गर्भ में शिशु के होने के बावजूद भी प्रेग्नेंसी वीक 3 (गर्भावस्था का तीसरा सप्ताह) में आपको प्रेग्नेंट होने का आभास या प्रेग्नेंसी वीक 3 (गर्भावस्था का तीसरा सप्ताह) के लक्षण (Pregnancy Symptoms Week 3) नहीं दिखते। फर्टिलाइज एग को सेल डिवीजन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

गर्भधारण के 30 घंटे बाद सेल या जाइगोट (Cell or Zygote) दो भागों में विभाजित होता है और धीरे-धीरे चार और फिर आठ सेल में विभाजित होता है। तीन दिनों के बाद 8 सेल 16 सेल में विभाजित होती हैं। इन सेल के विभिन्न ग्रुप को मोरुला या ब्लास्टोसिस्ट (Morula or Blastocyst) कहा जाता है। दो दिन बाद जाइगोट फैलोपियन ट्यूब से गर्भ की तरफ जाता है। जाइगोट के अंदर 46 क्रोमोसोम होते हैं, जिसमें से 23 क्रोमोसोम जैविक मां से और 23 क्रोमोसोम जैविक पिता से आते हैं। यही क्रोमोसोम भ्रूण का लिंग और शारीरिक बनावट तय करते हैं।
आपको पता चले बिना भी प्रेग्नेंसी वीक 3 (गर्भावस्था का तीसरा सप्ताह) में भ्रूण का साथ देने के लिए आपके शरीर में कई परिवर्तन आते हैं। डॉक्टर को आपकी गर्भावस्था के बारे में पता लगाने के लिए करीब 6 हफ्ते लग जाते हैं।
आमतौर पर डॉक्टरों को यह निर्धारित करने में 6 सप्ताह लगते हैं कि क्या आप गर्भवती हैं। हालांकि, प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) के अंत तक कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग (रक्तस्राव) दिख सकती है, जिसे ‘इंप्लांटेशन स्पॉटिंग या इंप्लांटेशन ब्लीडिंग’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि आपका फर्टिलाइज्ड एग यूटेराइन लाइनिंग के अंदर दाखिल हो गया है। लेकिन, सभी महिलाओं का प्रेग्नेंसी का यह लक्षण नहीं दिखता है और कुछ महिलाएं इसे माहवारी समझने की भूल भी कर जाती हैं।
सेल्स के दो हिस्सों में विभाजित होने की प्रक्रिया गर्भधारण के तीस घंटे बाद शुरू होती है और उसके तीन दिन बाद यह 16 सेल्स में विभाजित होती है। इसके दो दिन बाद जाइगोट फैलोपियन ट्यूब से गर्भाशय की ओर जाता है।
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प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) में अचार व आइसक्रीम की क्रेविंग (खाने की चाह) या जी मिचलाना जैसे मॉर्निंग सिकनेस (Morning Sickness) के लक्षण प्रेग्नेंसी के सामान्य लक्षणों में से एक हैं। हालांकि, जरूरी नहीं कि यह लक्षण सभी गर्भवती महिलाओं के अंदर देखने को मिलें। गर्भवती महिलाओं पर किए गए रिसर्च से पता चला है कि, करीब तीन चौथाई प्रेग्नेंट महिलाओं को उल्टी, जी मिचलाना जैसे मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण दिखे, जबकि एक चौथाई प्रेग्नेंट महिलाओं में यह लक्षण नहीं दिखे। यदि, आप भी एक चौथाई वाली गर्भवती महिलाओं में शामिल हैं और आपको अभी तक जी मिचलाना या उल्टी जैसी समस्याएं नहीं हुई तो आप खुशकिस्मत हैं।
तीन चौथाई प्रेग्नेंट महिलाओं को पूरे दिन मॉर्निंग सिकनेस महसूस हो सकती है। लेकिन, घबराने की कोई बात नहीं है, क्योंकि प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में में खाने का मन नहीं करने या वजन घटने आपके शिशु पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। यह सामान्य हो सकता है और आपका वजन दोबारा पहले जैसा या उससे भी ज्यादा हो जाएगा। दोबारा वजन बढ़ाना आसान होता है, क्योंकि प्रेग्नेंसी के 12वें हफ्ते के बीच से 14वें हफ्ते तक जी मिचलाना या उल्टी जैसे लक्षण गायब हो जाएंगे।
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अगर आपको प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) में गर्भवती होने के लक्षण या संकेत (Symptoms And Signs of getting Pregnant) के दिखते हैं तो अपने डॉक्टर से जरूर मिलें। हालांकि, यह प्रेग्नेंसी का पता लगाने के लिए बहुत जल्दी समय होगा, लेकिन आपका डॉक्टर आपको प्रेग्नेंसी टेस्ट करने की सलाह दे सकता है। आमतौर पर, प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का सही समय पिछले मासिक धर्म (Last Menstrual Period) के 6 हफ्तों के बाद का होता है। लेकिन, अगर आप प्रेग्नेंसी के संकेत दिखने के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट कर रही हैं और रिजल्ट नेगेटिव आता है तो यह जरूरी नहीं कि यह रिजल्ट सही हो।
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प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) के दौरान प्रेग्नेंट होने का पता लगाना थोड़ी जल्दबाजी होगी। लेकिन, आप घर पर ही प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकती हैं, मगर हमने जैसा ऊपर बताया कि प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) के प्रेग्नेंसी टेस्ट में नेगेटिव रिजल्ट आने से यह कंफर्म नहीं होता कि प्रेग्नेंसी वीक 6 में किए गए प्रेग्नेंसी टेस्ट में भी रिजल्ट नेगेटिव आए। घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के लिए आप भारतीय मार्केट में मौजूद किसी प्रेग्नेंसी किट का इस्तेमाल कर सकती हैं।
यह टेस्ट आपके यूरीन में मौजूद विशेष तरह के हॉर्मोन की जांच करता है, जो कि प्लेसेंटा रिलीज करता है। यह हॉर्मोन ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (HCG) कहलाता है। प्रेग्नेंसी टेस्ट स्ट्रिप पर ‘प्लस साइन’ या ‘दो पिंक लाइन्स’ दिखना पोजिटिव रिजल्ट माना जाता है, जो कि कंफर्म करता है कि आपके यूरिन में यह हॉर्मोन उपलब्ध है।
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प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) के अंदर आपको यह चिंता हो सकती है कि अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो प्रेग्नेंसी से आपकी सोशल लाइफ किस तरह प्रभावित होगी या आप अपना ऑफिस या घर का काम कैसे मैनेज करेंगी या क्या खाना आपके शिशु के लिए सुरक्षित रहेगा। आपको पता होना चाहिए कि आपके शिशु का विकास सिर्फ आपके खाने पर ही नहीं, बल्कि आपके इमोशन पर भी निर्भर करता है।
प्रेग्नेंसी वीक 3 (Pregnancy week 3) में जब आप चिंता करती हैं या परेशान होती हैं तो आपका शरीर कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज करता है, जो कि आपके शरीर में इंफ्लमेटरी रिस्पॉन्स को पैदा या बढ़ा सकता है। कई शोध में पता चला है कि प्रेग्नेंसी के दौरान खराब स्वास्थ्य और इंफ्लमेशन के बीच एक संबंध है जो कि शिशु के विकास संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है। साथ ही, प्रेग्नेंसी के पहले तिमाही में स्ट्रेस लेने से महिलाओं में गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है।
बातचीत करें- हो सकता है कि आप अपने पार्टनर या दोस्तों को पर्सनल प्रॉब्लम बताकर परेशान नहीं करना चाहती हों, लेकिन सिर्फ खुद ही परेशान रहना या सोचते रहना भी ठीक नहीं है। इसके लिए आप किसी प्रोफेशनल से बातचीत कर सकती हैं और आपको धीरे-धीरे ठीक लगने लगेगा।
आराम करें- मेडिटेशन या रिलेक्शेसन टेक्नीक्स आपकी मदद कर सकती हैं। इसके लिए आप अपनी मनपसंद ड्रिंक बनाकर अपनी मनपसंद बुक भी पढ़ सकती हैं।
रोजाना एक्सराइज करें- आप प्री-नेटल योगा क्लास, स्विमिंग या वॉकिंग या कोई भी मनपसंदीदा हल्की एक्सराइज रुटीन अपना सकती हैं। इन आसान एक्सरसाइज की मदद से आप न सिर्फ स्ट्रेस को मैनेज कर पाएंगी, बल्कि डिलिवरी के लिए अपने शरीर को तैयार भी कर पाएंगी।
प्रेग्नेंसी में तनाव होना सामान्य है, लेकिन यह समस्या गंभीर होने से पहले इसे मैनेज करना भी बहुत जरूरी है।
डिस्क्लेमर
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Current Version
23/09/2021
Surender aggarwal द्वारा लिखित
Updated by: Bhawana Awasthi