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लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) कितनी प्रभावी है?

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) कितनी प्रभावी है?

    ग्लोबोकैन (GLOBOCAN ) 2018 के अनुसार, लंग कैंसर भारत और दुनिया भर में कैंसर इन्सिडेंस और मृत्यु दर के मुख्य कारणों में से एक है। फेफड़े के कैंसर के कई प्रकार हैं – एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma), स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma) और स्मॉल सेल कार्सिनोमा (small cell carcinoma)। पहले, लंग कैंसर के एडवांस्ड स्टेज से बचने के लिए कुछ महीनों में मीडियन लाइफ एक्सपेक्टेंसी मापी गई थी और कीमोथेरेपी (chemotherapy) प्राइमरी ट्रटमेंट था। पिछले 5 वर्षों में, रिसर्च से पता चलता है कि लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) ने फेफड़ों के कैंसर रोगियों की काफी हेल्प की है। इम्यूनोथेरिपी इम्यून सिस्टम को कैंसर से उसी तरह लड़ने में मदद करती है जिस तरह यह सर्दी और वायरस से लड़ता है। आइए जानते हैं कि लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) कितनी प्रभावी है, यह किस तरीके से काम करती है?

    बता दें कि GLOBOCAN एक ऑनलाइन डेटाबेस है जो 185 देशों में 36 प्रकार के कैंसर के लिए वैश्विक कैंसर आँकड़े और घटनाओं और मृत्यु दर के अनुमान प्रदान करता है।

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    इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy) क्या है?

    कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी, जिसे कभी-कभी इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी (Immuno-oncology) कहा जाता है, एक प्रकार की मेडिसिन है जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करके कैंसर का इलाज करती है। कैंसर इम्यून सिस्टम के लिए एक ट्रिकी समस्या है क्योंकि कैंसर सेल्स नॉर्मल ऑर्गन सेल्स ही होती हैं, लेकिन जब सेल्स कैंसर में बदल जाती हैं, तो इम्यून सिस्टम के लिए खतरा बना जाती हैं। लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी मेडिसिन्स शरीर को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में मदद करती हैं ताकि आपका शरीर इससे लड़ सके।

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for Lung Cancer) के प्रकार

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी के प्रकार निम्न प्रकार हैं।

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for Lung Cancer)

    इम्यून चेकपॉइंट इंहिबिटर्स (Immune checkpoint inhibitors)

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) में सबसे ज्यादा प्रोग्रेस इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर में हुई है। इम्यून चेकपॉइंट इम्यून सेल्स पर मॉलिक्यूल होते हैं जो इम्यून रिस्पॉन्स को शुरू या रोक सकते हैं। इम्यून सिस्टम इन अणुओं का उपयोग यह निर्धारित करने में हेल्प करता है कि असामान्य क्या है और किस पर अटैक किया जाना चाहिए। शरीर को उन पर अटैक करने से रोकने के लिए कैंसर सेल्स कभी-कभी इन चेकपॉइंट को दिखा कर इम्यून सिस्टम को ट्रिक करती हैं। इम्यूनोथेरेपी मेडिसिन इम्यून सिस्टम को ट्रिक करने से रोक सकती हैं और कैंसर सेल्स के खिलाफ रिस्पॉन्स को स्टिमुलेट करने में हेल्प करती हैं।

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    इम्यून चेकपॉइंट इंहिबिटर्स कैसे काम करते हैं?

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी में ऐसी कई दवाएं दी जाती हैं जो लंग कैंसर के इलाज के लिए एप्रूव्ड इम्यून चेकपॉइंट्स को टारगेट करती हैं। इनमें से कई मेडिसिन्स टी सेल पर पीडी-एल1 प्रोटीन (PD-L1 protein) और पीडी-1 रिसेप्टर (PD-1 receptor) के बीच कॉन्टैक्ट को ब्लॉक करती हैं। PD-L1/PD-1 इंटरेक्शन एक ब्रेक के रूप में कार्य करता है जो इम्यून सिस्टम को कैंसर के प्रति प्रतिक्रिया करने से रोकता है। इस कॉन्टैक्ट को ब्लॉक करके, इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स को पहचानने और उन पर अटैक करने में सक्षम है। इन एप्रूव्ड दवाओं में से एक CTLA4 नामक एक अन्य इम्यून चेकपॉइंट्स को टारगेट करती है। जब CTLA4 ब्लॉक हो जाता है, तो शरीर कैंसर सेल्स के खिलाफ रिस्पॉन्स करने के लिए मौजूद इम्यून सेल्स की संख्या को बढ़ाने में सक्षम होता है।

    चेकपॉइंट इंहिबिटर्स को इंट्रावेनस (IV) इंफ्यूजन के रूप में दिया जाता है। इन मेडिसिन्स के कीमोथेरेपी की तरह ही साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिनमें थकान, मतली, खुजली, त्वचा पर लाल चकत्ते और बहुत कुछ शामिल हैं, लेकिन वे आमतौर पर कीमोथेरेपी की तुलना में कम टॉक्सिक होते हैं।

    कैंसर वैक्सीन्स (Cancer Vaccines)

    जब लोग वैक्सीन्स के बारे में सोचते हैं तो वे उन ट्रीटमेंट के बारे में सोचते हैं जो बीमारी को रोकते हैं। हालांकि, एक अन्य प्रकार का टीका है जिसे थेराप्यूटिक वैक्सीन (therapeutic vaccine) कहा जाता है। इस प्रकार की वैक्सीन कैंसर सेल्स को मारने में इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाकर मौजूदा कैंसर का इलाज करती है। ये वैक्सीन्स उन प्रोटीनों को टारगेट करते हैं जो कैंसर सेल्स में मौजूद होते हैं जो या तो सामान्य कोशिकाओं में मौजूद नहीं होते हैं या केवल सामान्य कोशिकाओं में ही मौजूद होते हैं। कभी-कभी, वैक्सीन्स को प्रोटीन को टारगेट करने के लिए कस्टमाइज किया जाता है जो किसी व्यक्ति के कैंसर के लिए यूनीक होते हैं। अन्य मामलों में, वैक्सीन्स कई लोगों द्वारा शेयर किए गए कैंसर-स्पेसिफिक प्रोटीन को टारगेट करते हैं।

    एक वैक्सीन दिए जाने से पहले, अक्सर यह जरूरी होता है कि पहले एक मेडिसिन लें ताकि उन इम्यून सेल्स के प्रकारों को कम किया जा सके जो कैंसर को बढ़ने दे सकती हैं और उन प्रतिरक्षा कोशिकाओं के प्रकारों को बढ़ावा दे सकती हैं जो कैंसर का रेस्पॉन्ड दे सकती हैं। अभी इन वैक्सीन्स की क्लीनिकल ट्रायल में स्टडी की जा रही है।

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    अडॉप्टिव टी सेल थेरेपी (Adoptive T cell therapy)

    इस थेरेपी में, टी कोशिकाओं (प्रतिरक्षा प्रणाली में एक प्रकार की वाइट ब्लड सेल्स) को आपके शरीर से हटा दिया जाता है और फिर एक लैब में बदल दिया जाता है ताकि वे आपके स्पेसिफिक कैंसर सेल्स पर हमला करने में बेहतर हों। अंत में, बढ़ी हुई टी सेल्स को कैंसर से लड़ने में मदद करने के लिए आपके शरीर में वापस डाल दिया जाता है। शरीर से टी कोशिकाओं को निकालना प्लास्मफेरेसिस (Plasmapheresis) नामक एक प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है जो आपके ब्लड को विशेष रूप से कुछ प्रकार की ब्लड सेल्स की पहचान करने में मदद करता है।

    यह ट्यूमर के हिस्से को हटाकर और टी कोशिकाओं को ऊतक से अलग करके भी किया जा सकता है। अभी, क्लिनिकल ट्रायल्स ​​में इस प्रकार के ट्रीटमेंट की स्टडी की जा रही है और फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए इस तरह के किसी भी ट्रीटमेंट को एफडीए द्वारा एप्रूव्ड नहीं किया गया है।

    इम्यूनोथेरिपी : समय पर है जरूरी

    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) के उपयोग का समय बहुत इम्पोर्टेंट है। डिजीज से छुटकारा पाने के लिए जितनी जल्दी हो सके इम्यूनोथेरेपी दी जानी चाहिए। नॉन-ड्राइवर म्युटेशन एडवांस्ड लंग कैंसर वाले ज्यादातर रोगियों को ट्यूमर सेल्स की पीडीएल 1 स्टेटस के आधार पर प्राइमरी ट्रीटमेंट (या तो स्वयं या कीमोथेरेपी के साथ) के रूप में इम्यूनोथेरिपी के लिए योग्य होना चाहिए।

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    लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी के साइड इफेक्ट्स (Side effects of immunotherapy for lung Cancer)

    सभी कैंसर ट्रीटमेंट्स के पॉसिबल साइड इफेक्ट्स होते हैं। इम्यूनोथेरिपी लेते समय, कुछ लोगों को बहुत कम साइड इफेक्ट का अनुभव होता है, जबकि अन्य में अधिक सीरियस कॉम्प्लीकेशंस होते हैं। इम्यूनोथेरिपी मेडिसिन्स के कुछ सबसे आम साइड इफेक्ट्स हैं:

    • इम्यूनोथेरिपी से शरीर के अंगों में सूजन हो सकती है।
    • सूजन शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है जिसमें शामिल हैं: फेफड़े (न्यूमोनाइटिस), लिवर (हेपेटाइटिस), कोलन (कोलाइटिस/डायरिया) या थायरॉयड ग्लैंड।
    • यह गंभीर हो सकती है, और मेडिसिन शुरू करने से पहले डॉक्टर के साथ सभी संभावित दुष्प्रभावों पर चर्चा करना जरूरी है।

    कुछ रोगियों में इम्यूनोथेरिपी का बहुत अच्छा रिस्पॉन्स भी दिखाई देता है, जबकि कुछ में समान पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं दिखाई देता है। कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता है कि आपका शरीर किसी एक ट्रीटमेंट के प्रति कैसा रिस्पॉन्स देगा। यह समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें कि इम्यूनोथेरिपी मेडिसिन के दौरान आप क्या एक्सपेक्ट कर सकते हैं, और क्या यह आपके लिए सही ऑप्शन है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/04/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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