लड़का या लड़की : क्या हार्टबीट से बच्चे के सेक्स का पता लगाया जा सकता है?

Medically reviewed by | By

Published on मई 14, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
Share now

बहुत से लोगों का मानना है कि वे केवल संकेतों के माध्यम से ही बच्चे के लिंग का अनुमान लगाया जा सकता है। जैसे गर्भावस्था के दौरान मां के स्तनों का आकार या गर्भ में भ्रूण की स्थिति। वहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अल्ट्रासाउंड स्कैन के दौरान हार्टबीट से सेक्स का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, किसी भी रिसर्च में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है और इसे केवल एक मिथक ही माना गया हैं। इस आर्टिकल में आज हार्टबीट से सेक्स का पता लगाने पर किये गए शोध पर चर्चा करेंगें।

डॉक्टर की राय

डॉ. श्रुति श्रीधर (एमडी. होम्योपैथिक, एमएससी. डीएफएसएम.), कंसल्टिंग होम्योपैथ और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है “आप सोनोग्राफी करके ही बच्चे के लिंग की पुष्टि कर सकते हैं। इसके अलावा बच्चे के सेक्स का पता लगाने का कोई तरीका नहीं है। हालांकि, प्रिडिक्शन्स कई हैं। पहली गर्भावस्था के अनुभव और आपकी इनर गट फीलिंग या सिक्स सेंस से आप महसूस कर सकती हैं कि गर्भ में लड़की है या लड़का। लेकिन, आप कभी भी इसके बारे में 100% सुनिश्चित नहीं हो सकती हैं। आपके सही होने की 50% ही संभावना हो सकती है। इसलिए, लोगों को लगता है कि वे बच्चे के दिल की धड़कन, बेबी बम्प, गर्भावस्था के दौरान मतली आदि से रैंडम विचारों से बच्चे के लिंग का अनुमान लगा सकते हैं। तो यह एकदम गलत है।”

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी में बुखार: कहीं शिशु को न कर दे ताउम्र के लिए लाचार

क्या हार्टबीट से सेक्स का पता चल सकता है?

कई लोगों का मानना है कि भ्रूण की हृदय की धड़कन की दर से बच्चे के लिंग का अनुमान लगाया जा सकता है। कुछ के लिए यह आश्चर्य की बात हो सकती है, क्योंकि एक डॉक्टर को पहली तिमाही में ही अल्ट्रासाउंड से बच्चे के लिंग के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है। यह माना जाता है कि प्रति मिनट 140 से कम धड़कन होने पर एक लड़के का जन्म होता है, वहीं दिल की धड़कन तेज होने पर लड़की का जन्म होता है। लेकिन, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि यह सच है।

यह भी पढ़ें : गर्भावस्था में ओरल केयर न की गई तो शिशु को हो सकता है नुकसान

हार्टबीट से सेक्स का पता : क्या कहती है रिसर्च?

कई अध्ययनों के जरिए भ्रूण की हृदय गति और उनके लिंग के बीच के संबंध को जानने की कोशिश की गई है। 2006 में, एक शोध में पाया गया कि मेल और फीमेल फ़ीटस के हार्ट बीट में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है।

शोधकर्ताओं ने पहली तिमाही के दौरान लिए गए 477 सोनोग्राम पर दर्ज हृदय दर को लिया और उनकी तुलना दूसरे ट्राइमेस्टर के दौरान लिए गए सोनोग्राम से की, जिसका उपयोग डॉक्टर भ्रूण के लिंग का निर्धारण करने के लिए करते थे। निष्कर्ष निकला कि एक हार्टबीट से सेक्स का पता नहीं चला।

2016 में, पहली तिमाही के दौरान रिकॉर्ड किए गए 332 फीमेल और 323 मेल फ़ीटस की हार्ट बीट रेट को देखा गया। इन शोधकर्ताओं ने भी उनके बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया।

यह भी पढ़ें :  गर्भावस्था में लिनिया नाइग्रा: क्या ये प्रेग्नेंसी में त्वचा संबधी बीमारी है?

बच्चे का लिंग कब निर्धारित किया जाता है?

जैसे ही स्पर्म अंडाणु से मिलता है, आपके बच्चे के सेक्स का निर्धारण हो जाता है। इससे पहले कि आपको पता चलता है कि आप प्रेग्नेंट हैं, कंसेप्शन (conception) के समय ही बच्चे के लिंग डिसाइड हो जाता है। शुरूआती समय में बच्चे के जननांगों का विकास नहीं होता है, लेकिन आपके बच्चे को एक्स या वाई क्रोमसोम वंशानुक्रम में मिलता है।

 लड़कियों का जनेटिक इन्फॉर्मैशन पैटर्न XX होता हैं, जबकि लड़कों का पैटर्न XY होता हैं। आपको यह जानकर भी आश्चर्य हो सकता है कि आपके बच्चे के जननांग तुरंत विकसित नहीं होते हैं। वास्तव में, लड़के और लड़कियां गर्भधारण के चार से छह सप्ताह तक अपेक्षाकृत समान ही दिखते हैं। उनके बीच अंतर दिखना 10 और 20 सप्ताह के बीच शुरू होता है।

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी में हर्बल टी से शिशु को हो सकता है नुकसान

बच्चे के सेक्स का पता चलता है इन टेस्ट्स से

सेल फ्री डीएनए ( Cell Free DNA)

सेल-फ्री डीएनए एक तरह का ब्लड टेस्ट है। आप अपनी गर्भावस्था के लगभग नौ सप्ताह होने के बाद यह परीक्षण करवा सकते हैं। इस परीक्षण का मुख्य लक्ष्य आपके बच्चे के सेक्स का पता करना नहीं है। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर्स संभावित आनुवंशिक असामान्यताओं की स्क्रीनिंग करते हैं। आपके बच्चे का सेक्स क्रोमसोम उन सभी जनेटिक इन्फॉर्मैशन में से एक हैं।

समान स्क्रीन (वेरीफाई, मेटरनिट 21, हार्मनी) की तुलना में, पैनोरमा भ्रूण के लिंग का निर्धारण करने का 100 प्रतिशत सटीकता दर का दावा करता है। वाई क्रोमसोम की उपस्थिति या अनुपस्थिति का पता लगाने से बच्चे के लिंग का पता चलता है।

इस बात का ध्यान रखें कि डोनर अंडे का उपयोग करने वाली महिलाओं के लिए या जिन लोगों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाया है, उनके लिए यह परीक्षण नहीं है। क्योंकि पैनोरमा एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, इसलिए आनुवंशिक असामान्यताओं के संबंध में परिणाम फॉल्स पॉजिटिव या फॉल्स नेगटिव भी हो सकते हैं। इसलिए, किसी भी डायग्नोसिस की पुष्टि कुछ और टेस्ट के साथ ही की जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें : गर्भावस्था से ही बच्चे का दिमाग होगा तेज, जानिए कैसे?

आनुवंशिक परीक्षण

आपकी गर्भावस्था के कुछ समय बाद, डॉक्टर आपको एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis) या कोरियोनिक विली सैंपलिंग (chorionic villi sampling) करवाने की सलाह देते हैं है। ये परीक्षण सेल-फ्री डीएनए की तरह जेनेटिक असामान्यताओं की पहचान करता है। नतीजतन, इससे आपके बच्चे के लिंग की जानकारी मिल सकती है। ये परीक्षण सेल-फ्री रक्त परीक्षणों की तुलना में अधिक सटीक हैं, लेकिन ये खतरनाक भी हैं और इसमे गर्भपात का जोखिम भी हो सकता है।

सीवीएस परीक्षण आमतौर पर गर्भावस्था के 10 और 13 सप्ताह के बीच किया जाता है। एमनियोसेंटेसिस आमतौर 14 और 20 सप्ताह के बीच किया जाता है।

इससे पहले कि आप अपने बच्चे के सेक्स का पता लगाने के लिए कोई भी टेस्ट करवाएं। इस बात का बेहद ध्यान रखें कि यह बच्चे के लिए जोखिम भरा हो सकता है। डॉक्टर्स इन परीक्षणों की सलाह नहीं देते है जब तक निम्नलिखित चीजें ना हों:

• यदि आपका सेल-फ्री डीएनए परीक्षण सकारात्मक आया है,
• पहले गर्भावस्था में क्रोमोसोमल स्थिति रही हो,
• यदि आपकी उम्र 35 से अधिक है,
• जेनेटिक डिसऑर्डर की फैमिली हिस्ट्री रही हो।

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी के दौरान खराब पॉश्चर हो सकता है मां और शिशु के लिए हानिकारक

अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

18 से 20 सप्ताह के बीच का समय सबसे आम माना गया है जब कपल अपने बच्चों के लिंग का पता लगाते हैं। कई डॉक्टर गर्भावस्था के इस समय अनैटमी स्कैन करते है जिससे कि आपके बच्चे के फीचर्स और सिर से पैर तक की आंतरिक क्रियाओं की जांच हो सके।

इस नॉन इन्वैसिव टेस्ट के दौरान, आपका डॉक्टर आपके पेट पर जेल लगा कर अल्ट्रासाउंड करता है और आपके बच्चे की तस्वीरें लेता है। अल्ट्रासाउंड के जरिए आपका बच्चा सही प्रकार से विकसित हो रहा है, यह देखा जाता है। इसके साथ ही प्रेग्नेंसी अल्ट्रासाउंड से बच्चे की शरीर की प्रणालियों, बच्चे के चारों ओर एमनीओटिक फ्लूइड (amniotic fluid) के स्तर और गर्भनाल (umbilical cord) का परीक्षण किया जाता है।

इस दौरान आपको बच्चे के लिंग का पता चल सकता है। डॉक्टर अक्सर स्क्रीन पर बच्चे के जननांगों को स्पष्ट रूप से देख सकते है। कभी-कभी, शिशु की स्थिति के कारण, लिंग का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, डॉक्टर आपको बच्चे के सेक्स के बारे में नहीं बताते हैं क्योंकि यह भारत में अवैध है।

विज्ञान कहता है कि प्रारंभिक गर्भावस्था में हार्ट बीट से सेक्स का पता लगाना विश्वसनीय संकेत नहीं है। वास्तव में, पुरुषों और महिलाओं के बीच प्रति मिनट औसत बीट्स में थोड़ा अंतर होता है। इसलिए, स्टडीज से पता चलता है कि हार्टबीट से सेक्स का पता नहीं लगाया जा सकता है।

लिंग का पता लगाना भारत में गैर-कानूनी है इसलिए, आप इसके लिए सोचे भी नहीं। बहरहाल, आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ गर्भ में लड़का है या लड़की इसका अनुमान लगाते रहें और डिलिवरी ड्यू डेट का इंतजार करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की चिकित्सापरामर्श और निदान नहीं देता।

और पढ़ें – 

प्रेग्नेंसी के दौरान कीड़े हो सकते हैं पेट में, जानें इससे बचाव के तरीके

प्रेग्नेंसी में ब्रेस्ट में आते हैं ये बदलाव, ऐसे करें देखभाल

प्रेग्नेंसी में कैंसर का बच्चे पर क्या हो सकता है असर? जानिए इसके प्रकार और उपचार का सही समय

प्रेग्नेंसी में ड्रैगन फ्रूट खाना सेफ है या नहीं?

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy"
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

प्रेग्नेंसी में स्ट्रेस का असर पड़ सकता है भ्रूण के मष्तिष्क विकास पर

प्रेग्नेंसी में स्ट्रेस किन-किन कारणों से हो सकता है ? प्रेग्नेंसी के दौरान अत्यधिक तनाव भ्रूण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है? प्रेग्नेंसी में स्ट्रेस...stress during pregnancy in hindi

Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
Written by Nidhi Sinha
प्रेग्नेंसी स्टेजेस, प्रेग्नेंसी मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

पेरेंट्स बनने के लिए आईयूआई तकनीक है बेस्ट!

IUI (आईयूआई) क्या है? आईयूआई प्रेग्नेंसी किन कपल्स के लिए सही विकल्प नहीं है? आईयूआई को सफल बनाने के लिए टिप्स और सुझाव क्या है ? IUI pregnancy process in hindi

Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
Written by Nidhi Sinha
प्रेग्नेंसी प्लानिंग, प्रेग्नेंसी मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

प्रेग्नेंसी में हायपोथायरॉइडिज्म डायट चार्ट, हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए करें इसे फॉलो

थायरॉइड या हायपोथायरॉइडिज्म डाइट चार्ट प्रेग्नेंसी में फॉलो नहीं करने से हो सकता है मिसकैरिज? ऐसे में गर्भावस्था के दौरान आहार में क्या शामिल करना है जरूरी?

Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
Written by Nidhi Sinha
प्रेग्नेंसी प्लानिंग, प्रेग्नेंसी मई 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

गर्भावस्था में चेचक शिशु के लिए जानलेवा न हो जाएं

NCBI के अनुसार गर्भावस्था में चिकनपॉक्स शिशु के लिए हो सकता है नुकसानदायक। प्रेग्नेंसी में चेचक के कारण शिशु के शारीरिक अंगों पर भी पड़ता है असर? chickenpox during pregnancy in hindi

Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
Written by Nidhi Sinha

Recommended for you

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी-Ectopic pregnancy

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्यों बन जाती है जानलेवा?

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Nidhi Sinha
Published on मई 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
कम उम्र में गर्भवती होना-teenage pregnancy

क्या कम उम्र में गर्भवती होना सही है?

Medically reviewed by Dr. Shruthi Shridhar
Written by Nidhi Sinha
Published on मई 12, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
गर्भावस्था में पिता के लक्षण

गर्भावस्था में पिता होते हैं बदलाव, एंजायटी के साथ ही सेक्शुअल लाइफ पर भी होता है असर

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Nidhi Sinha
Published on मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
प्रेग्नेंसी में बुखार

प्रेग्नेंसी में बुखार: कहीं शिशु को न कर दे ताउम्र के लिए लाचार

Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
Written by Nidhi Sinha
Published on मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें