एपगार स्कोर क्या होता है? जानें बच्चे के जन्म के बाद उसे कैसे दिया जाता है स्कोर

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 30, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

डिलिवरी के बाद बच्चे का रोना जरूरी माना जाता है। ठीक उसी तरह से अन्य बातें भी होती हैं जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिहाज से चेक की जाती है। बच्चे के जन्म के एक मिनट से लेकर पांच मिनट तक में एपगार स्कोर टेस्ट लिया जाता है। इस टेस्ट का उद्देश्य बच्चे की हार्ट बीट चेक करने से लेकर उसकी हलचल की जांच करना होता है। अगर बच्चे के अंदर सभी क्रियाएं सही हो रही है तो डॉक्टर एपगार स्कोर टेस्ट को बंद कर देता है। यदि बच्चा ठीक से प्रतिक्रया नहीं कर रहा है तो एपगार स्कोर टेस्ट को कई बार किया जा सकता है।

और पढ़ें: नवजात शिशु को घर लाने से पहले इस तरह तैयार करें शिशु का घर

एपगार स्कोर टेस्ट कैसे शुरू हुआ?

एपगार स्कोर सिस्टम का नाम अमेरिकी चिकित्सक वर्जीनिया एपगार के नाम पर रखा गया था। पहली बार 1960 के दशक में इस स्कोर प्रणाली को पेश किया गया था। एगपार स्कोर जन्म के समय बच्चे के पांच शारीरिक संकेतों का आकलन करने के लिए उपयोग किया जाता है। एपगार स्कोर को जीरो से लेकर 10 अंकों तक दिया जाता है।

एपगार स्कोर टेस्ट की हेल्प से बच्चे के जन्म के बाद उसकी शारीरिक जांच की जाती है। जांच के समय जिस तरह से बच्चे का शरीर काम कर रहा होता है, उसी के आधार पर स्कोर दिया जाता है। इन दिनों इस बात को लेकर बहुत विवाद है कि क्या एगपार स्कोर एक वैध उपकरण है या नहीं। इसका स्कोर बच्चे के लिए फायदेमंद साबित होता है या फिर नहीं।

पांच मिनट वाला एपगार स्कोर होता है महत्वपूर्ण

एक मिनट वाले एपगार स्कोर से कहीं ज्यादा पांच मिनट वाला एपगार स्कोर माना जाता है। ये बेबी की ओवरऑल हेल्थ को अच्छी तरह से रिफ्लेक्ट करता है। ऐसा माना जाता है कि जिस बच्चे का एपगार स्कोर आठ से 10 के बीच में है, वो बच्चा स्वस्थ्य है। जिस बच्चे का एपगार स्कोर पांच से सात के बीच में है, वो बच्चा थोड़ा अस्वस्थ्य हो सकता है। जिस बच्चे का एपगार स्कोर तीन से चार के बीच में है, वो बच्चा गंभीर समस्या से पीड़ित है। ऐसे बच्ची को तुरंत टेककेयर की जरूरत है नहीं तो खतरा हो सकता है।

एपगार स्कोर टेस्ट कैसे किया जाता है?

बच्चे के जन्म के समय मौजूद डॉक्टर एपगार स्कोर टेस्ट करते हैं।  एपगार स्कोर टेस्ट जन्म के तुरंत बाद दो बार किया जाता है। जब बच्चा एक मिनट का होता है और फिर जब बच्चे को पैदा हुए पांच मिनट हो जाते हैं। बच्चा पूर्ण रूप से प्रतिक्रिया देने में समय लगा सकता है। अगर शिशु ठीक से सांस ले रहा है तो सात मिनट की उम्र तक एपगार टेस्ट को दोहराया जा सकता है। अगर डॉक्टर को लग रहा है कि बच्चा अस्वस्थ्य है तो एपगार टेस्ट को दस मिनट में भी दोहराया जा सकता है।

जब बच्चा जन्म के तुरंत बाद रोता है और सतर्क दिखाई देता है तो अधिकांश डॉक्टर एक मिनट में नौ या 10 का स्कोर देते हैं। आमतौर पर रंग के लिए भी पॉइन्ट्स दिए जाते हैं। पांच मिनट के बाद चेक किया जाता है कि बच्चा बाहरी दुनिया में सहज महसूस कर रहा है या नहीं। अगर सब सही रहता है तो बच्चे को 10 अंक दे दिए जाते हैं। बच्चे के दिल की धड़कन की जांच और शारीरिक जांच भी की जाती है। बच्चे के अधिक संवेदनशील होने या फिर रोने पर बच्चे की हृदय गति 100 से अधिक होती है। सभी चांज करने के बाद बच्चे का एपगार स्कोर टेस्ट पूरा हो जाता है।

और पढ़ें: बेबी पूप कलर से जानें कि शिशु का स्वास्थ्य कैसा है

डिफरेंट एपगार स्कोर से क्या मतलब है?

बच्चे के एपगार स्कोर टेस्ट के लिए जन्म से एक मिनट बाद और फिर पांच मिनट बाद का समय लिया जाता है। किसी प्रकार की गड़बड़ी महसूस होने पर सात मिनट या फिर 10 मिनट बाद एपगार टेस्ट दोहराया जा सकता है। जन्म के बाद अक्सर बच्चों का रंग नीला होता है। ऐसा पांच दिनों तक हो सकता है। नवजात शिशुओं में जन्म के कुछ समय बाद तक नीला दिखना सामान्य शारीरिक विशेषता होती है। कुछ विशेषज्ञ एपगार स्कोर को पूर्ण रूप से सही नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि एपगार स्कोर एक मिनट से पांच मिनट के अंतर में विभिन्न विशेषता को नहीं जांच पाता है। इसी वजह से पांच मिनट के एपगार स्कोर को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। दोनों एपगार स्कोर में समानता पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

और पढ़ें: 5 फूड्स जो लेबर पेन को एक्साइट करने का काम करते हैं

एपगार स्कोर के दौरान

एपगार स्कोर में पांच जांचों को शामिल किया जाता है।

1. अपीयरेंस यानी बच्चे की त्वचा का रंग ( APPEARANCE)

जन्म के बाद बच्चे का रंग जांचना महत्पूर्ण होता है। वैसे तो बच्चे का रंग ज्यादातर नीला और हल्का गुलाबी होता है, लेकिन हाथ और पैर का पीला होना बच्चे के अस्वस्थ्य होने का लक्षण है।

हैलो स्वास्थ्य का न्यूजलेटर प्राप्त करें

मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कैंसर और भी बहुत कुछ...
सब्सक्राइब' पर क्लिक करके मैं सभी नियमों व शर्तों तथा गोपनीयता नीति को स्वीकार करता/करती हूं। मैं हैलो स्वास्थ्य से भविष्य में मिलने वाले ईमेल को भी स्वीकार करता/करती हूं और जानता/जानती हूं कि मैं हैलो स्वास्थ्य के सब्सक्रिप्शन को किसी भी समय बंद कर सकता/सकती हूं।

2. दिल की धड़कन (Pulse)

एपगार टेस्ट में बच्चे की पल्स भी चेक की जाती है। हार्ट रेट 100 पल्स पर मिनट होती है। अगर इस आकड़े में अंतर पाया जाता है तो ये भी गंभीर संकेत हो सकता है।

3. प्रतिक्रिया व्यक्त करना (Grimace)

जन्म के बाद बच्चा छींकता, खांसता या रोता है या नहीं। इस बारे में भी जांच की जाती है। बच्चा बाहरी माहौल के प्रति कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करता है तो ये बच्चे के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

और पढ़ें – नवजात शिशु की मालिश के लाभ,जानें क्या है मालिश करने का सही तरीका

4. एक्टिविटी (Activity)

बच्चा कोई एक्टिविटी करता है या नहीं, ये भी बहुत महत्पूर्ण है। अगर बच्चा जन्म के बाद हाथ पैर हिला रहा है और सामान्य प्रतिक्रया दे रहा है तो ये अच्छी बात है। अगर उसके अंदर बिल्कुल हलचल नहीं हो रही है तो खतरे का संकेत हो सकता है

5. ब्रीदिंग (Respiration)

सांस लेने की दर सामान्य है या नहीं, बच्चा चिल्ला रहा है या नहीं, इस बात की जांच भी एपगार टेस्ट में की जाती है।

और पढ़ें: क्या प्रेग्नेंसी में केसर का इस्तेमाल बन सकता है गर्भपात का कारण?

एपगार टेस्ट के बारे में और क्या जानें?

एपगार टेस्ट बच्चे के व्यवहार, दिमाग की प्रतिक्रिया आदि को जांचने के लिए किया जाता है। इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ये बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है। एपगार टेस्ट के माध्यम से ये पता चल जाता है कि बच्चे को किसी चिकित्सा देखभाल की जरूरत तो नहीं है। बच्चे के जन्म का आनंद उठाएं और अपने आपको परेशानी में न डालें।

बच्चे के जन्म के बाद जरूरी जांच के लिए एपगार टेस्ट किया जाता है। इससे संबंधित अगर कोई भी प्रश्न आपके मन में हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

Mary Kom’s Birthday : मां बनने के बाद थम नहीं जाती है दुनिया, मैरी कॉम ने ऐसे बदली समाज की पुरानी सोच

मैरी कॉम का नाम जबान पर आते ही महिलाओं को साहस मिलता है कुछ करने का, मुश्किल हालातों से लड़ने का, क्षमताओं से कहीं अधिक जीत लेने का और जीवन जीने की कला भी।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
लोकल खबरें, स्वास्थ्य बुलेटिन फ़रवरी 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

प्रेग्नेंसी के मिथक कर रहे हैं परेशान तो एक बार जरूर पढ़ लें ये आर्टिकल

प्रेग्नेंसी के मिथक आपको कई बार भ्रमित कर सकते हैं। सही जानकारी का पता लगाएं और दूसरों की बातों में आकर कोई भी गलत कदम न उठाएं। प्रेग्नेंसी के मिथक in hindi.

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Hemakshi J
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
प्रेग्नेंसी प्लानिंग, प्रेग्नेंसी जनवरी 15, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

प्रेग्नेंसी में इयर इंफेक्शन का कारण और इससे राहत दिलाने वाले घरेलू उपाय

प्रेग्नेंसी में इयर इंफेक्शन की जानकारी in hindi. प्रेग्नेंसी में इयर इंफेक्शन और कान में दर्द हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है। प्रेग्नेंसी में ear infection से बचने के लिए क्या करें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Hemakshi J
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi

क्या डिलिवरी के बाद मां को अपना प्लासेंटा खाना चाहिए?

प्लासेंटा खाना चाहिए या नहीं की जानकारी in hindi. क्या आपने कभी सुना है कि प्लासेंटा को खाया भी जाता है। जानवर अक्सर बच्चे को जन्म देने के बाद Placenta को खा जाते हैं। कुछ कल्चरल में भी इसे खाया जाता है।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Hemakshi J
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
डिलिवरी केयर, प्रेग्नेंसी दिसम्बर 31, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

एपिसीओटॉमी क्विज, episitomy quiz

डिलिवरी के दौरान की जाती है एपिसीओटॉमी की प्रोसेस, क्विज खेलकर आप बढ़ा सकते हैं नॉलेज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
प्रकाशित हुआ अक्टूबर 27, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
डिलिवरी के वक्त दाई

डिलिवरी के वक्त दाई (Doula) के रहने से होते हैं 7 फायदे

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
प्रकाशित हुआ मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
पॉलिहाइड्रेमनियोस

पॉलिहाइड्रेमनियोस (गर्भ में एमनियोटिक फ्लूइड ज्यादा होना) के क्या हो सकते हैं खतरनाक परिणाम?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr Sharayu Maknikar
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
प्रकाशित हुआ मई 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
राइट ब्रीदिंग हैबिट्स-Right Breathing Habits

राइट ब्रीदिंग हैबिट्स तनाव दूर करने से लेकर दे सकती हैं लंबी उम्र तक

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ मई 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें