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प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से मिलेगा आराम, आजमाएं ये आसान टिप्स

प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से मिलेगा आराम, आजमाएं ये आसान टिप्स

क्या आपको पता है कि लगभग 50 से 70% गर्भवती महिलाओं में प्रेग्नेंसी में कमर दर्द की समस्या से जूझना पड़ता है। यह दर्द आमतौर पर गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में ज्यादा देखने को मिलता है। डॉ सुमईया (एम. डी. ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजिस्ट) के अनुसार “आमतौर पर पीठ के निचले हिस्से में दर्द प्रेग्नेंसी के पांचवें और सातवें महीने के बीच होता है हालांकि, कुछ मामलों में यह आठ से 12 सप्ताह में ही शुरू हो जाता है।”

प्रेग्नेंसी में शरीर के अलग-अलग हिस्सों ( हाथ-पैर, पेट आदि ) में दर्द होना आम बात है। प्रेग्नेंसी में कमर दर्द भी उन्हीं में से एक है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान पेल्विक के जोड़ खुलने लगते हैं ताकि शिशु को डिलिवरी के समय बाहर आने में आसानी हो सके। इसी तरह और भी बहुत से कारण हैं जिनकी वजह से प्रेग्नेंसी में कमर दर्द या पीठ दर्द होता है। ‘हैलो स्वास्थ्य’ के इस आर्टिकल में प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को दर्द से निपटने में मददगार साबित हो सकती हैं।

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गर्भावस्था में बैक पेन: प्रेग्नेंसी में कमर दर्द के क्या कारण हैं?

1. हार्मोनल बदलाव (Hormonal Changes) – प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को प्रेग्नेंसी में कमर दर्द की शिकायत रहती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर रिलैक्सिन (relaxin) हार्मोन बनाता है, जिससे पेल्विक एरिया और कमर की हड्डियों के जोड़ ढीले पड़ने लगते हैं, ताकि शिशु का जन्म आसानी से हो सके। इसकी वजह से प्रेग्नेंसी में कमर दर्द और कमर के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है।

2. वजन बढ़ना (weight gain) – सामान्यतौर पर गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं का वजन 12-15 किलो तक बढ़ता है। जिसका प्रभाव रीढ़ की हड्डी और कमर पर पड़ता है। साथ ही गर्भाशय और शिशु का वजन के बढ़ने की वजह से कमर की रक्त धमनियों (blood vessels) पर प्रभाव पड़ता है, यह भी उनके बैक पेन का एक कारण हो सकता है। प्रेग्नेंसी में कमर दर्द का अहम कारण हैं उस दौरान बढ़ने वाला वजन। वजन जितना ज्यादा बढ़ता है महिलाओं को प्रेग्नेंसी में कमर दर्द की परेशानी उतनी ज्यादा होती है।

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3. सही मुद्रा (posture) में न रहना – यूट्रस के बढ़ने की वजह से ‘सेंटर ऑफ ग्रेविटी’ बदलता है, जिससे पॉस्चर भी बदलता है। गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला कैसे बैठ रही हैं और कैसे लेट रही हैं, इसका असर भी पीठ पड़ता है। गलत पोजीशन में बैठना, ज्यादा झुकना, ज्यादा समय तक खड़े रहना आदि की वजह से हल्का-फुल्का होने वाला पीठ-दर्द बढ़ भी सकता है।

4. मांसपेशियों में बदलाव – जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है, वैसे-वैसे गुदा और पेट की मांसपेशियां (जोकि समांतर होती हैं) अलग होने लगती हैं, इसलिए गर्भावस्था में कमर-दर्द की समस्या होती है।

5. तनाव- इमोशनल स्ट्रेस, प्रेग्नेंट महिला की पीठ में मांसपेशियों में तनाव का कारण बन सकता है, जिससे प्रेग्नेंसी में कमर दर्द या ऐंठन की समस्या हो सकती है। यह आप खुद भी महसूस कर सकती हैं गर्भावस्था के दौरान स्ट्रेस लेने पर पीठ-दर्द बढ़ जाता है।

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गर्भावस्था में बैक पेन: प्रेग्नेंसी में कमर दर्द को कम करने के टिप्स क्या हैं?

प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द को पूरी तरह से तो नहीं रोका जा सकता है लेकिन, दर्द की यह समस्या ज्यादा गंभीर न हो, इसके लिए कुछ आसान टिप्स जरूर अपनाएं जा सकते हैं। जैसे-

  • प्रेग्नेंसी के समय पीठ और कमर दर्द में आराम के लिए व्यायाम बहुत कारगर साबित होते हैं। डॉक्टर की सलाह से एक्सरसाइज करें। इससे प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से राहत मिलेगी।
  • कोशिश करें कि पीठ के बल न झुकें। अगर कोई सामान झुककर उठाना भी पड़े, तो पहले घुटने के बल झुकें और फिर सामान उठाएं। इस दौरान अपनी पीठ पर दबाव न पड़ने दें। ऐसा करने से आप प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से बच सकती हैं।
  • ऊंची एड़ी की सैंडल न पहनें। इससे दर्द बढ़ सकता है।
  • पीठ के बल सोने से बचें यह भी प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से बचा सकता है।
  • ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में खड़ी या बैठी न रहें।
  • अगर आप लेटी हैं और उठना चाहती हैं, तो झटके से न उठें। पहले एक तरफ करवट लें, फिर धीरे-धीरे बैठने की स्थिति में आएं और आराम से खड़ी हो जाएं।

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प्रेग्नेंसी में कमर दर्द को कम करने के लिए यह भी अपना सकती हैं-

‘हैलो स्वास्थ्य’ ने कुछ गर्भवती महिलाओं से बात की और जानना चाहा कि प्रेग्नेंसी में कमर दर्द से निपटने के लिए वे क्या करती हैं? इस पर मिले कुछ जवाब, जो आपके लिए भी कारगर साबित हो सकते हैं लेकिन, कोई भी उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें-

पूनम की प्रेग्नेंसी का 5वां महीना चल रहा है और कमर दर्द में कुछ आराम मिल सके, इसके लिए मां के बताए अनुसार मालिश का सहारा लेती हैं। मालिश से दर्द हो रही मांसपेशियों में आराम मिलता है। पीठ की मालिश कराने के लिए घर के किसी सदस्य की मदद ली जा सकती है या प्रोफेशनल थेरेपिस्ट के पास भी जा सकती हैं।

दिल्ली की रहने वाली शालिनी छाबड़ा पिछले तीन महीने से प्रेग्नेंट और न्यूक्लिअर फैमिली में रहने की वजह से वे ज्यादा घरेलू उपाय नहीं कर पाती हैं इसलिए, गर्भावस्था के दौरान होने वाले पीठ के दर्द को कम करने के लिए मेटरनिटी सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल करती हैं।

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प्रेग्नेंसी में कमर दर्द होने पर डॉक्टर से कब संपर्क करें?

कभी-कभी प्रेग्नेंसी में कमर दर्द सामान्य न होकर किसी आने वाली परेशानी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए, अगर ऐसी कोई स्थिति दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-

  • अगर दर्द बहुत तेज और असहनीय हो,
  • अगर दर्द अचानक से शुरू हुआ हो और लगातार बढ़ता जा रहा हो,
  • अगर दर्द के साथ ही बुखार लगे या पेशाब करने में तकलीफ हो रही हो।

प्रेग्नेंसी में पीठ/कमर दर्द होना सामान्य है। इसके चलते गर्भवती को उठने-बैठने, लेटने व सोने में परेशानी होती है लेकिन, कभी-कभी प्रेग्नेंसीके दौरान पीठ का दर्द इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि गर्भवती से सहन करना कठिन हो जाता है। इस तरह की स्थिति में डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिए।

उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल की जानकारी पसंद आई होगी और आपको गर्भावस्था में बैक पेन से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Mayank Khandelwal के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Shikha Patel द्वारा लिखित
अपडेटेड 09/09/2019
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