11 महीने और महाराष्ट्र में 2400 से ज्यादा लोगों की मौत का कारण है HIV

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Update Date फ़रवरी 20, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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”महाराष्ट्र में अप्रैल 2018 से, फरवरी 2019 में 2400 लोगों की मौत ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस (HIV) की वजह से हुई है” राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ खडसे ने एक मीडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात की जानकारी दी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, विश्व में भारत HIV जैसी गंभीर बीमरी से पीड़ित होने वाले तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत में 2.1 मिलियन लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। ऐसा नहीं है कि भारत में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस (HIV) के मरीज कम हुए लेकिन, यहां ये जानना बेहद जरूरी है कि आखिर इस बीमारी के शिकार भारतीय क्यों हो रहें हैं।

HIV या AIDS से जुड़े फैक्ट्स क्या हैं?

  • एड्स HIV वायरस के कारण होता है।
  • एड्स होने पर बीमारी या इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
  • एड्स होने का सबसे सामान्य कारण है किसी भी एड्स इंफेक्टेड व्यक्ति से (सेक्शुअली) संपर्क में आना।

HIV पॉजिटिव को दर्शाने वाले लक्षण:

  • थकावट महसूस होना – HIV पॉसिटिव होने पर शुरुआती लक्षणों में थकावट का एहसाह ज्यादा होता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से ऐसा होता है।
  • सिर दर्द – लगातार सिर में तेज दर्द होना भी शुरुआती HIV पॉजिटिव लक्षणों में एक माना जाता है।
  • बुखार – शरीर के तापमान का बढ़ना या फिर बार-बार बुखार होना। बुखार की वजह से सोते वक्त पसीना भी आता है।
  • फेस पर निशान – थकावट और लगातार सिर दर्द की वजह से नींद नहीं आना और ऐसे में चेहरे पर निशान आने लगते हैं। ये निशान ठीक भी नहीं होते हैं।
  • वजन कम होना – शरीर में होने वाली अलग-अलग तरह की परेशानी की वजह से शरीर का वजन भी लगातार कम होते जाता है।
  • काम पर फोकस न कर पाना – लगातार शरीर में हो रही कमजोरी की वजह से किसी भी काम में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।
  • जोड़ों में दर्द – ऐसा माना जाता है कि जोड़ों में दर्द सिर्फ वृद्धावस्था में ही शुरू होती है लेकिन, HIV पॉजिटिव के मरीजों में भी ये लक्षण देखने को मिलते हैं।

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HIV से कैसे बचें?

एचआईवी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि असुरक्षित तरीके से सेक्स न करें। लेकिन, अगर आप सेक्स करते हैं, तो आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें, जैसे:

  • सेक्स करते समय हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें।
  • सिर्फ एक ही व्यक्ति के साथ यौन संबंध रखें। यह भी ध्यान रखें की वह व्यक्ति HIV संक्रमित न हो।
  • एल्कोहॉल और ड्रग्स का सेवन न करें। इससे आप सही निर्णय ले सकते हैं।
  • HIV पॉजिटिव व्यक्ति के ब्लड के संपर्क में न आएं।

किसी भी बीमारी का इलाज न हो, ये कहना ठीक नहीं है। लेकिन, अगर शरीर में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को अनदेखा किया जाए, तो यह खतरनाक हो सकता है। जिस तरह कैंसर का इलाज पहले और दूसरे स्टेज में संभव है, ठीक वैसे ही एचआईवी से भी बचा जा सकता है। इसलिए, शुरुआती लक्षणों पर गौर करना समझदारी है। HIV या AIDS जैसी बीमारी होने पर या इसके लक्षण नजर आने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर कोई व्यक्ति HIV से पीड़ित होता है, तो HIV टेस्ट की जाती है। दरअसल ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस होने पर टेस्ट से इसकी स्थिति की जानकारी ली जाती है कि आप एचआईवी से संक्रमित हैं या नहीं। यह वायरस आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देता है, जिससे आप एक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिन्ड्रोम यानी एड्स से पीड़ित हो जाते हैं।

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HIV टेस्ट क्यों किया जाता है?

एचआईवी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह टेस्ट जरूरी होता है। बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती है कि उन्हें एचआईवी संक्रमण है या वो HIV से पीड़ित हैं। इसलिए वह वायरस को दूसरों तक फैलने से रोकने के लिए कोई सावधानी नहीं बरतते हैं। जल्दी निदान से दवाइयों और इलाज की मदद से एड्स को तेजी से फैलने से रोका जा सकता है। हालांकि अगर एचआईवी के लक्षण नजर आयें तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू करें। क्योंकि सही वक्त पर इलाज शुरू करने से किसी भी बीमारी से लड़ना आसान हो जाता है।

सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के सलाह अनुसार 13 से 64 साल के सभी व्यक्तियों को एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए। यह अस्पताल या सामुदायिक एचआईवी परीक्षण केंद्र में किया जा सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए एचआईवी टेस्ट बेहद जरूरी होता है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान, डिलीवरी के समय या स्तनपान के जरिए वायरस नवजात में आसानी से प्रवेश कर सकता है। एचआईवी संक्रमण से लड़ने वाली दवाओं के सेवन से गर्भावास्था के दौरान संक्रमण के नवजात तक फैलने की संभावना बहुत कम हो सकती है।

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HIV टेस्ट से पहले व्यक्ति को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

एचआईवी के बारे में ज्यादा सोचे नहीं की आप एचआईवी से पीड़ित हैं। एचआईवी एंटीबॉडी टेस्ट से पहले और बाद में काउंसलिंग जरूर की जानी चाहिए। टेस्ट से पहले काउंसलिंग करने से टेस्ट के परिणाम समझने में आसानी होती है, वायरस से खुद को सुरक्षित कैसे रखें और यदि आप एचआईवी से संक्रमित है तो उसे दूसरों तक फैलने से कैसे रोका जाए, के बारे में भी पूरी-पूरी जानकारी दी जाती है।

टेस्ट के बाद भी काउंसलिंग उतनी ही जरूरी है। नकारात्मक परिणाम का यह मतलब नहीं है कि आगे कभी आपको एचआईवी संक्रमण नहीं हो सकता। असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध, संक्रमित व्यक्ति को लगाई गई सुई के इस्तेमाल से यह हो सकता है, जिस बारे में काउंसलिंग में बताया जाता है।

एचआईवी टेस्ट से कुछ जोखिम जुड़े हुए हैं। यदि ब्लड सैंपल लिया जाता है तो आपको सुई लगाने वाली जगह पर दर्द, सूजन या चोट लगने का एहसास होगा। चक्कर आने या संक्रमण की भी शिकायत हो सकती है।

यदि आपको सुई या खून देखकर डर लगता है, तो नर्स को पहले ही इस बारे में बता दें। हो सकता है टेस्ट के दूसरे विकल्प मौजूद हों। इसके अतिरिक्त यदि आपको हीमोफिलिया है या खून पतला करने वाली दवा ले रहे हैं, तो आपके लिए छोटी साइज़ की बटरफ्लाई सुई का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे ज्यादा खून नहीं बहेगा।

कुछ एचआईवी परीक्षण इम्यून सिस्टम द्वारा एचआईवी संक्रमण की प्रतिक्रिया में तैयार किए जाने वाले एंटीबॉडीज की जांच के लिए किए जाते हैं। जबकि अन्य एचआईवी टेस्ट वायरस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए। रैपिड टेस्ट में 20 मिनट के अंदर परिणाम आ जाते हैं।

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