पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज को पीवीडी (PVD) के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी कोई भी बीमारी या समस्या मस्तिष्क और हार्ट से बाहर की तरफ सर्कुलेटरी सिस्टम में होती है उसे पीवीडी के नाम से जाना जाता है। पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज में उन सभी बीमारियों को शामिल किया जाता है, जो किसी भी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है। हालांकि, अक्सर इसे पेरीफेरल आर्टरी डिजीज के समानार्थी के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज आर्टरीज की सबसे ज्यादा समान्य बीमारी है। पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज में रक्त वाहिकाओं में फैट इक्कट्ठा हो जाता है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) या आर्टरी का सख्त होना कहा जाता है। फैट का यह जमाव धीरे-धीरे इक्ट्ठा होता है। समय के हिसाब से यह आर्टरी को जाम, सिकुड़ा या कमजोर बना देता है।
आर्टरी में इस प्रकार का ब्लॉकेज होने पर इसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज (coronary heart disease) कहा जाता है। अक्सर एथेरोस्क्लेरोसिस हार्ट और मस्तिष्क के ऊपर की आर्टरी को प्रभावित करता है। हालांकि, एथेरोस्क्लेरोसिस पूरी बॉडी की किसी भी रक्त वाहिका को प्रभावित कर सकता है।
अक्सर पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज से पैरों की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं। अन्य आर्टरी धीरे-धीरे प्रभावित होती हैं, जो किडनी और बाजुओं में रक्त का प्रवाह करती हैं। आर्टरी के जाम हो जाने या सिकुड़ जाने पर बॉडी के उस हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है। इस स्थिति को इसचेमिया (ischemia) कहा जाता है। इसचेमिया से कई प्रकार के लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि, यह कैसे होंगे यह प्रभावित अंग या सिस्टम पर निर्भर करता है।
अमेरिका में करीब 85 लाख लोग पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज से प्रभावित हैं। आमतौर पर पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज 60 वर्ष के बाद होती है। इस आयु वर्ग के करीब 12-20% लोग पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज से प्रभावित हैं। डायबिटीज से पीढ़ित लोगों में यह बीमारी सामान्य है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को यह बीमारी ज्यादा होती है। वहीं, स्मोकिंग करने वाले लोगों में पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज का खतरा ज्यादा रहता है। डायबिटीज और स्मोकिंग हमेशा एक साथ मिलकर एक गंभीर बीमारी परिणाम के रूप में देते हैं।
60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज विकलांगता का एक बड़ा कारण है। डायबिटीज में भी यह बीमारी विकलांगता की स्थिति उत्पन्न करती है। पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज से पीढ़ित 40% तक लोगों में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। वहीं, कुछ लोगों में इसके लक्षण नजर आने पर वह इसकी सूचना चिकित्सक को नहीं देते हैं।
पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज के लक्षण निम्नलिखित हैं:
उपरोक्त लक्षणों के अलावा भी पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज के कुछ अन्य लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें ऊपर सूचीबद्ध नहीं किया गया है। यदि आप इसके लक्षणों को लेकर चिंतित हैं तो अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
उपरोक्त लक्षणों में से किसी एक का अनुभव होन पर अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एजिंग की वजह से होने वाली समस्याओं को इन लक्षणों से अलग रखा जाता है। लेकिन निदान और इलाज में देरी करने से इससे आगे और गंभीर समस्याएं आ सकती हैं। रक्त की कमी, गैंग्रीन (gangrene) या ऊत्तकों के मृत होने के मामले में यह लक्षण सामने आ सकते हैं।
यदि आपको अचनाक सर्दी, दर्द, कमर के निचला हिस्सा कमजोरी के साथ पीला पड़ जाता है या पल्स नहीं होती है तो यह एक आपातकालीन स्थिति है। इस स्थिति में गंभीर समस्याओं से बचने के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।
पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज का कारण निम्नलिखित है:
पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज एथेरोस्क्लेरोसिस की वजह से होती है। एथेरोस्क्लेरोसिस में आर्टरी में फैट इक्कट्ठा हो जाता है और रक्त के प्रवाह को कम कर देता है। फैट का यह जमाव धीरे-धीरे इक्ट्ठा होता है। समय के हिसाब से यह आर्टरी को जाम, सिकुड़ा या कमजोर बना देता है। हालांकि, एथेरोस्क्लेरोसिस पर चर्चा आमतौर पर हार्ट पर केंद्रित होती है। इसके बावजूद भी यह बीमारी आपकी पूरी बॉडी को प्रभावित कर सकती है। कुछ मामलों में रक्त वाहिकाओं में इनफ्लेमेशन, लिंब्स में चोट, मांसपेशियों और लिगामेंट्स की असामान्य शारीरिक संरचना या रेडिएशन के संपर्क में आने से पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज होती है।
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निम्नलिखित कारकों से आपको पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज होने का जोखिम होता है:
पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज, हार्ट डिजीज या स्ट्रोक, होमोसाइटेनाइन (homocysteine) की मेडिकल हिस्ट्री होना। होमोसाइटेनाइन एक प्रोटीन कंपोनेंट है, जो ऊत्तकों को बनाने और में मदद करता है।
उपरोक्त सूची संपूर्ण नहीं है। पेरिफेरल वैस्कुलर के कारकों की विस्तृत जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज का निम्नलिखित तरीकों से पता लगाया जा सकता है:
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इसके अतिरिक्त निम्नलिखित तरीकों से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है:
एंजियोप्लास्टी (Angioplasty): इस प्रक्रिया में एक नली जो बलून के साथ फिट होती है, उसे क्षतिग्रस्त आर्टरी में डाला जाता है। इसके बाद बलून को फुलाया जाता है, जिसे आर्टरी चौड़ी हो जाए। कई बार डॉक्टर इसमें एक छोटी ट्यूब का इस्तेमाल करते हैं, जो आर्टरी को खुला रखती है।
वैस्कुलर बायपास सर्जरी: इसे वैस्कुलर ग्राफ्ट (vascular graft) के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रक्रिया में ब्लॉकेज या सिकुड़ी हुई आर्टरी को बायपास करते हुए रक्त वाहिकाओं को दोबारा जोड़ा जाता है। इससे बॉडी के एक हिस्से से अन्य हिस्से में रक्त प्रवाह करने में आसानी होती है।
इसके अतिरिक्त, पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज में दवाइयों का इस्तेमाल भी किया जात है। हालांकि, यह डॉक्टर के विवेक के ऊपर निर्भर करता है, जो आपकी स्थिति के आधार पर इलाज के विकल्प का चुनाव करता है।
जीवन शैली या लाइफस्टाइल में निम्नलिखित बदलाव करके पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज से लड़ा जा सकता है:
इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
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डिस्क्लेमर
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Current Version
07/06/2020
Sunil Kumar द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Nidhi Sinha