यूरिन, ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसे गर्भावस्था परीक्षण से लगाएं प्रेग्नेंसी का पता

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Update Date जनवरी 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कई बार पीरियड न आने की वजह से महिलाएं कंफ्यूज हो जाती हैं कि क्या वे प्रेग्नेंट हैं? ऐसे में एक्चुअल स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करना महत्वपूर्ण हो जाता है। अलग-अलग तरह के गर्भावस्था परीक्षण आपके कंफ्यूजन को खत्म कर सकते हैं। आमतौर पर महिलाएं मासिक धर्म के पहले दिन पीरियड मिस होने पर ही प्रेग्नेंसी के बारे में अंदाजा लगाती हैं। कई बार यह अंदाजा गलत साबित होता है। आज हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे प्रेग्नेंसी को लेकर आपकी शंकाएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी। इससे ड्यू डेट का अंदाजा भी लग जाएगा। गर्भावस्था परीक्षण के माध्यम से आपको असल में पता चल जाएगा कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं है।

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गर्भावस्था परीक्षण है अल्ट्रासाउंड टेस्ट

अगर आप आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन को लेकर अभी भी परेशान हैं, तो अब उसे भूल जाइए। इसके अलावा भी प्रेग्नेंसी की पुष्टि करने का विश्वसनीय तरीका गर्भावस्था परीक्षण अल्ट्रासाउंड टेस्ट है, जिससे पता चलता है कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। कुछ डॉक्टर्स सिर्फ मासिक धर्म में अनियमित्ता आने, महिला की उम्र 35 या इससे अधिक होने और पहले मिसकैरिज होने के मामले में ही अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। गर्भावस्था परीक्षण अल्ट्रासाउंड पहले ज्यादा इस्तेमाल किया जाता था लेकिन बदलते समय के साथ अलग-अलग प्रेग्नेंसी टेस्ट किट आ जाने से अल्ट्रासाउंट टेस्ट लोग कम इस्तेमाल करते हैं।

फिजकल एक्जामिनेशन से ड्यू डेट का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हालांकि, बच्चे की पहली धड़कन नौ या 10 हफ्ते पर सुनी जा सकती है। 18 और 22 हफ्तों के बीच बच्चा पहली बार मूवमेंट करता है। ऐसा इस अवधि के पहले या बाद में भी हो सकता है। इससे ड्यू डेट के सटीक होने का एक अंदाजा भी मिल सकता है।

गर्भावस्था परीक्षण के लिए उपयोग होने वाले अल्ट्रासाउंड (या सोनोग्राम) टेस्ट में आपको बिल्कुल दर्द नहीं होगा। इसमें हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स का इस्तेमाल करके गर्भाशय में बच्चे और प्रेग्नेंसी के विकास का आंकलन किया जाता है। 10 से 12 हफ्ते पूरे होने से पहले अल्ट्रासाउंड पर आपके बच्चे की धड़कनों को नहीं सुना जा सकता है। आपकी प्रेग्नेंसी कितने दिन की है, यह जानने का अल्ट्रासाउंड एक बेहतर तरीका है।

गर्भावस्था परीक्षण में छह से 10 हफ्तों के बीच पहला अल्ट्रासाउंड टेस्ट किया जाता है। ड्यू डेट का पता लगाने का यह सबसे सटीक तरीका है। यदि आप पहले ट्राइमेस्टर में प्रवेश कर चुकी हैं तो ड्यू डेट में बदलाव नहीं होगा।

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गर्भावस्था परीक्षण के लिए ब्लड टेस्ट भी है सही

गर्भावस्था परीक्षण के लिए ब्लड टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। ब्लड टेस्ट से भी प्रेग्नेंसी की जानकारी हासिल की जा सकती है। इस टेस्ट में चोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) नामक हार्मोन की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। भ्रूण के यूटराइन लाइन से जुड़ जाने से प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में यह हार्मोन बहुत ही तेजी से बनता है। हार्मोन के स्तर में तेजी से आया बदलाव प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है। गर्भावस्था परीक्षण से प्रेग्नेंसी की जानकारी हासिल करने के लिए ब्लड टेस्ट दो प्रकार से किया जाता है।

क्वांटिटेटिव ब्लड टेस्ट खून में एचसीजी की सही मात्रा का आंकलन करता है। क्वालिटेटिव एचसीजी ब्लड टेस्ट आपको सिर्फ यह बताता है कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। ब्लड टेस्ट का सबसे बड़ा फायदा है कि गर्भधारण के 7-12 दिनों के भीतर आपको प्रेग्नेंसी की जानकारी मिल जाती है। पीरियड न आने पर भी यदि टेस्ट नेगेटिव आ रहा है तो दोबारा ब्लड टेस्ट कराया जाना चाहिए।

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यूरिन टेस्ट से भी होता है गर्भावस्था परीक्षण

यूरिन टेस्ट को दो तरीकों से किया जा सकता है। घर में यूरिन की जांच के अलावा डॉक्टर के क्लीनिक में भी यह जांच की जा सकती है। एक कप में यूरिन को रखकर इसमें एक स्टिक को डुबोया जाता है या एक विशेष कंटेनर में इसकी एक बूंद डाली जाती है। इसके अलावा इसे करने का एक दूसरा तरीका भी है।

इसमें एक स्टिक को यूरिन स्ट्रीम में डालते और मिडस्ट्रीम की यूरिन को लेते हैं। आपको इसके रंग, लाइन या चिन्ह (प्लस या माइनस की तरह ) में बदलाव नजर आएगा, जो यह संकेत देता है कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं है।

कब करवाएं यूरिन टेस्ट

ज्यादातर डॉक्टर्स यूरिन टेस्ट करने से पहले मासिक धर्म के पहले दिन जब आपका पीरियड नहीं आता है तब तक इंतजार करने की सलाह देते हैं। आमतौर पर यह टेस्ट गर्भधारण के दो हफ्तों के बाद होता है। हालांकि, कुछ टेस्ट जो ज्यादा संवेदनशील होते हैं उन्हें शीघ्र ही कर लेना चाहिए।

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गर्भावस्था परीक्षण के लिए यूरिन टेस्ट कितना सटीक

ज्यादातर यूरिन टेस्ट 97 पर्सेंट सही परिणाम देते हैं, यदि इन्हें उचित तरीके से किया जाए। समय से पहले किया गया यूरिन टेस्ट नेगेटिव आ सकता है लेकिन, फिर भी आपका पीरियड नहीं आता है तो ऐसी स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।

इन टेस्ट्स की मदद से आप प्रेग्नेंसी के बारे में पता कर सकती हैं। साथ ही ड्यू डेट का एक अनुमान भी आपको मिल जाएगा। प्रेग्नेंट होने की जानकारी मिलते ही आपको खान-पान आदि पर विशेष ध्यान देना होगा।

गर्भावस्था परीक्षण में आरएच टाईप ब्लड टेस्ट

अपने ब्लड टाईप और आरएच टाईप का पता लगाने के लिए अपने खून की जांच कराना जरूरी है। अगर आप Rh-negative हैं और आपका बच्चा Rh-पॉजिटिव है तो यह आपके बच्चे के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। लेकिन कोई भी यह नहीं जानता कि जन्म के बाद आपके बच्चे का ब्लड टाईप क्या है। इसलिए अगर आप आरएच-नेगेटिव हैं तो आपको एक विशेष इंजेक्शन दिया जाएगा, जिसे एंटी-डी कहा जाता है, जो आपके 26-28 वीक की एंटिनाटल अपॉइंटमेंट और आपकी 34-36 वीक अपॉइंटमेंट है।

अगर आपको गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग होती है तो भी आपको एंटी-डी दिया जाता है। यह स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करता है।आपके बच्चे के जन्म के बाद आपके बच्चे की गर्भनाल से खून का सैंपल लिया जाता है और आरएच टाईप की जांच की जाती है। अगर आपका शिशु Rh- पॉजिटिव है तो भी आपको और एंटी-डी इंजेक्शन लगाना पड़ेगा।

गर्भावस्था परीक्षण में जेस्टेशनल डायबिटीज

जेस्टेशनल डायबिटीज के लिए ब्लड टेस्ट आमतौर पर गर्भावस्था के 24-28 सप्ताह में किया जाता है। अगर आपको पिछली गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज था या आपको यह स्थिति होने का उच्च जोखिम है तो आपका डॉक्टर शायद आपको पहले ही इस गर्भावस्था परीक्षण का सुझाव देगा।गर्भावस्था परीक्षण में आमतौर पर एक ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (जीटीटी) शामिल होता है जहां आपको रात भर उपवास (खाना या पीना नहीं) होता है। आपका ब्लड टेस्ट किया जाता है फिर आप एक शर्करा पेय में 75 ग्राम ग्लूकोज पीते हैं। आपके रक्त का दो बार और परीक्षण किया गया है – एक घंटे के बाद और दो घंटे बाद। अगर आपके ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट पर हाई शुगर का स्तर आता है, तो आपको जेस्टेशनल डायबिटीज डायग्नोज किया जाएगा।

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