अंतरराष्ट्रीय विकलांगता दिवसः स्कूल जाने से कतराते है दिव्यांग बच्चे, जानें कुछ चौकाने वाले आंकड़ें

Medically reviewed by | By

Update Date जनवरी 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Share now

अंतरराष्ट्रीय विकलांगता दिवस हर साल 3 दिसंबर को मनाया जाता है। साल 1992 के बाद से विश्व विकलांग दिवस विकलांग लोगों के प्रति करुणा और विकलांगता के मुद्दों  को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इसके अलावा इस दिन को विकलांग लोगों का आत्म-सम्मान बढ़ाने और उनके अधिकारों का समर्थन करने के उद्देश से सयुंक्त राष्ट्र द्वारा शुरू किया गया था।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार दुनिया की कम से कम 10% आबादी या 650 मिलियन लोग विकलांगता के साथ जी रहे हैं। वहीं दुनिया के 20 प्रतिशत गरीब लोग विकलांगता का दंश भी झेल रहे हैं। स्कूल न जा पाने वाले विकलांग बच्चों का प्रतिशत भी बहुत अधिक है और कुछ अफ्रीकी देशों में तो यह  65% से 85% के बीच है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि विकलांग लोगों के लिए ‘विकलांग‘ के बजाए ‘दिव्यांग‘ (दिव्य शरीर) शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम मोदी के इस फैसले के समर्थन में अपनी एक रैली में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांग लोगों को जो सबसे बड़ा उपहार दिया है वह उनको पुकारने के लिए ‘दिव्यांग’ शब्द है।

दिव्यांगता (Disability) रोजमर्रा की गतिविधियों को ठीक ढ़ंग से पूरा करने में भी अड़चन पैदा करती है। देश में दिव्यांग सेवा अधिनियम 1993 में विकलांगता (disability) को इस तरह बताया गया हैंः

  • किसी व्यक्ति को एक बौद्धिक, मानसिक, संज्ञानात्मक, न्यूरोलॉजिकल, संवेदी या शारीरिक हानि होना
  • यह स्थाई हो सकती है या इसके स्थाई होने की आशंका हो सकती है
  • यह एक पुरानी परेशानी हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप संचार, सामाजिक संपर्क, सीखने या गतिशीलता और निरंतर सहायता सेवाओं की आवश्यकता के लिए व्यक्ति की क्षमता में काफी कमी आई हो।

विकलांगता के प्रकार

विकलांगता मुख्य रूप से शारीरिक(physical), संवेदी (sensory), मनोरोग ( psychiatric), न्यूरोलॉजिकल (neurological), संज्ञानात्मक (cognitive) और बौद्धिक (intellectual) हो सकती है। कुछ विकलांग लोगों में एक से अधिक तरह की विकलांगता हो सकती है।

  1. शारीरिक विकलांगता सबसे सामान्य प्रकार की विकलांगता है। इसके बाद बौद्धिक (intellectual) और संवेदी (sensory) विकलांगता लोगों में पाई जाती है। शारीरिक विकलांगता आम तौर पर मस्कुलोस्केलेटल (musculoskeletal), संचार (circulatory), श्वसन (respiratory ) और रेस्पिरेटरी सिस्टम (nervous systems) के विकारों से संबंधित है।
  2. संवेदी विकलांगता (sensory disability) में सुनने और देखनें में परेशानी हो सकती है।
  3. न्यूरोलॉजिकल और संज्ञानात्मक विकलांगता में मल्टीपल स्केलेरोसिस (sclerosis ) या दिमाग की चोट जैसी विकलांगता शामिल हैं। बौद्धिक विकलांगता में बौद्धिक और विकासात्मक विकलांगता शामिल है, जो विचार प्रक्रियाओं, कुछ नया सीखने, सूचना को याद रखने और उचित रूप से उपयोग करने का निर्णय लेने और समस्या को हल करने के साथ कठिनाइयों से संबंधित है।
  4. विकलांगता के परिणामस्वरूप होने वाले मनोरोग विकारों में चिंता, फोबिया या अवसाद शामिल हो सकते हैं।

विकलांगता से पीड़ित लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, शिक्षा की कम उपलब्धियां और साथ ही इनकी आर्थिक भागीदारी भी कम होती है।

विकलांगता को अब मानवाधिकार का मुद्दा समझा जाता है। अगर सरकारें, गैर-सरकारी संगठन, प्रोफेशनल और विकलांगता वाले लोग और उनके परिवार एक साथ काम करे, तो इन बाधाओं को दूर किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ(WHO) और विश्व बैंक(World Bank) की विकलांगता पर विश्व रिपोर्ट आगे की राह दिखाती हैं।

ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का डर यानी टोकोफोबिया क्या है और कैसे पाएं इससे छुटकारा?

विकलांगता के बारे में ये बातें आप शायद नहीं जानते होंगेः

दुनिया के 15%  लोग विकलांगता के साथ जीते हैं

दुनिया की आबादी के लगभग 15% लोग विकलांग हैं। 110-190 मिलियन ऐसे अडल्ट लोगों में कामकाज में बहुत कठिनाइयां है। विकलांगता की दर बढ़ती जा रही है। इसका कारण जनसंख्या का बढ़ना, बढ़ती उम्र और बढ़ती ग्लोबल क्रोनिक मेडिकल कंडीशन्स हैं।

विकलांगता कमजोर आबादी को प्रभावित करती है

निम्न-आय वाले देशों में उच्च-आय वाले देशों की तुलना में विकलांगता अधिक पाई जाती है। विकलांगता महिलाओं, वृद्धों और बच्चों और वयस्कों में अधिक सामान्य है, साथ ही ये ऐसे लोग भी हैं, जो आर्थिक तौर पर कमजोर हैं।

विकलांगता की वजह है जरूरी देखभाल न मिलना

विकलांगता से पीड़ित लोग स्वास्थ के लिए जरूरी मेडिकल देखभाल लेने में असमर्थ हैं। विकलांगता से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित जरूरी देखभाल मिलने में देरी और सही मेडिकल हेल्प ना मिलना भी इसका बड़ा कारण हैं।

ये भी पढ़ें: नवजात शिशु में दिखाई दें ये संकेत तो हो सकता है पीलिया

विकलांगता से पीड़ित बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं

विकलांगता की वजह से एजुकेशन गैप लगभग हर देश में देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए विकलांग बच्चों का प्रतिशत और प्राथमिक विद्यालय में एडमिशन लेने वाले विकलांग बच्चों के प्रतिशत के बीच का अंतर भारत में 10 प्रतिशत, तो इंडोनेशिया में 60 प्रतिशत तक है।

विकलांगता दूर करने के लिए जरूरी कदम

इसे दूर करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाये जा सकते हैं। जैसे-

  • मुख्यधारा की सेवाओं को लोगों तक पहुंचाना
  • विकलांग लोगों के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों में निवेश करना
  • एक राष्ट्रीय रणनीति और कार्य योजना को अपनाना
  • कर्मचारियों की शिक्षा, प्रशिक्षण और भर्ती में सुधार
  • पर्याप्त धन उपलब्ध कराना
  • विकलांगता पर सार्वजनिक जागरूकता और समझ बढ़ाना
  • अनुसंधान और डेटा संग्रह को मजबूत करना और
  • नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करने में विकलांगता वाले लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना

ये भी पढ़ें: तो इसलिए पुरुष नहीं कर पाते हैं एक साथ कई काम, जानें कुछ और फैक्ट्स 

इनसभी बातों को समझने के साथ-साथ समझते हैं विकलांगता से कैसे लोग शिकार हो जाते हैं?

इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे-

  • आनुवंशिक समस्याएं
  • पोलियो होना
  • मालन्यूट्रिशन की समस्या
  • गरीबी (ठीक तरह से खाना नहीं मिलना)

इसके लक्षण क्या हो सकते हैं?

इसके निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं। जैसे-

दुखी महसूस होना दरअसल ऐसे व्यक्ति या बच्चे ज्यादातर दुखी रहते हैं।

किसी भी काम पर फोकस न कर पाना। पढ़ाई हो या कोई अन्य काम में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाना।

ऐसे व्यक्ति हमेशा और अत्यधिक डरा हुआ महसूस करते हैं।

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सोने में परेशानी होती है या नींद नहीं आती है।

पीड़ित व्यक्ति के खाना खाने के आदत में अत्यधिक बदलाव देखा जा सकता है।

किसी भी बात को समझने में परेशानी होना। दरअसल आसान से भी आसान बातों को समझने में दिक्कत महसूस होना।

पीड़ित व्यक्ति हमेशा गुस्से में रह सकते हैं। हालांकि इसके कारण का पता नहीं होता है।

बार-बार और तेज मूड (स्वभाव) बदलना।

अगर आप विकलांगता से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

और पढ़ें:

ऑस्यिोइंटिग्रेशन: क्या आ प जानते हैं इसके बारे में?

क्यों होती है पैरों में झनझनाहट? जानिए इसके घरेलू उपाय

पैरों को मजबूती देने के लिए करें प्लियोमेट्रिक एक्सरसाइज, कुछ इस तरह

पैरों की समस्या को दूर करने के लिए करें ये 4 एक्सरसाइज

मुझे अक्सर मांसपेशियों में ऐंठन रहती है, इसका क्या उपाय है?

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"
    सूत्र

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    नर्सिंग केयर हायर करने से पहले किन बातों का रखें ख्याल?

    बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए नर्सिंग केयर चुनते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, किस तरह के सवाल पूछने चाहिए, फायदे-नुकसान को जानेंष

    Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
    Written by Shilpa Khopade
    सीनियर हेल्थ, स्वस्थ जीवन मई 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    Tick Bite: टिक बाइट क्या है?

    जानिए टिक बाइट क्या है in hindi, टिक बाइट के कारण और लक्षण क्या है, tick bite को ठीक करने के लिए क्या उपचार है जानिए यहां।

    Medically reviewed by Dr. Pooja Daphal
    Written by Kanchan Singh
    हेल्थ कंडिशन्स, स्वास्थ्य ज्ञान A-Z अप्रैल 30, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    प्रेग्नेंसी में संतरा खाना कितना सुरक्षित है?

    प्रेग्नेंसी में संतरा खाना क्या गर्भवती महिला और उसके बच्चे के लिए सुरक्षित हो सकता है? प्रेग्नेंसी में संतरा खाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए,

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Ankita Mishra
    प्रेग्नेंसी स्टेजेस, प्रेग्नेंसी अप्रैल 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    मलेरिया से जुड़े मिथ पर कभी न करें विश्वास, जानें फैक्ट्स

    जानिए मलेरिया से जुड़े मिथ और फैक्ट्स क्या हैं, Myths and Facts about Malaria in hindi, मलेरिया से जुड़े मिथ से कैसे दूर रहें, Malaria se jude myths, malaria se kaise bachav kareien, मलेरिया से कैसे बचें।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Surender Aggarwal
    स्वास्थ्य बुलेटिन, लोकल खबरें अप्रैल 25, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    Recommended for you

    dementia symptoms- डिमेंशिया के लक्षण

    जानिए डिमेंशिया के लक्षण पाए जाने पर क्या करना चाहिए

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Surender Aggarwal
    Published on जून 29, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    Fever : बुखार

    Fever : बुखार क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Ankita Mishra
    Published on जून 2, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
    Elder Abuse - एल्डर एब्यूज

    जानें एल्डर एब्यूज को कैसे पहचानें और कैसे इसे रोका जा सकता है

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Surender Aggarwal
    Published on मई 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन-bujurgo me dehydration

    बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन होने पर करें ये उपाय

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Shilpa Khopade
    Published on मई 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें