Cordocentesis: कॉर्डोसेंटेसिस क्या है?

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Update Date मई 23, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिभाषा

कॉर्डोसेंटेसिस (Cordocentesis) क्या है?

कॉर्डोसेंटेसिस जिसे कभी-कभी पेरक्यूटेनियल ऑम्बिलिकल कॉर्ड ब्लड सैंपलिंग (PUBS) भी कहा जाता है, एक डायग्नोस्टिक टेस्ट है जिसमें भ्रूण की असमान्यताओं का पता लगाने के लिए भ्रूण का ब्लड टेस्ट किया जाता है।

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कॉर्डोसेंटेसिस क्यों किया जाता है?

कॉर्डोसेंटेसिस मुख्य रूप से विकसित हो रहे भ्रूण की ब्लड कंडीशन जैसेे एनीमिया– हेल्दी रेड बल्ड सेल्स की कम मात्रा, की जांच और उपचार के लिए किया जाता है।

कॉर्डोसेंटेसिस तभी किया जाता है जब एमनियोसेंटेसिस, कोरियोनिक विलस सैंपलिंग, अल्ट्रासाउंड व अन्य तरीकों से डायग्नोसिस नहीं हो पाता। क्योंकि कॉर्डोसेंटेसिस में अन्य तरीकों के मुकाबले भ्रूण के नुकसान को जोखिम अधिक होता है, इसलिए जब दूसरे तीरके काम नहीं करते या ही परिणाम नहीं दिखाते तभी डॉक्टर कॉर्डोसेंटेसिस करता है।

दुर्लभ स्थितियों में, कॉर्डोसेंटेसिस भ्रूण क्रोमोसोम के आकार और नंबर की जांच के लिए किया जा सकता है। भ्रूण का ब्लड कैरोटाइपिंग 48 घंटों के भीतर किया जा सकता है। यह संभवतः एमनियोसेंटेसिस या कोरियोनिक विलस सैंपलिंग की तुलना में जल्दी परिणाम देता है।

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एहतियात/चेतावनी

कॉर्डोसेंटेसिस से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए?

कॉर्डोसेंटेसिस को हालांकि सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें मिसकैरेज का खतरना रहता है। 100 मामलों में से 1-2 का मिसकैरिज हो जाता है। इससे जुड़े अन्य जोखिम हैं-

  • भ्रूण से ब्लीडिंग। जिस जगह पर सुई लगाई जाती है वहां से ब्लीडिंग होना आम है। यह ब्लीडिंग बहुत अधिका होती है, तो डॉक्टर भ्रूण के ब्लड प्रोडक्ट्स के रिप्लेसमेंट की सलाह देगा।
  • कॉर्ड हेमेटोमा। कॉर्डोसेंटेसिस के दौरान या बाद में कॉर्ड के अंदर रक्त का संग्रह हो सकता है। अधिकांश बच्चों में इसका कोई लक्षण नहीं दिखता है। हालांकि कुछ भ्रूण का हार्ट रेट थोड़ी देर के लिए कम हो जाता है। यदि हेमेटोमा स्थिर है, तो डॉक्टर भ्रूण की निगरानी करेगा। यदि हेमेटोमा स्थिर नहीं है या आपके बच्चे का हार्ट रेट सामान्य नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर इमरजेंसी सी-सेक्शन सलाह देगा।
  • बच्चे का हार्ट रेट। कॉर्डोसेंटेसिस के बाद थोड़ी देर के लिए बच्चे का हार्ट रेट कम हो सकता है।
  • शायद ही कभी कॉर्डोसेंटेसिस से यूटराइन या भ्रूण का संक्रमण होता है>
  • फीटल मेटरनल ब्लीडिंग। प्रक्रिया के प्रतिशल मामलों में भ्रूण का रक्त मेटरनल सर्कुलेशन में चला जाता है। रक्तस्राव थोड़ी मात्रा में ही होता है। प्लेसेंटा के यूटरस के सामने होने पर आमतौर पर यह समस्या होती है।

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प्रक्रिया

कॉर्डोसेंटेसिस के लिए कैसे तैयारी करें?

यदि आप हफ्ते की प्रेग्नेंट है, तो आपको कॉर्डोसेंटेसिस से पहले आधी रात से कुछ भी खाने और पीने के लिए मना किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की कॉप्लीकेशन होने पर सी सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। अपने डॉक्टर को इस मामले में दिशानिर्देश देने को कहें। इस दौरान हेल्थ एक्सपर्ट जो सलाह दें उसका पूरा-पूरा पालन करें और लापरवाही न बरतें।

कॉर्डोसेंटेसिस के दौरान क्या होता है?

इस टेस्ट के दौरान निम्नलिखित स्टेप्स होते हैं। जैसे-

  • प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते से पहले कॉर्डोसेंटेसिस डॉक्टर के क्लिनिक पर किया जाता है, लेकिन 24 हफ्ते के बाद यह अस्पताल में किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान एक सहायक डॉक्टर की मदद करता है।
  • प्रक्रिया से पहले भ्रूण के रक्त के साथ मिलान के लिए आपके रक्त का नमूना लिया जाता है।
  • यूटराइन संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए प्रक्रिया से 30 से 60 मिनट पहले आपको एंटीबायोटिक दिया जाता है। यह आमतौर पर इंट्राविनस कैथेटर के जरिए किया जाता है।
  • जब प्रक्रिया शुरू होती है, तो डॉक्टर गर्भाशय में बच्चे के सटीक स्थान का निर्धारण करने के लिए अल्ट्रासाउंड करता है। आप परीक्षण टेबल पर पीठ के लेट जाएंगी और हेल्थ प्रोफेशनल पेट पर खास तरह का जेल लगाता है। फिर वह या तो अल्ट्रासाउंड ट्रांसड्यूसर नामक छोटे से उपकरण की मदद से मॉनिटर पर बच्चे कि स्थिति दिखाता है।
  • इसके बाद पेट पर लगे जेल को एंटीसेप्टिक से साफ कर दिया जाता है। कभी-कभी प्रक्रिया के दौरान सहजता के लिए लोकल एनिस्थिसिया का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अधिकांश समय इसकी जरूरत नहीं पड़ती है। अल्ट्रासाउंड के आधार पर डॉक्टर एक पतली सुई आपके पेट की दीवार और गर्भाशय में डालेगा और अम्बिलिकल कॉर्ड से थोड़ी मात्रा में खून सिरिंज के जरिए निकाला जाता है।
  • सुई डाले जाने के समय आपको सीधा लेटना चाहिए। सुई अंदर घुसाते समय थोड़ा सेंसेशन होगा और जब यह गर्भाशय तक पहुंचेगी तो आपको क्रैंप महसूस होगा।

कॉर्डोसेंटेसिस के बाद क्या होता है?

इस जांच के बाद निम्नलिखित अन्य शारीरिक गतिविधि पर ध्यान रखी जाती है। जैसे:

  • प्रक्रिया के बाद बच्चे के हार्ट रेट पर नज़र रखने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या एक्सटरनल लेबर मॉनीटर का इस्तेमाल करेगा।
  • घर जाने के बाद उस दिन डॉक्टर आपको आराम की सलाह देगा। अगले दिन से आप अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकते हैं। वजाइना से रक्त या तरल पदार्थ आने या किसी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर आपको तुंरत उनसे सलाह के लिए कहेगा।
  • इस बीच लैब में ब्लड सैंपल का मूल्यांकन किया जाता है। रिपोर्ट आमतौर पर उसी दिन आ जाती हा।

कॉर्डोसेंटेसिस टेस्ट से जुड़े किसी सवाल और इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए, कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें। अगर कोई परेशानी महसूस होती है, तो इसकी जानकारी भी जल्द से जल्द अपने डॉक्टर को दें। 

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Explanation of results

मेरे परिणामों का क्या मतलब है?

इस टेस्ट के निम्नलिखित रिजल्ट्स आ सकते हैं। जैसे:-

  • कॉर्डोसेंटेसिस डायग्नोस्टिक टेस्ट है जो क्रोमोसोम असामान्यताओं और कुछ ब्लड डिसॉर्डर की जांच करता है अधिक सटीकता के साथ। यह टेस्ट बीमारी की पहचान तो करता है लेकिन उसकी गंभीरता का पता नहीं लगाता। यह टेस्ट न्यूरल ट्यूब में कमी या दोष का पता नहीं लगाता।
  • यदि आपका परीक्षण परिणाम सामान्य है तो डॉक्टर फॉलो अप अपॉइंटमेंट के बारे में आपसे चर्चा करेगा।
  • यदि आपके बच्चे को संक्रमण है, तो डॉक्टर आपको उपचार के तरीके समझने में मदद करेगा। यदि बच्चे को गंभीर एनीमिया है तो उसे अम्बिलिकल कॉर्ड के जरिए ब्लड ट्रांसफ्यूशन की जरूरत हो सकती है।
  • यदि आपके परिणाम बताते हैं कि बच्चे को कोई ऐसी समस्या है जिसका उपचार नहीं किया जा सकता, तो आपको सख्त निर्णय लेना पड़ सकता है, जैसे बच्चे को जन्म देना है या नहीं। इस मुश्किल फैसले में आप अपने परिवार और डॉक्टरों की मदद ले सकते हैं।

सभी लैब और अस्पताल के आधार परकॉर्डोसेंटेसिस टेस्ट की सामान्य सीमा अलग-अलग हो सकती है। परीक्षण परिणाम से जुड़े किसी भी सवाल के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी तरह की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता है।

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