नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे का भोपाल गैस त्रासदी से है कनेक्शन

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Update Date जनवरी 20, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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पॉल्यूशन आज दुनिया के लिए एक साइलेंट किलर बन गया है। पॉल्यूशन के कारण हमारे नेचुरल रिर्सोसेज को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंच रहा है। भारत में हर साल 2 दिसंबर को नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे(Nationl Pollution control day) के रूप में मनाया जाता है।

क्यों मनाया जाता है नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस दो और तीन दिसंबर 1984 की रात को भोपाल गैस त्रासदी के शिकार लोगों की याद में मनाया जाता है। इस त्रासदी में लगभग 3787 लोग मारे गए थे। इसके अलावा इस त्रासदी में लाखों लोग प्रभावित भी हुए थे। इसके दुष्प्रभाव आज भी यहां पैदा होने वाले बच्चों में देखे जा सकते हैं। मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से यह त्रासदी हुई थी। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश लोगों में पॉल्यूशन को लेकर जागरूकता फैलाना है।

ट्रैफिक पुलिस हो रही पॉल्यूशन से बीमार

कुछ समय पहले ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर किए गए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट Pulmonary function test(PFT) से खुलासा हुआ कि दिन भर प्रदूषण में रहने से इन जवानों में फेफड़ों के कई रोग पनप रहे हैं। पांच साल से कम सर्विस वाले इन जवानों में यह आंकड़ा 22.3 प्रतिशत था। इनमें रिस्ट्रीक्टिव लंग्स( Restrictive lung disease)  की समस्या पाई गई। इस समस्या में फेफड़े हवा के जाने के बाद भी पूरी तरह से नहीं खुल पाते।

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स्कूल जाने वाले बच्चे भी पॉल्यूशन से प्रभावित

भारत में लाखों बच्चे जो स्कूल जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, पॉल्यूशन से होने वाली समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा स्कूल द्वारा मुहैया कराए गए वाहनों में भी बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं। बच्चों में प्रदूषण के कारण सांस की कई बीमारियां पनप रही हैं। हर साल शहरी क्षेत्रों में अस्थमा के पीड़ित बच्चों की तादाद बढ़ रही है।

मानव स्वास्थ्य पर एयर पॉल्यूशन के खतरे

वायु प्रदूषण सांस की बीमारी से लेकर दिल, दिमाग और यहां तक ​​कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। हवा के कणों में मौजूद टॉक्सिक पदार्थों को  कई उच्च स्तर के एक्यूट और क्रोनिक परेशानियों का कारण माना जाता है। हालांकि, हृदय रोगों और सांस की बीमारियों के लक्षणों के बढ़ते जोखिम के अलावा वायु प्रदूषकों का यह खतरनाक कॉकटेल आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

दमघोटु हवा का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आने से बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित करने और मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों को खराब करने के साथ जोड़ा गया है। खतरनाक वायु प्रदूषण शारीरिक विकास पर जितना प्रभाव डालता है, उसकी तुलना में कहीं ज्यादा नुकासन दिमाग को पहुंचाता है। वॉल्टर्स क्लूवर द्वारा लिपिपकॉट पोर्टफोलियो में प्रकाशित एक पत्रिका के अनुसार, किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य में हवा के कणों से होने वाले नुकसान की अधिक आशंका है।

क्या है स्टडी

इस अध्ययन के दौरान 144 किशोरों को एक सोशियल स्ट्रेस टेस्ट दिया गया, जिसमें पांच मिनट का भाषण और एक गणित टेस्ट शामिल था। किशोरों की हृदय गति और अन्य शारीरिक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने के बाद यह पाया गया कि तनाव के लिए एक हाई ऑटोनॉमिक रेस्पांस के साथ किशोरों में उनके घर के पास पीएम का स्तर 2.5 तक बढ़ गया था।

जबकि अध्ययन में प्रदूषित हवा और अधिक तनावों के बीच संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन यह इस तथ्य पर फिर से जोर देता है कि जहरीली हवा न्यूरोडेवलपमेंट और कॉग्नेटिव डेवलेपमेंट को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

एयर पॉल्यूशन हमें स्ट्रैस में डाल रहा

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने कौन सा न्यूज चैनल लगा रहे या कौन सा अखबार आप पढ़ने के लिए उठाते हैं, वे सारे ही इस वक्त वायु प्रदूषण के घातक स्तरों के प्रभाव से भरे हुए हैं। इसके अलावा, डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरत न हो, घर से बाहर जाने से बचें।

लोगों को बाहर काम करना बंद करने और एक्सरसाइज से बचने के लिए भी कहा गया है, जो सांस की बीमारियों का कारण हो सकता है।  सर्दियों के छोटे दिन, धुंए से भरा आसमान और हर जगह दमघोटू हवा की उपस्थिति किसी को भी तनाव में डालने और मूड खराब करने का कारण बन सकती है।

 पॉल्यूशन से बचने के उपाय

प्रदूषण से बचने के आसान उपाय, जैसे-

  1. बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर पहने
  2. अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें
  3. संभव हो तो पैदल (वॉक) चलें, यदि ऑफिस वॉकिंग डिस्टेंस पर है तो वाॅक कर के ही जाएं
  4. इलेक्ट्रिक गाड़ियों से यात्रा करना बेहतर होगा
  5. कूड़े को न जलाएं
  6. जरूरत न होने पर लाइट या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद रखें
  7. हर्बल टी जैसे तुलसी और अदरक की चाय पिएं
  8. आहार में विटामिन-सी, ओमेगा- 3 और मैग्निशियम और हल्दी का सेवन करें
  9. अपने घर में पॉल्यूशन कम करने वाले पौधे रखें

प्रदूषित हवा को साफ कर बनेगा फ्यूल

पॉल्यूशन के बढ़ते प्रकोप से दुनिया भर में बीमारियां फैल रही है। साथ ही पॉल्यूशन से निपटने के लिए दुनिया भर में कई शौध भी किए जाते रहते हैं। इसी कड़ी में शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उपकरण ईजात किया है, जो प्रदूषित हवा(Polluted Air) को सोखकर साफ ईंधन तैयार करने में सक्षम है। इस उपकरण को इंग्लैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर में किए गए एक शोध में विकसित किया गया है। इसमें मेटल के कार्बनिक फ्रेमवर्क (MOF) से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) को सोखने की क्षमता को विकसित किया गया है।

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गाड़ियों के धुएं में होता है NO2:

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) एक जहरीली गैस है। यह डीजल और बायो फ्यूल के जलने से बनती है। इस नई तकनीक के इस्तेमाल से एनओ2 को नाइट्रिक एसिड में बदला जा सकेगा। नाइट्रिक एसिड का इस्तेमाल फसलों में खाद की तरह किया जा सकता है।

भारत में पॉल्यूशन के नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम

पॉल्यूशन पर नियंत्रण के लिए भारत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन सितंबर, 1974 में किया गया। केंद्रीय और राज्य नियंत्रण बोर्ड द्वारा वायु की गुणवत्ता बहाल करने के लिए वायु अधिनियम 1981 को लागू किया गया है। बोर्ड कार्य-योजना बनाने के साथ समय-समय पर प्रदूषण से संबंधित रिपोर्ट जारी करता है।

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