भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव कुछ महिलाओं के लिए इससे अलग भी हो सकता है।

    9वें महीने में भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement) आ सकता है। यह पहले की तुलना में कम हो जाएगा क्योंकि अब उसका वेट और लेंथ बढ़ गई है। अब आप पहले जैसी हलचल महसूस नहीं कर पाएंगी क्योंकि उसके पास पर्याप्त स्पेस नहीं बचा है, लेकिन बेबी के टर्न होने से मूवमेंट को जरूर महसूस करेंगी।

    28 वीक के शुरुआत में डॉक्टर या नर्स हर दिन जब तक महिला बच्चे को जन्म नहीं देती बेबी किक्स को काउंट करने की सलाह दे सकती हैं। सुबह या शाम को किक को काउंट करना सही आइडिया माना जाता है। एक घंटे में 10 मूवमेंट को जरूरी माना जाता है। अगर एक घंटे में 10 मूवमेंट जिसमें किक, बेबी का रोल करना, उसका हिलना फील नहीं होता है तो डॉक्टर को इसके बारे में जानकारी दें। भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव यानी कि कमी आने पर डॉक्टर को जरूर बताएं।

    फीटल मूवमेंट में कमी के कारण (What are the causes of decreased fetal movement)

    गर्भवती महिला जब पहली बार बेबी किक से लेकर प्रेग्नेंसी के आखिर तक भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement) होते रहते हैं। जो आमतौर पर सामान्य होते हैं। इनके कारण निम्न हो सकते हैं।

    महिला का सुपर एक्टिव होना (You have been super active)

    अगर महिला ज्यादातर समय बाहर रहती है या व्यस्त रहती है तो वह बेबी के मूवमेंट्स को नोटिस नहीं कर पाती। ऐसे में परेशान होने की कोई वजह नहीं है।

    सेक्स के बाद मूवमेंट में कमी

    कुछ बेबीज पेरेंट्स के सेक्स के बाद एक्टिव हो जाते हैं वहीं कुछ ऑर्गेज्म के दौरान होने वाले यूटेराइन कॉन्ट्रेक्शन के चलते सुस्त हो जाते हैं। दोनों प्रतिक्रियाएं पूरी तरह से सामान्य हैं। जब तक डॉक्टर आपको मना नहीं करते तब तक प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना पूरी तरह से सेफ माना जाता है।

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    ये बात ना भूलें कि बेबी अभी बहुत छोटा है

    सेकेंड ट्राइमेस्टर के दौरान फीटल मूवमेंट को महसूस किया जाता है, लेकिन इस दौरान कई बार ऐसा भी हो सकता है कि वह एक पल के लिए बहुत एक्टिव हो जाए वहीं दूसरे ही पल एकदम चुप। गर्भवती महिला को बेबी मूवमेंट के लिए कई घंटों या दिनों तक भी इंतजार करना पड़ सकता है। चूंकि अभी शिशु काफी छोटा है इसलिए इन हलचलों को मिस कर देना आसान है। आमतौर पर बच्चे अक्सर रात को अधिक एक्टिव होते हैं और ऐसे में अगर मां सो रही है तो वह इन मूवमेंट को मिस कर देती है।

    गर्भाशय (Uterus) में जगह कम बचना

    जब महिला पहली बार शिशु के मूवमेंट को फील करती है तब उसके बार उछल कूद करने के लिए काफी जगह होती है। उस दौरान गर्भवती महिला पेट में गुदगुदी जैसा फील करती है। कुछ हफ्ते बीतने के बाद पर किक और पंचेस का अनुभव करती है, लेकिन तीसरे ट्राइमेस्टर तक पहुंचने तक बेबी बड़ा हो चुका होता है। ऐसे में उसके लिए जगह कम पड़ने लगती है। अभी भी वह मूवमेंट कर सकता है, लेकिन पहले की तरह नहीं।

    सोते समय भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes in fetal movement during sleeping)

    तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान महिलाएं तेज हलचल महसूस नहीं करती हैं, लेकिन मूवमेंट्स की संख्या बढ़ सकती है। इसका कारण बेबी लंबे समय को सोना भी हो सकता है। यहां तक कि बेबी उस समय ज्यादा एक्टिव रहते हैं जब आप सोने की कोशिश में होती हैं। दिन के समय कोई मूवमेंट नहीं दिखाई देना पूरी तरह से सामान्य है।

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    बेबी का सिर पेल्विस (Pelvis) में स्थिर हो जाना

    प्रेग्नेंसी के आखिरी कुछ हफ्तों में महिलाएं फीटल मूवमेंट में कमी का अनुभव कर सकती हैं। इसका एक कारण बेबी का सिर पेल्विस तक पहुंचना भी हो सकता है। इस दौरान बेबी ज्यादा एक्टिव नहीं रह जाता है।

    बेबी के सुपर एक्टिव होने से कोई परेशानी होती है?

    भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement)

    दूसरे ट्राइमेस्टर में बेबी के पास मूव करने के लिए पर्याप्त स्पेस होता है, लेकिन अगर बेबी आखिर तक एक्टिव है तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। यह हेल्दी बेबी का ही साइन है। यह उनकी मसल्स और बोन्स के विकास में मदद करता है। बेबी के गर्भाशय में अधिक एक्टिव होने का यह मतलब नहीं होता है कि वह बाहर आने पर हायपर रहेगा। जब महिला प्रसव में जाने वाली होती हैं और उस समय शिशु अधिक सक्रिय हो जाता है और यदि महिला संकुचन का अनुभव कर रही हैं और भ्रूण की हलचल कुछ समय के लिए तेज हो जाती है, तो महिला वास्तव में फाल्स लेबर में हो सकती है।

    भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement) या कमी चिंता का कारण कब बन जाती है?

    अधिकांश मामलों में, गर्भावस्था में कई परिवर्तन होते हैं यहां तक ​​कि भ्रूण की गति में भी कमी आती है। हालांकि, यदि आपने अपने बच्चे को जगाने के लिए कदम उठाए हैं (जैसे मीठा पेय पीना या अपने पेट को हिलाना) और वह चुप रहता है, तो यह एक समस्या का संकेत भी हो सकता है। दुर्लभ मामलों में, भ्रूण की गतिविधि में अचानक ध्यान देने योग्य कमी निम्न कारणों से हो सकती है:

    एम्नियोटिक फ्लूइड का कम होना (Low amniotic fluid)

    लगभग 4 प्रतिशत महिलाओं को कम एमनियोटिक द्रव का अनुभव होता है – आमतौर पर तीसरी तिमाही के आखिर में। जबकि इस स्थिति वाले अधिकांश लोगों में कोई ध्यान देने योग्य लक्षण नहीं होते हैं और पूरी तरह से स्वस्थ गर्भधारण करते हैं, कुछ को भ्रूण की गतिविधि में अचानक और महत्वपूर्ण गिरावट दिखाई दे सकती है। आपका डॉक्टर आपकी निगरानी कर सकता है और संभवत: शीघ्र प्रसव का विकल्प चुन सकता है।

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    एम्नियोटिक फ्लूइड का अधिक होना (Too much amniotic fluid)

    लगभग 1 प्रतिशत गर्भधारण में हाइड्रमनिओस, या बहुत अधिक एमनियोटिक द्रव का निदान किया जाता है। यह उन महिलाओं में आम है जो मल्टिपल्स बेबीज को कैरी करती हैं या जिनका मधुमेह नियंत्रित नहीं है।

    फीटल डिस्ट्रेस (Fetal distress)

    प्रसव से पहले या उसके दौरान बच्चे की ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे गतिविधि में महत्वपूर्ण और अचानक कमी आ सकती है। ऐसे में तुरंत ऑपरेशन की आवश्यकता होती है।

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    उम्मीद करते हैं कि आपको भ्रूण के मूवमेंट में बदलाव (Changes In Fetal Movement) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/12/2021 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड