प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान आपके शिशु का वजन 200 ग्राम के करीब हो जाता है और उसकी लंबाई 13 सेंटीमीटर के आसपास हो जाती है। गर्भावस्था के 18 हफ्ते (प्रेग्नेंसी वीक 18) के दौरान शिशु की त्वचा के नीचे फैट बनना शुरू हो जाता है और यह फैट शिशु को गर्म रखने के लिए एक स्त्रोत के रूप में कार्य करता है। प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान शिशु अपनी आंखों की पुतलियां हिला सकता है, हालांकि उसकी पलकें इस समय भी बंद रहती हैं। शिशु की पलकें, भौहें और उंगलियों के फिंगरप्रिंट और हाथों की लकीरें बनने लगती हैं। प्रेग्नेंसी वीक 18 के समय शिशु के पंजे और हाथों की उंगलियों के नाखून बनने चालू रहते हैं। 18 हफ्ते की गर्भवती के शिशु अपना सिर घुमाने लगता है। इसके साथ ही अगर गर्भवती महिला पेट के सामने रोशनी करती हैं, तो शिशु के आंखों के रेटिना उस रोशनी का पता लगाने में सक्षम होते हैं।

प्रेग्नेंसी वीक 18 में शिशु थोड़ा बहुत हिलना शुरू कर देता है। 18 हफ्ते की गर्भवती महिला अपने पेट में शिशु की हलचल, पैर मारना आदि गतिविधियों को महसूस कर सकती है। गर्भवती महिला इस हफ्ते में शिशु की उबासी, हिचकियों को भी महसूस कर सकती है। इस समय शिशु का विकास मजबूत होने लगता है और उसके कान आपकी आवाज को सुन सकते हैं। यह समय शिशु से बात करने और मातृत्व का विकास होने में मदद करता है। शिशु जब अपनी जैविक मां की आवाज, उसकी हृदयगति को सुनता है, तो उसे अच्छा अनुभव होता है।
प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान गर्भवती महिला के कमर दर्द की समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है। हालांकि, यह गर्भावस्था का एक आम लक्षण है। जैसे-जैसे गर्भवती महिला का पेट बढ़ता रहता है, वैसे-वैसे ही निचली कमर में दर्द बढ़ता रहता है। इसके पीछे आपकी सेंटर ऑफ ग्रेविटी में बदलाव होता है, जिससे आपकी निचली कमर पर ज्यादा स्ट्रेस पड़ता है। इसका दूसरा कारण प्रेग्नेंसी हॉर्मोन की वजह से पेल्विक बोन और लिगामेंट्स का ढीला होना भी हो सकता है।
यहां दिए गए कुछ टिप्स की मदद से आप गर्भावस्था में होने वाले कमर दर्द से राहत पा सकती हैं। जैसे-
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प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान आपको बार-बार तीखा और गर्म खाने की इच्छा हो सकती है, जिससे सीने में जलन होने की संभावना बढ़ सकती है। अगर आपका पेट संवेदनशील है, तो अपने सूप या अन्य फूड्स में लाल मिर्च डालने से पहले आपको सोचना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन में सामान्य बदलाव होने की वजह से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। आपका इम्यून सिस्टम भी पहले के मुकाबले कमजोर होता है, जिससे आपको पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान आपका मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है और पेट और आंतों में मांसपेशियों का संकुचन (Muscles Contractions) धीरे हो जाता है, जिससे खाना में पचाने में मुश्किल होती है। इसलिए, प्रेग्नेंसी वीक 18 में सीने में जलन की समस्या से राहत पाने के लिए आपको थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए और कोशिश करें कि तीखा कम खाएं।
प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान आपकी नजर में स्पॉट्स या फ्लोटर्स दिखना सामान्य बात है। इसके लिए आप अपने प्रेग्नेंसी हॉर्मोन को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान आपकी आंखों में आंसुओं का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे आपकी आंखें रूखी और नजर धुंधली हो सकती है। अगर आपकी नजर ज्यादा धुंधली हो जाती है या इसके आपके रोजाना के कार्यों में बाधा पड़ती है, तो इसके बारे में अपने डॉक्टर को बताएं। नजर के धुंधला होने का कारण आंखों में फ्लूड बनना भी हो सकता है, जो कि एक गंभीर समस्या है और इसे जल्दी ठीक करवाना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर और गेस्टेशनल डायबिटीज की वजह से भी नजर धुंधली हो सकती है।
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अगर आप प्रेग्नेंसी वीक 18 या गर्भावस्था के पांचवे महीने में डॉक्टर के पास नहीं गई हैं, तो आपको जाना चाहिए। आपका डॉक्टर प्रेग्नेंसी वीक 18 में आपको दूसरी तिमाही में होने वाला अल्ट्रासाउंड करवा सकता है, जिसे लेवल 2 अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है। इसे आमतौर पर प्रेग्नेंसी वीक 18 से प्रेग्नेंसी वीक 22 के दौरान करवाया जाता है। दूसरी तिमाही के दौरान करवाए जाने वाले 3डी या 4डी अल्ट्रासाउंड की मदद से आपको और आपके डॉक्टर को शिशु के विकास का सही आंकलन लग जाता है। आप इसकी मदद से अपने विकासशील शिशु की गतिविधियों की बेहतर फोटो या वीडियो देख पाएंगी। लेवल 2 सोनोग्राम, जिसे एनॉमली या एनाटोमी स्कैन कहते हैं की मदद से शिशु और उसके अंगों की लंबाई, एम्नियोटिक फ्लूड की मात्रा और शिशु को पर्याप्त ब्लड सप्लाई करने वाली प्लासेंटा की लोकेशन की जांच होती है। इस अल्ट्रासाउंड की मदद से शिशु की बारीकी और बेहतर तस्वीर सामने आती है।
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सी फूड में मौजूद खतरनाक तत्व- आप मछली या अन्य सी फूड का सेवन कर सकती हैं, लेकिन उनका सेवन करते हुए थोड़ी सावधानी बरतें। सी फूड में काफी पोषण होता है, लेकिन उसमें डाइऑक्सिन, मर्करी और पेस्टीसाइड जैसे विषाक्त तत्व भी हो सकते हैं। सी फूड में विषाक्त तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जिससे शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।
हालांकि, प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान सी फूड्स से दूरी बना लेना भी ठीक नहीं है। बल्कि इससी जगह आपको यह पता करना चाहिए कि कौन-सी मछली का सेवन आपके लिए उचित है और कौन-सी मछली का सेवन खतरनाक है।
थकान- अगर प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान आपको सांस लेने में दिक्कत या चलने में थकान हो जा रही है, तो थोड़ी देर रुक कर आराम करें। बिना आराम किए ज्यादा काम करने से आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है। गर्भावस्था के दौरान ज्यादा काम करने से न सिर्फ आपको थकान होती है, बल्कि इसका असर शिशु पर भी पहुंचता है। याद रखें कि गर्भावस्था के दौरान आप पहले जितना मजबूत और एनर्जेटिक नहीं रहती हैं। अगर, प्रेग्नेंसी वीक 18 के दौरान आपको ज्यादा देर तक काम करना पड़ रहा है, तो उसके दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लें। आपके लिए खुद का और शिशु का स्वास्थ्य सबसे पहले होना चाहिए। जरूरत हो तो एक दिन पूरा आराम करें, जिससे आप दोबारा अच्छे से काम कर पाएंगी।
अगले आर्टिकल में हम प्रेग्नेंसी वीक 19 के बारे में बात करेंगे।
डिस्क्लेमर
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Stages of pregnancy –https://www.womenshealth.gov/pregnancy/youre-pregnant-now-what/stages-pregnancy – Accessed on 23/12/2019
What happens in the fourth month of pregnancy? – https://www.plannedparenthood.org/learn/pregnancy/pregnancy-month-by-month/what-happens-fourth-month-pregnancy – Accessed on 23/12/2019
What happens in the fifth month of pregnancy? – https://www.plannedparenthood.org/learn/pregnancy/pregnancy-month-by-month/what-happens-fifth-month-pregnancy – Accessed on 23/12/2019
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Current Version
02/11/2020
Aamir Khan द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr Sharayu Maknikar
Updated by: Sanket Pevekar
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr Sharayu Maknikar