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महिलाओं में कोलोन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं मासिक धर्म के लक्षणों से मिलते हुए, ना करें लापरवाही

    महिलाओं में कोलोन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं मासिक धर्म के लक्षणों से मिलते हुए, ना करें लापरवाही

    कोलन कैंसर (Colon cancer) को अक्सर रेक्टल कैंसर (Rectal cancer) के साथ समूहीकृत किया जाता है। इन दो प्रकार के कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal cancer) कहा जा सकता है। कोलन और रेक्टल कैंसर के बीच मुख्य अंतर यह है कि कैंसर पॉलीप्स (Cancer polyps) पहले कोलन या रेक्टम में बनता है। वैसे तो कोलन कैंसर महिला और पुरुष दोनों को प्रभावित करता है, लेकिन हम इस आर्टिकल में महिलाओं में कोलोन कैंसर (Colon cancer in women) के बारे में जानकारी दे रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि इस कैंसर से होने वाली मौतों को स्क्रीनिंग और अर्ली डायग्नोसिस के जरिए रोका जा सकता है।

    महिलाओं में कोलोन कैंसर (Colon cancer in women)

    कोलन कैंसर की शुरुआत कोलन की इनर वॉल पर विकसित होने से होती है। इन ग्रोथ्स को पॉलिप्स (Polyps) कहा जाता है। पॉलिप्स आमतौर पर नॉनकैंसरस होते हैं, लेकिन जब एक कैंसरस पॉलिप्स का निमार्ण होता है तो ये रेक्टम या कोलन की लाइनिंग के अंदर जाकर तेजी से वृद्धि करते हैं। कैंसर सेल्स ब्लडस्ट्रीम और लिम्फ सिस्टम में प्रवेश कर सकते हैं। अर्ली स्टेज में महिलाओं में कोलोन कैंसर के लक्षण नोटिसेबल नहीं होते। जब ये दिखाई देना शुरू करते हैं तो महिलाओं में कोलोन कैंसर के लक्षण पुरुषों की तरह ही होते हैं।

    और पढ़ें: पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण क्या हैं? जानिए इस पर एक्सपर्ट की राय…

    महिलाओं में कोलोन कैंसर के लक्षण (Colon cancer symptoms in Women) बनाम मासिक धर्म के लक्षण

    महिलाओं में कोलोन कैंसर के लक्षण कई बार मासिक धर्म के लक्षणों से मिलते जुलते हो सकते हैं। उदाहरण के लिए असामान्य रूप से थकान या एनर्जी का कम लगना पीएमएस (PMS) के कॉमन लक्षण हैं। ये एनीमिया (Anemia) के भी लक्षण हैं। जो कि मासिक धर्म के दौरान बहुत सारे ब्लड लॉस के कारण दिखाई देते हैं। इसी तरह महिलाओं में कोलोन कैंसर का लक्षण एब्डोमिनल क्रैम्प्स को भी मासिक धर्म के समय होने वाले क्रैम्प्स से कंफ्यूज कर सकते हैं।

    अपने चिकित्सक से बात करें यदि आप नियमित रूप से थकान या पेट दर्द का अनुभव करते हैं जो आपके मासिक धर्म से संबंधित नहीं है, या यदि आप पहली बार इन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं – भले ही वे आपके मासिक धर्म से संबंधित नहीं है तो भी डॉक्टर की सलाह लें।

    आपको अपने डॉक्टर से भी बात करनी चाहिए यदि ये लक्षण आपके मासिक धर्म के दौरान सामान्य रूप से अनुभव किए जाने वाले लक्षणों से भिन्न होते हैं।

    महिलाओं में कोलोन कैंसर के रिस्क फैक्टर्स (Colon cancer risk factors in women)

    महिलाओं में कोलोन कैंसर के रिस्क पुरुषों के रिस्क के ही समान है। जो निम्न प्रकार हैं।

    पॉलीप्स का इतिहास (History of Polyps)

    यदि पॉलिप्स की मेडिकल हिस्ट्री है, तो आपको बाद में कैंसर वाले पॉलीप्स के उच्च जोखिम का सामना करना पड़ता है। कोलन कैंसर होने से आपको नए कैंसरयुक्त पॉलीप बनने का भी अधिक खतरा होता है।

    और पढ़ें: क्या कोलन को साफ करने के लिए डायट निभा सकती है अहम भूमिका?

    कोलन कैंसर या पॉलीप्स का पारिवारिक इतिहास (Family history of polyps)

    माता-पिता, भाई-बहन, या अन्य करीबी रिश्तेदार को कोलन कैंसर या पॉलीप्स का इतिहास होने से महिलाओं में कोलोन कैंसर होने की अधिक संभावना होती है।

    रेडिएशन ट्रीटमेंट (Radiation Treatment)

    यदि आपने सर्वाइकल कैंसर सहित एब्डोमिनल एरिया में कैंसर के इलाज के लिए रेडिएशन थेरिपी ली है, तो आपको कोलन या रेक्टल कैंसर का अधिक खतरा हो सकता है।

    अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy lifestyle)

    गतिहीन या मोटा होना, धूम्रपान करना और अत्यधिक शराब पीना ये सभी महिलाओं में कोलोन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। महिलाओं को प्रति दिन एक से अधिक मादक पेय नहीं लेने की सलाह दी जाती है।

    बढ़ती उम्र (Age)

    उम्र बढ़ने के साथ कैंसर होने का रिस्क बढ़ जाता है, लेकिन बता दें कि यंग लोगों को भी कोलन कैंसर हो सकता है। मेनोपॉज के बाद महिला में सभी तरह के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) (रजोनिवृत्ति के लक्षणों का प्रबंधन करने के लिए प्रयोग की जाती है) कुछ कैंसर के जोखिम को बढ़ाती है, यह कोलोरेक्टल कैंसर के कम जोखिम से जुड़ा है।

    हालांकि अभी और शोध की जरूरत है। चिकित्सा शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से एचआरटी के फायदे और नुकसान के बारे में चर्चा करें।

    और पढ़ें: Colon polyps: कोलन पॉलीप्स क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

    कोलोन कैंसर को डायग्नोस कैसे किया जाता है? (Diagnosis of colon cancer)

    कोलोन कैंसर का इलाज करने के लिए फीकल इम्यूनोकेमिकल टेस्टिंग (Fecal immunochemical testing) की जाती है। यह एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है। इस टेस्ट को जिन लोगों को कोलन कैंसर का रिस्क होता है उनमें हर 2 साल में किया जाता है। इसके अलावा हर 10 साल में कोलोनोस्कोपी भी रिकमंड की जाती है। जिसमें एक लंबी, फ्लैग्जिबल ट्यूब एनस से होते हुए कोलोन में जाती है। इस ट्यूब की टिप पर एक छोटा कैमरा होता है जो डॉक्टर को इमेज सेंड करता है जिन्हें वे कंप्यूटर पर देखते हैं।

    अगर टेस्ट में किसी भी पॉलीप्स को पता चलता है तो कोलोनोस्कोप प्रॉसेस में विशेष उपकरणों के माध्यम को इसे हटाया जा सकता है। पॉलीप्स का एक प्रयोगशाला में विश्लेषण किया जाता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कोई कैंसर कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं। प्रक्रिया के इस हिस्से को बायोप्सी के रूप में जाना जाता है। कोलोन कैंसर का निदान के लिए निम्न परीक्षण भी अपनाए जा सकते हैं।

    • सटीक प्रकार के कैंसर की पहचान करने में मदद के लिए एक जीन टेस्ट किया जा सकता है, क्योंकि यह उपचार के निर्णयों को निर्देशित करने में मदद कर सकता है।
    • कोलोन के पास ऊतक का एक कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन डॉक्टर को यह देखने में मदद कर सकता है कि क्या कैंसर फैल गया है।
    • अल्ट्रासाउंड, जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करते हैं, शरीर में ऊतक की कंप्यूटर छवियां बना सकते हैं।

    महिलाओं में कोलोन कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है? (Treatments for colon cancer)

    महिलाओं में कोलोन कैंसर का इलाज कई प्रकार के किया जा सकता है। जो निम्न प्रकार है।

    सर्जरी (Surgery)

    अपने शुरुआती चरणों में, कोलन कैंसर का इलाज केवल कैंसरयुक्त पॉलीप्स को हटाकर किया जा सकता है। जब रोग बढ़ता है, तो टिशूज या कोलन के कुछ हिस्सों को हटाने की आवश्यकता हो सकती है।

    सिस्टेमिक थेरिपीज (Systemic therapy)

    कीमोथेरेपी के दौरान, पावरफुल दवाएं, जिन्हें अक्सर IV के माध्यम से दिया जाता है, कैंसर कोशिकाओं को मार देती हैं। यदि कैंसर लिम्फ नोड्स तक पहुंच गया है तो अक्सर इस थेरिपी की सिफारिश की जाती है। कभी-कभी ट्यूमर या ट्यूमर को सिकोड़ने में मदद करने के लिए सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी शुरू की जाती है। टार्गेटेड थेरिपीज या इम्यूनोथेरिपीज की भी सिफारिश की जा सकती है और इसका उपयोग अकेले या कीमोथेरेपी के संयोजन में किया जा सकता है।

    और पढ़ें: स्टमक कैंसर कीमोथेरिपी (Stomach cancer chemotherapy): कब जरूरत पड़ती है पेट के कैंसर में कीमोथेरिपी!

    रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy)

    रेडिएशन थेरिपी के दौरान, एक्स-रे जैसी पावरफुल एनर्जी बीम्स का उद्देश्य कैंसर के ट्यूमर को सिकोड़ना या नष्ट करना होता है। रेडिएशन थेरिपी कभी-कभी कीमोथेरेपी के संयोजन में की जाती है, और सर्जरी से पहले इसकी सिफारिश की जा सकती है।

    महिलाओं और पुरुषों में कोलन कैंसर की वजह से जीवित रहने की दर समान है। जीवित रहने की दर को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक यह है कि कैंसर कितनी दूर फैल गया है। आपकी उम्र और समग्र स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण कारक हैं। सामान्य तौर पर लोकलाइज्ड कोलन कैंसर – जिसका अर्थ है कि कैंसर कोलन या रेक्टम से आगे नहीं फैला है तो इसकी जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत है तक 5 साल तक है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको महिलाओं में कोलोन कैंसर (Colon cancer in women) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Accessed on 16/05/2022

     

     

    लेखक की तस्वीर badge
    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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