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पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी के दौरान किया जाता है इन दवाओं का इस्तेमाल!

पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी के दौरान किया जाता है इन दवाओं का इस्तेमाल!

कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में फैलने वाली बीमारी है। कैंसर के कारण सेल्स तेजी से डिवीजन शुरू कर देती हैं और अपनी संख्या बढ़ाने लगती हैं। पैंक्रियाज यानी अग्नाशय हमारे पाचन तंत्र का अहम हिस्सा माना जाता है। अग्नाशय न सिर्फ डायजेशन में हेल्प करता है बल्कि ये शरीर में शुगर के लेवल को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। जब पैंक्रियाज में कैंसर की समस्या हो जाती है, तो अग्नाशय की कोशिकाएं तेजी से बढ़ना शुरू कर देती हैं और फिर अपने आसपास की कोशिकाओं को तेजी से बढ़ाती हैं। पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer) को एक्सोक्राइन (Exocrine) और एंडोक्राइन (Endocrine) में बांटा गया है। जब पैंक्रियाटिक कैंसर की शरुआत होती है, तो आमतौर पर हल्के या समझ न आने वाले लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं। ऐसे में पेशेंट को पेट में दर्द की समस्या के साथ ही बैक पेन, खाने का मन न करना, अचानक से वजन कम होने लगना, डायबिटीज के लक्षण, खाने के बाद जी मितलाना आदि लक्षण नजर आते हैं। आमतौर पर लोग इन लक्षणों को पेट की आम बीमारी समझ कर इग्नोर कर देते हैं। आमतौर पर पैंक्रियाटिक कैंसर का ट्रीटमेंट सर्जरी के माध्यम से किया जाता है। पैंक्रियाटिक कैंसर का ट्रीटमेंट में इम्यूनोथेरिपी भी अपना असक दिखाती हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy in pancreatic cancer) के बारे में अहम जानकारी देंगे। जानिए पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी कैसे काम करती है और किन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

और पढ़े: स्टेज 1 पैंक्रियाटिक कैंसर: कैंसर के लक्षणों और इलाज को समझें यहां!

पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy in pancreatic cancer)

Immunotherapy in pancreatic cancer

एनसीबीआई में प्रकाशित रिपोर्ट की मानें, तो एक लाभ पुरुषों में 2.4 प्रतिशत लोगों को पैंक्रियाटिक कैंसर की संभावना रहती है। महिलाओं में ये प्रतिशत कुछ कम है। अग्नाशय का कैंसर जानलेना बीमारी है। अगर किसी पुरुष या फिर महिला को पैंक्रियाटिक कैंसर हो जाता है, तो तुरंत इलाज पेशेंट की जान बचा सकता है। अगर बीमारी के बढ़ जाने पर केवल चार फीदसी लोगों के बच पाने की उम्मीद रहती है।

पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनो कार्सिनोमा (Pancreatic ductal adenocarcinoma) डेडली कैंसर है, जिसके कारण एक ही साल में पेशेंट की जान जा सकती है। ये ट्यूमक आक्रामक होता है और सामान्य कोशिकाओं में पर हमला करता है। ट्यूमर के आसपास की जो कोशिकाएं सामान्य होती हैं, वो भी कुछ समय बाद तक इन एग्रेसिव कैंसर को बढ़ाने में मदद करने लगती हैं। मेटास्टेसाइज (Metastasize) के लिए कैंसर सेल्स के साथ मिलकर काम करती हैं।कनाडाई सेल बायोलॉजिस्ट राल्फ स्टीनमैन (Ralph Steinman) इस बीमारी से करीब चार साल जूझें और उन्होंने 1973 में डेंड्रिटिक सेल्स (Dendritic cells) का अविष्कार किया।

पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी: LANEX-DC(R) इम्यूनोथेरिपी

डेंड्रिटिक सेल्स स्किन कैंसर (Skin cancer) , किडनी कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, कोलन, ओवेरियन, प्रोस्टेट के साथ ही पैंक्रियाटिक कैंसर लाभकारी साबित होती है। LANEX-DC(R) इम्यूनोथेरिपी का इस्तेमाल कर कैंरस पेशेंट की लाइफ क्वालिटी को सुधारा जाता है। इम्यूनोथेरिपी के दौरान पेशेंट को वैक्सिनेशन की जरूरत होती है। ये पेशेंट के ब्लड से तैयार की जाती है और इम्यूनिटी को बढ़ाने में काम आती है। इस वैक्सिनेशन को पेशेंट कीमोथेरिपी (Chemotherapy) के दौरान ले सकता है। इम्यूनोथेरिपी की मदद से कुछ कैंसर से भी बचा जा सकता है। यानी की ट्यूमर को सिर्फ कीमोथेरिपी या फिर रेडिएशन से ही नहीं बल्कि इम्यून थेरिपी की मदद से भी खत्म किया जा सकता है। इसके कुछ साइडइफेक्ट भी हो सकते हैं लेकिन ये अन्य के कंपेयर में कम होते हैं।

और पढ़े: स्टेज 2 पैंक्रियाटिक कैंसर: कैंसर के लक्षणों और इलाज को समझें यहां!

पैंक्रियाटिक कैंसर में दवाओं का सेवन

डेंड्रिटिक सेल्स इम्यून सिस्टम की डिफेंस मशीन को रेग्युलेट करने का काम करती है। इसी से पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी ( Immunotherapy in pancreatic cancer) की नींव रखी गई। एडेनो कार्सिनोमा पैंक्रियाटिक कैंसर का एग्रेसिव फॉम है। ज्यादातर लोगों को लास्ट स्टेज में इसकी जानकारी मिल पाती है और जीने की संभावना बहुत कम रह जाती है। पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy in pancreatic cancer) पेशेंट की जीवन को बढ़ा सकती है। यानी ये लाइफ को क्योर न करने के बजाय पेशेंट के जीने के अवधि को लंब कर देती है।

डेंड्रिटिक सेल्स का इस्तेमाल कई प्रकार के कैंसर के करने की कोशिश की गई है। ऐसा करने से शरीर में सेल्स की इम्युनिटी को बढ़ाया जाता है ताकि वो ट्यूमर सेल्स को मार सके। लोगों में पैंक्रियाटिक कैंसर का अन्य प्रकार न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर (Neuro-endocrine pancreatic tumour) भी पाया जाता है, जो केवल पांच प्रतिशत लोगों में पाएं जाने की संभावना रहती है। न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर होने की स्थिति में दो दवाओं का सेवन जीवन की अधिक को बढ़ा सकता है। ये दवाएं ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से अप्रूव की गई हैं।

और पढ़े: स्टेज 3 पैंक्रियाटिक कैंसर: कैंसर के लक्षणों और इलाज को समझें यहां!

पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी: सुटेंट (Sutent)

सुटेंट ब्रांड की दवा का इस्तेमाल न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर (neuro-endocrine pancreatic tumour) में किया जाता है। न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर जब बढ़ता है, तो सेल्स नॉर्मल दिखाई पड़ती हैं। सुटेंट (Sutent) ड्रग में एक्टिव इंग्रीडिएंट के रूप में सुनिटिनिब (sunitinib) और काइनेज इनहिबिटर्स (kinase inhibitors) होता है। ये ड्रग कैप्सूल के रूप में आता है और 12.5 mg, 25 mg, 37.5 mg, and 50 mg की स्ट्रेंथ में उपलब्ध है।सुटेंट (Sutent) का इस्तेमाल करने से न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर की ग्रोथ बहुत कम या धीमी हो जाती है। यानी दवा का सेवन करने करीब 10.2 महीने तक ट्यूमर की ग्रोथ रुक जाती है।सुटेंट अन्य दवाओं के साथ रिएक्शन कर सकती है। ये कुछ सप्लिमेंट्स के साथ ही फूड के साथ ही इंटरेक्ट कर सकती है। सुटेंट ड्रग का इस्तेमाल आपको कैसे करना है, इस बारे में डॉक्टर से जरूर पूछें। इस दवा का सेवन प्रेग्नेंसी के दौरान (During pregnancy) नहीं करने की सलाह दी जाती है। दवा के साइड इफेक्ट गंभीर हो सकते हैं। लिवर डैमेज दुष्प्रभाव के रूप में सामने आ सकता है। इस दवा की कीमत 13900 रु है। आप इसे ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं।

और पढ़े: स्टेज 4 पैंक्रियाटिक कैंसर: कैंसर के लक्षणों और इलाज को समझें यहां!

नोट- दवा की कीमत में बदलाव भी हो सकता है। आप जहां से दवा खरीद रहे हैं, वहीं के अनुसार दाम तय किए जाते हैं।

पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी : लैनोलिमस 0.5एमजी (LANOLIMUS 0.5MG)

पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy in pancreatic cancer) के दौरान सुटेंट (Sutent) के साथ ही एवरोलिमस एक्टिव इंग्रीडिएंट की ड्रग लैनोलिमस का इस्तेमाल किया जाता है। इस दवा का इस्तेमाल करने से न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर (neuro-endocrine pancreatic tumour) की ग्रोथ को रोकने में मदद मिलती है और साथ ही पेशेंट के जीने की अवधि भी बढ़ जाती है। पैंक्रियाटिक कैंसर के पेशेंट्स (Cancer patients) में न्यूरो-एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक ट्यूमर वाले पेशेंट्स की संख्या भले ही कम होती हो लेकिन समय पर ट्रीटमेंट न मिलने पर उनकी उम्र कम हो जाती है। टारगेट थेरिपी इसमें बहुत मदद करती है। लैनोलिमस ड्रग ओरल इनहिबिटर के तौर पर इस्तेमाल की जाती है और ये टारगेट थेरिपी में मदद करती है। ये दवा ब्लड वैसल्स के डेवलपमेंट को रोकने का काम कर सकती है, जिससे ट्यूमर (Tumor) को न्यूट्रिएंट्स मिलना बंद हो जाते हैं और उसकी ग्रोथ रुक जाती है। इस दवा का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। इस दवा की कीमत 739 रु है। आप इसे ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं।

और पढ़े: क्या टाइप 2 डायबिटीज होता है जेनेटिक? जानना है जवाब तो पढ़ें यहां

हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको पैंक्रियाटिक कैंसर में इम्यूनोथेरिपी ( Immunotherapy in pancreatic cancer) के संबंध में जानकारी दी है। शरीर में अचानक से आने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आपको शरीर में कुछ लक्षण नजर आएं, तो तुरंत जांच कराएं। हो सकता है कि वो लक्षण कैंसर से जुड़े हुए हो। समय पर कैंसर का ट्रीटमेंट कराने से जान बच सकती है वरना कैंसर की लास्ट स्टेज में जान बचाना मुश्किल हो जाता है। आपको इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड