Peripheral Cyanosis: पेरिफेरल सायनॉसिस क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज
त्वचा पर पड़ने वाले निशान कुछ ना कुछ इशारा जरूर करते हैं। आज इस आर्टिकल में त्वचा पर नीले रंग का निशान आखिर क्या दर्शाता है यह समझेंगे। प्रायः स्किन का कलर अगर ब्लू नजर आये तो हमसभी ऐसा सोच लेते हैं कि चोट लगी होगी इसलिए त्वचा नीली पड़ गई है। हालांकि इसकी वजह कुछ और है और यह एक स्किन कंडिशन है पेरिफेरल सायनॉसिस (Peripheral Cyanosis)। क्या है पेरिफेरल सायनॉसिस, पेरिफेरल सायनॉसिस के कारण और इससे जुड़े अन्य सवालों का जवाब आज इस आर्टिकल में आपके साथ शेयर करेंगे।
पेरिफेरल सायनॉसिस क्या है?
पेरिफेरल सायनॉसिस के कारण क्या हैं?
पेरिफेरल सायनॉसिस के लक्षण क्या हैं?
पेरिफेरल सायनॉसिस का निदान कैसे किया जाता है?
पेरिफेरल सायनॉसिस का इलाज कैसे किया जाता है?
क्या शिशु भी पेरिफेरल सायनॉसिस के शिकार हो सकते हैं?
डॉक्टर से कब कंसल्ट करना आवश्यक है?
चलिए अब त्वचा पर नीले रंग का निशान और ऊपर बताये इन सवालों का जवाब जानते हैं।
हाथ और पैर का रंग ब्लू होना (Blue Hands and Feet) कभी-कभी बिना चोट लगने के कारण भी देखा जा सकता है। त्वचा पर नीले रंग होने की इस समस्या को मेडिकल टर्म में पेरिफेरल सायनॉसिस (Peripheral Cyanosis) कहते हैं। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेकोनोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार जब शरीर में आवश्यक ऑक्सिजन की पूर्ति नहीं हो पाती है, तो ऐसी समस्या शुरू हो जाती है। शरीर में ऑक्सिजन की कमी कोल्ड टेम्प्रेस्चर की वजह से भी हो सकती है। रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार ठंड के मौसम में ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाते हैं, जो नीली त्वचा का कारण बन सकते हैं। पेरिफेरल सायनॉसिस के और भी कई कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में आगे समझेंगे।
पेरिफेरल सायनॉसिस के कारण क्या हैं? (Cause of Peripheral Cyanosis)
शरीर में मौजूद सभी टिशू और ऑर्गन को ऑक्सिजन की जरूरत पड़ती है, जिससे वो ठीक तरह से काम कर सकें। मनुष्य का शरीर ऑक्सिजन एब्सॉर्ब कर सांस लेने में मददगार होती है। ब्लड में प्रोटीन की मौजूदगी को हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कहते हैं, जो बॉडी सेल्स में ऑक्सिजन कैरी करने का काम करता है। अगर शरीर आवश्यक मात्रा में ऑक्सिजन की पूर्ति ना करवा पाए तो ऐसी ही स्थिति सायनॉसिस (Cyanosis) की बनने लगती है।
वहीं कुछ मेडिकल कंडिशन की वजह से भी शरीर को जितनी ऑक्सिजन की जरूरत होती है वह नहीं मिल पाती है। कभी-कभी जन्म से ही कुछ लोगों को एब्नॉर्मल हीमोग्लोबिन (Abnormal Hemoglobin) की समस्या हो सकती है। इन स्थितियों के साथ-साथ निम्नलिखित स्थितियों में भी पेरिफेरल सायनॉसिस (Peripheral Cyanosis) की समस्या हो सकती है। जैसे:
रेनॉड सिंड्रोम (Raynaud’s syndrome)- रेनॉड सिंड्रोम एक ऐसी समस्या है, जिसमें हाथ और पैर का रंग ब्लू होना (Blue Hands and Feet) शुरू हो जाता है। इस दौरान विशेष रूप से हाथ और पैर की उंगलियों का ऊपरी हिस्सा ब्लू होने लगता है।
लो ब्लड प्रेशर (Low blood pressure)- जब शरीर में ब्लड और ऑक्सिजन को पुश करने की क्षमता कम होने लगती है, तो पैर एवं हाथों की उंगलियों की टिप तक ऑक्सिजन नहीं पहुंच पाता है। लो ब्लड प्रेशर को मेडिकल टर्म में हायपोटेंशन (Hypotension) कहते हैं।
हायपोथर्मिया (Hypothermia)- यह एक ऐसी स्थिति है जब शरीर का तापमान अत्यधिक कम हो जाता है और हायपोथर्मिया की स्थिति इमरजेंसी की स्थिति भी पैदा कर सकती है।
वेन या आर्टरी की समस्या (Vein or artery problems)- अगर किसी व्यक्ति को वेन या आर्टरी की समस्या होती है, तो ऐसे में त्वचा पर नीले रंग का निशान देखा जा सकता है।
हार्ट फेलियर (Heart failure)- जब हार्ट फेलियर की स्थिति बनती है, तो हार्ट शरीर में ऑक्सिजन सप्लाई करने में असमर्थ होने लगता है।
लिम्फ सिस्टम में समस्या (Problems with the lymph system)- लिम्फेटिक डायफंक्शन (Lymphatic dysfunction) के दौरान लिम्फ फ्लूइड ठीक तरह से फ्लो नहीं कर पाता है। ऐसे में टिशू में सूजन की समस्या शुरू हो जाती है।
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep vein thrombosis)-ब्लड क्लॉट की समस्या होने पर भी त्वचा पर नीले रंग का निशान देखा जा सकता है।
हाइपोवॉलेमिक शॉक (Hypovolemic shock)- हाइपोवॉलेमिक शॉक की वजह से भी स्किन कलर ब्लू हो सकती है।
पेरिफेरल सायनॉसिस के कारण इन स्थितियों में हो सकती है। चलिए अब पेरिफेरल सायनॉसिस के लक्षण को समझने की कोशिश करते हैं, जिससे समय रहते बीमारी का इलाज करवाया जा सके।
पेरिफेरल सायनॉसिस का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Peripheral Cyanosis)
पेरिफेरल सायनॉसिस के निदान के लिए फिजिकल टेस्ट (Physical Test), इमेजिंग स्कैन (Imaging Scan) जैसे एक्स-रे (X-Ray) और ब्लड टेस्ट (Blood Test) करवाने की सलाह देते हैं। इन टेस्ट से पेशेंट के हेल्थ कंडिशन की जानकारी मिल जाती है। हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर और टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर पेरिफेरल सायनॉसिस (Peripheral Cyanosis) का इलाज शुरू किया जा सकता है।
क्या शिशु भी पेरिफेरल सायनॉसिस के शिकार हो सकते हैं? (Peripheral Cyanosis in babies)
पेरिफेरल सायनॉसिस की समस्या नवजात शिशुओं एवं बच्चों के साथ-साथ सभी एज ग्रुप लोगों में हो सकती है। नवजात शिशुओं में पेरिफेरल सायनॉसिस की समस्या के कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्ट (Heart), नर्व (Nerves), लंग्स (Lungs) एवं एब्नॉर्मल डिस्फंक्शन (Abnormal dysfunctional) की समस्या होने पर।
अगर ऐसी कोई भी स्थिति नजर आ रही है, तो डॉक्टर से जल्द से जल्द कंसल्ट करना चाहिए।
अगर आपको पेरिफेरल सायनॉसिस (Peripheral Cyanosis) या स्किन से जुड़ी किसी भी समस्या होती है, तो इसे इग्नोर ना करें और जल्द से जल्द इलाज शुरू करवाएं। ऐसा करने से बीमारी से जल्द से जल्द राहत मिल सकती है और किसी भी गंभीर बीमारियों से बचने में मदद भी मिल सकती है।
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डिस्क्लेमर
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