गर्भावस्था का 30वां सप्ताह या प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान आपके शिशु का आकार छोटे तरबूज के जितना हो जाता है। 30 हफ्ते की गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु की लंबाई 40 सेंटीमीटर के करीब हो जाती है और उसका वजन 1.3 किलोग्राम हो जाता है। इसके साथ ही शिशु का वजन फैट की लेयर बढ़ने की वजह से अभी भी बढ़ता रहता है। इस फैट की मदद से शिशु के शरीर की झुर्रियां कम हो जाती हैं, जो कि जन्म के बाद उसके शरीर को गर्म रखने में मदद भी करेगी।

प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान आपका शिशु अपने डायाफ्राम को लगातार मूव करके सांस लेने की प्रक्रिया का अभ्यास करता है। इस समय आपका शिशु कभी-कभी हिचकियां भी लेता है, जिससे आपके गर्भ में ऐंठन या मरोड़ महसूस हो सकती है।
प्रेग्नेंसी वीक 30 तक आपका शिशु आंखें काफी खोलने लगता है और उसके सिर पर बालों का अच्छा विकास हो जाता है। शिशु की बोनमैरो में रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन शुरू हो जाता है। जबकि, शिशु की त्वचा स्मूथ होने लगती है और उसका शरीर उचित आकार लेने लगता है। शिशु की त्वचा की सतह पर मौजूद वर्निक्स की सफेद और चिकनी परत प्रेग्नेंसी वीक 30 में अवशोषित होने लगती है। प्रेग्नेंसी वीक 30 में शिशु के चेहरे पर मौजूद लानूगो की परत भी गायब होने लगती है। इसके साथ इस समय आपके शिशु के दिमाग का आकार और मैच्योरिटी भी विकसित होती रहती है।
गर्भकालीन समय का 95 प्रतिशत समय शिशु सोने में निकालता है। लेकिन, प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान आप अपने शिशु के सोने का पैटर्न पहले के मुकाबले ज्यादा आराम से महसूस कर सकती हैं। आप इस वक्त शिशु के नींद में करवट लेने को भी महसूस कर सकती हैं, जिसे एक्टिव स्लीप और आरईएम (REM) स्लीप कहते हैं। इसके साथ ही शिशु इस समय अपनी आंखों को इधर-उधर घुमाने में सक्षम होता है और वह सोते हुए सपने भी देख सकता है। प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान शिशु की धड़कन सामान्य होने लगती है। एक्टिव स्लीप शिशु की चार प्रमुख स्थितियों में से एक है, जो कि उसके जन्म के बाद भी जारी रहती है। यदि बच्चे का विकास ठीक तरह से होता है तो बच्चा मूवमेंट भी सही तरह से करता है। अगर आपको प्रेग्नेंसी के 30वें सप्ताह में बच्चे का मूवमेंट महसूस नहीं हो रहा है तो आप डॉक्टर से इस बारे में बात कर सकती हैं।
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गर्भावस्था में गर्भवती महिलाओं के बाल डिलीवरी के बाद स्थिति की तुलना में घने होते हैं। डिलीवरी के बाद आपको हेयर फॉल की समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी वीक 30 में आपको थकान हो सकती है और पहले के मुकाबले ज्यादा क्लमजी महसूस कर सकती हैं और आपको गहरी नींद लेने में दिक्कत हो सकती है। हॉर्मोनल चेंज की वजह से आपके लिगामेंट ढीले और रिलैक्स हो जाते हैं। इस स्थिति में आपको कंफर्टेबल जूते पहनने चाहिए, जिससे आपको चलने में समस्या न हो। प्रेग्नेंसी के 30वें सप्ताह में महिला को कमर में दर्द की समस्या भी अधिक महसूस हो सकती है। ऐसा पेट में वजन बढ़ने के कारण होता है। अगर कमर में हल्का दर्द हो रहा है तो आप तेल की मालिश भी करवा सकती हैं। ऐसा करने से बहुत आराम महसूस होता है। वहीं कुछ महिलाओं को पैरों में सूजन की समस्या भी महसूस होती है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या का अधिक एहसास हो रहा हो तो बेहतर होगा कि आप इस बारे में डॉक्टर से बात करें।
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प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान आपको बार-बार मूड स्विंग्स की समस्या हो सकती है। लेकिन, शारीरिक थकावट, गर्भावस्था से संबंधित चिंता और हॉर्मोनल चेंज के कारण यह समस्या आम है। इसकी वजह से कई बार आपको इमोशनल अप्स और डाउन सहने पड़ते हैं। मगर, आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सभी लक्षण आम हैं और डिलीवरी के बाद गायब हो जाएंगे।
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प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान आपको सांस चढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, इसके पीछे का कारण आपके यूट्रस का बड़ा होना और आपके शिशु के लिए आरामदायक जगह बनने की वजह से फेफड़े आदि शारीरिक अंगों पर पड़ने वाला प्रेशर है। अगर, आपको सांस चढ़ने की समस्या बहुत ज्यादा परेशान कर रही है, तो आपको अपने डॉक्टर से इस बारे में बातचीत करनी चाहिए। आपका डॉक्टर आपके शरीर की जांच करके आपको उचित उपायों के बारे में सलाह दे सकता है। लेकिन, आमतौर पर प्रेग्नेंसी के आखिरी समय में इस समस्या का होना आम बात होती है। इसलिए, अगर आपकी सभी जांच नॉर्मल आती है, तो आपको इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए।
इस समय के आसपास आपको नियमित अंतराल पर अपने डॉक्टर के पास जाकर जांच करवानी चाहिए। आपको शुरुआत में दो हफ्तों में एक बार और फिर हर हफ्ते डॉक्टर के पास जांच के लिए जाना चाहिए। प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान डॉक्टर आपके गर्भ में शिशु द्वारा की जा रही हलचल की जानकारी ले सकता है, जैसे- आपका शिशु दिन के किस समय में ज्यादा हलचल करता है या किस समय शांत रहता है। इसके साथ ही अगर आपको प्रेग्नेंसी के कुछ असामान्य लक्षण परेशान कर रहे हैं, तो उसके बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं। डॉक्टर किसी भी संभावित खतरे को परखने के लिए कुछ जांच के बारे में सलाह दे सकता है।
प्रेग्नेंसी वीक 30 में डॉक्टर आपसे या फिर आप डॉक्टर से इन टेस्ट्स को एक बार फिर करवाने के बारे में बात कर सकती हैं। जैसे-
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सांस लेने में दिक्कत होने से आपको तकलीफ हो सकती है और यह स्थिति आपके लिए असुविधाजनक हो सकती है। लेकिन, अगर आपके शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है, तो आपको घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि, इस समस्या से शिशु के स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
प्रेग्नेंसी वीक 30 के दौरान अगर आपको इंसोम्निया की परेशानी हो रही है , तो आपको अपने डॉक्टर की बिना सलाह के हिप्नोथेरेपी नहीं करवानी चाहिए। प्रेग्नेंसी में इस तरह के ट्रीटमेंट को सुरक्षित नहीं माना जाता। इसकी जगह डॉक्टर आपको कुछ जरूरी दवाइयों और गर्भावस्था में इंसोम्निया को दूर करने के तरीके बता सकता है।
जब भी आप प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए डॉक्टर के पास जाती हैं तो डॉक्टर आपको नौ महीने के दौरान होने वाले टेस्ट से लेकर जरूरी जानकारी भी प्रदान करते हैं। प्रेग्नेंसी के 30वें सप्ताह के दौरान आपको क्या टेस्ट करवाने हैं या फिर किस तरह की डायट लेनी चाहिए, डॉक्टर आपको इस बारे में जानकारी जरूर प्रदान करेंगे। अगर फिर भी आपको इस विषय के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो आप डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। अगर किसी महिला को किसी भी प्रकार की हेल्थ कंडीशन है तो ऐसे में उसे अधिक ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। ऐसा करने से बच्चे का विकास ठीक तरह से होता है।
अगले आर्टिकल में हम प्रेग्नेंसी वीक 31 के बारे में बात करेंगे।उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल की जानकारी पसंद आई होगी और आपको गर्भावस्था का 30वां सप्ताह से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।
डिस्क्लेमर
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Current Version
24/12/2021
Aamir Khan द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr Sharayu Maknikar
Updated by: Nikhil deore
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr Sharayu Maknikar